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Friday, December 10, 2010

हिंदी

भाषा  का  ज्ञान , भाषा  का  मान  
देश  धर्म  की  पहली  पहिचान 
समर्द्ध, सम्पन्न, हिंद का सम्मान 
आज अंग्रेजी के समक्ष हतमान
क्या जापान कम उन्नत है?
क्या रूस के स्पुतनिक चाँद पर नहीं पहुँचते?
गुलामी तो चीन ने भी झेली थी 
हमलावरों की ताकत क्या हमने अकेले देखी थी 
लेकिन हर मुल्क में नेहरु गांधी ना हुए 
यानी अंग्रेजी को लादने को साथी ना हुए 
इसलिए चीन, जापान, रूस, मंगोलिस्तान
जर्मनी हो या फ्राँस अपनी भाषा का मान रखते हैं 
दूसरी से परहेज नहीं पर अपनी को ऊपर रखते हैं 
संविधान के बताये वर्ष तो कभी के बीत गये 
अटल के हिंदी शब्द रास्ट्रसंघ में गूंज गये 
हमे भी आज सोचना होगा 

Wednesday, November 24, 2010

bihar ki jeet

दे दी पटकनी लालू राहुल को तुने बिना खडग बिना ढाल
पटना के रन बांकुरों तुमने कर दिया कमाल

कल तक नितीश- मोदी झेलते थे हमले बार बार
राज में ना बिजली ना रक्षा जनता बेकार

जयप्रकाश के पठे बिहार में  जन्मे दो सितारे
 शुशील और नितीश इस धरती के तारे

सामने थी बेकारी, अन्धकार,  और सूखा बाढ़ गरीबी लाचारी
साथ थी हिम्मत, हौसला, संगठन शक्ति और दयानतदारी

पांच वर्ष पहीले अंधकार विरासत में मिला था
सामने समश्याओं का बड़े बोलों का लम्बा सिलसिला था

लड़ते लड़ते निकल गये सरदारों के सरदार हिम्मत ना हार के
 आगयी परिक्षा जनता के दरबार परीक्षक केद्र सरकार के

कहीं राम
कही राहुल
कहीं माया
कहीं लल्लू   
कुरुक्षेत्र सज चूका था
बिहार चुनाव धधक चूका था

हमले हुए, तीर चले आरोप लगे
अपने पराये हुए, दिल में खंजर से लगे

जनता पर विश्वास था कर्म पर था भरोसा
साथ कमल सा कोमल और तीर सा कठोर था

शरद, शिवानन्द, ठाकुर, रविशंकर
शाहनवाज, शुष्मा, लालजी से साथ कर

भीड़ गये बौल हर हर महादेव अल्लाह हो अकबर
सामने लालू राबड़ी, रामविलास, राहुल सोनिया  एक से एक बढ़ कर

काम जीत गया, विश्वाश बढ़ गया
नतीजे आज आये तो नशा सा चढ़ गया

एक दो नही  २०० भी पार होगये
सामने तो तीन चार बीस बाईस रह गये

रन बाकुरो जीत को संभालना साथ निभाना
कमल खिला रहे, तीर पैना रहे जनता की आस पुराना 

Tuesday, May 4, 2010

हार ही जीत का श्रोत..

जिन्दगी जिंदादिली का नाम है
रुकावटें मुसीबतें तो यूँ ही बदनाम है


आती हैं यह सब्र का इम्तहान लेने
आंकने ताकत और होसला तोलने


जो डर गया घबरा गया
या इनसे जी चुरा गया


मर गया जीतेजी मौत की जरुरत उसे नही
जो अड़ गया मैदान ए जंग में वोह हारा नही


पोरस हर के भी जीता था दुनिया जानती है
जीसे गौरो ने डिब्बे से फैंक दिया उसे आज महात्मा जानती है


लिंकन, वाशिंगटन गजनवी इंदिरा की हार कोन नही जानता
संघर्ष इनका जिसने विश्वनेता इन्हें बना दिया


ना थमे ना रुके रणबाँकुरे झुझ गये केसरिया बना पहिरके
ली प्रेरणा, संकल्प जीत का लिया बेपरवाह हार या जीत से


आज इतहास भर गया है इन की कहानिओं से
कल तुम्हारी भी चर्चा इनमे होगी तुम्हारे काम से


मत कर प्रवाह हार की जीत की कर्म कर कर्म कर
कर्म किये जा फल वोह देगा विश्वास कर

हार ही जीत का श्रोत..

