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Tuesday, September 28, 2010

राम जन्म भूमि विवाद

राम जन्म भूमि विवाद
देश को परतंत्रता की सौगात 
  
३० सितम्बर को क्या होगा? 

कुछ  टीवी पर आयेंगे 
कुछ  अख़बारों पर छाएंगे 
कुछ फ़ना, कुछ शहीद,  
कुछ गुमनामी में सो जायेंगे 

कुछ खोजेंगे अदालती फैसले में खामिया, 
कुछ प्रदेश और कुछ रास्ट्रीय सरकार में,
कुछ नाम लेंगे 'भगवा और हरे' सम्प्रदायों का  
कुछ माननीय जजों को ही खोज डालेंगे  

मुक़दमा आगे बढेगा, 

राम तो आज भी साये में हैं 
कल भी साये में ही पाएंगे 
फर्क नही पड़ता इस राम भक्त को 
राम तो हनुमान के सीने  में सर्वदा सुरक्षित, सन्मानित, 
नित्य सुमिरन पाएंगे 

यह कैसा गाँधी का रामराज 
जिसमे राम सीता के घर भी,
अदालती फैसले से पहिचाने जायेंगे

राम के स्थान भी कब्जा किये जायेंगे 
राम सेवक तो जीतेगा ही 
हम है तैयार 
१५०० इसवी - नहीं - लेकिन 
१९९२ फिर दुहराए जायेंगे 
राम मंदिर कब बनेगा ? 
सीता रसोई में भोग कब लगेगा ?

सुर्यवंश की जितनी पीढ़ी लगी थी एक भागीरथ पाने में 
क्या हमें भी इतनी पीढ़ीओं जीना,
 लड़ना, 
भुगतना पड़ेगा 
रामलल्ला को घर दिलवाने में

Thursday, October 9, 2008

विजयदशमी पर्व का महत्व

विजयादशमी का पावन पर्व हमे कुछ याद कराता है ।
दशमुख के दहन की याद कराता है ॥

हम सदियों से जन्म मरण दिवस मनाते आए हैं ।
इस ही रूप में श्रधा के पुष्प चढाते आए हैं ॥

हरवर्ष ईद क्रिश्मस मनती है,गुरुनानक जयंती आती है ।
गाँधीजयंती ,बालदिवस और आधीअधूरी आजादी भी मनाई जाती है ॥

हर बच्चा अपनी वर्षगाँठ मनाता है।
हर जोडा शादी की सालगिरह पर बीबी के नाज़ उठाता है॥

आज देश में देशद्रोही मक्कारों की वर्षगांठ मनाई जाती है।
चारण चाटुकारों द्वारा उनकी झूटी महिमा सुनाई जाती है ॥

कल तक जो गबन के आरोपों में घिरे रहा करते थे ।
वोह आज देश के नेता और जनता खडी है सकते में ॥

आज अगर गांधी भी इस भारत में वापिस आ जायें ।
देख इटेलियन गांधियों को शायद वोह भी शरमा जाये ॥

त्रेतायुग ने दशानन के दस मुख दिखाए थे।
लालच, इर्षा, घमंड, द्वेष, परनारी आदि के पाप गिनाये थे ॥

रावण तो महाज्ञानी, पराक्रमी वेदपाठी, पोलत्सय था ।
इन्द्र यम कुबेर अग्नि वरुण विजेता तेजस्वी था ॥

आज कलयुग में भी रावण हैं।
जिस गली में चले जाओ एक दो नही बावन हैं॥

विजयदसमी की कल ही नही आज भी जरुरत है।
दसमुख से क्या होगा आज तो सौ की जरूरत है॥

आज (जनता) सीता (नेता) रावन की लंका में कैद हो गयी।
हनुमान दलाल बन गये सीता नीलाम हो गयी॥

विजय दसमी का पर्व नया संदेश लाता है।
दसमुख हों या सौमुख हों उनसे लड़ने को जगाता है ॥

एक दिन तो हर बच्चा राम बनना चाहता है।
आतंक, द्वेष, लालच,
देशद्रोह, मक्कारी, महंगाई,
गरीबी, बीमारी,छल कपट,
झूट, बेईमानी, लम्पटता
को जलाना चाहता है ॥

इस ही लिए यह पावन पर्व आता है।
राम नाम, राम राज्य, राम चरित्र की याद दिलाता है ॥

आओ हम भी यह विजय पर्व मनाये।
दसानन दहन का विशाल आयोजन करवाएं ॥

सीता को आजाद कराने की
दशानन को मार गिराने की
दलालों को भगाने की
विभिष्नो को दूर हटाने की
कीगरीबी, भुखमरी, बेकारी,
बदसलूकी, गद्दारी,चोरबाजारी,
आतंक, लालच, छलकपट, मक्कारी
दसमुखों को दहन करने की शपथ खाएं ।।

