आज की इस अंधी दौड़ में देखे हैं हमने
नफरत की ठोकर से जज्बात बिखरते
उपरवाला भी अगर आये तो यारों
सौदागर उसे भी बेच खाके निकलते
आज की सौगात झूट नफरत आतंक
इसे फैलाने वाले तानाशाह और मालिक बनते
बहुत से गम हैं इस ज़माने में
इश्क से हालात नहीं पलटते
आओ हम मिल बनाये नयी दुनिया
जिसमे इश्क, मोहब्बत की शहनाई गूंज
Tuesday, August 5, 2008
मिसाल ए दोस्ती
इन्सान को इन्सान बनाती है दोस्ती
हैवानियत से भी कभी बचाती है दोस्ती
दोस्त की हर मुसीबत की निगेबाहं है दोस्ती
हाथ में आ जाती है गिरेबान करे अगर कोई बुराई दोस्तकी
हर तक़दीर को बदल दे ऐसी मेहरबान होती है दोस्ती
युधिस्टर ने निभाई थी स्वान से दोस्ती
आज भी मिसाल है कृष्ण सुदामा की दोस्ती
आ हम भी आज बन जाये मिसाल ए दोस्ती
हैवानियत से भी कभी बचाती है दोस्ती
दोस्त की हर मुसीबत की निगेबाहं है दोस्ती
हाथ में आ जाती है गिरेबान करे अगर कोई बुराई दोस्तकी
हर तक़दीर को बदल दे ऐसी मेहरबान होती है दोस्ती
युधिस्टर ने निभाई थी स्वान से दोस्ती
आज भी मिसाल है कृष्ण सुदामा की दोस्ती
आ हम भी आज बन जाये मिसाल ए दोस्ती
कातिल मल्लिका
कातिल को कातिल कह क्यों मजाक करते हो
उनकी अदा पे मरते हो फिर क्यों शिकवा करते हो
वोह जहर भी पिला दें अपनी आंखों से कोई बात नहीं
उनके खुसबू और साए में जिन्दगी गुजर जाये तो खता नहीं
आग का दरिया उनका इश्क हमे तो पार तक जाना है
मल्लिका ए हुस्न तुम साथ तो जन्नत किसे जाना है ?
उनकी अदा पे मरते हो फिर क्यों शिकवा करते हो
वोह जहर भी पिला दें अपनी आंखों से कोई बात नहीं
उनके खुसबू और साए में जिन्दगी गुजर जाये तो खता नहीं
आग का दरिया उनका इश्क हमे तो पार तक जाना है
मल्लिका ए हुस्न तुम साथ तो जन्नत किसे जाना है ?
खुशियाँ और गम
ख्वाब और ख्यालों की मलिका हम तुम्हारे गुलाम
हर ल्ह्मा हर पल हम तुम्हे याद करते हैं
खुशियाँ बाटने से बढती असूल जमाने का
गम तो अकेले ही सहने पड़ते हैं
अपनों से शिकवा की बारिश की खबर नहीं दी
बंद कमरे में गैरों के साथ क्यों आप बंद होते है
तुम्हे दिखाने को हंसते रहे हम
छिपाते दिल के आंसू और गम
जब तुम सामने तो हम बाग़ बाग़ होते है
हर रात के बाद दिन आता है
चाँद छिपता सूरज निकल जाता है
दिल के जख्म भरने को
ग़मगीन के भी उत्सव होते है
ख्वाब और ख्यालों की मलिका हम तुम्हारे गुलाम
हर ल्ह्मा हर पल हम तुम्हे याद करते हैं
हर ल्ह्मा हर पल हम तुम्हे याद करते हैं
खुशियाँ बाटने से बढती असूल जमाने का
गम तो अकेले ही सहने पड़ते हैं
अपनों से शिकवा की बारिश की खबर नहीं दी
बंद कमरे में गैरों के साथ क्यों आप बंद होते है
तुम्हे दिखाने को हंसते रहे हम
छिपाते दिल के आंसू और गम
जब तुम सामने तो हम बाग़ बाग़ होते है
हर रात के बाद दिन आता है
चाँद छिपता सूरज निकल जाता है
दिल के जख्म भरने को
ग़मगीन के भी उत्सव होते है
ख्वाब और ख्यालों की मलिका हम तुम्हारे गुलाम
हर ल्ह्मा हर पल हम तुम्हे याद करते हैं
चौराहा
चौराहे पर खडा मैं सोच रहा
किधर जाऊं मन टटोल रहा
चार राहें जहाँ आके मिलती हैं
उस चौराहे के थानेदार से मैं बोल रहा
बहुत सुंदर सजाया है चौराहे को
उसपे बैठाया चहचहाते चिडे चिडयों को
मुबारक हो थानेदार तुम्हे यह खुशहाल चौराहा
हमारा तो येही रास्ता है
रोज निकलेंगे इस चौराहे से
दिलबर का आशियाँ यहाँ से दिखता है
इतना रहम करना दिलबर के रूबरू होने पर
रोक देना उन्हें अपना रुआब दिखा कलाम सुना कर
किधर जाऊं मन टटोल रहा
चार राहें जहाँ आके मिलती हैं
उस चौराहे के थानेदार से मैं बोल रहा
बहुत सुंदर सजाया है चौराहे को
उसपे बैठाया चहचहाते चिडे चिडयों को
मुबारक हो थानेदार तुम्हे यह खुशहाल चौराहा
हमारा तो येही रास्ता है
रोज निकलेंगे इस चौराहे से
दिलबर का आशियाँ यहाँ से दिखता है
इतना रहम करना दिलबर के रूबरू होने पर
रोक देना उन्हें अपना रुआब दिखा कलाम सुना कर
Sunday, August 3, 2008
विश्व दोस्त दिवस .................
पूरा विश्व आज दोस्त दिवस मना रहा है
आज हमें भी हमारा दोस्त याद आ रहा है.
आज देख रहे हैं दोस्ती भरे तराने को
मेरे दोस्त आ आज ताजा करें अपने अफसाने को
हम तो हैं तैयार तुम्हारे हमदम बन जाने को
अरमान हमारा एक, दिल को दिल से मिलने और मुस्कुराने को
हाथ में हाथ डाल हम चाँद पर जायेंगे
परियां स्वागत करेंगी गन्धर्व गीत गायेंगे
जब दिल से दिल; मिल जायेंगे नया उजाला आएगा
दुनिया देखेगी हमारी दोस्ती और दुश्मन घबराएगा
कसमे हमारी दोस्ती की हर आशिक खायेगा
कृष्ण सुदामा को भूल हम से दिल लगायेगा
आज हमें भी हमारा दोस्त याद आ रहा है.
आज देख रहे हैं दोस्ती भरे तराने को
मेरे दोस्त आ आज ताजा करें अपने अफसाने को
हम तो हैं तैयार तुम्हारे हमदम बन जाने को
अरमान हमारा एक, दिल को दिल से मिलने और मुस्कुराने को
हाथ में हाथ डाल हम चाँद पर जायेंगे
परियां स्वागत करेंगी गन्धर्व गीत गायेंगे
जब दिल से दिल; मिल जायेंगे नया उजाला आएगा
दुनिया देखेगी हमारी दोस्ती और दुश्मन घबराएगा
कसमे हमारी दोस्ती की हर आशिक खायेगा
कृष्ण सुदामा को भूल हम से दिल लगायेगा
Sunday, July 20, 2008
मौला.............
मौला बोला बचाले मुझे
इस मतलबी दुनिया से उठाले मुझे
तुने कायनात बनायीं थी
खुबसुरत बगिया लगायी थी
आदम और हौवा बनाये थे
पीर पैगम्बर भिजाये थे
नेकी पर चलना सिखाया था
जकात रहम इबादत पे चलना सिखाया था
आज खुदा की खुदाई हैवान हो गयी
इंसानियत लालच में नीलाम होगई
इंसान खुद खुदा बन गया
उपर वाले पे से भरोसा उठ गया
अल्लाह की दर इराक टूट गया
अमरीका परस्ती में पाक नापाक हो गया
इंसानियत का हस्र इतना की दिल भर गया
मोला भी शायद अटम से डर गया
जमी को जन्नत बनाने का ख्वाब धूल में मिल गया
मौला तू ही संभालेगा
इस कायनात को शैतानो के कब्जे से निकलेगा
या खुद भी जायेगा और हमें भी बुला लेगा
इस मतलबी दुनिया से उठाले मुझे
तुने कायनात बनायीं थी
खुबसुरत बगिया लगायी थी
आदम और हौवा बनाये थे
पीर पैगम्बर भिजाये थे
नेकी पर चलना सिखाया था
जकात रहम इबादत पे चलना सिखाया था
आज खुदा की खुदाई हैवान हो गयी
इंसानियत लालच में नीलाम होगई
इंसान खुद खुदा बन गया
उपर वाले पे से भरोसा उठ गया
अल्लाह की दर इराक टूट गया
अमरीका परस्ती में पाक नापाक हो गया
इंसानियत का हस्र इतना की दिल भर गया
मोला भी शायद अटम से डर गया
जमी को जन्नत बनाने का ख्वाब धूल में मिल गया
मौला तू ही संभालेगा
इस कायनात को शैतानो के कब्जे से निकलेगा
या खुद भी जायेगा और हमें भी बुला लेगा
Saturday, July 19, 2008
चुनाव का बकरा...............