Saturday, April 24, 2010

इंडियन पैसा लीग

 इंडियन पैसा लीग से आई हवा 
मारिसस जा और माल कमा

नाम रखले अपना मोदी या ललित
साथ में जीसके राजे पवार और कितने भ्रमित 

कोई भी रिश्तेदारी निकाल ले
या गाँव का पुराना पड़ोस ही निकाल ले 

कुछ न मिले तो सौतेला ही सही
अपना नही तो दारू वाले का ही
 

सुबह कर बैठक टीम के मालिकों से
दिन में इंटरवियु इनकमटेक्स को दे 

शाम को तो मेच देखेगा
जिनके लिए फिक्स किया उनसे भी वसूलेगा
 
दिनभर फिक्स करे और डुबेगा  नशे में  
रात गुजरेगी स्वप्न सुन्दरियो के आगोश में 

फिरलालच का एक सरुर आएगा
सुनन्दा जैसी सुन्दरी को थरूर लायेगा
 

इंडियन पैसा लीग में जोर और भाग आजमाएगा 
सो सुनार कि एक लुहार कि एक दी वोह भी खायेगा 

लीग के पटेलों पवारों के वफादार को रस नही आएगा
हिल जायेगा देश पूरा थरूर तो थर्रा ही जायेगा 

थरूर गया थर्रा के बड़ी बड़ी पावरों को
पटेलो को मनोहओं को शुक्लों को मलयों को 

देखो ये पैसा लीग कया रंग लाती है
कितनो को गद्दी से उतारती और चढ़ावा चढ़ाती है 

ऐसी लीग से बचना यारों
अगर मारीशस में नही बसना प्यारों

Friday, April 9, 2010

कर्म का मर्म

जैसा करेगा
वैसा भरेगा
सोएगा तो खोएगा
जागेगा तो पायेगा
कर्म करेगा फल पायेगा
प्यार करेगा प्यार ही पायेगा
दुनिया छोटी हो गयी
हिम्मत कर पार उतर जायेगा
कल करने को टालेगा
फ़िर कैसे पा लेगा
साथ में तेरे बहुत कुछ आया था
जाते बहुत साथ बांधेगा
यह मानव जनम भाग्य से पाया
प्रभु भजन परोपकार से इसे सफल बना लेगा

Wednesday, April 7, 2010

लाल झंडा लाल निसान

लाल हाथ लाल खून से रंगे
पुलिस का हो चाहे जनता हत्थे चढ़े

आज ७६ वर्ष में सेकड़ों मरे
देश के कोने कोने में कितने इनके हत्थे चढ़े ?

हिटलर भी उनके हाथ चढ़ गया`
१९६२ में चाचा नेहरु को डस गया

बंगाल की तरक्की वोह खा गया
देखो कितनी तेजी से आसमा पर छा गया

कभी इंदिरा कभी अटल कभी प्रचंड दहल
बंगाल से शुरू केरल पर रहा टहल

देश की आज़ादी में देशद्रोह की मीसाल
देश की तरक्की का विनाश और काल

नक्सल,फारवर्ड, वाम, माओवादी मार्किस्ट आदि
सभी अंदर से एक,दिखते अलग जैसे खांसी बुखार मियादी

प्रेम की भाषा दलाई पुकारते रह गये
हिंदी चीनी भाई भाई सुनाते नेहरु चले गये

इनका तो बस एक ही इलाज़ है
फौज की तैनाती और इनका पूर्ण विनाश है

सरकार में इच्छाशक्ति नही जनता में एका नही
वोटों की राजनीती इनको मरने देती नही

आज हमे ही आगे आना होगा
दे हथियार आदिवासी को इनसे टकराना होगा

जिनकी पैरवी का दावा यह करते है उन्हें इनसे बचाना होगा
वोह जग गये तो यह भाग गए इनको बतलाना होगा


