Saturday, September 13, 2008

आज फ़िर चला पटाका

आज हिमाले की चोटी से 
फिर किसी ने पुकारा है ।
आतंकवाद के साये में धूर्त जलते 
पडोसी ने ललकारा है ॥

पूरा भारत घूम, सिमी मुजाहिद्दीन, 
हिन्दोस्तान  में फिर धमका गया ।
भारत के सपूतों ने आईएसआई की 
इस चुनौती को स्वीकारा किया ॥

आतंक के सौदागरों को 
चेतावनी का संदेश भिजवाया है ।
बम फोड ले सडक खोल ले
 हिंद-कश्मीर हमारा है ॥

कितने ही सालों से जालिम तुने 
मासूमों पर कहर बरपाया है ।
हम ने मुहतोड़ जवाब दिया 
और हर जगह तुझे हराया है ॥

खेमकरण और कारगिल के संग्राम 
की पिटाई तू क्या भूल गया ।
जम्मू हो या सूरत, हैदराबाद हो या
 बनारस चाहे संसद तेरी मौत भूल गया ॥

शायद खावायिश लालकिले पे चाय पीने की
 अभी भुला नहीं तू ।
शास्त्री के जय जवान की मार 
को आज भी याद कर तू ॥

राम कृष्ण गौतम गाँधी तिलक जवाहर
 के हम वंशज हैं जान ले ।
सर पे कफ़न माथे पे तिलक, 
कमर कसे है मोदी की सेना मानले ॥

हमने विश्व को मानवता का सन्देश दिया ।
पंचशील और सद्भावना को माना और जिया ॥

मजहबों से परे जा हर कौम को आदर दिया ।
इस देश में हर मजहब ने प्यार अमन को जिया ॥

हमने विश्व से आतंक 
ख़त्म करने का अहद लिया ।
बंगबंधुओं से, अफगानों से, 
पूछ हमने क्या क्या नहीं किया ॥

हमें लाहौर शांती की रेल भेजना आता है ।
तू छुरा घोंपे तो कारगिल 
भी करना आता है ॥

मुल्क में जमुरियत फिर से दस्तक दे रही है ।
बेनजीर को लुटा के इंसानियत भी रो रही है ॥

सात समुन्द्र दूर बैठा 
तेरा आका आज तुझे जान गया ।
हम कुछ भी ना करें 
दुनिया का थानेदार 
तो डंडा तान चुका ॥

कुरान-हदीस के पाक फतवों को भुला तू
 कुफ्र की वकालत कर रहा है ।
अपनों को भड़का के तू उन्हें क्यों 
नापाक नाकाम बदनाम कर रहा है ॥

दुनिया कहाँ से कहाँ तरक्की 
कर गयी तू भी इसे जान ले ।
झूट बोलना आतंक बोना- 
लाशे काटना गलत है मान ले ॥

2025  के पाक महिने में सिजदा कर
 कुफ्र  से तौबा मांग ले ।
छोड़ दे यह ओछी हरकते विनाश की,
तरक्की की डगर थाम ले ॥

मत ले इम्तहान नहीं तो तू पछतायेगा ।
कसम से हम उठ गए तो कौन बचायेगा ॥

भारत वासियों मत घबराना 
सब तुम्हारे साथ है ।
हम एकता, सावधानी, कठोरता, 
निरभ्यता, सद्भाव है ॥

हिम्मत रखना मत घबराना 
 आतंकियों को सबक सिखाना है ।
बाबा बर्फानी के दर्शनों को जाना है 
आशीर्वाद पाना है 

जनगनमन, सत्यमेव जयते और 
वन्देमातरम गाना है ॥

Thursday, September 11, 2008

एहसास ए इश्क

रात तनहा नही सितारों से भरी होती है ।
दूजे की बगल में हूर की चाहत भी किस्मत से शिकायत करती है॥

जिसको चाहते हैं नही मिलती यह नसीब या खेल कहो ।
आशिक की तबियत तो गमगीन नर्म करती है ॥

फूल ही नही हर कांटे की दास्ताँ अलग होती है ।
हिफाजत करे काँटा, कली हसीना के जुड़े में जा सजती है॥

कांटा चुपचाप फना हो जाता है इश्क का एहसास लिए
उसकी दिलऔजान जैसे फूल के पास गिरवी होती है ॥

कभी कांटे के दिन भी आते हैं
जब कली के साथ चुने, जुड़े में फूलों का सहारा बन पाते हैं ॥

