Friday, August 29, 2008
मेरा धर्म ....गोरक्षा......... मेरी गोमांता
तुने जन्म दिया नहीं मुझको ।
पर मानू तुझे मैं मा ॥
तेरा दूध रगों में दोडे ।
मैं जानू ये भी मा ॥
भारत के तू हर कण में ।
भारत के तू हर जन में ।
तू बसती है मेरी मा ॥
सुख सारे तुससे पाए ।
तू दुःख में भी सुखालाये ।
मैं हर्षित हूँ मेरी मा ॥
जीवन से और मरण तक ।
शिख से और चरण तक ।
तू सबके काम आये ॥
बैल शक्ति गोबर गोमूत्र से ।
दूध दही घी उपयोग से ।
नई उद्योग क्रांति आये ॥
हर गाँव हर कोने में ।
देश का दुर्भाग्य ।
जो तुझे काट और खाए ॥
हर गाँव में हो तेरा बसेरा ।
फैलाए जो सवेरा ।
अंधियारा भाग जाए ॥
अब हमने भी ठानी ।
गोमाता है बचानी ।
जो मरने पर तारे ।
जन्नत धरा पे लाये ॥
पर मानू तुझे मैं मा ॥
तेरा दूध रगों में दोडे ।
मैं जानू ये भी मा ॥
भारत के तू हर कण में ।
भारत के तू हर जन में ।
तू बसती है मेरी मा ॥
सुख सारे तुससे पाए ।
तू दुःख में भी सुखालाये ।
मैं हर्षित हूँ मेरी मा ॥
जीवन से और मरण तक ।
शिख से और चरण तक ।
तू सबके काम आये ॥
बैल शक्ति गोबर गोमूत्र से ।
दूध दही घी उपयोग से ।
नई उद्योग क्रांति आये ॥
हर गाँव हर कोने में ।
देश का दुर्भाग्य ।
जो तुझे काट और खाए ॥
हर गाँव में हो तेरा बसेरा ।
फैलाए जो सवेरा ।
अंधियारा भाग जाए ॥
अब हमने भी ठानी ।
गोमाता है बचानी ।
जो मरने पर तारे ।
जन्नत धरा पे लाये ॥
कृष्ण प्यारी........... निहाल
कान्हा खेलत ब्रिज मैं ग्वालन संग
घुसत गोपियन के घर ढुडन माखन ॥
गोपी तरसत छुप झाँकत, कब आवेंगे नन्दलाल
देख कान्हा, दर्शन पात, होजावे निहाल ॥
लेत बलिआं, पीछे भागत, पकड़वे को नटवरलाल
अंखियन नीर बहावत, कमलपद पखारत, जपे गोपाल ॥
ये नटखट,लीला करत,गोपियन को खिजावत,करे धमाल
छाछ के लोटे पे,त्रिभंगी को नचावे,देखो गोपियन को कमाल ॥
मनभाव दुसरो,काम दूसरो,पकडे श्याम को, डाले लाल
सून स्यानी, जो इसे ध्यावे,वोह तो,निहाल और खुशहाल ॥
घुसत गोपियन के घर ढुडन माखन ॥
गोपी तरसत छुप झाँकत, कब आवेंगे नन्दलाल
देख कान्हा, दर्शन पात, होजावे निहाल ॥
लेत बलिआं, पीछे भागत, पकड़वे को नटवरलाल
अंखियन नीर बहावत, कमलपद पखारत, जपे गोपाल ॥
ये नटखट,लीला करत,गोपियन को खिजावत,करे धमाल
छाछ के लोटे पे,त्रिभंगी को नचावे,देखो गोपियन को कमाल ॥
मनभाव दुसरो,काम दूसरो,पकडे श्याम को, डाले लाल
सून स्यानी, जो इसे ध्यावे,वोह तो,निहाल और खुशहाल ॥
Saturday, August 16, 2008
रक्षा बंधन
अपनी मुफलिसी के डर से, मैं घर ही नहीं गया अपने ।
बहन ने फेंक दी होगी राखी, मेरा इंतज़ार करते करते
मुफलिसी नहीं यह तो बहाना था
तो भाभी के साथ सुसराल जाना था
बहिन मिलती तो खर्च हुआ होता
सुसराल में तो स्वागत हुआ होगा
बहिन तो इंतज़ार में सूख आधी हो चुकी
तुझे किसने समझया की वोह राखी फैंक चुकी
में एक बार भाई बहिन का त्यौहार आता है
मुफलिसी का बहानाकर बहिन को इंतजार कराता है
फेकी नहीं किसी गधे को बाँध दी होगी राखी
अपसगुन कैसे करेगी फैंक के बहिन,
.................भाई का वरदान यह राखी
बहन ने फेंक दी होगी राखी, मेरा इंतज़ार करते करते
मुफलिसी नहीं यह तो बहाना था
तो भाभी के साथ सुसराल जाना था
बहिन मिलती तो खर्च हुआ होता
सुसराल में तो स्वागत हुआ होगा
बहिन तो इंतज़ार में सूख आधी हो चुकी
तुझे किसने समझया की वोह राखी फैंक चुकी
में एक बार भाई बहिन का त्यौहार आता है
मुफलिसी का बहानाकर बहिन को इंतजार कराता है
फेकी नहीं किसी गधे को बाँध दी होगी राखी
अपसगुन कैसे करेगी फैंक के बहिन,
.................भाई का वरदान यह राखी
आज की ताजा खबर
कश्मिरिओं को १५०० करोड़ का नुक्सान हो गया
अरे हिसाब लगाने वालोंसिर्फ ३,००,००० कश्मीरी पंडितों का ५,00,000/- साल से हिसाब लगालो तो :-
अबतक 15000 करोड़ के हिसाब के ३,0०,००० करोड़ का नुक्सान हो चूका है।
उनकी जमीन सम्पति तो १० लाख करोड़ से ज्यादा की पाएगी ॥
अगर हिसाब की बात करते हो तो लगाओ हिसाब की ....................
