आतंकवाद के साये में धूर्त जलते
पूरा भारत घूम, सिमी मुजाहिद्दीन,
भारत के सपूतों ने आईएसआई की
आतंक के सौदागरों को
बम फोड ले सडक खोल ले
कितने ही सालों से जालिम तुने
हम ने मुहतोड़ जवाब दिया
खेमकरण और कारगिल के संग्राम
जम्मू हो या सूरत, हैदराबाद हो या
शायद खावायिश लालकिले पे चाय पीने की
शास्त्री के जय जवान की मार
राम कृष्ण गौतम गाँधी तिलक जवाहर
सर पे कफ़न माथे पे तिलक,
हमने विश्व को मानवता का सन्देश दिया ।
पंचशील और सद्भावना को माना और जिया ॥
मजहबों से परे जा हर कौम को आदर दिया ।
इस देश में हर मजहब ने प्यार अमन को जिया ॥
हमने विश्व से आतंक
बंगबंधुओं से, अफगानों से,
हमें लाहौर शांती की रेल भेजना आता है ।
तू छुरा घोंपे तो कारगिल
मुल्क में जमुरियत फिर से दस्तक दे रही है ।
बेनजीर को लुटा के इंसानियत भी रो रही है ॥
सात समुन्द्र दूर बैठा
हम कुछ भी ना करें
कुरान-हदीस के पाक फतवों को भुला तू
अपनों को भड़का के तू उन्हें क्यों
दुनिया कहाँ से कहाँ तरक्की
झूट बोलना आतंक बोना-
2025 के पाक महिने में सिजदा कर
छोड़ दे यह ओछी हरकते विनाश की,
मत ले इम्तहान नहीं तो तू पछतायेगा ।
कसम से हम उठ गए तो कौन बचायेगा ॥
भारत वासियों मत घबराना
हम एकता, सावधानी, कठोरता,
हिम्मत रखना मत घबराना
बाबा बर्फानी के दर्शनों को जाना है
जनगनमन, सत्यमेव जयते और