देखो फिर ईद आ गयी
बकरे की मुसीबत आ गयी
अरे नहीं बकरे की तो किस्मत संवर गयी
सौदागर ने फरमान किया
ईद मनाने का ऐलान किया
खरीदी का दाम दिया
कल तक जो बकरा मण्डी के ख्वाब थे देखते
आज हम उन्हें मण्डी के तिजारती देखते
काश्मीर से कन्याकुमारी
मुंबई से बंगाल की खाडी
हर बकरे का अलग निसान है
उसके मालिक की अलग दुकान है
कुछ बकरे खुले घूम रहे है
चुंगी वाले जाल डाल उन्हें ताक रहे हैं
कुछ बकरे मिमिया रहे हैं
मंत्री बनाओ चिल्ला रहे हैं
कुछ लाल कुछ हरे नीले, कुछ केसरिया बाड़े में घुस चुके है
कुछ हाथ के इशारे पे, सजे संवरे खड़े हैं
तीन दिन है बाकी सौदागर को ईद मनाने को
बकरों की तो मौज होगई, ईद को चला जाने दो
यारों ईद के बाद क्याहोगा ?
सौदागर तो खुश, देश का सत्यानास होगा
हाथ जीत गया तो भी हारेगा
लाल का कया बिगडेगा वोह तो चीन पधारेगा
हाँ- कुछ बकरे मोटे हो जायेंगे
कुछ मंत्री कुछ संत्री बन जायेंगे
इसी लिए कहता हूँ ईद आ गयी .........
बकरों की तो मौज आगयी
बकरे की मुसीबत आ गयी
अरे नहीं बकरे की तो किस्मत संवर गयी
सौदागर ने फरमान किया
ईद मनाने का ऐलान किया
खरीदी का दाम दिया
कल तक जो बकरा मण्डी के ख्वाब थे देखते
आज हम उन्हें मण्डी के तिजारती देखते
काश्मीर से कन्याकुमारी
मुंबई से बंगाल की खाडी
हर बकरे का अलग निसान है
उसके मालिक की अलग दुकान है
कुछ बकरे खुले घूम रहे है
चुंगी वाले जाल डाल उन्हें ताक रहे हैं
कुछ बकरे मिमिया रहे हैं
मंत्री बनाओ चिल्ला रहे हैं
कुछ लाल कुछ हरे नीले, कुछ केसरिया बाड़े में घुस चुके है
कुछ हाथ के इशारे पे, सजे संवरे खड़े हैं
तीन दिन है बाकी सौदागर को ईद मनाने को
बकरों की तो मौज होगई, ईद को चला जाने दो
यारों ईद के बाद क्याहोगा ?
सौदागर तो खुश, देश का सत्यानास होगा
हाथ जीत गया तो भी हारेगा
लाल का कया बिगडेगा वोह तो चीन पधारेगा
हाँ- कुछ बकरे मोटे हो जायेंगे
कुछ मंत्री कुछ संत्री बन जायेंगे
इसी लिए कहता हूँ ईद आ गयी .........
बकरों की तो मौज आगयी
माशूक और बीबी में फर्क
वो भी दिन थे की हमीं आयें हरेक बात में याद
आज हर बात में कह्ते हैं की हम भूल गए
बड़े भोले है, बड़े ढूध के धोये हैं आज
पी के जब प्यार में बहके थे कदम भूल गए
हमसे कांटे भी निकलवाये थे तलवों से कभी
आ के मंजिल पे सभी राह के ग़म भूल गए
अब तो कह्ते हो की भाते ही नही हमको "गुलाब"
आपके दिल् को कभी था ये वहम भूल गए
कल तक हम तुम्हारे आशिक थे आज खाविंद होते है
कल तक पसीना था गुलाब आज रोटी कपडा और मकान को रोते हैं
तुम आज भी दिल के पास हो दुनियादारी में फंसे तुम्हे खोते हैं
ड़र से तुम्हारे जानबूझ कर अनजान बन भूलना कबूल लेते हैं
हमारी वफादारी की कसम हर आशिक खाता है
अहद निभाने को इश्क अंजाम तक लाने को दूध नहीं
गंगाजल से धुले रोज तुम्हारी आंखों में खोते है
हम अकेले गुनहगार नहीं इस खुशनुमा अंजाम के
उस वक्त कदम दोनो के बहके थे नतीजे में संग होते हैं
याद है हमें तलवा और कांटे
जो लगे थे तुम्हे रिझाने को फूल लाते
याद है तुम्हारा उन फूलों का कबूल करना
और हमारे दर्द को सहलाना और सिसकना
कसम तुम्हारी याद है की
तुम्हे फूलों से नही हम से प्यार है
तुम गुलाब, हम कांटे, इश्क हवा हुआ,
आओ मिल दुनिया के दर्द बांटे
सात जन्मो के साथ की कसम को पूरी करने के खातिर
बनाया है नया आशियाना "हुजुर" तुम्हारे खातिर
कल तक हम तुम्हारे आशिक थे आज खाविंद होते है
कल तक पसीना था गुलाब आज रोटी कपडा और मकान को रोते हैं
लोग कहते हैं वो मुझसे मुझ्तालिफ सा है
मगर वोह जानते नहीं
मैं उस से रूठ जाऊं तोह..
वोह मुझसे रूठ जाता है ..
गलत ख्याल दिल को दुखा देता है
खोफ्नाक सपना नींद उडा देता है
तुम रूठी तो मनाने को कया कोई ताऊ आते है
फिल्म दिखाते, चाट खिलाते हम ही तो मनाते हैं
अगर वोह पूछ लें हम से की तुम्हे
किस बात का गम हे?
तो फीर................
किस बात का गम हें? ॥
गम था तो बस एक ही गम था
जहाँ किस्ती डूबी वहां पानी बहुत कम था ।
जो आँखों की जबान नहीं पढ़ते
उन्हें इश्क का हक नही ।
जो बातबात पर रुठते हैं उन्हें ,
हमारे दिल टूटने का इल्म नही ॥
वो मुझे याद तोः करता है मगर यूँही जैसे
घर का दरवाज़ा किसी रात खुला रह जाए॥
हमारे घर के दरवाजे तो कभी के उखड गए
तुम कब आओगी सोच सोच अरमान भड़क गए
आओगी तुम तो सितारों की छाँव होगी
चाँद रास्ता दिखायेगा गली सुनसान होगी
चौखट पर हम खड़े होंगे पलकों में छिपाने को
नज़रे उतार ले बलियां लोगो की नजरों से छिपाने को
आज हर बात में कह्ते हैं की हम भूल गए
बड़े भोले है, बड़े ढूध के धोये हैं आज
पी के जब प्यार में बहके थे कदम भूल गए
हमसे कांटे भी निकलवाये थे तलवों से कभी
आ के मंजिल पे सभी राह के ग़म भूल गए
अब तो कह्ते हो की भाते ही नही हमको "गुलाब"
आपके दिल् को कभी था ये वहम भूल गए
कल तक हम तुम्हारे आशिक थे आज खाविंद होते है
कल तक पसीना था गुलाब आज रोटी कपडा और मकान को रोते हैं
तुम आज भी दिल के पास हो दुनियादारी में फंसे तुम्हे खोते हैं
ड़र से तुम्हारे जानबूझ कर अनजान बन भूलना कबूल लेते हैं
हमारी वफादारी की कसम हर आशिक खाता है
अहद निभाने को इश्क अंजाम तक लाने को दूध नहीं
गंगाजल से धुले रोज तुम्हारी आंखों में खोते है
हम अकेले गुनहगार नहीं इस खुशनुमा अंजाम के
उस वक्त कदम दोनो के बहके थे नतीजे में संग होते हैं
याद है हमें तलवा और कांटे
जो लगे थे तुम्हे रिझाने को फूल लाते
याद है तुम्हारा उन फूलों का कबूल करना
और हमारे दर्द को सहलाना और सिसकना
कसम तुम्हारी याद है की
तुम्हे फूलों से नही हम से प्यार है
तुम गुलाब, हम कांटे, इश्क हवा हुआ,
आओ मिल दुनिया के दर्द बांटे
सात जन्मो के साथ की कसम को पूरी करने के खातिर
बनाया है नया आशियाना "हुजुर" तुम्हारे खातिर
कल तक हम तुम्हारे आशिक थे आज खाविंद होते है
कल तक पसीना था गुलाब आज रोटी कपडा और मकान को रोते हैं
लोग कहते हैं वो मुझसे मुझ्तालिफ सा है
मगर वोह जानते नहीं
मैं उस से रूठ जाऊं तोह..