Tuesday, April 7, 2009

वीरों की परिभाषा

वीरों की जरूरत
आज भाटों की नही वीरों की जरुरत है
जो भिड सके दुश्मनों से राष्ट्र के खातिर
खून खोलता हो जिसका अत्याचार देख
ऐसे ही चाहिए नोजवान जिसमे हो वेग.
..........
वीरों की जरूरत तो आदिकाल से चली आई है।
आल्हा उदल वीर शिवा छत्रसाल से यह धरा सजाई है॥

खून हो तो खोलेगा यारों
यहाँ तो डालडा और बिसलरी पिलवायी है॥

जो बोले हाथ कटवा दूंगा उसे रासुका,
जिसके साले ............
बीबी बेलगाम चले ............
और खुद बुलडोजर चलवाए .............
यह २ /३ की राजनीति
देश के नवजवानों पर छाई है ।।

बगल में तालिबान दहाड़ रहा...........
२६/११ हो चूका ..........
अब शायद मोदी अडवाणी जैसों की बारी आई है॥

एक नोजवान ने सत्य बोलने का साहस किया।
माया लालू मुलायम प्रियंका जैसो की बन आई है॥

गुरु कुर्बानी किसी मकसद से हो तो रंग लाती है।
नहीं तो खुदकुशी पर देश का कानून हरजाई है॥

Thursday, February 5, 2009

नेता की महिमा

अफसर नेता दोनों खडे काके लागु पाए
बलिहारी नेता अपनों जो अफसर से सलाम कराए

नेता बैठा पेड़ पर रहा सबकी हरकत देख
चमचों पर करपा करे खागया, देश और खेत

अफसर गुंडे और नेता हैं आज के ब्रह्मा विष्णु महेश
पूरा देश कब्जे में इस त्रिमूर्ति के बाकी सब अवशेष

ब्रह्मा पूजे विष्णु को विष्णु पूजे महेश को महेश उसे दिल में धारे
ब्रह्मा सबका रचियेता सब एक पर दिखते सारे नियारे

इनकी लाली देखन मैं गया जित देखूं उत लाल
देखत देखत खा गये देश विदेश में गया माल

गिरगिट ने शिकायत करी क्यों करते मुझे बदनाम
रंग पलटने दल पलटने और आँख बदलने में यह मुझसे महान

रहिमन नेता की झोपडी होत बहुत विशाल
चमचे भी बना गये कार, दुकान महाल

नेता से डर कर रहियो कभी न निभावें प्रीत
सरकारी दामाद यह इनकी माल पचाने की रीत

पढ़ लिख कर तू कया करेगा बन जा किसी का चमचा
नेता बन, माल डकार, होगा तेरे पास रुतबा, नाम और पैसा

जीत गया तो मंत्री और हार गया तो निगमों का अध्यक्ष
पार्टी में रुतबा तेरा, थाने में शब्द तेरे, जनता को तू भक्ष

जेल गया तो कया हुआ कल अख़बार में देख
नेता बनने का रस्ता होत जात जेल के खेत

Monday, January 26, 2009

गणतन्त्र दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएँ

यह आजादी का सुनहरा गणतन्त्र
विश्व में बेमिसाल हमारा प्रजातंत्र ।

अब तजुर्बेकार हो गया यह तन्त्र
हमे फक्र है की हमारा है यह गणतन्त्र॥

याद आती है लिछिविओं की जिहोने विश्व को गणतन्त्र दिया
नमस्कार बाबा साहेब अम्बेडकर को जिन्होंने विश्व का सर्वोतम सविधान दिया ॥

75 सालों में इसमें सैकडो परिवर्तन हो गये
जैसे सोने की मूर्ति पर हीरे मोती टंग गये ॥

इसही सविधान से बिना खून के सत्ता की परिवर्तन है
बोलने, पूजा, व्यवसाय, आवागमन की पूर्ण स्वतन्त्रता है॥

सांसदों को,विधायकों को, नगर ग्रामसभाओं का चुनाव होता है
इसके सामने प्रधान मंत्री को भी सर झुकाना होता है ॥

उपर बैठे कह रहे होंगे गाँधी नेहरु तिलक गोखले
लाजपत भगत राजगुरु चंद्रशेखर सुभाष जो लड़े और चले ॥