Friday, September 5, 2008

झुलत पलने में घनश्याम

यशोदा लेत बलैया देखत श्याम सुबह श्याम
पलना डोरत हिलत पायजबिआं बजत मधुर कर्णधाम

नन्दबाबा को लाडलो सोवे गोपिआं देखेत आवे भूलत घाम
हरष खिलत देख श्याम को सखी झोंटा देत लपक नित शाम

यह दर्श मेरे मन में व्यापो मेरे जीवन की भई शाम
मैं तो चली गोकुल मिलवे सांवरे को मुझे ना कोई दूजो काम

तू भी आयियो कान्हा के दर्शन पायियो दोनों लेवेंगे श्याम को नाम
सुन प्रियसखी बैठेंगे नन्द के चौबारे कर जन्म सफल निरख छबि घनश्याम

राधे राधे

श्याम से मिला दे

नैया तू सबकी पार लगा दे

Wednesday, September 3, 2008

गणपति बाप्पा मोरिया

हीरों के मुकुट से सजा
लाल रत्नों से भरा

गणपति बाप्पा मोरिया

आया मेरे द्वारे
कारण तुम्हारे

आ मिल के इसे पुकारें

गणपति बाप्पा मोरिया
अबके वर्ष तू जल्दी आ

रिद्दि सिद्दि साथ ला
दीन दुखी सेवा की शक्ति दे
देश को खुशहाल बना

अंत समय आये तो ..........
अपने दर्श दिखा

यमपाश से बचा के ..................
अपने धाम में बसा

Monday, September 1, 2008

बर्फानी की जय


बधाई
इस सफलता पर पुरे बर्फानी भक्त समुदाय को
और केंद्र सरकार को सदबुद्दि आने पर।

बर्फानी का देखो कमाल
दुश्मनों को कर दिया हलाल

बर्फानी से जो टकराएगा
उसका येही हश्र हो जायेगा ॥।

कुर्बानी असर लाती है खून देने के बाद
आतंकियों को सबक काश्मीर या मुज्जफराबाद ॥।

जीत की ख़ुशी मनाएंगे
अब तो अमरनाथ जायेंगे ॥।

Friday, August 29, 2008

कृष्ण प्यारी........... निहाल

कान्हा खेलत ब्रिज मैं ग्वालन संग
घुसत गोपियन के घर ढुडन माखन ॥

गोपी तरसत छुप झाँकत, कब आवेंगे नन्दलाल
देख कान्हा, दर्शन पात, होजावे निहाल ॥

लेत बलिआं, पीछे भागत, पकड़वे को नटवरलाल
अंखियन नीर बहावत, कमलपद पखारत, जपे गोपाल ॥

ये नटखट,लीला करत,गोपियन को खिजावत,करे धमाल
छाछ के लोटे पे,त्रिभंगी को नचावे,देखो गोपियन को कमाल ॥

मनभाव दुसरो,काम दूसरो,पकडे श्याम को, डाले लाल
सून स्यानी, जो इसे ध्यावे,वोह तो,निहाल और खुशहाल ॥

Saturday, August 16, 2008

नटवरलीला

प्रिय सखी

जपत देखत नटवरलीला अपनों जन्म सफल बनाएँगे
राधे श्याम सुमिरत ब्रिन्दावन धाम जायेंगे.

राधावल्लभ कुञ्ज गलियन में ढूंड नयनन शीतल करवाएँगे
आया जन्मोत्सव राधाजू को श्याम रिझाने को सृंगार करेगे

सखी सखा सब मिल श्याम राधाजू की लीला में रास करेंगे
वेश बना पकवान पका युगलवर की ब्लैआं ले सेवा करेंगे

नन्द यशोदा के लाडले को माखन दिखा नाचवे को त्यार करेंगे
सुनरी सखी श्याम मनोहर राधाजू संग रास ठिठोली कर विलास करेंगे

ऐसी छटा इस जग में खिलेगी हम सब द्रग नीर भर भाग सराहेंगे
मुझे ना चाहे बंसीबट या महल चौबारा मैं तो वहां ही बसूं जहाँ मेरे राधे श्याम बसेंगे

Thursday, July 3, 2008

अमरनाथ.....................