कितने लाख करोड़ इधर से उधर जा चुके हैं ।
एक कारगिल में कितने जवान जान गवां चुके है ॥
क्या मुजफ्फराबाद में सेव नही उगते जो इनका वहाँ इस्तकबाल होगा ।
अरे नही इन्हें जाने दो इनका हमे मालूम है वहां क्या हाल होगा ॥
हमे uno की धमकी देते हैं जैसे अमन के ठेकेदार हों ।
दुनिया जानती है पहिचान्ती है इन आतन्किओं को ॥
बदनाम कर दिया हिंद के मुसलमान को ।
अल्लाह के नाम को इंसान के अरमान को ॥
भेड़िया आया भेड़िया आया का शौर सुन दौड़ा करते थे ।
एक दिन आया तो झूट मान अनसुना करते थे ॥
एक दिन यहाँ भी ऐसा ही होने वाला है ।
पूरा काश्मीर एक हो भारत में मिलने वाला है ॥
अरे हिसाब लगाने वालोंसिर्फ ३,००,००० कश्मीरी पंडितों का ५,00,000/- साल से हिसाब लगालो तो :-
अबतक 15000 करोड़ के हिसाब के ३,0०,००० करोड़ का नुक्सान हो चूका है।
उनकी जमीन सम्पति तो १० लाख करोड़ से ज्यादा की पाएगी ॥
अगर हिसाब की बात करते हो तो लगाओ हिसाब की ....................
कितने लाख करोड़ इधर से उधर जा चुके हैं ।
एक कारगिल में कितने जवान जान गवां चुके है ॥
क्या मुजफ्फराबाद में सेव नही उगते जो इनका वहाँ इस्तकबाल होगा ।
अरे नही इन्हें जाने दो इनका हमे मालूम है वहां क्या हाल होगा ॥
हमे uno की धमकी देते हैं जैसे अमन के ठेकेदार हों ।
दुनिया जानती है पहिचान्ती है इन आतन्किओं को ॥
बदनाम कर दिया हिंद के मुसलमान को ।
अल्लाह के नाम को इंसान के अरमान को ॥
भेड़िया आया भेड़िया आया का शौर सुन दौड़ा करते थे ।
एक दिन आया तो झूट मान अनसुना करते थे ॥
एक दिन यहाँ भी ऐसा ही होने वाला है ।
पूरा काश्मीर एक हो भारत में मिलने वाला है ॥
कश्मीर की धरती का बवाल
आज की ताजा खबर कश्मिरिओं को १५०० करोड़ का नुक्सान हो गया हिसाब लगाने वालों सिर्फ ३,००,००० कश्मीरी पंडितों का ५०,०००/- साल से हिसाब लगालो तो अबतक १५०० करोड़ के हिसाब के ३०,००० करोड़ का नुक्सान हो चूका हैउनकी जमीन सम्पति तो १० लाख करोड़ से ज्यादा की पाएगी ॥
हिसाब की बात करते हो तो लगाओ हिसाब की
कितने लाख करोड़ इधर से उधर जा चुके हैं ।
एक कारगिल में कितने जवान जान गवां चुके है ॥
क्या मुजफ्फराबाद में सेव नही उगते जो इनका वहाँ इस्तकबाल होगा ।
अरे नही इन्हें जाने दो इनका हमे मालूम है वहां क्या हाल होगा ॥
हमे uno की धमकी देते हैं जैसे अमन के ठेकेदार हों ।
दुनिया जानती है पहिचान्ती है इन आतन्किओं को ॥
बदनाम कर दिया हिंद के मुसलमान को ।
अल्लाह के नाम को इंसान के अरमान को ॥
रक्षा बंधन
शुभ प्रभात की बेला में
रक्षा बंधन लिए हाथ में
बहिन खड़ी दरवाजे पे
उठ दौड़ ले बलैआं
भाग जगे तेरे उसके आने से
वोह बांधेगी रक्षा
तेरा रक्षा का वचन पाने को
देगी तुझे आशीर्वाद
दुनिया की हर नेमत पाने को
नटवरलीला
प्रिय सखी
जपत देखत नटवरलीला अपनों जन्म सफल बनाएँगे
राधे श्याम सुमिरत ब्रिन्दावन धाम जायेंगे.