अली इस अरमान से कली के साये में भटकता है
मिलेगी फतह नाकामयाबी से ना डरता है ॥

क्या हुआ जो पा ना सका रस ए गुल वोह अली
लुटाता मिट गया बेपरवाह इश्क ए कली ॥

उस अली और कांटे का एहसास किसी को नही
मजनू , फरहाद महिवाल के किस्सों का भी इल्म nhi ॥

इश्क के पुजारी उनको आज भी सिजदा करते हैं
कसम उनकी खाते और महोब्बत करते हैं ॥

कभी देखते इश्क लुटता दुसरे की बाहों में आह भरते हैं
माशूक जब दगा देता तब भी अहद इक तरफा करते हैं ॥

हैंयारां अकेले हो तन्हा हो तो याद करना
छोड़ खुदा का दर भी आएंगे इतना इतबार करना ॥

तारों से फरमाईश

यह बेकरारी है,सबब ए इंतजारी चाँद के प्यारों जागतेरहों
हमारी जानेमन आज आ रही है सितारों जागते रहो ॥

वोह आयेनही ऐसी बदकिस्मती नहिहमारी तुम
jab tak ना आये प्यारी रातहैभारी तारों साथ में रहो ॥

चाँदसेप्यारी जान है हमारी तारों रश्क ना करो
फक्र हमे चाँद हार गया बाजी तुम गवाह तो हो ॥

जाग रहे पाने को राजदारी इस बदख्याल में न रहो
कल ढिंढोरा न पीटना हमारे राज का कसम तुम्हे हो ॥

वोह आये या ना आए जागेंगे रात सारी तुम हामी तो भरो
चाँद छिपगया शर्मसे बादलो की ओट में उनका इस्तकबाल करके
...........अब तुम्हारी बारी आगे बढो ॥

लाना उन्हें हमारे गरीबखाने पे तारों की छाओं में ऐसा करम करो
सीता की बेकरारी अशोकवन में तारी ऐसी ही कोई जुगत करो ॥

Monday, September 8, 2008

वकील भाई को जन्म दिन की बधाई

वकीलों का भी जन्म दिवस आता है
वोह भी उसे बडी धूमधाम से मनाता है

कमल के समान चेहरा
उपर से काला कोट तुम्हारा

हमे भी कुछ कहने को
कुछ पैरवी करने को
जन्मदिन की खुशीआं मनाने को
तुम्हे बधाई सुनाने को

हजारों साल जीने को
और हर साल में हजारों दिन बनाने को

प्रभु से अर्दास करने को दिल चाहता है

हमारी अरदास कबूल होगी
तुम्हे दुनिया की सब खुशीआं नसीब होंगी

हमारी मिठाई
हमारे तुम तक आने तक
या तुम्हारे मैसूर आने तक
उधार रखनी होंगी

इस विश्वास के साथ

तुम्हे जन्म दिन की बहुत बधाई
हम ही नही पूरा जग सुनाता है

इंतज़ार.................

शायद आज कल आपके आँगन में धुप आने लगी है
बंधन टूटे युग बीता पर आँखे अब तक संबोधित है '


इस दुनिया में इंसान दूर भागता है किस से
मौत और मौत सबसे बड़ा सच्च है फिर भी इस से


उनके नाम को देख कर कंपकपी सी चढ़ जाती है
खबर की कोन कहे यहाँ तो माँ याद आ जाती है

उन्हें तलाश है मौत के जल्दी आने की
हमे तो करने हैं अभी बहुत काम देर है अभी जाने की

जब मौत आये तो घबरा मत जाना
गले मिलना, कंधे पर चढ़ना और रुखसत हो जाना

हमारे जैसे शायद वहां भी बहुत मिलेंगे
अगर नही तो हम भी अपना सफ़र चालू ही करेंगे

फिर मिलेंगे उपर खुब बातें होंगी
सर्द गर्म खट्टी मिट्ठी मुलाकाते होंगी

अगर खुदा को रास नहीं आई तो फिर वापसी होगी
फिर से संदेश भेजेंगे और मौत की इंतज़ार होगी

अगर ईस जमी पर बाकी हो तो जवाब खरियत का देना नही
तो हम चले आयेंगे उनके कुचे में मुश्किल होगा हमे झेलना

मुरीद तो उनके हो गये
सौदागर ए मौत के प्यारे हो गये

चाहते लकीरें बनके उभर आती हैं हाथो में
पूछ लेना यह बात किसी नजूमी से मुलाकातों में