वोह मुझसे रूठ जाता है ..
गलत ख्याल दिल को दुखा देता है
खोफ्नाक सपना नींद उडा देता है
तुम रूठी तो मनाने को कया कोई ताऊ आते है
फिल्म दिखाते, चाट खिलाते हम ही तो मनाते हैं
अगर वोह पूछ लें हम से की तुम्हे
किस बात का गम हे?
तो फीर................
किस बात का गम हें? ॥
गम था तो बस एक ही गम था
जहाँ किस्ती डूबी वहां पानी बहुत कम था ।
जो आँखों की जबान नहीं पढ़ते
उन्हें इश्क का हक नही ।
जो बातबात पर रुठते हैं उन्हें ,
हमारे दिल टूटने का इल्म नही ॥
वो मुझे याद तोः करता है मगर यूँही जैसे
घर का दरवाज़ा किसी रात खुला रह जाए॥
हमारे घर के दरवाजे तो कभी के उखड गए
तुम कब आओगी सोच सोच अरमान भड़क गए
आओगी तुम तो सितारों की छाँव होगी
चाँद रास्ता दिखायेगा गली सुनसान होगी
चौखट पर हम खड़े होंगे पलकों में छिपाने को
नज़रे उतार ले बलियां लोगो की नजरों से छिपाने को
Sunday, July 13, 2008
देश का हाल
पंच बुला कर करो फ़ैसला
भाई और साले में
दांये बाएं में हो गयी जंग
बीती रात शिवाले में
प्यास लगी नींद भगी
कमल घूम रहा ख्यालों में
भोले बोले पंच बुलाओ
जनता तो गयी हिमाले पे
गलती किसकी इच्छा उसकी
भंग चढ़ गयी माथे पे
हर घर का हाल यही है
पंच गये दिवाले में
बुश को मानने सरकार हिली
वाम रूठा खडा विराने में
टुकुर टुकुर देख रहे घरवाले
आज इस ज़माने में
घर की आग में हाथ सेक रहे
ऐरे गेरे नथू खेरे बैठे मैखाने में
बेडा गर्क हो रहा देश का
फ़िक्र किसे करो फैसला चो्डे चोक उजाले में
भाई और साले में
दांये बाएं में हो गयी जंग
बीती रात शिवाले में
प्यास लगी नींद भगी
कमल घूम रहा ख्यालों में
भोले बोले पंच बुलाओ
जनता तो गयी हिमाले पे
गलती किसकी इच्छा उसकी
भंग चढ़ गयी माथे पे
हर घर का हाल यही है
पंच गये दिवाले में
बुश को मानने सरकार हिली
वाम रूठा खडा विराने में
टुकुर टुकुर देख रहे घरवाले
आज इस ज़माने में
घर की आग में हाथ सेक रहे
ऐरे गेरे नथू खेरे बैठे मैखाने में
बेडा गर्क हो रहा देश का
फ़िक्र किसे करो फैसला चो्डे चोक उजाले में
छोरा गंगा किनारे वाला
बांकी चितवन आँखे नशे का प्याला
सुप्रभात बोल चहक रहा
मीठी वाणी बोल रहा
दिल के अन्दर डोल रहा
जनबल धनबल बहुबल तोल रहा
लोकतंत्र की बातें बोल रहा
सूरज की तरह प्रखर
भविष्य उसका उज्जवल
पहली किरण की तरह निर्मल
ऐसे दोस्त को आदाब नमस्ते और सलाम
आज रविवार करो आराम
सुप्रभात बोल चहक रहा
मीठी वाणी बोल रहा
दिल के अन्दर डोल रहा
जनबल धनबल बहुबल तोल रहा
लोकतंत्र की बातें बोल रहा
सूरज की तरह प्रखर
भविष्य उसका उज्जवल
पहली किरण की तरह निर्मल
ऐसे दोस्त को आदाब नमस्ते और सलाम
आज रविवार करो आराम
मजनू, फरहाद महिवाल
बेपरवाही से जीने का मजा कुछ और ही आता है
आँख बंद कर प्यार करने को ही इश्क कहा जाता है
जलने वालों ने बख्शा नहीं मजनू फरहाद महिवाल को
फन्हा होने तक मजबूर किया इश्क के दिवानो को
परवाह अगर करते तो मिसाल ए इश्क कहाँ बनते
आज तुम हम है और हम भी परवाह नहीं करते
कल रात तो सितम की रात थी
तुम उधर सोच में डूबे थे तो इधर भी येही बात थी
याद करते तुम्हारी और जालिम ज़माने को कोसते थे
कसम खुद ए इश्क की हम भी येही सोचते थे
तुम जब सामने आओगे तो क़यामत आ जायेगी
सब्र का बांध टूट जायेगा और गुस्से की बाढ़ आजायेगी
लेकिन कसूर तुम्हारा नहीं इस ज़माने का है
लगे हज़ार पहरे फिर भी जिगरा तुम्हरा जो आने का है
इस्तकबाल तुम्हारा करेंगे गुलदस्ता हाथ में होगा
तामिल रात का सोच, हंसी चेहरे पे, तुम्हारे हाथ में हाथ होगा
रात कैसे गुजरे तुम बताओ कम स कम इश्क का आगाज होगा
भूल जायेंगे ज़माने वाले, मजनू, फरहाद महिवाल को, कल हमारा होगा
आँख बंद कर प्यार करने को ही इश्क कहा जाता है
जलने वालों ने बख्शा नहीं मजनू फरहाद महिवाल को
फन्हा होने तक मजबूर किया इश्क के दिवानो को
परवाह अगर करते तो मिसाल ए इश्क कहाँ बनते
आज तुम हम है और हम भी परवाह नहीं करते
कल रात तो सितम की रात थी
तुम उधर सोच में डूबे थे तो इधर भी येही बात थी
याद करते तुम्हारी और जालिम ज़माने को कोसते थे
कसम खुद ए इश्क की हम भी येही सोचते थे
तुम जब सामने आओगे तो क़यामत आ जायेगी
सब्र का बांध टूट जायेगा और गुस्से की बाढ़ आजायेगी
लेकिन कसूर तुम्हारा नहीं इस ज़माने का है
लगे हज़ार पहरे फिर भी जिगरा तुम्हरा जो आने का है
इस्तकबाल तुम्हारा करेंगे गुलदस्ता हाथ में होगा
तामिल रात का सोच, हंसी चेहरे पे, तुम्हारे हाथ में हाथ होगा
रात कैसे गुजरे तुम बताओ कम स कम इश्क का आगाज होगा
भूल जायेंगे ज़माने वाले, मजनू, फरहाद महिवाल को, कल हमारा होगा
Tuesday, July 8, 2008
समय की पुकार
समय की पुकार आज की दरकार
जाग दोस्त सुन भारत माता की पुकार
जो दंगा करते हैं
जो नर संहार करते है
जो जातिवाद की नफरत की आग में देश को में झोंकते
राम- रहीम -इसा - गुरु -गाँधी -बाबा की बात करते है
इन आस्तीन के सांपो से
सावधान ख़बरदार होशियार
मेरे देश वासिओं कसलो कमर,
होजाओ त्यार
इन पापिओं को सबक सिखाना होगा
हर हथियार काम में ला इन्हें उडाना होगा
देर बहुत हो जायेगी
मानवता कराहयेगी
जब देश ही ना रहा
तो नींद कहाँ से आएगी
आज की ताजा ख़बर ...............
कश्मीर जल रहा है
काबूल आतंकियों से थर्रा रहा है
गुलाम इस्तीफ़ा दे दिल्ली चल रहा है
मनमोहन टोकियो में बुश से चोंचे लड़ा रहा है
वाम हका बका मुलायम अवसर ताक रहा है
महंगाई का नाग डस रहा किसान जहर खा रहा है
भारतमाँ का मुकट खतरे में है केन्द्र थर्रा रहा है
समय की पुकारआज की दरकार
जाग दोस्त सुन भारत माता की पुकार
जाग दोस्त सुन भारत माता की पुकार
जो दंगा करते हैं
जो नर संहार करते है
जो जातिवाद की नफरत की आग में देश को में झोंकते
राम- रहीम -इसा - गुरु -गाँधी -बाबा की बात करते है
इन आस्तीन के सांपो से
सावधान ख़बरदार होशियार
मेरे देश वासिओं कसलो कमर,
होजाओ त्यार
इन पापिओं को सबक सिखाना होगा
हर हथियार काम में ला इन्हें उडाना होगा
देर बहुत हो जायेगी
मानवता कराहयेगी
जब देश ही ना रहा
तो नींद कहाँ से आएगी
आज की ताजा ख़बर ...............