राधावल्लभ कुञ्ज गलियन में ढूंड नयनन शीतल करवाएँगे
आया जन्मोत्सव राधाजू को श्याम रिझाने को सृंगार करेगे
सखी सखा सब मिल श्याम राधाजू की लीला में रास करेंगे
वेश बना पकवान पका युगलवर की ब्लैआं ले सेवा करेंगे
नन्द यशोदा के लाडले को माखन दिखा नाचवे को त्यार करेंगे
सुनरी सखी श्याम मनोहर राधाजू संग रास ठिठोली कर विलास करेंगे
ऐसी छटा इस जग में खिलेगी हम सब द्रग नीर भर भाग सराहेंगे
मुझे ना चाहे बंसीबट या महल चौबारा मैं तो वहां ही बसूं जहाँ मेरे राधे श्याम बसेंगे
जपत देखत नटवरलीला अपनों जन्म सफल बनाएँगे
राधे श्याम सुमिरत ब्रिन्दावन धाम जायेंगे.
राधावल्लभ कुञ्ज गलियन में ढूंड नयनन शीतल करवाएँगे
आया जन्मोत्सव राधाजू को श्याम रिझाने को सृंगार करेगे
सखी सखा सब मिल श्याम राधाजू की लीला में रास करेंगे
वेश बना पकवान पका युगलवर की ब्लैआं ले सेवा करेंगे
नन्द यशोदा के लाडले को माखन दिखा नाचवे को त्यार करेंगे
सुनरी सखी श्याम मनोहर राधाजू संग रास ठिठोली कर विलास करेंगे
ऐसी छटा इस जग में खिलेगी हम सब द्रग नीर भर भाग सराहेंगे
मुझे ना चाहे बंसीबट या महल चौबारा मैं तो वहां ही बसूं जहाँ मेरे राधे श्याम बसेंगे
Monday, August 11, 2008
अभिनव बिंद्रा का अभिनन्दन
देश ओलम्पिक में शामिल तो होता था
११० करोड़ का देश शर्मिंदा वापिस होता था
अरबों खर्च का था सालो साल कोई हिसाब नही
एक भी एकल स्वर्ण था हमारे भाग में नही
हम विश्व नेता होने का दावा करते थे
लेकिन स्वर्ण पाने को तरसते थे
खेल भावना की मिसाल देते थे
अपने कर्म ठोक रो लेते थे
कभी ध्यान कभी मिल्खा कभी अमृत याद करते थे
कर्नेश्वरी और चौहान को आँखों पर रखते थे
पुरुश्कारो को अर्जुन राजीव पुकारते थे
देश के खिलाडियों को भर भर धिक्कारते थे
असली अर्जुन तो अभ्यास कर रहा था
अपने करतब को पैनी धार धार रहा था
सुबह पूरब से नया उजाला आया
देश में खुशीओं से भरा पैगाम लाया
अभिनव तुम देश की शान
भेद दिया ओलम्पिक का निसान
२५ साल के पंजाब के नवजवान
आधुनिक अर्जुन को देश का सलाम
आओ वापिस देश पलक बिछा इन्तजार में
है बिंद्रा के विजय अभियान उत्सव की त्यारी जोरों पे है
तुम्हारी विजय देश का भाग लिखा जाने वाला है
स्वर्ण नही, नवयुवको की प्रेरणा और संकल्प होने वाला है
बिंद्रा परिवार को हार्दिक बधाई
११० करोड़ का देश शर्मिंदा वापिस होता था
अरबों खर्च का था सालो साल कोई हिसाब नही
एक भी एकल स्वर्ण था हमारे भाग में नही
हम विश्व नेता होने का दावा करते थे
लेकिन स्वर्ण पाने को तरसते थे
खेल भावना की मिसाल देते थे
अपने कर्म ठोक रो लेते थे
कभी ध्यान कभी मिल्खा कभी अमृत याद करते थे
कर्नेश्वरी और चौहान को आँखों पर रखते थे
