Showing posts with label patni. Show all posts
Showing posts with label patni. Show all posts

Tuesday, October 6, 2009

करवा चौथ की महीमा

देवी लक्ष्मी की सब पूजा करते हैं
इसे देख लक्ष्मी वाहन उल्लू जलते हें ।।

एक दि लक्ष्मी बिना वाहन के हो गयी
उल्लू महाराज रूस् गये माता घर में बैठी रह गयी
माँ ने वजह पूछी और खिलखिला  कर हंस पडी

माँ तेरी पूजा ३६५ दि २४ घंटे होती है
तुझे वहां पहुचाने में मेरी बुरी हालात होती है

माँ समझ गयी और दे दिया वरदान
साल में एक दि तेरी भी होगी पूजा और मान

सुहागिन  तेरे नाम का व्रत रखेंगी
चरण छुएंगी और तुझे पूजे ध्यायेंगी

वोह शुभ दि दिपावली से पहिले आएगा
करवा चौथ के नाम से मनाया जाएगा ॥
साथिओं इस दि हर घर में सुबह से रात तक पूजा का माहोल होता है
हर पत्ति पूजा और ध्याया जाता है

हर उल्लू की ये ही कहानी है
पुरे साल करता इंतज़ार कि करवाचौथ कब आनी है

महिमाकरवा चौथ की हर उल्लू ने जानी है
गृह लक्ष्मी की पूजा ३६४ दि और उल्लू की करवा चौथ पर हो जानी है

जय लक्ष्मी माता 

Saturday, June 21, 2008

पत्नी महिमा

नमो -नमो पत्नी महारानी ,
तुम्हारी महिमा कोई न जानी ।।

हमने समझा तुम अबला हो,
पर तुमतो सबसे बड़ी बला हो।।

हे देवी तुम पुरी मैं अधुरा तुम तो वंशपुर्णा हो
तुम्ही रात तुम्ही दिन तुम्ही अन्नपुर्णा हो ॥

डोली में बैठ तुम अर्धांगिनी आई थी
जैसे बला रेशम में लिपट दिल पे छाई थी ॥

जबसे तुम मेरे घर आई हो
दोस्त छूटे भाई फूटे तुम भी बनी हरजाई हो ॥

जिस दिन हाथ में बेलन आवे
उस दिन पत्नी खुब चिल्लावे ॥

सारे बेड पे पत्नी सोवे ,
पति बैठ फर्श पर रोवे ।।

जय जय पत्नी गाथा
बाप ने पढ़ी बेटा गाता ॥

कभी पति को मोका आता
चरण दबाने का पुन्य भी मिल जाता ॥

पति थका जब घर जब आता
देख तुम्हे कमल सा खिल जाता ॥

फिर जब तुम शुरू हो जाती
आस पड़ोस सास ननद सब सुनाती ॥

पहली तारीख हर महीने आवे
पति की पूजा पत्नी कर जावे ॥

वेतन पे अधिकार तुम्हारा
पुरे माह पति भिकारी और बेचारा ॥

उसके सास ससुर की सेवा खुब करे तू
अपने सास ससुर को भूल जाये तू ॥

तुमसे ही घर मथुरा काशी ,
और तुमशे घर सत्यानाशी ।।

पत्नी महिमा जो नर गावे ,
सब सुख छोड़ परम दुःख पावे॥

हाथ जोड़ सर झुका करता मई तुम्हे नमन
कृपा करना, क्षमा करना, पालना सातों वचन ॥

फल प्राप्ति ..................

पत्नी के नाम में बड़े गुण सुनलो धर के ध्यान
जो ध्यावे घर शांती सुख पावे पुरे होत अरमान ॥