ऊपर वाला बडा हिसाब किताब रखता है
एक पल ज्यादा ना कम खर्च करने देता है

चाहने से मजनू को लैला नहीं मिली सब जानते
एक भीष्म को इच्छाम्रत्यु वरदान था सब मानते

उसने भी कौरवों पांडवों की दुश्मनी देख मौत चाही थी
लेकिन वोह तो सब खत्म होने के बाद ही मिल पाई थी

आ हम तुम मिल नई दुनिया बनाने का आगाज करें
जिसमें मौत की कोईजगह नाहो ना जुर्म या आतंक वास करे

मन्दिर सजते मधुशाला से

अगर रावण का भाई ना होता तो राम कहाँ होते ?
अगर आम्भी ना होता तो सिकंदर कहाँ होते ?॥

सफेद चादर पर काला निसान टीके की तरह सजता है ।
जैसे गोरी के गाल पे काला तिल चाँद सा चमकता है ॥

मन्दिर के पंडत याद करते है मधुशाला की रातें ।
बैठते अल्लाह के दर पे, पर मधुबाला को ताकते ॥

उस बुतखाने को क्यों याद करना जहां खुदा भी कैद हो ।
उस साकी और मधुशाला का सदका जहां आज़ादी काबिज़ हो ॥

अगर साबित करना हो की किस की ज्यादा दुकानदारी है ।
खोल देखो मधुशाला, किस पर, किस की, रंगत भारी है ॥

दिख जायेगा रंग मधुशाला का हर कोई मदहोश हो जाएगा ।
कारवां पीने गया मधुशाला से तो इबादत करने कोन जाएगा ॥

"सजते है मंदिर मधुशाला से" शराबी झूमता गाता जायेगा ।
मधुशाला होंगी तो ही मौलवी मस्जिद में खुदा याद कराएगा ॥

Friday, September 5, 2008

झुलत पलने में घनश्याम

यशोदा लेत बलैया देखत श्याम सुबह श्याम
पलना डोरत हिलत पायजबिआं बजत मधुर कर्णधाम

नन्दबाबा को लाडलो सोवे गोपिआं देखेत आवे भूलत घाम
हरष खिलत देख श्याम को सखी झोंटा देत लपक नित शाम

यह दर्श मेरे मन में व्यापो मेरे जीवन की भई शाम
मैं तो चली गोकुल मिलवे सांवरे को मुझे ना कोई दूजो काम

तू भी आयियो कान्हा के दर्शन पायियो दोनों लेवेंगे श्याम को नाम
सुन प्रियसखी बैठेंगे नन्द के चौबारे कर जन्म सफल निरख छबि घनश्याम

राधे राधे

श्याम से मिला दे

नैया तू सबकी पार लगा दे

Wednesday, September 3, 2008

गणपति बाप्पा मोरिया

हीरों के मुकुट से सजा
लाल रत्नों से भरा

गणपति बाप्पा मोरिया

आया मेरे द्वारे
कारण तुम्हारे

आ मिल के इसे पुकारें

गणपति बाप्पा मोरिया
अबके वर्ष तू जल्दी आ

रिद्दि सिद्दि साथ ला
दीन दुखी सेवा की शक्ति दे
देश को खुशहाल बना

अंत समय आये तो ..........
अपने दर्श दिखा

यमपाश से बचा के ..................
अपने धाम में बसा

कसम बेवफ़ा

लम्हा लम्हा वक़्त गुज़र जायेगा ,
चंद लम्हों में दामन छोड़ जायेगा।

अभी वक़्त है दो बातें कर लो हमसे,
पता नही कल कौन तेरी ज़िंदगी में आ जायेगा।।

तुम भूलकर तो देखो हमे
हर ख़ुशी तुमसे रूठ जायेगी।
जब भी सोचोगे अपने बारे में
खुद-बा- खुद याद हमारी आएगी ॥

जीनकी याद में हम दीवाने हो गए,
वो हम ही से बेगाने हो गए।।

शायद उन्हें तलाश है अब नए दोस्त की,
क्युंकी उनकी नज़र में अब हम पुराने हो गए ॥

ख्वाब देखा भी नहीं और टूट गए
वोह हमसे मीले भी नहीं और रूठ गए ॥

हम जागते रहे दुनिया सोती रही
एक बारीष ही थी जो साथ रोती रही।।

सुना है जब कोई याद करता है तो हीच्की आती है
अगर इस बात मैं थोडी सी भी हकीकत है ॥

नामुमकिन है की तुम्हारी हिचकी एक पल भी रुक जाय
हम सामने ना होंगे फ़िर भी हमारी याद आए और आँख ना भर आए ॥