पुरुश्कारो को अर्जुन राजीव पुकारते थे
देश के खिलाडियों को भर भर धिक्कारते थे
असली अर्जुन तो अभ्यास कर रहा था
अपने करतब को पैनी धार धार रहा था
सुबह पूरब से नया उजाला आया
देश में खुशीओं से भरा पैगाम लाया
अभिनव तुम देश की शान
भेद दिया ओलम्पिक का निसान
२५ साल के पंजाब के नवजवान
आधुनिक अर्जुन को देश का सलाम
आओ वापिस देश पलक बिछा इन्तजार में
है बिंद्रा के विजय अभियान उत्सव की त्यारी जोरों पे है
तुम्हारी विजय देश का भाग लिखा जाने वाला है
स्वर्ण नही, नवयुवको की प्रेरणा और संकल्प होने वाला है
बिंद्रा परिवार को हार्दिक बधाई
Tuesday, August 5, 2008
बिखरते जज्बात
आज की इस अंधी दौड़ में देखे हैं हमने
नफरत की ठोकर से जज्बात बिखरते
उपरवाला भी अगर आये तो यारों
सौदागर उसे भी बेच खाके निकलते
आज की सौगात झूट नफरत आतंक
इसे फैलाने वाले तानाशाह और मालिक बनते
बहुत से गम हैं इस ज़माने में
इश्क से हालात नहीं पलटते
आओ हम मिल बनाये नयी दुनिया
जिसमे इश्क, मोहब्बत की शहनाई गूंज
नफरत की ठोकर से जज्बात बिखरते
उपरवाला भी अगर आये तो यारों
सौदागर उसे भी बेच खाके निकलते
आज की सौगात झूट नफरत आतंक
इसे फैलाने वाले तानाशाह और मालिक बनते
बहुत से गम हैं इस ज़माने में
इश्क से हालात नहीं पलटते
आओ हम मिल बनाये नयी दुनिया
जिसमे इश्क, मोहब्बत की शहनाई गूंज
मिसाल ए दोस्ती
इन्सान को इन्सान बनाती है दोस्ती
हैवानियत से भी कभी बचाती है दोस्ती
दोस्त की हर मुसीबत की निगेबाहं है दोस्ती
हाथ में आ जाती है गिरेबान करे अगर कोई बुराई दोस्तकी
हर तक़दीर को बदल दे ऐसी मेहरबान होती है दोस्ती
युधिस्टर ने निभाई थी स्वान से दोस्ती
आज भी मिसाल है कृष्ण सुदामा की दोस्ती
आ हम भी आज बन जाये मिसाल ए दोस्ती
हैवानियत से भी कभी बचाती है दोस्ती
दोस्त की हर मुसीबत की निगेबाहं है दोस्ती
हाथ में आ जाती है गिरेबान करे अगर कोई बुराई दोस्तकी
हर तक़दीर को बदल दे ऐसी मेहरबान होती है दोस्ती
युधिस्टर ने निभाई थी स्वान से दोस्ती
आज भी मिसाल है कृष्ण सुदामा की दोस्ती
आ हम भी आज बन जाये मिसाल ए दोस्ती
कातिल मल्लिका
कातिल को कातिल कह क्यों मजाक करते हो
उनकी अदा पे मरते हो फिर क्यों शिकवा करते हो
वोह जहर भी पिला दें अपनी आंखों से कोई बात नहीं
उनके खुसबू और साए में जिन्दगी गुजर जाये तो खता नहीं
आग का दरिया उनका इश्क हमे तो पार तक जाना है
मल्लिका ए हुस्न तुम साथ तो जन्नत किसे जाना है ?
उनकी अदा पे मरते हो फिर क्यों शिकवा करते हो
वोह जहर भी पिला दें अपनी आंखों से कोई बात नहीं
उनके खुसबू और साए में जिन्दगी गुजर जाये तो खता नहीं
आग का दरिया उनका इश्क हमे तो पार तक जाना है
मल्लिका ए हुस्न तुम साथ तो जन्नत किसे जाना है ?