हर वर्ष लगेंगे मेले बस शहीदों का येही मुकाम होगा
जब भी उनकी याद आएगी आँखे नम होंगी और जुबान पर नाम होगा ॥

तूफान से लाये थे आज़ादी के परवाने किस्ती निकाल के
इस गणतन्त्र को रखना मेरे साथियो संभाल के॥

दुश्मन आतंकी खडा है दरवाजे पर बंदूकें तान के
सम भारतमाता की खाते हैं रखेंगे हम इसको सम्भाल के ॥

आप को गणतन्त्र दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएँ

Thursday, November 27, 2008

धिक्कार


भारत के कर्णधारों को
देश के सुरक्षा के जिम्मेदारों को
धिक्कार धिक्कार धिक्कार

जो घर के रहने वालों पर भोंकते काटते हैं
बाहर के आतंकियों को देख दुम दबा कर भागते है
निर्दोषों की जानो को दाव पर लगा कर झूटी शान बखारते हैं
धिक्कार धिक्कार धिक्कार

उन देश के नेताओं को
जो सुभाष भगतसिंह आजाद का नाम बदनाम करते
पंचशील को पुकारते हर बार यह आखिरी है वादा करते
ऐसे भेडियों को
धिक्कार धिक्कार धिक्कार

कभी कारगिल तो कभी संसद
कभी काशी तो कभी दखन
कभी दिल्ली तो कभी बम्बई
देश की अस्मत को लुटाते
निर्दोषों की जान गवांते
ऐसे पाखंडियों देश द्रोहियों को
धिक्कार धिक्कार धिक्कार


सब्र का बाँध टूट गया है
देश आंसुओं डूब गया है
विदेशी ठठाका मार रहा है
ऐसे शिखंडी सरकार पर
धिक्कार धिक्कार धिक्कार

देश की सेना क्या सो रही है
गुप्तचर सेवा क्या सुप्त हो रही है
ATS क्या अब रो रही है
ऐसी सरकार को
धिक्कार धिक्कार धिक्कार

देश भक्तों और सेना गोरवों पर
कहर बदनामी बरपा कर
अफजल को फांसी दोगे तो काश्मीर जल जाएगा सुना कर
देश की आन बान शान लूटा रही है
ऐसी राजनीती को
धिक्कार धिक्कार धिक्कार


आज जरूरत है इंतकाम की
इन आतंक के सौदागरों के दिल में
भारत के बदले और इंतकाम की
एक के बदले चार की यानी पैनी तलवार की धार की
नहीं तो हमें नहीं स्वीकार


उठो
देशवासिओं ऐसे देश के दुश्मनों से देश को बचाओ
खुल के सामने आओ और इनको बोली गोली और मतों से सबक सिखाओ





Thursday, October 9, 2008

विजयदशमी पर्व का महत्व

विजयादशमी का पावन पर्व हमे कुछ याद कराता है ।
दशमुख के दहन की याद कराता है ॥

हम सदियों से जन्म मरण दिवस मनाते आए हैं ।
इस ही रूप में श्रधा के पुष्प चढाते आए हैं ॥

हरवर्ष ईद क्रिश्मस मनती है,गुरुनानक जयंती आती है ।
गाँधीजयंती ,बालदिवस और आधीअधूरी आजादी भी मनाई जाती है ॥

हर बच्चा अपनी वर्षगाँठ मनाता है।
हर जोडा शादी की सालगिरह पर बीबी के नाज़ उठाता है॥

आज देश में देशद्रोही मक्कारों की वर्षगांठ मनाई जाती है।
चारण चाटुकारों द्वारा उनकी झूटी महिमा सुनाई जाती है ॥

कल तक जो गबन के आरोपों में घिरे रहा करते थे ।
वोह आज देश के नेता और जनता खडी है सकते में ॥

आज अगर गांधी भी इस भारत में वापिस आ जायें ।
देख इटेलियन गांधियों को शायद वोह भी शरमा जाये ॥

त्रेतायुग ने दशानन के दस मुख दिखाए थे।
लालच, इर्षा, घमंड, द्वेष, परनारी आदि के पाप गिनाये थे ॥