Monday, September 1, 2008

संदेश

************************
* जीयो और जीने दो । *

* अहिंसा परमो धर्म: ॥ *
************************
दया करुणा रहम अहिंसा ।
क्षमा मानव-प्राणी प्रेम त्याग का संदेश ॥

गौतमबुद्द-महावीर-गांधी ।
ईसा अल्लाह नानक के नाम की आंधी ॥

हर पैगम्बर हर मजहब का यह एक फरमान ।
भूलगया आज इन्हें इंसान ॥

जाता मन्दिर मस्जिद चर्च गुरद्वारे और दिवान ।
दिल में नफरत इर्षा और धर्म का तूफ़ान ॥

सुमरिणी फेरत दिन गुजारे।
राम रहीम जिसस नानक को पुकारे ॥

पर्युषण पर मांगे क्षमा का दान ।
दिल में रखे लडाई का मैदान ॥

कैसा भ्रम पाला तुने हे हिन्दू सिख क्रिस्चन मुसलमान ।
तू समझे धर्म पर मिटना तेरी आन लड़ना तेरी शान ॥

पछता रहा उपरवाला बना के कलजुग का इंसान ।
अरे तुझे लड़ा रहे धर्म के ठेकेदार यह कलजुग के शैतान ॥

गौरी-गणेश पर्युषण पर्व और महिना पाक रमजान ।
आ आज प्रण करके करुणा अहिंषा का दे इन्हें सम्मान ॥

जन्मदिन की बधाई

मैं पल दो पल का शायर हूँ
पल दो पल की जिंदगानी है

आज जन्मदिन की बधाई देनी
और तुम से खुशी की मिठाई खानी है

यह हसीं गुलाब सा चेहरा रोशन रहे
इस आसमा पर जब तक सूरज चाँद रहे

यह पहाडों का देवता अडिग रहे
किसी भूचाल तूफान से ना डरे

इस जिन्दगी का मकसद
रहम करुना दया और माफ़ करना

आज एक अहद करो
इन मकसदों को नये प्रभात में लागू करना

बर्फानी की जय


बधाई
इस सफलता पर पुरे बर्फानी भक्त समुदाय को
और केंद्र सरकार को सदबुद्दि आने पर।

बर्फानी का देखो कमाल
दुश्मनों को कर दिया हलाल

बर्फानी से जो टकराएगा
उसका येही हश्र हो जायेगा ॥।

कुर्बानी असर लाती है खून देने के बाद
आतंकियों को सबक काश्मीर या मुज्जफराबाद ॥।

जीत की ख़ुशी मनाएंगे
अब तो अमरनाथ जायेंगे ॥।

Friday, August 29, 2008

मेरा धर्म ....गोरक्षा......... मेरी गोमांता

तुने जन्म दिया नहीं मुझको ।
पर मानू तुझे मैं मा ॥

तेरा दूध रगों में दोडे ।
मैं जानू ये भी मा ॥

भारत के तू हर कण में ।
भारत के तू हर जन में ।
तू बसती है मेरी मा ॥


सुख सारे तुससे पाए ।
तू दुःख में भी सुखालाये ।
मैं हर्षित हूँ मेरी मा ॥


जीवन से और मरण तक ।
शिख से और चरण तक ।
तू सबके काम आये ॥

बैल शक्ति गोबर गोमूत्र से ।
दूध दही घी उपयोग से ।
नई उद्योग क्रांति आये ॥

हर गाँव हर कोने में ।
देश का दुर्भाग्य ।
जो तुझे काट और खाए ॥

हर गाँव में हो तेरा बसेरा ।
फैलाए जो सवेरा ।
अंधियारा भाग जाए ॥

अब हमने भी ठानी ।
गोमाता है बचानी ।
जो मरने पर तारे ।
जन्नत धरा पे लाये ॥

कृष्ण प्यारी........... निहाल

कान्हा खेलत ब्रिज मैं ग्वालन संग
घुसत गोपियन के घर ढुडन माखन ॥

गोपी तरसत छुप झाँकत, कब आवेंगे नन्दलाल
देख कान्हा, दर्शन पात, होजावे निहाल ॥

लेत बलिआं, पीछे भागत, पकड़वे को नटवरलाल
अंखियन नीर बहावत, कमलपद पखारत, जपे गोपाल ॥

