Showing posts with label pita. Show all posts
Showing posts with label pita. Show all posts

Saturday, March 27, 2010

माँ बाप मजधार में

पढ़ लिखकर बाजार में लेते फिरता सीख
घर चलाता अनपढ़, ढोता माल बोझा खीच

मांग काढ जुल्फ बना ढूंढे नोकरी को
घर पर गांठे रोब, तोड़े रोटियां,पाठ पढ़ावे सबको

नोकरी अगर मिल जाये तो भी किस काम को
गाँव छोड़ शहर को भागे ठोकर मारे माँ बाप को

कबीरा काम का ना काज का पढ़ा लिखा
इसको को तो चाहिए मेज कुर्सी चाहे किस्तों पर लेआ

नकल मार के पास हुआ और रिश्वत दे के नोकर
चमचा बन के तरक्की पाई मेमसाब का बन कर

चांस लग गया तो विदेश गया दुल्हनिया को छोड़ कर
गिट पिट कर मेम पटाई भुला अपना गाँव घर

कबीरा इस संसार में तू किस पर भरोसा करता सोच सोच कर
यह भी पढ़ लिखने की रीत है बढ़िया तू तो बुनकरका बुनकर

Monday, February 9, 2009

परिवार

परिवार से होती है पहिचान
परिवार से बढती है शान ॥

परिवार करता है होसले बुलंद
परिवार ही ख्याल रखता जब तू तंग॥

परिवार न होता तो महाभारत ना होती
परिवार ने बताई भरत के त्याग की चोटी॥

परिवार की महिमा देवताओं ने गयी
शिव परिवार के दर्शन बहुत शुभ होते हैं भाई॥

जब बाबा की गोद में पोता आता है
खेलता कूदता और घोड़ा बनाता है॥

उस समय बाबा की जीना हो जाता है सार्थक
अगर परिवार न हो तो सभी निरर्थक ॥

आप और हम भी एक परिवार ही तो है
जिस के राजा रानी हम और आप है॥


खूब समझाई है परिवार की महिमा....
लेकिन एक बात है आपने भी छुपाई ..
परिवार हीं है जो सीमित कर देता है इन्सान को..
नहीं लड़ पाता ज़माने के जुल्मों के खिलाफ ..
डरता है क्या होगा उसके बाद...
समझौते करवाता है परिवार..
फिर भी सबको भाता है परिवार...
सुखी रहे आपका परिवार


सुमन ..................................

दिलज़लों का हर जगह येही हाल होता है
परिवार के अंदर या बाहर उनका तो मुह लाल होता है

जो परिवार में रह नहीं सकते
वोह समाज में भी शायद खप नहीं सकते

हर सर्दी के बाद गर्मी आती है
हर रात के साथ दिन जुडा होता है॥

हर फूल के साथ कांटे होते है
हर अधिकार के साथ फर्ज भी अदा करने होते है

कुछ लोग सिर्फ अधिकार जानते हैं
जवाबदारी से मुह चुरा के भागते हैं

ऐसे लोग अपने माँ बाप को भी धत्ता बता देते हैं
मजे लेने के लिए पैदा किया कौनसा अहसान किया सुना देते है

हमने यूरोप भी देखा है
जहाँ परिवारों का टोटा है

उनका हाल भी हम जानते हैं
जाने कितने ओल्डएज होम उनकी छाती पे गडे हैं

इसलिए फिर कहता हूँ सुनो खोल के कान
रहना भाईओं के बीच चाहे जंगल हो या मकान

Friday, June 13, 2008

पितृदिवस पर एक प्रण

पिताश्री इस पितृदिवस के पावन अवसर पे नमन करता हूँ
स्मरण अपना बचपन और आपका कन्धा आज भी करता हूँ॥

एक दिन दादी ने मुझे बतलाया था
कितने मंदिर तीर्थ घुमे तो मुझे पाया था॥

मेरे जन्म पर आपने पूरे गाँव में बधाई बाटी थी
खुशिओं की सौगात और मिठाई भी बाटी थी॥

मेरे स्कूल जाने पर कितनी बलैयां ले डाली थी
पास होकर आने पे कितनी शाबाशीयां दे डाली थी॥