रावण तो महाज्ञानी, पराक्रमी वेदपाठी, पोलत्सय था ।
इन्द्र यम कुबेर अग्नि वरुण विजेता तेजस्वी था ॥

आज कलयुग में भी रावण हैं।
जिस गली में चले जाओ एक दो नही बावन हैं॥

विजयदसमी की कल ही नही आज भी जरुरत है।
दसमुख से क्या होगा आज तो सौ की जरूरत है॥

आज (जनता) सीता (नेता) रावन की लंका में कैद हो गयी।
हनुमान दलाल बन गये सीता नीलाम हो गयी॥

विजय दसमी का पर्व नया संदेश लाता है।
दसमुख हों या सौमुख हों उनसे लड़ने को जगाता है ॥

एक दिन तो हर बच्चा राम बनना चाहता है।
आतंक, द्वेष, लालच,
देशद्रोह, मक्कारी, महंगाई,
गरीबी, बीमारी,छल कपट,
झूट, बेईमानी, लम्पटता
को जलाना चाहता है ॥

इस ही लिए यह पावन पर्व आता है।
राम नाम, राम राज्य, राम चरित्र की याद दिलाता है ॥

आओ हम भी यह विजय पर्व मनाये।
दसानन दहन का विशाल आयोजन करवाएं ॥

सीता को आजाद कराने की
दशानन को मार गिराने की
दलालों को भगाने की
विभिष्नो को दूर हटाने की
कीगरीबी, भुखमरी, बेकारी,
बदसलूकी, गद्दारी,चोरबाजारी,
आतंक, लालच, छलकपट, मक्कारी
दसमुखों को दहन करने की शपथ खाएं ।।

Saturday, September 13, 2008

आज फ़िर चला पटाका

आज हिमाले की चोटी से 
फिर किसी ने पुकारा है ।
आतंकवाद के साये में धूर्त जलते 
पडोसी ने ललकारा है ॥

पूरा भारत घूम, सिमी मुजाहिद्दीन, 
हिन्दोस्तान  में फिर धमका गया ।
भारत के सपूतों ने आईएसआई की 
इस चुनौती को स्वीकारा किया ॥

आतंक के सौदागरों को 
चेतावनी का संदेश भिजवाया है ।
बम फोड ले सडक खोल ले
 हिंद-कश्मीर हमारा है ॥

कितने ही सालों से जालिम तुने 
मासूमों पर कहर बरपाया है ।
हम ने मुहतोड़ जवाब दिया 
और हर जगह तुझे हराया है ॥

खेमकरण और कारगिल के संग्राम 
की पिटाई तू क्या भूल गया ।
जम्मू हो या सूरत, हैदराबाद हो या
 बनारस चाहे संसद तेरी मौत भूल गया ॥

शायद खावायिश लालकिले पे चाय पीने की
 अभी भुला नहीं तू ।
शास्त्री के जय जवान की मार 
को आज भी याद कर तू ॥

राम कृष्ण गौतम गाँधी तिलक जवाहर
 के हम वंशज हैं जान ले ।
सर पे कफ़न माथे पे तिलक, 
कमर कसे है मोदी की सेना मानले ॥

हमने विश्व को मानवता का सन्देश दिया ।
पंचशील और सद्भावना को माना और जिया ॥

मजहबों से परे जा हर कौम को आदर दिया ।
इस देश में हर मजहब ने प्यार अमन को जिया ॥

हमने विश्व से आतंक 
ख़त्म करने का अहद लिया ।
बंगबंधुओं से, अफगानों से, 
पूछ हमने क्या क्या नहीं किया ॥

हमें लाहौर शांती की रेल भेजना आता है ।
तू छुरा घोंपे तो कारगिल 
भी करना आता है ॥

मुल्क में जमुरियत फिर से दस्तक दे रही है ।
बेनजीर को लुटा के इंसानियत भी रो रही है ॥

सात समुन्द्र दूर बैठा 
तेरा आका आज तुझे जान गया ।
हम कुछ भी ना करें 
दुनिया का थानेदार 
तो डंडा तान चुका ॥