कश्मीर जल रहा है
काबूल आतंकियों से थर्रा रहा है
गुलाम इस्तीफ़ा दे दिल्ली चल रहा है
मनमोहन टोकियो में बुश से चोंचे लड़ा रहा है
वाम हका बका मुलायम अवसर ताक रहा है
महंगाई का नाग डस रहा किसान जहर खा रहा है
भारतमाँ का मुकट खतरे में है केन्द्र थर्रा रहा है
समय की पुकारआज की दरकार
जाग दोस्त सुन भारत माता की पुकार
हिंद के नौजवान हिंद की पहचान
ऐ हिंद के युवा तू आगे बढ़ लगाम थाम ले
तू हिंद कि पहचान है तू हिंद को पहचान दे
आयें लाखों दिक्कते पर तेरा कदम ना डिगे
शोषण किसीका होता देख तेरा खूं खौल उठे
तू बेफिक्र आगे बढ़ मुश्किलें कितनी ही आयेंगी
मन मे हो उमंग जिसके जीत उसको ही पायेगी
ऐ हिंद के युवा तू आगे बढ़ लगाम थाम ले
तू हिंद कि पहचान है तू हिंद को पहचान दे
देश का प्रहरी तू देश का मान है तू
देश का भविष्य तू देश का अरमान तू
जाग देख तेरे देश को दुश्मन ललकार रहा है
उठ थाम ले हथियार आतंक सीमा लाँघ रहा है
राम कृष्ण गौतम गाँधी की संतान है तू
राम रहीम नानक और जीसस का आशीर्वाद है तू
हिंद के नौजवान कर तू विजय का प्रयाण
समुद्र की गहराई आसमा की ऊँचाई हो तेरा अरमान
तू हिंद कि पहचान है तू हिंद को पहचान दे
आयें लाखों दिक्कते पर तेरा कदम ना डिगे
शोषण किसीका होता देख तेरा खूं खौल उठे
तू बेफिक्र आगे बढ़ मुश्किलें कितनी ही आयेंगी
मन मे हो उमंग जिसके जीत उसको ही पायेगी
ऐ हिंद के युवा तू आगे बढ़ लगाम थाम ले
तू हिंद कि पहचान है तू हिंद को पहचान दे
देश का प्रहरी तू देश का मान है तू
देश का भविष्य तू देश का अरमान तू
जाग देख तेरे देश को दुश्मन ललकार रहा है
उठ थाम ले हथियार आतंक सीमा लाँघ रहा है
राम कृष्ण गौतम गाँधी की संतान है तू
राम रहीम नानक और जीसस का आशीर्वाद है तू
हिंद के नौजवान कर तू विजय का प्रयाण
समुद्र की गहराई आसमा की ऊँचाई हो तेरा अरमान
Thursday, July 3, 2008
अमरनाथ.....................
बर्फानी बाबा देख तेरी धरा पर कया हो रहा है ।
आज तो तेरे दर्शन का भी टोटा हो रहा है ॥
तेरा नाम लेके सवाली करते हैं तेरे धाम की यात्रा ।
तेरा नाम रटते हमारी पूरी होती है जीवन यात्रा ॥
काश्मीर का भविष्य है तेरी यात्रा ।
लाखों जिन्दगी का पालन करती है ये यात्रा ॥
सदिओं से आते हैं सवाली तेरे दर पे मत्था टेकने ।
अमरता का वरदान पाने आत्मा शीतल करने ॥
गरीबों को झोंक दिया आतंक की आग में ।
यात्रा को भी सवाली बना दिया सियास्तबाज ने ॥
अरबों रुपया पाते है काश्मीरी तेरे नाम पे ।
फिर भी दिखाते हैं दादागिरी धर्म के नाम पे ॥
भोले बाबा , क्या तू भी विदेशी होने जा रहा है ?
या तेरा कहर इन पर टूटने जा रहा है ॥
पुकारते हैं हम सिरफिरों को बुद्धि प्रदान कर ।
अपने भक्तों का मार्ग खोल, दर्शन दे, मुरादे पूरी कर ॥
काश्मीर की आग पुरे देश में फैलने जा रही है ।
'गुलाम'सरकार बचे या ना बचे जनता पिसने जा रही है ॥
जागो देश वासियो इस षड्यंत्र को पहिचानो ।
३७० अभिशाप असर ला रहा है देखो और जानो ॥
बालटाल के ४० हेक्टर ने आज सवाल उठाया है ।
सैकडो हजघर और हाजी सेवा खर्च पर आज फिर ध्यान आया है ॥
भारतवासियों ........सोचो जानो पहिचानो............
विदेशी षड्यंत्र से सावधान हो, मेरी राय मानो
मुफ्ती फारुख और पाकिस्तानी हुकुमरानों ।
काश्मीरी हो, देश के सिरमौर बर्फानी के कहर को मानो ॥
मत जलाओ काश्मीर को तुम भी नहीं बच पाओगे ।
भूल गए कबायली हमला, जो तुम कुछ,पाकिस्तान जा के, पाओगे
बर्फानी बाबा उठ जाग तेरा देश जल रहा है ।
खोल समाधि देख, सवाली, तेरे दर पे आने से डर रहा है ॥
देशवासिओं, सुनो बाबा की हुँकार ।
कमर कसो, आतंकियों से मुकाबिले को, हो जाओ तयार ॥
गुलाम- मुफ्ती -फारुख- की चलने देंगे नही ।
बर्फानी की इज्ज़त कम होने देंगे नही ॥
यात्रा करेंगे भोले को याद करते जायेंगे ।
इंट का जवाब पत्थर से देंगे शहीद हो जायेंगे ॥
आज तो तेरे दर्शन का भी टोटा हो रहा है ॥
तेरा नाम लेके सवाली करते हैं तेरे धाम की यात्रा ।
तेरा नाम रटते हमारी पूरी होती है जीवन यात्रा ॥
काश्मीर का भविष्य है तेरी यात्रा ।
लाखों जिन्दगी का पालन करती है ये यात्रा ॥
सदिओं से आते हैं सवाली तेरे दर पे मत्था टेकने ।
अमरता का वरदान पाने आत्मा शीतल करने ॥
गरीबों को झोंक दिया आतंक की आग में ।
यात्रा को भी सवाली बना दिया सियास्तबाज ने ॥
अरबों रुपया पाते है काश्मीरी तेरे नाम पे ।
फिर भी दिखाते हैं दादागिरी धर्म के नाम पे ॥
भोले बाबा , क्या तू भी विदेशी होने जा रहा है ?
या तेरा कहर इन पर टूटने जा रहा है ॥
पुकारते हैं हम सिरफिरों को बुद्धि प्रदान कर ।
अपने भक्तों का मार्ग खोल, दर्शन दे, मुरादे पूरी कर ॥
काश्मीर की आग पुरे देश में फैलने जा रही है ।
'गुलाम'सरकार बचे या ना बचे जनता पिसने जा रही है ॥
जागो देश वासियो इस षड्यंत्र को पहिचानो ।
३७० अभिशाप असर ला रहा है देखो और जानो ॥
बालटाल के ४० हेक्टर ने आज सवाल उठाया है ।
सैकडो हजघर और हाजी सेवा खर्च पर आज फिर ध्यान आया है ॥
भारतवासियों ........सोचो जानो पहिचानो............