खुशियाँ और गम
ख्वाब और ख्यालों की मलिका हम तुम्हारे गुलाम
हर ल्ह्मा हर पल हम तुम्हे याद करते हैं
खुशियाँ बाटने से बढती असूल जमाने का
गम तो अकेले ही सहने पड़ते हैं
अपनों से शिकवा की बारिश की खबर नहीं दी
बंद कमरे में गैरों के साथ क्यों आप बंद होते है
तुम्हे दिखाने को हंसते रहे हम
छिपाते दिल के आंसू और गम
जब तुम सामने तो हम बाग़ बाग़ होते है
हर रात के बाद दिन आता है
चाँद छिपता सूरज निकल जाता है
दिल के जख्म भरने को
ग़मगीन के भी उत्सव होते है
ख्वाब और ख्यालों की मलिका हम तुम्हारे गुलाम
हर ल्ह्मा हर पल हम तुम्हे याद करते हैं
हर ल्ह्मा हर पल हम तुम्हे याद करते हैं
खुशियाँ बाटने से बढती असूल जमाने का
गम तो अकेले ही सहने पड़ते हैं
अपनों से शिकवा की बारिश की खबर नहीं दी
बंद कमरे में गैरों के साथ क्यों आप बंद होते है
तुम्हे दिखाने को हंसते रहे हम
छिपाते दिल के आंसू और गम
जब तुम सामने तो हम बाग़ बाग़ होते है
हर रात के बाद दिन आता है
चाँद छिपता सूरज निकल जाता है
दिल के जख्म भरने को
ग़मगीन के भी उत्सव होते है
ख्वाब और ख्यालों की मलिका हम तुम्हारे गुलाम
हर ल्ह्मा हर पल हम तुम्हे याद करते हैं
चौराहा
चौराहे पर खडा मैं सोच रहा
किधर जाऊं मन टटोल रहा
चार राहें जहाँ आके मिलती हैं
उस चौराहे के थानेदार से मैं बोल रहा
बहुत सुंदर सजाया है चौराहे को
उसपे बैठाया चहचहाते चिडे चिडयों को
मुबारक हो थानेदार तुम्हे यह खुशहाल चौराहा
हमारा तो येही रास्ता है
रोज निकलेंगे इस चौराहे से
दिलबर का आशियाँ यहाँ से दिखता है
इतना रहम करना दिलबर के रूबरू होने पर
रोक देना उन्हें अपना रुआब दिखा कलाम सुना कर
किधर जाऊं मन टटोल रहा
चार राहें जहाँ आके मिलती हैं
उस चौराहे के थानेदार से मैं बोल रहा
बहुत सुंदर सजाया है चौराहे को
उसपे बैठाया चहचहाते चिडे चिडयों को
मुबारक हो थानेदार तुम्हे यह खुशहाल चौराहा
हमारा तो येही रास्ता है
रोज निकलेंगे इस चौराहे से
दिलबर का आशियाँ यहाँ से दिखता है
इतना रहम करना दिलबर के रूबरू होने पर
रोक देना उन्हें अपना रुआब दिखा कलाम सुना कर
Sunday, August 3, 2008
विश्व दोस्त दिवस .................
पूरा विश्व आज दोस्त दिवस मना रहा है
आज हमें भी हमारा दोस्त याद आ रहा है.
आज देख रहे हैं दोस्ती भरे तराने को
मेरे दोस्त आ आज ताजा करें अपने अफसाने को
हम तो हैं तैयार तुम्हारे हमदम बन जाने को
अरमान हमारा एक, दिल को दिल से मिलने और मुस्कुराने को
हाथ में हाथ डाल हम चाँद पर जायेंगे
परियां स्वागत करेंगी गन्धर्व गीत गायेंगे
जब दिल से दिल; मिल जायेंगे नया उजाला आएगा
दुनिया देखेगी हमारी दोस्ती और दुश्मन घबराएगा
कसमे हमारी दोस्ती की हर आशिक खायेगा
कृष्ण सुदामा को भूल हम से दिल लगायेगा
आज हमें भी हमारा दोस्त याद आ रहा है.
आज देख रहे हैं दोस्ती भरे तराने को
मेरे दोस्त आ आज ताजा करें अपने अफसाने को
हम तो हैं तैयार तुम्हारे हमदम बन जाने को
अरमान हमारा एक, दिल को दिल से मिलने और मुस्कुराने को
हाथ में हाथ डाल हम चाँद पर जायेंगे
परियां स्वागत करेंगी गन्धर्व गीत गायेंगे
जब दिल से दिल; मिल जायेंगे नया उजाला आएगा
दुनिया देखेगी हमारी दोस्ती और दुश्मन घबराएगा
कसमे हमारी दोस्ती की हर आशिक खायेगा
कृष्ण सुदामा को भूल हम से दिल लगायेगा
Sunday, July 20, 2008
मौला.............
मौला बोला बचाले मुझे
इस मतलबी दुनिया से उठाले मुझे
तुने कायनात बनायीं थी
खुबसुरत बगिया लगायी थी
आदम और हौवा बनाये थे
पीर पैगम्बर भिजाये थे
नेकी पर चलना सिखाया था
जकात रहम इबादत पे चलना सिखाया था
आज खुदा की खुदाई हैवान हो गयी
इंसानियत लालच में नीलाम होगई
इंसान खुद खुदा बन गया
उपर वाले पे से भरोसा उठ गया
अल्लाह की दर इराक टूट गया
अमरीका परस्ती में पाक नापाक हो गया
इंसानियत का हस्र इतना की दिल भर गया
मोला भी शायद अटम से डर गया
जमी को जन्नत बनाने का ख्वाब धूल में मिल गया
मौला तू ही संभालेगा
इस कायनात को शैतानो के कब्जे से निकलेगा
या खुद भी जायेगा और हमें भी बुला लेगा
इस मतलबी दुनिया से उठाले मुझे
तुने कायनात बनायीं थी
खुबसुरत बगिया लगायी थी
आदम और हौवा बनाये थे
पीर पैगम्बर भिजाये थे
नेकी पर चलना सिखाया था
जकात रहम इबादत पे चलना सिखाया था
आज खुदा की खुदाई हैवान हो गयी
इंसानियत लालच में नीलाम होगई
इंसान खुद खुदा बन गया
उपर वाले पे से भरोसा उठ गया
अल्लाह की दर इराक टूट गया
अमरीका परस्ती में पाक नापाक हो गया
इंसानियत का हस्र इतना की दिल भर गया
मोला भी शायद अटम से डर गया
जमी को जन्नत बनाने का ख्वाब धूल में मिल गया
मौला तू ही संभालेगा
इस कायनात को शैतानो के कब्जे से निकलेगा
या खुद भी जायेगा और हमें भी बुला लेगा
Saturday, July 19, 2008
चुनाव का बकरा...............