कुरान-हदीस के पाक फतवों को भुला तू
 कुफ्र की वकालत कर रहा है ।
अपनों को भड़का के तू उन्हें क्यों 
नापाक नाकाम बदनाम कर रहा है ॥

दुनिया कहाँ से कहाँ तरक्की 
कर गयी तू भी इसे जान ले ।
झूट बोलना आतंक बोना- 
लाशे काटना गलत है मान ले ॥

2025  के पाक महिने में सिजदा कर
 कुफ्र  से तौबा मांग ले ।
छोड़ दे यह ओछी हरकते विनाश की,
तरक्की की डगर थाम ले ॥

मत ले इम्तहान नहीं तो तू पछतायेगा ।
कसम से हम उठ गए तो कौन बचायेगा ॥

भारत वासियों मत घबराना 
सब तुम्हारे साथ है ।
हम एकता, सावधानी, कठोरता, 
निरभ्यता, सद्भाव है ॥

हिम्मत रखना मत घबराना 
 आतंकियों को सबक सिखाना है ।
बाबा बर्फानी के दर्शनों को जाना है 
आशीर्वाद पाना है 

जनगनमन, सत्यमेव जयते और 
वन्देमातरम गाना है ॥

Saturday, August 16, 2008

आज की ताजा खबर

कश्मिरिओं को १५०० करोड़ का नुक्सान हो गया
अरे हिसाब लगाने वालोंसिर्फ ३,००,००० कश्मीरी पंडितों का ५,00,000/- साल से हिसाब लगालो तो :-

अबतक 15000 करोड़ के हिसाब के ३,0०,००० करोड़ का नुक्सान हो चूका है।
उनकी जमीन सम्पति तो १० लाख करोड़ से ज्यादा की पाएगी ॥


अगर हिसाब की बात करते हो तो लगाओ हिसाब की ....................
कितने लाख करोड़ इधर से उधर जा चुके हैं ।
एक कारगिल में कितने जवान जान गवां चुके है ॥


क्या मुजफ्फराबाद में सेव नही उगते जो इनका वहाँ इस्तकबाल होगा ।
अरे नही इन्हें जाने दो इनका हमे मालूम है वहां क्या हाल होगा ॥

हमे uno की धमकी देते हैं जैसे अमन के ठेकेदार हों ।
दुनिया जानती है पहिचान्ती है इन आतन्किओं को ॥


बदनाम कर दिया हिंद के मुसलमान को ।
अल्लाह के नाम को इंसान के अरमान को ॥

भेड़िया आया भेड़िया आया का शौर सुन दौड़ा करते थे ।
एक दिन आया तो झूट मान अनसुना करते थे ॥

एक दिन यहाँ भी ऐसा ही होने वाला है ।
पूरा काश्मीर एक हो भारत में मिलने वाला है ॥

कश्मीर की धरती का बवाल

आज की ताजा खबर कश्मिरिओं को १५०० करोड़ का नुक्सान हो गया हिसाब लगाने वालों सिर्फ ३,००,००० कश्मीरी पंडितों का ५०,०००/- साल से हिसाब लगालो तो अबतक १५०० करोड़ के हिसाब के ३०,००० करोड़ का नुक्सान हो चूका हैउनकी जमीन सम्पति तो १० लाख करोड़ से ज्यादा की पाएगी ॥
हिसाब की बात करते हो तो लगाओ हिसाब की

कितने लाख करोड़ इधर से उधर जा चुके हैं ।

एक कारगिल में कितने जवान जान गवां चुके है ॥
क्या मुजफ्फराबाद में सेव नही उगते जो इनका वहाँ इस्तकबाल होगा ।

अरे नही इन्हें जाने दो इनका हमे मालूम है वहां क्या हाल होगा ॥
हमे uno की धमकी देते हैं जैसे अमन के ठेकेदार हों ।