विदेशी षड्यंत्र से सावधान हो, मेरी राय मानो
मुफ्ती फारुख और पाकिस्तानी हुकुमरानों ।
काश्मीरी हो, देश के सिरमौर बर्फानी के कहर को मानो ॥
मत जलाओ काश्मीर को तुम भी नहीं बच पाओगे ।
भूल गए कबायली हमला, जो तुम कुछ,पाकिस्तान जा के, पाओगे
बर्फानी बाबा उठ जाग तेरा देश जल रहा है ।
खोल समाधि देख, सवाली, तेरे दर पे आने से डर रहा है ॥
देशवासिओं, सुनो बाबा की हुँकार ।
कमर कसो, आतंकियों से मुकाबिले को, हो जाओ तयार ॥
गुलाम- मुफ्ती -फारुख- की चलने देंगे नही ।
बर्फानी की इज्ज़त कम होने देंगे नही ॥
यात्रा करेंगे भोले को याद करते जायेंगे ।
इंट का जवाब पत्थर से देंगे शहीद हो जायेंगे ॥
Monday, June 23, 2008
बेवफा के ख़त का जवाब
मैंने एक ख़त लिखा था तुम्हे परेशानी में
कौन जाने की तुम्हे याद भी है की नहीं
मैंने लिखा था जरूरत है सहारे की मुझे
वोह सहारा जो तुम दो तोह इन्य्यात होगी
मैंने लिखा था मेरा कोई नहीं दुनिया में
मैं गई थी आकाश में बादल तनहा
जैसे बसती में किस्सी मोड़ पे पीपल तनहा
जैसे मुरझाया हुआ कमळ कोई पानी में
मैंने लिखा था ये तुझे मालूम न था
"मैं तुम्हे रूह की जागीर नहीं लिख सकती
ख़त तोः लिख सकता हूँ तकदीर नहीं लिख सकती
भूल जाना की खता होगी नादानी में
में एक ख़त लिखा था तुम्हे परेशानी में
कौन जाने की तुम्हे याद भी है या की नहीं
तुमने तो दसिओं ख़त लीखे ते इजहार ए प्यार को
कोन से ख़त को सुना रहे हो अपने दिल दार को
आज भी हमारी रात वोही ख़त पढ़ पढ़ गुजरती है
पढ़ते हैं ख़त और तस्वीर तुम्हारी सामने पसरती है
तुम्हारी परेशानी का सबब फरेबी है
वफादारी तुम से दूर पास लालच और बेसब्री है
इस लिए तुम कहानी सुनाते हो
जब दुसरे की बाँहों में जगह नहीं मिली
तो अपने खतों का वास्ता बताते हो
हम ने तभी तुम्हे आगाह किया था
चिडीया सोने का पिंजरा और सयाद को याद किया था
आज भी कुछ बिगडा नहीं
हम बदले नहीं तुम वापस वहीँ
तुम हसीं हम जवान वल्लाह कया बात है
ख़त मत लिखो चले आओ आज पूनम की रात है
तकदीर की बात करो मत आगाज ए तकदीर हैं हम तुम्हारे
सात जन्म तक का वादा रहा हम ही हैं पीर पैगम्बर तुम्हारे
क्या मिला जीन्दगी में ?
मिटता नहीं दिल का अँधेरा कभी उजालो से.......
बदलती नहीं दुनिया कभी ख्यालों से.......
क्या मिला है तुमको इस जिन्दगी से,
पूछना कभी अपने उलझे हुये सवालों से
चाँद जैसे तुम दिल में,
तो अँधेरा कहाँ ख्यालों में
इबादत तो जमी पे खुदा
पूछते हो ..............
क्या मिला है हमको इस जिन्दगी से,
पूछना कभी उलझे हुये सवालों से.......
सोचा और जवाब आया................
हम किस लायक, औकात से ज्यादा दिए रब,
हम नाशुक्रे, एहशान फरामोश, उसे ही भूल गए
सब कुछ दिया दुनिया बनाने वाले ने सब को
लालच और हवस में उसके
कारनामे बेमाने हो गए
बदलती नहीं दुनिया कभी ख्यालों से.......
क्या मिला है तुमको इस जिन्दगी से,
पूछना कभी अपने उलझे हुये सवालों से
चाँद जैसे तुम दिल में,
तो अँधेरा कहाँ ख्यालों में
इबादत तो जमी पे खुदा
पूछते हो ..............
क्या मिला है हमको इस जिन्दगी से,
पूछना कभी उलझे हुये सवालों से.......
सोचा और जवाब आया................
हम किस लायक, औकात से ज्यादा दिए रब,
हम नाशुक्रे, एहशान फरामोश, उसे ही भूल गए
सब कुछ दिया दुनिया बनाने वाले ने सब को
लालच और हवस में उसके
कारनामे बेमाने हो गए
राधा श्याम
कान्हा तेरे रंग भरे नैन रसीले
पिताम्बर छटा शोभित कजरारे नयन कटीले॥
मैं बावरी डोर फिरत इत् उत ज्यों विरहिन चोट चुटीले
ब्रज में मच गयी धूम तेरे सैनं बाण नुकीले
भौहं कमान तान कस राधाज्यु के मारी ।
घायल कर डारी ब्रिजनारी नयन चले तेरे छैल छबीले
"सखी" फँसी लख राधावल्लभ बाँकी चितवन
करो रास कुञ्ज वनन में धर ललित रूप गरबीले
श्याम पत राखो "सखी" की ।
द्रोपदी की राखी जैसे मद्ध कौरवं हटीले ॥
॥ राधे राधे ॥
पिताम्बर छटा शोभित कजरारे नयन कटीले॥
मैं बावरी डोर फिरत इत् उत ज्यों विरहिन चोट चुटीले
ब्रज में मच गयी धूम तेरे सैनं बाण नुकीले
भौहं कमान तान कस राधाज्यु के मारी ।
घायल कर डारी ब्रिजनारी नयन चले तेरे छैल छबीले
"सखी" फँसी लख राधावल्लभ बाँकी चितवन
करो रास कुञ्ज वनन में धर ललित रूप गरबीले
श्याम पत राखो "सखी" की ।
द्रोपदी की राखी जैसे मद्ध कौरवं हटीले ॥
॥ राधे राधे ॥
Saturday, June 21, 2008
पत्नी महिमा
नमो -नमो पत्नी महारानी ,
तुम्हारी महिमा कोई न जानी ।।
हमने समझा तुम अबला हो,
पर तुमतो सबसे बड़ी बला हो।।
हे देवी तुम पुरी मैं अधुरा तुम तो वंशपुर्णा हो
तुम्ही रात तुम्ही दिन तुम्ही अन्नपुर्णा हो ॥
डोली में बैठ तुम अर्धांगिनी आई थी
जैसे बला रेशम में लिपट दिल पे छाई थी ॥
जबसे तुम मेरे घर आई हो
दोस्त छूटे भाई फूटे तुम भी बनी हरजाई हो ॥
जिस दिन हाथ में बेलन आवे
उस दिन पत्नी खुब चिल्लावे ॥
सारे बेड पे पत्नी सोवे ,
पति बैठ फर्श पर रोवे ।।
जय जय पत्नी गाथा
बाप ने पढ़ी बेटा गाता ॥
कभी पति को मोका आता
चरण दबाने का पुन्य भी मिल जाता ॥
पति थका जब घर जब आता
देख तुम्हे कमल सा खिल जाता ॥
फिर जब तुम शुरू हो जाती
आस पड़ोस सास ननद सब सुनाती ॥
पहली तारीख हर महीने आवे
पति की पूजा पत्नी कर जावे ॥
वेतन पे अधिकार तुम्हारा
पुरे माह पति भिकारी और बेचारा ॥
उसके सास ससुर की सेवा खुब करे तू
अपने सास ससुर को भूल जाये तू ॥
तुमसे ही घर मथुरा काशी ,
और तुमशे घर सत्यानाशी ।।
पत्नी महिमा जो नर गावे ,
सब सुख छोड़ परम दुःख पावे॥
हाथ जोड़ सर झुका करता मई तुम्हे नमन
कृपा करना, क्षमा करना, पालना सातों वचन ॥
फल प्राप्ति ..................
पत्नी के नाम में बड़े गुण सुनलो धर के ध्यान
जो ध्यावे घर शांती सुख पावे पुरे होत अरमान ॥
तुम्हारी महिमा कोई न जानी ।।
हमने समझा तुम अबला हो,
पर तुमतो सबसे बड़ी बला हो।।
हे देवी तुम पुरी मैं अधुरा तुम तो वंशपुर्णा हो
तुम्ही रात तुम्ही दिन तुम्ही अन्नपुर्णा हो ॥
डोली में बैठ तुम अर्धांगिनी आई थी
जैसे बला रेशम में लिपट दिल पे छाई थी ॥
जबसे तुम मेरे घर आई हो
दोस्त छूटे भाई फूटे तुम भी बनी हरजाई हो ॥
जिस दिन हाथ में बेलन आवे
उस दिन पत्नी खुब चिल्लावे ॥
सारे बेड पे पत्नी सोवे ,
पति बैठ फर्श पर रोवे ।।
जय जय पत्नी गाथा
बाप ने पढ़ी बेटा गाता ॥
कभी पति को मोका आता
चरण दबाने का पुन्य भी मिल जाता ॥
पति थका जब घर जब आता
देख तुम्हे कमल सा खिल जाता ॥
फिर जब तुम शुरू हो जाती
आस पड़ोस सास ननद सब सुनाती ॥
पहली तारीख हर महीने आवे
पति की पूजा पत्नी कर जावे ॥
वेतन पे अधिकार तुम्हारा
पुरे माह पति भिकारी और बेचारा ॥
उसके सास ससुर की सेवा खुब करे तू
अपने सास ससुर को भूल जाये तू ॥
तुमसे ही घर मथुरा काशी ,
और तुमशे घर सत्यानाशी ।।
पत्नी महिमा जो नर गावे ,
सब सुख छोड़ परम दुःख पावे॥
हाथ जोड़ सर झुका करता मई तुम्हे नमन
कृपा करना, क्षमा करना, पालना सातों वचन ॥
फल प्राप्ति ..................