ये नटखट,लीला करत,गोपियन को खिजावत,करे धमाल
छाछ के लोटे पे,त्रिभंगी को नचावे,देखो गोपियन को कमाल ॥

मनभाव दुसरो,काम दूसरो,पकडे श्याम को, डाले लाल
सून स्यानी, जो इसे ध्यावे,वोह तो,निहाल और खुशहाल ॥

Saturday, August 16, 2008

रक्षा बंधन

अपनी मुफलिसी के डर से, मैं घर ही नहीं गया अपने ।
बहन ने फेंक दी होगी राखी, मेरा इंतज़ार करते करते

मुफलिसी नहीं यह तो बहाना था
तो भाभी के साथ सुसराल जाना था

बहिन मिलती तो खर्च हुआ होता
सुसराल में तो स्वागत हुआ होगा

बहिन तो इंतज़ार में सूख आधी हो चुकी
तुझे किसने समझया की वोह राखी फैंक चुकी

में एक बार भाई बहिन का त्यौहार आता है
मुफलिसी का बहानाकर बहिन को इंतजार कराता है

फेकी नहीं किसी गधे को बाँध दी होगी राखी
अपसगुन कैसे करेगी फैंक के बहिन,
.................भाई का वरदान यह राखी

आज की ताजा खबर

कश्मिरिओं को १५०० करोड़ का नुक्सान हो गया
अरे हिसाब लगाने वालोंसिर्फ ३,००,००० कश्मीरी पंडितों का ५,00,000/- साल से हिसाब लगालो तो :-

अबतक 15000 करोड़ के हिसाब के ३,0०,००० करोड़ का नुक्सान हो चूका है।
उनकी जमीन सम्पति तो १० लाख करोड़ से ज्यादा की पाएगी ॥


अगर हिसाब की बात करते हो तो लगाओ हिसाब की ....................
कितने लाख करोड़ इधर से उधर जा चुके हैं ।
एक कारगिल में कितने जवान जान गवां चुके है ॥


क्या मुजफ्फराबाद में सेव नही उगते जो इनका वहाँ इस्तकबाल होगा ।
अरे नही इन्हें जाने दो इनका हमे मालूम है वहां क्या हाल होगा ॥

हमे uno की धमकी देते हैं जैसे अमन के ठेकेदार हों ।
दुनिया जानती है पहिचान्ती है इन आतन्किओं को ॥


बदनाम कर दिया हिंद के मुसलमान को ।
अल्लाह के नाम को इंसान के अरमान को ॥

भेड़िया आया भेड़िया आया का शौर सुन दौड़ा करते थे ।
एक दिन आया तो झूट मान अनसुना करते थे ॥

एक दिन यहाँ भी ऐसा ही होने वाला है ।
पूरा काश्मीर एक हो भारत में मिलने वाला है ॥

कश्मीर की धरती का बवाल

आज की ताजा खबर कश्मिरिओं को १५०० करोड़ का नुक्सान हो गया हिसाब लगाने वालों सिर्फ ३,००,००० कश्मीरी पंडितों का ५०,०००/- साल से हिसाब लगालो तो अबतक १५०० करोड़ के हिसाब के ३०,००० करोड़ का नुक्सान हो चूका हैउनकी जमीन सम्पति तो १० लाख करोड़ से ज्यादा की पाएगी ॥
हिसाब की बात करते हो तो लगाओ हिसाब की

कितने लाख करोड़ इधर से उधर जा चुके हैं ।

एक कारगिल में कितने जवान जान गवां चुके है ॥
क्या मुजफ्फराबाद में सेव नही उगते जो इनका वहाँ इस्तकबाल होगा ।

अरे नही इन्हें जाने दो इनका हमे मालूम है वहां क्या हाल होगा ॥
हमे uno की धमकी देते हैं जैसे अमन के ठेकेदार हों ।

दुनिया जानती है पहिचान्ती है इन आतन्किओं को ॥

बदनाम कर दिया हिंद के मुसलमान को ।
अल्लाह के नाम को इंसान के अरमान को ॥

रक्षा बंधन

शुभ प्रभात की बेला में
 रक्षा बंधन लिए हाथ में 
बहिन खड़ी दरवाजे पे 
उठ दौड़ ले बलैआं 
भाग जगे तेरे उसके आने से 
वोह बांधेगी रक्षा 
तेरा रक्षा का वचन पाने को 
देगी तुझे आशीर्वाद 
दुनिया की हर नेमत पाने को

नटवरलीला

प्रिय सखी

जपत देखत नटवरलीला अपनों जन्म सफल बनाएँगे
राधे श्याम सुमिरत ब्रिन्दावन धाम जायेंगे.