बर्फानी बाबा देख तेरी धरा पर कया हो रहा है ।
आज तो तेरे दर्शन का भी टोटा हो रहा है ॥

तेरा नाम लेके सवाली करते हैं तेरे धाम की यात्रा ।
तेरा नाम रटते हमारी पूरी होती है जीवन यात्रा ॥

काश्मीर का भविष्य है तेरी यात्रा ।
लाखों जिन्दगी का पालन करती है ये यात्रा ॥

सदिओं से आते हैं सवाली तेरे दर पे मत्था टेकने ।
अमरता का वरदान पाने आत्मा शीतल करने ॥

गरीबों को झोंक दिया आतंक की आग में ।
यात्रा को भी सवाली बना दिया सियास्तबाज ने ॥

अरबों रुपया पाते है काश्मीरी तेरे नाम पे ।
फिर भी दिखाते हैं दादागिरी धर्म के नाम पे ॥


भोले बाबा , क्या तू भी विदेशी होने जा रहा है ?
या तेरा कहर इन पर टूटने जा रहा है ॥

पुकारते हैं हम सिरफिरों को बुद्धि प्रदान कर
अपने भक्तों का मार्ग खोल, दर्शन दे, मुरादे पूरी कर ॥

काश्मीर की आग पुरे देश में फैलने जा रही है ।
'गुलाम'सरकार बचे या ना बचे जनता पिसने जा रही है ॥

जागो देश वासियो इस षड्यंत्र को
पहिचानो ।
३७० अभिशाप असर ला रहा है देखो और जानो ॥

बालटाल के ४० हेक्टर ने आज सवाल उठाया है ।
सैकडो हजघर और हाजी सेवा खर्च पर आज फिर ध्यान आया है ॥

भारतवासियों ........सोचो जानो पहिचानो............
विदेशी षड्यंत्र से सावधान हो, मेरी राय मानो

मुफ्ती फारुख और पाकिस्तानी हुकुमरानों ।
काश्मीरी हो, देश के सिरमौर बर्फानी के कहर को मानो ॥

मत जलाओ काश्मीर को तुम भी नहीं बच पाओगे ।
भूल गए कबायली हमला, जो तुम कुछ,पाकिस्तान जा के, पाओगे

बर्फानी बाबा उठ जाग तेरा देश जल रहा है ।
खोल समाधि देख, सवाली, तेरे दर पे आने से डर रहा है ॥

देशवासिओं, सुनो बाबा की हुँकार ।
कमर कसो, आतंकियों से मुकाबिले को, हो जाओ तयार ॥

गुलाम- मुफ्ती -फारुख- की चलने देंगे नही ।
बर्फानी की इज्ज़त कम होने देंगे नही ॥

यात्रा करेंगे भोले को याद करते जायेंगे ।
इंट का जवाब पत्थर से देंगे शहीद हो जायेंगे ॥

Monday, June 23, 2008

राधा श्याम

कान्हा तेरे रंग भरे नैन रसीले
पिताम्बर छटा शोभित कजरारे नयन कटीले॥
मैं बावरी डोर फिरत इत् उत ज्यों विरहिन चोट चुटीले
ब्रज में मच गयी धूम तेरे सैनं बाण नुकीले
भौहं कमान तान कस राधाज्यु के मारी ।
घायल कर डारी ब्रिजनारी नयन चले तेरे छैल छबीले
"सखी" फँसी लख राधावल्लभ बाँकी चितवन
करो रास कुञ्ज वनन में धर ललित रूप गरबीले
श्याम पत राखो "सखी" की ।
द्रोपदी की राखी जैसे मद्ध कौरवं हटीले ॥

॥ राधे राधे ॥

Saturday, June 14, 2008

भगवान से अरदास

हे परमेश्वर
अजर अमर सर्वेश्वर

तेरी कायनात सुंदर मनहर दुखहर
कलकल करती नदियाँ चहचाहते व्योमचर
सुंदर बगिया के रंग बिरंगे पुष्प मनोहर
तेरे नाम की मधुर तान से व्याप्त यह चर

तेरे हम दास कृपा के पात्र
दया कर करुणा कर प्रदान कर
दीन दुखी के काम आऊं तेरा नाम कर देश
धर्म पर जान दूँ तेरा ध्यान धर

जब तेरा आवाहन हो
मेरे लिए पुष्पक वाहन हो
यम् दूत का पलायन हो
विष्णुलोक का निर्धारण हो

वापसी का रस्ता बंद कर
भेजे भी तो यह हमारी सुन कर
हमें पुनः मानवरूप से संवार कर
मन में तेरे ज्ञान की ज्योति उजाल कर
नहीं तो कसम तुझे .....................
धरती पर भेजने की टाळ कर

गुरु वंदना

गुरु गोविन्द दोनो खडे काके लगूँ पाये
बलिहारी गुरु आपनो जो गोविन्द दीयो मिलाये

गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरु देवो महेश्वर:
गुरु साक्षात् परा ब्रह्म त्स्मये श्री गुरुओ नमः:

सात समुंद की मस्सी करूं लेखनी सब वन राय
धरती सब कागद करूं गुरु तेरो वर्णन कियो ना जाये

कबीर बैठा छत पे जोर जोर चिल्लाए
देखो गुरु आ गए कोई पांव धोवो जाये
मैं तो माटी का लोंदा मुझे मूरत दीयो बनाए