पत्नी के नाम में बड़े गुण सुनलो धर के ध्यान
जो ध्यावे घर शांती सुख पावे पुरे होत अरमान ॥
Friday, June 20, 2008
बकरा
सादर वंदन - देवकीनंदन
तुमने दफ्तर का जिक्र किया
उस मोटे 'बकरे' का फ़िक्र किया
हाँ, बकरे से याद आया
शायद उसका भी खून लाल होता है
जब कटता है तो चीखता चिल्लाता भी है
कलमा सुनाने को मौलवी वहां होता है
फिर भी बकरा तो वहीँ दौखज पाता
और मौलवी 'वहां' जाता है
जिस लाल धुएँ वाले शहर की आप बात करते हैं
मैं उसका बाशिंदा हूँ .............
लाल आँखे,
लाल फितने,
लाल बच्चे,
लाल ताऊ
लाल कपडा,
लाल हथियार
और ना जाने क्या कया
लाल लाल
इस शहर में देखा है
शर्म से झुकी
लालच से भरी,
आतंक से डरी,
काम से थकी,
गौरी से लड़ी
इंतज़ार में पस्त
चिंता में ग्रस्त
प्रभु आनंद में मस्त
नशे में लस्त
आसमा से गिरते डस्ट से ग्रस्त
हवा का झोंका भी
लाल आस्मां और लाल धुएँ सा दिखता है
इसलिए मैं कहता हूँ ......
बोलने वाले मुख से सहायता करनेवाला
हाथ ज्यादा पाक होता है
Wednesday, June 18, 2008
पूनम
पूनम की रात आई कोई गीत गाने दो
तारों की बारात आई साजन को रिझाने दो
सुबह भोरों ने कलियों से प्रीत लगायी
और हमें भी आपकी खुशनुमा याद आई
यह तराना तुम्हारे दिल को छू जाने दो
दिल के जज्बात लिख डालो और नज्म बन जाने दो
अगर हमारी याद आये तो कोने में छिप आंसू ना बहाना ....
भूलीबिसरी या टूटी फूटी ही सही प्यार की आवाज आने दो
Tuesday, June 17, 2008
शुभ कामनाएँ
शुभ कामनाएँ
कल मुलाकात हुई आज बात हुई
तुम बड़े मुकद्दर वाले हो जो मिलते ही बरसात हुई ॥
हमें नसीब मिला बधाई गाने का
तुम्हे जन्मदिन मुबारक सुनाने का ॥
और तुम्हारे नाम से मिठाई खाने का
मदिर में जा के सिजदा कर सिर झुकाने का ॥
जब अरदास कर रहे थे मंदिर में, एक आवाज आई
मेरे भक्त की अरदास कबूल, उस को बता देना भाई ॥
हम आशीर्वाद देते हैं जन्मदिन पर उनको
फलेंगे फूलेंगे छुएंगे आसमा को ॥
जियेंगे १०००ओँ साल कोई सुबहा ना करना
हर साल में दिन होने ५०,००० यकीं करना ॥
हर वरस लगेंगे मेले जन्मदिन मनाने को
खुशियाँ मनाने को गीत गाने को, मिठाई खाने को ॥
जन्मदिन पर मित्तल परिवार की और से हार्दिक शुभ कामनाएँ ॥
कल मुलाकात हुई आज बात हुई
तुम बड़े मुकद्दर वाले हो जो मिलते ही बरसात हुई ॥
हमें नसीब मिला बधाई गाने का
तुम्हे जन्मदिन मुबारक सुनाने का ॥
और तुम्हारे नाम से मिठाई खाने का
मदिर में जा के सिजदा कर सिर झुकाने का ॥
जब अरदास कर रहे थे मंदिर में, एक आवाज आई
मेरे भक्त की अरदास कबूल, उस को बता देना भाई ॥
हम आशीर्वाद देते हैं जन्मदिन पर उनको
फलेंगे फूलेंगे छुएंगे आसमा को ॥
जियेंगे १०००ओँ साल कोई सुबहा ना करना
हर साल में दिन होने ५०,००० यकीं करना ॥
हर वरस लगेंगे मेले जन्मदिन मनाने को
खुशियाँ मनाने को गीत गाने को, मिठाई खाने को ॥
जन्मदिन पर मित्तल परिवार की और से हार्दिक शुभ कामनाएँ ॥
Monday, June 16, 2008
आज
आज की सुबह.............. तुम्हारे साथ ।
आज की शाम ................तुम्हारे नाम ॥
आज की खबर ..............१०० की खुद गयी कब्र ॥
आज का सवाल ............दोस्त कया है हालचाल ॥
आज का दर्द .................क्यों होगये सब नामर्द ॥
आज की आशा .............नयी राहें पूरी अकांषा ॥
आज के बच्चे ...............सिरफिरे कान के कच्चे ॥
आज का इश्क ..............सुबह बीबी शाम को मिस ॥
आज का दुश्मन ............इर्षा, लालसा और चलता मन ॥
आज की दौलत .............ज्ञान विज्ञान और अनुसंधान ॥
आज का मान ............... पैसा ताकत और अभिमान ॥
आज की शाम ................तुम्हारे नाम ॥
आज की खबर ..............१०० की खुद गयी कब्र ॥
आज का सवाल ............दोस्त कया है हालचाल ॥
आज का दर्द .................क्यों होगये सब नामर्द ॥
आज की आशा .............नयी राहें पूरी अकांषा ॥
आज के बच्चे ...............सिरफिरे कान के कच्चे ॥
आज का इश्क ..............सुबह बीबी शाम को मिस ॥
आज का दुश्मन ............इर्षा, लालसा और चलता मन ॥
आज की दौलत .............ज्ञान विज्ञान और अनुसंधान ॥
आज का मान ............... पैसा ताकत और अभिमान ॥
Saturday, June 14, 2008
भगवान से अरदास
हे परमेश्वर
अजर अमर सर्वेश्वर
तेरी कायनात सुंदर मनहर दुखहर
कलकल करती नदियाँ चहचाहते व्योमचर
सुंदर बगिया के रंग बिरंगे पुष्प मनोहर
तेरे नाम की मधुर तान से व्याप्त यह चर
तेरे हम दास कृपा के पात्र
दया कर करुणा कर प्रदान कर
दीन दुखी के काम आऊं तेरा नाम कर देश
धर्म पर जान दूँ तेरा ध्यान धर
जब तेरा आवाहन हो
मेरे लिए पुष्पक वाहन हो
यम् दूत का पलायन हो
विष्णुलोक का निर्धारण हो
वापसी का रस्ता बंद कर
भेजे भी तो यह हमारी सुन कर
हमें पुनः मानवरूप से संवार कर
मन में तेरे ज्ञान की ज्योति उजाल कर
नहीं तो कसम तुझे .....................
धरती पर भेजने की टाळ कर
अजर अमर सर्वेश्वर
तेरी कायनात सुंदर मनहर दुखहर
कलकल करती नदियाँ चहचाहते व्योमचर
सुंदर बगिया के रंग बिरंगे पुष्प मनोहर
तेरे नाम की मधुर तान से व्याप्त यह चर
तेरे हम दास कृपा के पात्र
दया कर करुणा कर प्रदान कर
दीन दुखी के काम आऊं तेरा नाम कर देश
धर्म पर जान दूँ तेरा ध्यान धर
जब तेरा आवाहन हो
मेरे लिए पुष्पक वाहन हो
यम् दूत का पलायन हो
विष्णुलोक का निर्धारण हो
वापसी का रस्ता बंद कर
भेजे भी तो यह हमारी सुन कर
हमें पुनः मानवरूप से संवार कर
मन में तेरे ज्ञान की ज्योति उजाल कर
नहीं तो कसम तुझे .....................