राधावल्लभ कुञ्ज गलियन में ढूंड नयनन शीतल करवाएँगे
आया जन्मोत्सव राधाजू को श्याम रिझाने को सृंगार करेगे

सखी सखा सब मिल श्याम राधाजू की लीला में रास करेंगे
वेश बना पकवान पका युगलवर की ब्लैआं ले सेवा करेंगे

नन्द यशोदा के लाडले को माखन दिखा नाचवे को त्यार करेंगे
सुनरी सखी श्याम मनोहर राधाजू संग रास ठिठोली कर विलास करेंगे

ऐसी छटा इस जग में खिलेगी हम सब द्रग नीर भर भाग सराहेंगे
मुझे ना चाहे बंसीबट या महल चौबारा मैं तो वहां ही बसूं जहाँ मेरे राधे श्याम बसेंगे

Monday, August 11, 2008

अभिनव बिंद्रा का अभिनन्दन

देश ओलम्पिक में शामिल तो होता था
११० करोड़ का देश शर्मिंदा वापिस होता था

अरबों खर्च का था सालो साल कोई हिसाब नही
एक भी एकल स्वर्ण था हमारे भाग में नही

हम विश्व नेता होने का दावा करते थे
लेकिन स्वर्ण पाने को तरसते थे

खेल भावना की मिसाल देते थे
अपने कर्म ठोक रो लेते थे

कभी ध्यान कभी मिल्खा कभी अमृत याद करते थे
कर्नेश्वरी और चौहान को आँखों पर रखते थे

पुरुश्कारो को अर्जुन राजीव पुकारते थे
देश के खिलाडियों को भर भर धिक्कारते थे

असली अर्जुन तो अभ्यास कर रहा था
अपने करतब को पैनी धार धार रहा था

सुबह पूरब से नया उजाला आया
देश में खुशीओं से भरा पैगाम लाया

अभिनव तुम देश की शान
भेद दिया ओलम्पिक का निसान

२५ साल के पंजाब के नवजवान
आधुनिक अर्जुन को देश का सलाम

आओ वापिस देश पलक बिछा इन्तजार में
है बिंद्रा के विजय अभियान उत्सव की त्यारी जोरों पे है

तुम्हारी विजय देश का भाग लिखा जाने वाला है
स्वर्ण नही, नवयुवको की प्रेरणा और संकल्प होने वाला है

बिंद्रा परिवार को हार्दिक बधाई

Tuesday, August 5, 2008

बिखरते जज्बात

आज की इस अंधी दौड़ में देखे हैं हमने
नफरत की ठोकर से जज्बात बिखरते

उपरवाला भी अगर आये तो यारों
सौदागर उसे भी बेच खाके निकलते

आज की सौगात झूट नफरत आतंक
इसे फैलाने वाले तानाशाह और मालिक बनते

बहुत से गम हैं इस ज़माने में
इश्क से हालात नहीं पलटते

आओ हम मिल बनाये नयी दुनिया
जिसमे इश्क, मोहब्बत की शहनाई गूंज

मिसाल ए दोस्ती

इन्सान को इन्सान बनाती है दोस्ती
हैवानियत से भी कभी बचाती है दोस्ती

दोस्त की हर मुसीबत की निगेबाहं है दोस्ती
हाथ में आ जाती है गिरेबान करे अगर कोई बुराई दोस्तकी

हर तक़दीर को बदल दे ऐसी मेहरबान होती है दोस्ती
युधिस्टर ने निभाई थी स्वान से दोस्ती

आज भी मिसाल है कृष्ण सुदामा की दोस्ती
आ हम भी आज बन जाये मिसाल ए दोस्ती

कातिल मल्लिका

कातिल को कातिल कह क्यों मजाक करते हो
उनकी अदा पे मरते हो फिर क्यों शिकवा करते हो

वोह जहर भी पिला दें अपनी आंखों से कोई बात नहीं
उनके खुसबू और साए में जिन्दगी गुजर जाये तो खता नहीं

आग का दरिया उनका इश्क हमे तो पार तक जाना है
मल्लिका ए हुस्न तुम साथ तो जन्नत किसे जाना है ?