कबीरा तेरी वाणी बोले राम के नाम
किसने तुझे बोल्यो तू भज राम को नाम

...........कहे कबीरा सुन भाई साधो
मेरे गुरु तो तर गए और मुझे दे गए जपने को नाम

,,,,,,,,,,,,,
कुछ ना होते हुए भी हंसाते है दुनिया
कुछ सब कुछ होते भी दुनिया के अन्देसे से जलते है मिया

हमारी तो कुछ बात ही और है, तुम्हारे दिल मैं रहते हैं हर लह्मा
तुम्हारे दिदार को तरसते हैं बाकि तो बेकार है दुनिया

Saturday, May 31, 2008

खुदा-बुदबुदा


जवानी में हसीना का पसीना इत्र ए गुलाब
और बाद में उसका सीना चारमीनार ए हयद्राबाद

हमें मुर्गा मुस्सलम नहीं सिर्फ दावत ए शिराजी चाहिए
तुम्हारी सांसे नहीं सिर्फ साथ जीने की आसें चाहिए

कहाँ खुदा- कहाँ बुदबुदा
मैं तो इंसान हूँ इंसान ही भला


भूल गए सुबह की नसीहत जो शाम ख़राब करते हो
लड़ने जीने की बात करते हो दिल पे वार करते हो

तुम करो या मैं करू किसी का साझा नहीं है
काम सब को है इम्त्ज़ार में कृष्ण के राधा नहीं है

अक्स ए खुदा

हमारी वफ़ा तुम्हे दगा लगती है
हम तुम्हारे इशारे पर चले फिरभी तुम्हे तसल्ली नहीं मिलती है


हम तुम्हारा नाम लेकर निकले थे तुम्हारा दिदार करने
तुम्हें पाया रकीब की बाँहों में मायूस हो हम निकले

हर इंसान में सैतान और भगवान छुपा होता है
तुमने जो देखा वोह सही होगा उसकी कुदरत में उसका जलवा होता है

आशिक माशूक को बेटा बाप को, चेला उस्ताद को भगवान का दर्जा देता है
हवानियत साथ चले पर नाम अल्लाह, खुदा भगवान का ही लेता है

फितरत इन्सान की होती है रंग पलटने की, नहीं पलटने वाला तो भगवान होता है
तुम्हारे कर्म में शर्म क्यों है जब की कसूर पैदा करने वाले का होता है
तुमने अगर कुछ करामात करी हो तो वाकई में इल्जाम ए शर्म आता है

शुक्र कर उस उपर वाले का जिसने हमें इंसान बनाया
दीन इमान जज्बात रहम और महोब्बत का सबक पढाया

सोच, कहीं कुत्ता बनाया होता तो क्या होता?
भोंकता दूसरो पर, काटता अपनों को, और झुटन चाट रहा होता

नसीब हमारा की हम तुम्हारी आंखों में बसते है
मुकद्दर के सिकंदर हो जो तुम में अक्श ए इलाही नज़र आते है

Tuesday, May 13, 2008

कृष्ण की दिवानी

दिन दहारे सरक किनारे, गोपी खरी कबसे बाट जोहत है ॥
नन्द का छौना, चलत रोज़ इस डगर पर, गोपियन संग अँखियाँ लडावत है ॥

रात सपने में ,मुस्का दिखा चितवन मधुर , गोपियन की नींद उडा,
रास केली दर्शन,करा हिरदय मे हिलोर मचावत है ॥

भोर होते ही, गयियन संग, पाग लचीली, कटी काछनी,
कर में मुरली लिए , गोपन के छोरों के संग देखो कान्हा जावत है ॥

याद किसे अपनी चुनरी सारी, सुन के टेर बंसी की प्यारी,
ले हाथ में माखन को लौन्दा, ब्रजबाला दौड्त कान्हा मिलने की आस लगात है ॥

भूल गयी मैं तो "सखी" सुन श्याम बंसरी, दिन चैन -रात नींद नहीं,
श्याम से मिलन को दिल तडपत, मुझे कछु नहीं भावत है ॥

Monday, April 7, 2008

राधे राधे राधे

'राधे' तेरी चरणों की कहीं धुल जो मील जाए,
सच कहता हूँ मेरी तकदीर बदल जाय ॥

'राधे' कहते हैं तेरी रहमत दीन रात बरसती है,
इक बूंद जो मील जाए, मेरे दील की कली खील जाये ॥

'राधे', यह मन बड़ा चंचल, कैसे तेरा भजन करूं,
जीतना इसे समझाऊं, उतना ही मचल जाए ॥

'राधे', मेरे जीवन की बस एक तम्मना है,
तू सामने हो मेरे, मेरा दम ही नीकल जाये ॥

राधे तू बड भागीनी, कौन तपस्या कीन,
तीन लोक चोधाह भुवन सब तेरे आधीन ॥