धरती पर भेजने की टाळ कर
गुरु वंदना
गुरु गोविन्द दोनो खडे काके लगूँ पाये
बलिहारी गुरु आपनो जो गोविन्द दीयो मिलाये
गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरु देवो महेश्वर:
गुरु साक्षात् परा ब्रह्म त्स्मये श्री गुरुओ नमः:
सात समुंद की मस्सी करूं लेखनी सब वन राय
धरती सब कागद करूं गुरु तेरो वर्णन कियो ना जाये
कबीर बैठा छत पे जोर जोर चिल्लाए
देखो गुरु आ गए कोई पांव धोवो जाये
मैं तो माटी का लोंदा मुझे मूरत दीयो बनाए
कबीरा तेरी वाणी बोले राम के नाम
किसने तुझे बोल्यो तू भज राम को नाम
...........कहे कबीरा सुन भाई साधो
मेरे गुरु तो तर गए और मुझे दे गए जपने को नाम
,,,,,,,,,,,,,
कुछ ना होते हुए भी हंसाते है दुनिया
कुछ सब कुछ होते भी दुनिया के अन्देसे से जलते है मिया
हमारी तो कुछ बात ही और है, तुम्हारे दिल मैं रहते हैं हर लह्मा
तुम्हारे दिदार को तरसते हैं बाकि तो बेकार है दुनिया
बलिहारी गुरु आपनो जो गोविन्द दीयो मिलाये
गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरु देवो महेश्वर:
गुरु साक्षात् परा ब्रह्म त्स्मये श्री गुरुओ नमः:
सात समुंद की मस्सी करूं लेखनी सब वन राय
धरती सब कागद करूं गुरु तेरो वर्णन कियो ना जाये
कबीर बैठा छत पे जोर जोर चिल्लाए
देखो गुरु आ गए कोई पांव धोवो जाये
मैं तो माटी का लोंदा मुझे मूरत दीयो बनाए
कबीरा तेरी वाणी बोले राम के नाम
किसने तुझे बोल्यो तू भज राम को नाम
...........कहे कबीरा सुन भाई साधो
मेरे गुरु तो तर गए और मुझे दे गए जपने को नाम
,,,,,,,,,,,,,
कुछ ना होते हुए भी हंसाते है दुनिया
कुछ सब कुछ होते भी दुनिया के अन्देसे से जलते है मिया
हमारी तो कुछ बात ही और है, तुम्हारे दिल मैं रहते हैं हर लह्मा
तुम्हारे दिदार को तरसते हैं बाकि तो बेकार है दुनिया
शिव महिमा
आज महाकाल की महिमा गाते हैं
उज्जैन वासी को याद कराते हैं ॥
हे मेरे साथी मेरे दोस्त मेरे भाई
क्यों भूल जाता है तू सच्चाई ॥
मौत तुम्हारी पडोसन है सावधान रहना
शिप्रा इंतजार में है छिपे रहना ॥
भस्म आरती तुम्हे पुकारती है जाते रहना
महाकाल के चरणों तक ठीक
..................... त्रिकाल द्र्स्टी से बचके रहना ॥
हमें क्या ड़र दिखाते हो महाकाल का
हमें क्या गीत सुनाते हो शिप्राघाट का ॥
हम तो महाकाल के रूप है
भस्म आरती के प्रारूप है ॥
ब्रह्म विष्णु शंकर सब एक हैं
सबके विराजमान होने के स्थान अनेक है ॥
त्रिकाल हमारे भाल पे है
बम बम हमारे गाल पे है
शिव शिव हमारे लबों पे है
ओंकार हमारे कंठ में है
मंदसोर पशुपति अगल में है
रामेश्वेर बगल में है
नीलकंठ के हम सेवक है
केदार हमारे सिर पे है
अमरनाथ हमारे रक्षक हैं
हम उनके बालक वोह हमारे पालक हैं ॥
गणपति को प्रथम सुमिरते हैं
उमा कार्तिक्य की आराधना करते है
नंदी की महिमा गाते है
भैरव की सांकल बजाते है
बजरंग के गुरुज्ञान की आमना करते है
हरदम शिवधाम की कामना करते हैं ॥
जन्म दिन भोले का हर साल आता है
पुरा विश्व जीसे जोरो से मनाता है
शिवरात्रि और सावन में भोले पर कावड चढ़ते हैं
हम शिव भक्त शंकर बूटी का सेवन करते हैं ॥
भोले ओढ़रदानी बड़े कृपालु हैं
धन दौलत राज - पूत देते बड़े दयालु है ॥
जय जय भोलेनाथ सदाशिव गंगाधर महाकाल हरे
तीन लोक धरती पर बसाय खुद मसान में वास करे ॥
हे प्यारे सुन हमारी -या तो तू दोस्ती स्वीकारे
या आ जा करने दो दो हाथ अखाडे में हमारे ॥
उज्जैन वासी को याद कराते हैं ॥
हे मेरे साथी मेरे दोस्त मेरे भाई
क्यों भूल जाता है तू सच्चाई ॥
मौत तुम्हारी पडोसन है सावधान रहना
शिप्रा इंतजार में है छिपे रहना ॥
भस्म आरती तुम्हे पुकारती है जाते रहना
महाकाल के चरणों तक ठीक
..................... त्रिकाल द्र्स्टी से बचके रहना ॥
हमें क्या ड़र दिखाते हो महाकाल का
हमें क्या गीत सुनाते हो शिप्राघाट का ॥
हम तो महाकाल के रूप है
भस्म आरती के प्रारूप है ॥
ब्रह्म विष्णु शंकर सब एक हैं
सबके विराजमान होने के स्थान अनेक है ॥
त्रिकाल हमारे भाल पे है
बम बम हमारे गाल पे है
शिव शिव हमारे लबों पे है
ओंकार हमारे कंठ में है
मंदसोर पशुपति अगल में है
रामेश्वेर बगल में है
नीलकंठ के हम सेवक है
केदार हमारे सिर पे है
अमरनाथ हमारे रक्षक हैं
हम उनके बालक वोह हमारे पालक हैं ॥
गणपति को प्रथम सुमिरते हैं
उमा कार्तिक्य की आराधना करते है
नंदी की महिमा गाते है
भैरव की सांकल बजाते है
बजरंग के गुरुज्ञान की आमना करते है
हरदम शिवधाम की कामना करते हैं ॥
जन्म दिन भोले का हर साल आता है
पुरा विश्व जीसे जोरो से मनाता है
शिवरात्रि और सावन में भोले पर कावड चढ़ते हैं
हम शिव भक्त शंकर बूटी का सेवन करते हैं ॥
भोले ओढ़रदानी बड़े कृपालु हैं
धन दौलत राज - पूत देते बड़े दयालु है ॥
जय जय भोलेनाथ सदाशिव गंगाधर महाकाल हरे
तीन लोक धरती पर बसाय खुद मसान में वास करे ॥
हे प्यारे सुन हमारी -या तो तू दोस्ती स्वीकारे
या आ जा करने दो दो हाथ अखाडे में हमारे ॥
Friday, June 13, 2008
पितृदिवस पर एक प्रण
पिताश्री इस पितृदिवस के पावन अवसर पे नमन करता हूँ
स्मरण अपना बचपन और आपका कन्धा आज भी करता हूँ॥
एक दिन दादी ने मुझे बतलाया था
कितने मंदिर तीर्थ घुमे तो मुझे पाया था॥
मेरे जन्म पर आपने पूरे गाँव में बधाई बाटी थी
खुशिओं की सौगात और मिठाई भी बाटी थी॥
मेरे स्कूल जाने पर कितनी बलैयां ले डाली थी
पास होकर आने पे कितनी शाबाशीयां दे डाली थी॥
माँ मेरी शरारतों से थक तुम्हारा इंतज़ार करती थी
तुम्हारे नाम को ले ले मुझे डराया करती थी ॥
तुम उनको सुन अनसुना करते थे
राजा बेटा अच्छा बेटा कह मुझे समझाया करते थे॥
याद आता है मेरा साइकल से गिर जाना
मेरी चोट देख जैसे तुम्हारी जान निकल जाना॥
सर्दी गर्मी धुप छाओं से मुझे बचाया करते थे
मेरे हर सवाल का जवाब हर मुश्किल सुलझाया करते थे॥
जिन्दगी के हर मोड़ पर मैं ने आपको पाया था
मेरे 'प्यार' को ठुकरा के भी फिर दोनों को अपनाया था॥
कितनी ही बार आप भी झुंझलाते थे
बाप बनुगा तो पता चलेगा कह थक जाते थे॥
आज जब मैं भी जवान बेटे का बाप बना हूँ
आपके कदम के निसानो पे खडा हूँ ॥
आपके पोते से मैं भी रूठ जाता हूँ
बेटा बाप बनोगे तो याद करोगे बोल जाता हूँ ॥
दादा जैसा बनो उन्हें स्मरण करो उसे याद दिलाता हूँ
अपने जवाब - उसके मुख से सुन शर्माता- पछताता हूँ ॥
बाप बेटे के सवाल का सो बार जवाब देता है
बेटा बाप के एक सवाल दुबारा आने पर सनकी, बुढा बोल देता है ॥
पितृपक्ष पर सुबह तर्पण करता है श्राद्ध करता ब्रह्म भोज करता है
उसही आदरणीय के अधूरे कामो से मुख मोड़ लेता है ॥
मैंने भी एक प्रण किया था इस जिन्दगी का
अच्छा बेटा बन आपके स्वप्न पूरे करने का ॥
लेकिन क्या मैं आपकी आकांक्षा पूरी कर सका हूँ
आज जिस मुकाम पर हूँ क्या आपकी ऊंचाई तक पहुँच सका हूँ ?