देखो फिर ईद आ गयी
बकरे की मुसीबत आ गयी
अरे नहीं बकरे की तो किस्मत संवर गयी
सौदागर ने फरमान किया
ईद मनाने का ऐलान किया
खरीदी का दाम दिया
कल तक जो बकरा मण्डी के ख्वाब थे देखते
आज हम उन्हें मण्डी के तिजारती देखते
काश्मीर से कन्याकुमारी
मुंबई से बंगाल की खाडी
हर बकरे का अलग निसान है
उसके मालिक की अलग दुकान है
कुछ बकरे खुले घूम रहे है
चुंगी वाले जाल डाल उन्हें ताक रहे हैं
कुछ बकरे मिमिया रहे हैं
मंत्री बनाओ चिल्ला रहे हैं
कुछ लाल कुछ हरे नीले, कुछ केसरिया बाड़े में घुस चुके है
कुछ हाथ के इशारे पे, सजे संवरे खड़े हैं
तीन दिन है बाकी सौदागर को ईद मनाने को
बकरों की तो मौज होगई, ईद को चला जाने दो
यारों ईद के बाद क्याहोगा ?
सौदागर तो खुश, देश का सत्यानास होगा
हाथ जीत गया तो भी हारेगा
लाल का कया बिगडेगा वोह तो चीन पधारेगा
हाँ- कुछ बकरे मोटे हो जायेंगे
कुछ मंत्री कुछ संत्री बन जायेंगे
इसी लिए कहता हूँ ईद आ गयी .........
बकरों की तो मौज आगयी
बकरे की मुसीबत आ गयी
अरे नहीं बकरे की तो किस्मत संवर गयी
सौदागर ने फरमान किया
ईद मनाने का ऐलान किया
खरीदी का दाम दिया
कल तक जो बकरा मण्डी के ख्वाब थे देखते
आज हम उन्हें मण्डी के तिजारती देखते
काश्मीर से कन्याकुमारी
मुंबई से बंगाल की खाडी
हर बकरे का अलग निसान है
उसके मालिक की अलग दुकान है
कुछ बकरे खुले घूम रहे है
चुंगी वाले जाल डाल उन्हें ताक रहे हैं
कुछ बकरे मिमिया रहे हैं
मंत्री बनाओ चिल्ला रहे हैं
कुछ लाल कुछ हरे नीले, कुछ केसरिया बाड़े में घुस चुके है
कुछ हाथ के इशारे पे, सजे संवरे खड़े हैं
तीन दिन है बाकी सौदागर को ईद मनाने को
बकरों की तो मौज होगई, ईद को चला जाने दो
यारों ईद के बाद क्याहोगा ?
सौदागर तो खुश, देश का सत्यानास होगा
हाथ जीत गया तो भी हारेगा
लाल का कया बिगडेगा वोह तो चीन पधारेगा
हाँ- कुछ बकरे मोटे हो जायेंगे
कुछ मंत्री कुछ संत्री बन जायेंगे
इसी लिए कहता हूँ ईद आ गयी .........