खुशियाँ और गम

ख्वाब और ख्यालों की मलिका हम तुम्हारे गुलाम
हर ल्ह्मा हर पल हम तुम्हे याद करते हैं
खुशियाँ बाटने से बढती असूल जमाने का
गम तो अकेले ही सहने पड़ते हैं

अपनों से शिकवा की बारिश की खबर नहीं दी
बंद कमरे में गैरों के साथ क्यों आप बंद होते है

तुम्हे दिखाने को हंसते रहे हम
छिपाते दिल के आंसू और गम
जब तुम सामने तो हम बाग़ बाग़ होते है

हर रात के बाद दिन आता है
चाँद छिपता सूरज निकल जाता है
दिल के जख्म भरने को
ग़मगीन के भी उत्सव होते है

ख्वाब और ख्यालों की मलिका हम तुम्हारे गुलाम
हर ल्ह्मा हर पल हम तुम्हे याद करते हैं

चौराहा

चौराहे पर खडा मैं सोच रहा
किधर जाऊं मन टटोल रहा

चार राहें जहाँ आके मिलती हैं
उस चौराहे के थानेदार से मैं बोल रहा

बहुत सुंदर सजाया है चौराहे को
उसपे बैठाया चहचहाते चिडे चिडयों को

मुबारक हो थानेदार तुम्हे यह खुशहाल चौराहा
हमारा तो येही रास्ता है
रोज निकलेंगे इस चौराहे से
दिलबर का आशियाँ यहाँ से दिखता है

इतना रहम करना दिलबर के रूबरू होने पर
रोक देना उन्हें अपना रुआब दिखा कलाम सुना कर

Sunday, August 3, 2008

विश्व दोस्त दिवस .................

पूरा विश्व आज दोस्त दिवस मना रहा है
आज हमें भी हमारा दोस्त याद आ रहा है.

आज देख रहे हैं दोस्ती भरे तराने को
मेरे दोस्त आ आज ताजा करें अपने अफसाने को

हम तो हैं तैयार तुम्हारे हमदम बन जाने को
अरमान हमारा एक, दिल को दिल से मिलने और मुस्कुराने को

हाथ में हाथ डाल हम चाँद पर जायेंगे
परियां स्वागत करेंगी गन्धर्व गीत गायेंगे

जब दिल से दिल; मिल जायेंगे नया उजाला आएगा
दुनिया देखेगी हमारी दोस्ती और दुश्मन घबराएगा

कसमे हमारी दोस्ती की हर आशिक खायेगा
कृष्ण सुदामा को भूल हम से दिल लगायेगा

Sunday, July 20, 2008

मौला.............

मौला बोला बचाले मुझे
इस मतलबी दुनिया से उठाले मुझे

तुने कायनात बनायीं थी
खुबसुरत बगिया लगायी थी

आदम और हौवा बनाये थे
पीर पैगम्बर भिजाये थे

नेकी पर चलना सिखाया था
जकात रहम इबादत पे चलना सिखाया था

आज खुदा की खुदाई हैवान हो गयी
इंसानियत लालच में नीलाम होगई

इंसान खुद खुदा बन गया
उपर वाले पे से भरोसा उठ गया

अल्लाह की दर इराक टूट गया
अमरीका परस्ती में पाक नापाक हो गया

इंसानियत का हस्र इतना की दिल भर गया
मोला भी शायद अटम से डर गया

जमी को जन्नत बनाने का ख्वाब धूल में मिल गया
मौला तू ही संभालेगा

इस कायनात को शैतानो के कब्जे से निकलेगा
या खुद भी जायेगा और हमें भी बुला लेगा

Saturday, July 19, 2008

चुनाव का बकरा...............