अगर कोई ख़ता हुई हो तो मुझे माफ़ करना
मेरा प्रण है आपकी भावना और इच्छा पूर्ण करना ॥
आज इस पितृदिवस मैं नमन करता पुष्प चढाता हूँ
आशीर्वाद की कामना और श्रद्धा का विश्वास दिलाता हूँ ॥
स्मरण अपना बचपन और आपका कन्धा आज भी करता हूँ॥
एक दिन दादी ने मुझे बतलाया था
कितने मंदिर तीर्थ घुमे तो मुझे पाया था॥
मेरे जन्म पर आपने पूरे गाँव में बधाई बाटी थी
खुशिओं की सौगात और मिठाई भी बाटी थी॥
मेरे स्कूल जाने पर कितनी बलैयां ले डाली थी
पास होकर आने पे कितनी शाबाशीयां दे डाली थी॥
माँ मेरी शरारतों से थक तुम्हारा इंतज़ार करती थी
तुम्हारे नाम को ले ले मुझे डराया करती थी ॥
तुम उनको सुन अनसुना करते थे
राजा बेटा अच्छा बेटा कह मुझे समझाया करते थे॥
याद आता है मेरा साइकल से गिर जाना
मेरी चोट देख जैसे तुम्हारी जान निकल जाना॥
सर्दी गर्मी धुप छाओं से मुझे बचाया करते थे
मेरे हर सवाल का जवाब हर मुश्किल सुलझाया करते थे॥
जिन्दगी के हर मोड़ पर मैं ने आपको पाया था
मेरे 'प्यार' को ठुकरा के भी फिर दोनों को अपनाया था॥
कितनी ही बार आप भी झुंझलाते थे
बाप बनुगा तो पता चलेगा कह थक जाते थे॥
आज जब मैं भी जवान बेटे का बाप बना हूँ
आपके कदम के निसानो पे खडा हूँ ॥
आपके पोते से मैं भी रूठ जाता हूँ
बेटा बाप बनोगे तो याद करोगे बोल जाता हूँ ॥
दादा जैसा बनो उन्हें स्मरण करो उसे याद दिलाता हूँ
अपने जवाब - उसके मुख से सुन शर्माता- पछताता हूँ ॥
बाप बेटे के सवाल का सो बार जवाब देता है
बेटा बाप के एक सवाल दुबारा आने पर सनकी, बुढा बोल देता है ॥
पितृपक्ष पर सुबह तर्पण करता है श्राद्ध करता ब्रह्म भोज करता है
उसही आदरणीय के अधूरे कामो से मुख मोड़ लेता है ॥
मैंने भी एक प्रण किया था इस जिन्दगी का
अच्छा बेटा बन आपके स्वप्न पूरे करने का ॥
लेकिन क्या मैं आपकी आकांक्षा पूरी कर सका हूँ
आज जिस मुकाम पर हूँ क्या आपकी ऊंचाई तक पहुँच सका हूँ ?
अगर कोई ख़ता हुई हो तो मुझे माफ़ करना
मेरा प्रण है आपकी भावना और इच्छा पूर्ण करना ॥
आज इस पितृदिवस मैं नमन करता पुष्प चढाता हूँ
आशीर्वाद की कामना और श्रद्धा का विश्वास दिलाता हूँ ॥
Wednesday, June 11, 2008
पिता को श्रधान्जली
बापू को नमन
पिता के रूप में राष्ट्रपिता का स्मरण करता हूँ
आजादी की सांस ले रहा हूँ नमन करता हूँ
हे युग पुरुष अगर तुम आज होते
हम एक दुसरे के कांधे पर सिर रख रो रहे होते
क्या आजादी का परचम इस लिए लहराया था
देश में काले अंग्रेजो का शासन,क्या तुमने चाहा था?
तुझे आज अफ्रीका भी नमन करता है
वंशवाद रंगभेद छोड़ वोह लोकतंत्र में विचरता है
नमन करता हूँ तेरी गोलमेज सम्मेलन की तस्वीर को
नीलों से संग्राम और जेल की तदबीर को
चौरीचौरा पे तेने अहिंषा का सन्देश दिया
तेरी हिम्मत थी जो तुने आन्दोलन वापिस लिया
हे राम के तेरे शब्द आज भी गूंजते कान में
कोन याद करता गोडसे, स्वर्ग से क्षमादान दे
सत्य अहिंषा बकरी चरखा तेरे निसान थे
पूरे देश के भ्रमण ने दिए तुझे अनुमान थे
तिलक गोखले पटेल नहरू ने तुझे सरहाया था
अंग्रेजों को तेरे असहयोग आन्दोलन ने थर्राया था
प्यारे बापू - देख तेरे चेले तुझे भूल गए
खादी भूली चरखा भुला
गाय बैल बछड़ा भूल गए
जाति नस्ल आतंक का
बवंडर छा गया है
देश कर्जदार हो गया
किसान आत्महत्या कर रहा है
हे बापू आज पितृदिवस पर हम
तुम्हे नमन करते है
हे बापुओं के बापू
तेरे आशीर्वाद की कामना रखते है
Tuesday, June 10, 2008
चल गयी ...................?
आँखें भीगी हों या मुस्कुराती हुयी
पलकें भीगी हों बंद हों खुली हों या सुखी हुयी
जागते को जगा के दिखाओ
सोते को तो कोई भी जगा सकता है
आँखों ही आंखों में इशारा
खतरनाक हो भी जाता है
पलकों के झपकने से यार्रों
पिटने का सबब भी आता है
तुम्हे सुनाते है एक वाकया -
सोचना की वहां पर क्या हुआ
एक गाँव में शोर मचा
- चल गयी
भीड़ इकट्ठी हो गयी
जांच चालू की गयी
पुलिस को सूचना गयी
गारद आ के लग गयी
अखबार वाले आ गए
केमरा विडियो चालू किया
सवाल सबपे कायम हुआ
कहाँ चली
किस पे चली
क्यों चली
किस से चली
सब इधर उधर देखने लगे
एक दूसरे से पूछने लगे
तो एक लड़की ने पीछे से कहा
सबने इत्मिनान का सांस लिया
लड़की ने कया सुनाया?
जो सब को इतना मज़ा आया
कहा उसने - चल गयी
मेरे आशिक की आँख पडोसन से लड़ गयी
मैं आपे से बाहर थी
आशिक से खफा और परेशान थी
बेचारे आशिक की शामत आई थी
रात उसकी आँख दुखनी आई थी
पड़ोस से दवाई मंगवाई थी
दवा डलाते दर्द हुआ
आंखों का झपकना तल्ब हुआ
उसकी तो झपक गयी
और मैं ना जाने क्या समझ गयी
मेरी गलती हो गयी
माफी- आप को गलतफहमी हो गयी
गोली नहीं मेरे आशिक की आँख चल गयी
पलकें भीगी हों बंद हों खुली हों या सुखी हुयी
जागते को जगा के दिखाओ
सोते को तो कोई भी जगा सकता है
आँखों ही आंखों में इशारा
खतरनाक हो भी जाता है
पलकों के झपकने से यार्रों
पिटने का सबब भी आता है
तुम्हे सुनाते है एक वाकया -
सोचना की वहां पर क्या हुआ
एक गाँव में शोर मचा
- चल गयी
भीड़ इकट्ठी हो गयी
जांच चालू की गयी
पुलिस को सूचना गयी
गारद आ के लग गयी
अखबार वाले आ गए
केमरा विडियो चालू किया
सवाल सबपे कायम हुआ
कहाँ चली
किस पे चली
क्यों चली
किस से चली
सब इधर उधर देखने लगे
एक दूसरे से पूछने लगे
तो एक लड़की ने पीछे से कहा
सबने इत्मिनान का सांस लिया
लड़की ने कया सुनाया?
जो सब को इतना मज़ा आया
कहा उसने - चल गयी
मेरे आशिक की आँख पडोसन से लड़ गयी
मैं आपे से बाहर थी
आशिक से खफा और परेशान थी
बेचारे आशिक की शामत आई थी
रात उसकी आँख दुखनी आई थी
पड़ोस से दवाई मंगवाई थी
दवा डलाते दर्द हुआ
आंखों का झपकना तल्ब हुआ
उसकी तो झपक गयी
और मैं ना जाने क्या समझ गयी
मेरी गलती हो गयी
माफी- आप को गलतफहमी हो गयी
गोली नहीं मेरे आशिक की आँख चल गयी
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