बकरों की तो मौज आगयी
माशूक और बीबी में फर्क
वो भी दिन थे की हमीं आयें हरेक बात में याद
आज हर बात में कह्ते हैं की हम भूल गए
बड़े भोले है, बड़े ढूध के धोये हैं आज
पी के जब प्यार में बहके थे कदम भूल गए
हमसे कांटे भी निकलवाये थे तलवों से कभी
आ के मंजिल पे सभी राह के ग़म भूल गए
अब तो कह्ते हो की भाते ही नही हमको "गुलाब"
आपके दिल् को कभी था ये वहम भूल गए
कल तक हम तुम्हारे आशिक थे आज खाविंद होते है
कल तक पसीना था गुलाब आज रोटी कपडा और मकान को रोते हैं
तुम आज भी दिल के पास हो दुनियादारी में फंसे तुम्हे खोते हैं
ड़र से तुम्हारे जानबूझ कर अनजान बन भूलना कबूल लेते हैं
हमारी वफादारी की कसम हर आशिक खाता है
अहद निभाने को इश्क अंजाम तक लाने को दूध नहीं
गंगाजल से धुले रोज तुम्हारी आंखों में खोते है
हम अकेले गुनहगार नहीं इस खुशनुमा अंजाम के
उस वक्त कदम दोनो के बहके थे नतीजे में संग होते हैं
याद है हमें तलवा और कांटे
जो लगे थे तुम्हे रिझाने को फूल लाते
याद है तुम्हारा उन फूलों का कबूल करना
और हमारे दर्द को सहलाना और सिसकना
कसम तुम्हारी याद है की
तुम्हे फूलों से नही हम से प्यार है
तुम गुलाब, हम कांटे, इश्क हवा हुआ,
आओ मिल दुनिया के दर्द बांटे
सात जन्मो के साथ की कसम को पूरी करने के खातिर
बनाया है नया आशियाना "हुजुर" तुम्हारे खातिर
कल तक हम तुम्हारे आशिक थे आज खाविंद होते है
कल तक पसीना था गुलाब आज रोटी कपडा और मकान को रोते हैं
लोग कहते हैं वो मुझसे मुझ्तालिफ सा है
मगर वोह जानते नहीं
मैं उस से रूठ जाऊं तोह..
वोह मुझसे रूठ जाता है ..
गलत ख्याल दिल को दुखा देता है
खोफ्नाक सपना नींद उडा देता है
तुम रूठी तो मनाने को कया कोई ताऊ आते है
फिल्म दिखाते, चाट खिलाते हम ही तो मनाते हैं
अगर वोह पूछ लें हम से की तुम्हे
किस बात का गम हे?
तो फीर................
किस बात का गम हें? ॥
गम था तो बस एक ही गम था
जहाँ किस्ती डूबी वहां पानी बहुत कम था ।
जो आँखों की जबान नहीं पढ़ते
उन्हें इश्क का हक नही ।
जो बातबात पर रुठते हैं उन्हें ,
हमारे दिल टूटने का इल्म नही ॥
वो मुझे याद तोः करता है मगर यूँही जैसे
घर का दरवाज़ा किसी रात खुला रह जाए॥
हमारे घर के दरवाजे तो कभी के उखड गए
तुम कब आओगी सोच सोच अरमान भड़क गए
आओगी तुम तो सितारों की छाँव होगी
चाँद रास्ता दिखायेगा गली सुनसान होगी
चौखट पर हम खड़े होंगे पलकों में छिपाने को
नज़रे उतार ले बलियां लोगो की नजरों से छिपाने को
आज हर बात में कह्ते हैं की हम भूल गए
बड़े भोले है, बड़े ढूध के धोये हैं आज
पी के जब प्यार में बहके थे कदम भूल गए
हमसे कांटे भी निकलवाये थे तलवों से कभी
आ के मंजिल पे सभी राह के ग़म भूल गए
अब तो कह्ते हो की भाते ही नही हमको "गुलाब"
आपके दिल् को कभी था ये वहम भूल गए
कल तक हम तुम्हारे आशिक थे आज खाविंद होते है
कल तक पसीना था गुलाब आज रोटी कपडा और मकान को रोते हैं
तुम आज भी दिल के पास हो दुनियादारी में फंसे तुम्हे खोते हैं
ड़र से तुम्हारे जानबूझ कर अनजान बन भूलना कबूल लेते हैं
हमारी वफादारी की कसम हर आशिक खाता है
अहद निभाने को इश्क अंजाम तक लाने को दूध नहीं
गंगाजल से धुले रोज तुम्हारी आंखों में खोते है
हम अकेले गुनहगार नहीं इस खुशनुमा अंजाम के
उस वक्त कदम दोनो के बहके थे नतीजे में संग होते हैं
याद है हमें तलवा और कांटे
जो लगे थे तुम्हे रिझाने को फूल लाते
याद है तुम्हारा उन फूलों का कबूल करना
और हमारे दर्द को सहलाना और सिसकना
कसम तुम्हारी याद है की
तुम्हे फूलों से नही हम से प्यार है
तुम गुलाब, हम कांटे, इश्क हवा हुआ,
आओ मिल दुनिया के दर्द बांटे
सात जन्मो के साथ की कसम को पूरी करने के खातिर
बनाया है नया आशियाना "हुजुर" तुम्हारे खातिर
कल तक हम तुम्हारे आशिक थे आज खाविंद होते है
कल तक पसीना था गुलाब आज रोटी कपडा और मकान को रोते हैं
लोग कहते हैं वो मुझसे मुझ्तालिफ सा है
मगर वोह जानते नहीं
मैं उस से रूठ जाऊं तोह..
वोह मुझसे रूठ जाता है ..