माँ मेरी शरारतों से थक तुम्हारा इंतज़ार करती थी
तुम्हारे नाम को ले ले मुझे डराया करती थी ॥

तुम उनको सुन अनसुना करते थे
राजा बेटा अच्छा बेटा कह मुझे समझाया करते थे॥

याद आता है मेरा साइकल से गिर जाना
मेरी चोट देख जैसे तुम्हारी जान निकल जाना॥

सर्दी गर्मी धुप छाओं से मुझे बचाया करते थे
मेरे हर सवाल का जवाब हर मुश्किल सुलझाया करते थे॥

जिन्दगी के हर मोड़ पर मैं ने आपको पाया था
मेरे 'प्यार' को ठुकरा के भी फिर दोनों को अपनाया था॥

कितनी ही बार आप भी झुंझलाते थे
बाप बनुगा तो पता चलेगा कह थक जाते थे॥

आज जब मैं भी जवान बेटे का बाप बना हूँ
आपके कदम के निसानो पे खडा हूँ ॥

आपके पोते से मैं भी रूठ जाता हूँ
बेटा बाप बनोगे तो याद करोगे बोल जाता हूँ ॥

दादा जैसा बनो उन्हें स्मरण करो उसे याद दिलाता हूँ
अपने जवाब - उसके मुख से सुन शर्माता- पछताता हूँ ॥

बाप बेटे के सवाल का सो बार जवाब देता है
बेटा बाप के एक सवाल दुबारा आने पर सनकी, बुढा बोल देता है ॥

पितृपक्ष पर सुबह तर्पण करता है श्राद्ध करता ब्रह्म भोज करता है
उसही आदरणीय के अधूरे कामो से मुख मोड़ लेता है ॥

मैंने भी एक प्रण किया था इस जिन्दगी का
अच्छा बेटा बन आपके स्वप्न पूरे करने का ॥

लेकिन क्या मैं आपकी आकांक्षा पूरी कर सका हूँ
आज जिस मुकाम पर हूँ क्या आपकी ऊंचाई तक पहुँच सका हूँ ?

अगर कोई ख़ता हुई हो तो मुझे माफ़ करना
मेरा प्रण है आपकी भावना और इच्छा पूर्ण करना ॥

आज इस पितृदिवस मैं नमन करता पुष्प चढाता हूँ
आशीर्वाद की कामना और श्रद्धा का विश्वास दिलाता हूँ ॥

Wednesday, June 11, 2008

पिता को श्रधान्जली

बापू को नमन 

पिता के रूप में राष्ट्रपिता का स्मरण करता हूँ आजादी की सांस ले रहा हूँ नमन करता हूँ 
 
  हे युग पुरुष अगर तुम आज होते
हम एक दुसरे के कांधे पर सिर रख रो रहे होते

क्या आजादी का परचम इस लिए लहराया था
देश में काले अंग्रेजो का शासन,क्या तुमने चाहा था? 

तुझे आज अफ्रीका भी नमन करता है 
वंशवाद रंगभेद छोड़ वोह लोकतंत्र में विचरता है 

 नमन करता हूँ तेरी गोलमेज सम्मेलन की तस्वीर को नीलों से संग्राम और जेल की तदबीर को 
 
चौरीचौरा पे तेने अहिंषा का सन्देश दिया 
तेरी हिम्मत थी जो तुने आन्दोलन वापिस लिया 
  
हे राम के तेरे शब्द आज भी गूंजते कान में 
कोन याद करता गोडसे, स्वर्ग से क्षमादान दे 
  
सत्य अहिंषा बकरी चरखा तेरे निसान थे 
पूरे देश के भ्रमण ने दिए तुझे अनुमान थे 
  
तिलक गोखले पटेल नहरू ने तुझे सरहाया था
अंग्रेजों को तेरे असहयोग आन्दोलन ने थर्राया था 

 प्यारे बापू - देख तेरे चेले तुझे भूल गए 
खादी भूली चरखा भुला 
गाय बैल बछड़ा भूल गए 
  
जाति नस्ल आतंक का
 बवंडर छा गया है 
देश कर्जदार हो गया 
किसान आत्महत्या कर रहा है 
  
हे बापू आज पितृदिवस पर हम 
तुम्हे नमन करते है 
हे बापुओं के बापू 
 तेरे आशीर्वाद की कामना रखते है