दुनिया जानती है पहिचान्ती है इन आतन्किओं को ॥

बदनाम कर दिया हिंद के मुसलमान को ।
अल्लाह के नाम को इंसान के अरमान को ॥

Tuesday, August 5, 2008

चौराहा

चौराहे पर खडा मैं सोच रहा
किधर जाऊं मन टटोल रहा

चार राहें जहाँ आके मिलती हैं
उस चौराहे के थानेदार से मैं बोल रहा

बहुत सुंदर सजाया है चौराहे को
उसपे बैठाया चहचहाते चिडे चिडयों को

मुबारक हो थानेदार तुम्हे यह खुशहाल चौराहा
हमारा तो येही रास्ता है
रोज निकलेंगे इस चौराहे से
दिलबर का आशियाँ यहाँ से दिखता है

इतना रहम करना दिलबर के रूबरू होने पर
रोक देना उन्हें अपना रुआब दिखा कलाम सुना कर

Sunday, August 3, 2008

विश्व दोस्त दिवस .................

पूरा विश्व आज दोस्त दिवस मना रहा है
आज हमें भी हमारा दोस्त याद आ रहा है.

आज देख रहे हैं दोस्ती भरे तराने को
मेरे दोस्त आ आज ताजा करें अपने अफसाने को

हम तो हैं तैयार तुम्हारे हमदम बन जाने को
अरमान हमारा एक, दिल को दिल से मिलने और मुस्कुराने को

हाथ में हाथ डाल हम चाँद पर जायेंगे
परियां स्वागत करेंगी गन्धर्व गीत गायेंगे

जब दिल से दिल; मिल जायेंगे नया उजाला आएगा
दुनिया देखेगी हमारी दोस्ती और दुश्मन घबराएगा

कसमे हमारी दोस्ती की हर आशिक खायेगा
कृष्ण सुदामा को भूल हम से दिल लगायेगा

Sunday, July 20, 2008

मौला.............

मौला बोला बचाले मुझे
इस मतलबी दुनिया से उठाले मुझे

तुने कायनात बनायीं थी
खुबसुरत बगिया लगायी थी

आदम और हौवा बनाये थे
पीर पैगम्बर भिजाये थे

नेकी पर चलना सिखाया था
जकात रहम इबादत पे चलना सिखाया था

आज खुदा की खुदाई हैवान हो गयी
इंसानियत लालच में नीलाम होगई

इंसान खुद खुदा बन गया
उपर वाले पे से भरोसा उठ गया

अल्लाह की दर इराक टूट गया
अमरीका परस्ती में पाक नापाक हो गया

इंसानियत का हस्र इतना की दिल भर गया
मोला भी शायद अटम से डर गया

जमी को जन्नत बनाने का ख्वाब धूल में मिल गया
मौला तू ही संभालेगा

इस कायनात को शैतानो के कब्जे से निकलेगा
या खुद भी जायेगा और हमें भी बुला लेगा

Saturday, July 19, 2008

चुनाव का बकरा...............

देखो फिर ईद गयी
बकरे की मुसीबत गयी
अरे नहीं बकरे की तो किस्मत संवर गयी

सौदागर ने फरमान किया
ईद मनाने का ऐलान किया
खरीदी का दाम दिया

कल तक जो बकरा मण्डी के ख्वाब थे देखते
आज हम उन्हें मण्डी के तिजारती देखते

काश्मीर से कन्याकुमारी
मुंबई से बंगाल की खाडी

हर बकरे का अलग निसान है
उसके मालिक की अलग दुकान है

कुछ बकरे खुले घूम रहे है
चुंगी वाले जाल डाल उन्हें ताक रहे हैं

कुछ बकरे मिमिया रहे हैं
मंत्री बनाओ चिल्ला रहे हैं

कुछ लाल कुछ हरे नीले, कुछ केसरिया बाड़े में घुस चुके है
कुछ हाथ के इशारे पे, सजे संवरे खड़े हैं

तीन दिन है बाकी सौदागर को ईद मनाने को
बकरों की तो मौज होगई, ईद को चला जाने दो

यारों ईद के बाद क्याहोगा ?
सौदागर तो खुश, देश का सत्यानास होगा

हाथ जीत गया तो भी हारेगा
लाल का कया बिगडेगा वोह तो चीन पधारेगा

हाँ- कुछ बकरे मोटे हो जायेंगे
कुछ मंत्री कुछ संत्री बन जायेंगे

इसी लिए कहता हूँ ईद गयी .........
बकरों की तो मौज आगयी