देखो फिर ईद गयी
बकरे की मुसीबत गयी
अरे नहीं बकरे की तो किस्मत संवर गयी

सौदागर ने फरमान किया
ईद मनाने का ऐलान किया
खरीदी का दाम दिया

कल तक जो बकरा मण्डी के ख्वाब थे देखते
आज हम उन्हें मण्डी के तिजारती देखते

काश्मीर से कन्याकुमारी
मुंबई से बंगाल की खाडी

हर बकरे का अलग निसान है
उसके मालिक की अलग दुकान है

कुछ बकरे खुले घूम रहे है
चुंगी वाले जाल डाल उन्हें ताक रहे हैं

कुछ बकरे मिमिया रहे हैं
मंत्री बनाओ चिल्ला रहे हैं

कुछ लाल कुछ हरे नीले, कुछ केसरिया बाड़े में घुस चुके है
कुछ हाथ के इशारे पे, सजे संवरे खड़े हैं

तीन दिन है बाकी सौदागर को ईद मनाने को
बकरों की तो मौज होगई, ईद को चला जाने दो

यारों ईद के बाद क्याहोगा ?
सौदागर तो खुश, देश का सत्यानास होगा

हाथ जीत गया तो भी हारेगा
लाल का कया बिगडेगा वोह तो चीन पधारेगा

हाँ- कुछ बकरे मोटे हो जायेंगे
कुछ मंत्री कुछ संत्री बन जायेंगे

इसी लिए कहता हूँ ईद गयी .........
बकरों की तो मौज आगयी

माशूक और बीबी में फर्क

वो भी दिन थे की हमीं आयें हरेक बात में याद
आज हर बात में कह्ते हैं की हम भूल गए
बड़े भोले है, बड़े ढूध के धोये हैं आज
पी के जब प्यार में बहके थे कदम भूल गए
हमसे कांटे भी निकलवाये थे तलवों से कभी
आ के मंजिल पे सभी राह के ग़म भूल गए
अब तो कह्ते हो की भाते ही नही हमको "गुलाब"
आपके दिल् को कभी था ये वहम भूल गए

कल तक हम तुम्हारे आशिक थे आज खाविंद होते है
कल तक पसीना था गुलाब आज रोटी कपडा और मकान को रोते हैं

तुम आज भी दिल के पास हो दुनियादारी में फंसे तुम्हे खोते हैं
ड़र से तुम्हारे जानबूझ कर अनजान बन भूलना कबूल लेते हैं

हमारी वफादारी की कसम हर आशिक खाता है
अहद निभाने को इश्क अंजाम तक लाने को दूध नहीं
गंगाजल से धुले रोज तुम्हारी आंखों में खोते है

हम अकेले गुनहगार नहीं इस खुशनुमा अंजाम के
उस वक्त कदम दोनो के बहके थे नतीजे में संग होते हैं

याद है हमें तलवा और कांटे
जो लगे थे तुम्हे रिझाने को फूल लाते
याद है तुम्हारा उन फूलों का कबूल करना

और हमारे दर्द को सहलाना और सिसकना
कसम तुम्हारी याद है की

तुम्हे फूलों से नही हम से प्यार है

तुम गुलाब, हम कांटे, इश्क हवा हुआ,
आओ मिल दुनिया के दर्द बांटे

सात जन्मो के साथ की कसम को पूरी करने के खातिर

बनाया है नया आशियाना "हुजुर" तुम्हारे खातिर

कल तक हम तुम्हारे आशिक थे आज खाविंद होते है
कल तक पसीना था गुलाब आज रोटी कपडा और मकान को रोते हैं

लोग कहते हैं वो मुझसे मुझ्तालिफ सा है
मगर वोह जानते नहीं
मैं उस से रूठ जाऊं तोह..
वोह मुझसे रूठ जाता है ..


गलत ख्याल दिल को दुखा देता है
खोफ्नाक सपना नींद उडा देता है
तुम रूठी तो मनाने को कया कोई ताऊ आते है

फिल्म दिखाते, चाट खिलाते हम ही तो मनाते हैं

अगर वोह पूछ लें हम से की तुम्हे
किस बात का गम हे?
तो फीर................
किस बात का गम हें? ॥

गम था तो बस एक ही गम था
जहाँ किस्ती डूबी वहां पानी बहुत कम था ।


जो आँखों की जबान नहीं पढ़ते
उन्हें इश्क का हक नही ।
जो बातबात पर रुठते हैं उन्हें ,

हमारे
दिल टूटने का इल्म नही ॥

वो मुझे याद तोः करता है मगर यूँही जैसे
घर का दरवाज़ा किसी रात खुला रह
जाए॥

हमारे घर के दरवाजे तो कभी के उखड गए
तुम कब आओगी सोच सोच अरमान भड़क गए

आओगी तुम तो सितारों की छाँव होगी
चाँद रास्ता दिखायेगा गली सुनसान होगी

चौखट पर हम खड़े होंगे पलकों में छिपाने को
नज़रे उतार ले बलियां लोगो की नजरों से छिपाने को