गलत ख्याल दिल को दुखा देता है
खोफ्नाक सपना नींद उडा देता है
तुम रूठी तो मनाने को कया कोई ताऊ आते है
फिल्म दिखाते, चाट खिलाते हम ही तो मनाते हैं
अगर वोह पूछ लें हम से की तुम्हे
किस बात का गम हे?
तो फीर................
किस बात का गम हें? ॥
गम था तो बस एक ही गम था
जहाँ किस्ती डूबी वहां पानी बहुत कम था ।
जो आँखों की जबान नहीं पढ़ते
उन्हें इश्क का हक नही ।
जो बातबात पर रुठते हैं उन्हें ,
हमारे दिल टूटने का इल्म नही ॥
वो मुझे याद तोः करता है मगर यूँही जैसे
घर का दरवाज़ा किसी रात खुला रह जाए॥
हमारे घर के दरवाजे तो कभी के उखड गए
तुम कब आओगी सोच सोच अरमान भड़क गए
आओगी तुम तो सितारों की छाँव होगी
चाँद रास्ता दिखायेगा गली सुनसान होगी
चौखट पर हम खड़े होंगे पलकों में छिपाने को
नज़रे उतार ले बलियां लोगो की नजरों से छिपाने को
Sunday, July 13, 2008
देश का हाल
पंच बुला कर करो फ़ैसला
भाई और साले में
दांये बाएं में हो गयी जंग
बीती रात शिवाले में
प्यास लगी नींद भगी
कमल घूम रहा ख्यालों में
भोले बोले पंच बुलाओ
जनता तो गयी हिमाले पे
गलती किसकी इच्छा उसकी
भंग चढ़ गयी माथे पे
हर घर का हाल यही है
पंच गये दिवाले में
बुश को मानने सरकार हिली
वाम रूठा खडा विराने में
टुकुर टुकुर देख रहे घरवाले
आज इस ज़माने में
घर की आग में हाथ सेक रहे
ऐरे गेरे नथू खेरे बैठे मैखाने में
बेडा गर्क हो रहा देश का
फ़िक्र किसे करो फैसला चो्डे चोक उजाले में
भाई और साले में
दांये बाएं में हो गयी जंग
बीती रात शिवाले में
प्यास लगी नींद भगी
कमल घूम रहा ख्यालों में
भोले बोले पंच बुलाओ
जनता तो गयी हिमाले पे
गलती किसकी इच्छा उसकी
भंग चढ़ गयी माथे पे
हर घर का हाल यही है
पंच गये दिवाले में
बुश को मानने सरकार हिली
वाम रूठा खडा विराने में
टुकुर टुकुर देख रहे घरवाले
आज इस ज़माने में
घर की आग में हाथ सेक रहे
ऐरे गेरे नथू खेरे बैठे मैखाने में
बेडा गर्क हो रहा देश का
फ़िक्र किसे करो फैसला चो्डे चोक उजाले में
छोरा गंगा किनारे वाला
बांकी चितवन आँखे नशे का प्याला
सुप्रभात बोल चहक रहा
मीठी वाणी बोल रहा
दिल के अन्दर डोल रहा
जनबल धनबल बहुबल तोल रहा
लोकतंत्र की बातें बोल रहा
सूरज की तरह प्रखर
भविष्य उसका उज्जवल
पहली किरण की तरह निर्मल
ऐसे दोस्त को आदाब नमस्ते और सलाम
आज रविवार करो आराम
सुप्रभात बोल चहक रहा
मीठी वाणी बोल रहा
दिल के अन्दर डोल रहा
जनबल धनबल बहुबल तोल रहा
लोकतंत्र की बातें बोल रहा
सूरज की तरह प्रखर
भविष्य उसका उज्जवल
पहली किरण की तरह निर्मल
ऐसे दोस्त को आदाब नमस्ते और सलाम
आज रविवार करो आराम
मजनू, फरहाद महिवाल
बेपरवाही से जीने का मजा कुछ और ही आता है
आँख बंद कर प्यार करने को ही इश्क कहा जाता है
जलने वालों ने बख्शा नहीं मजनू फरहाद महिवाल को
फन्हा होने तक मजबूर किया इश्क के दिवानो को
परवाह अगर करते तो मिसाल ए इश्क कहाँ बनते
आज तुम हम है और हम भी परवाह नहीं करते
कल रात तो सितम की रात थी
तुम उधर सोच में डूबे थे तो इधर भी येही बात थी
याद करते तुम्हारी और जालिम ज़माने को कोसते थे
कसम खुद ए इश्क की हम भी येही सोचते थे
तुम जब सामने आओगे तो क़यामत आ जायेगी
सब्र का बांध टूट जायेगा और गुस्से की बाढ़ आजायेगी
लेकिन कसूर तुम्हारा नहीं इस ज़माने का है
लगे हज़ार पहरे फिर भी जिगरा तुम्हरा जो आने का है
इस्तकबाल तुम्हारा करेंगे गुलदस्ता हाथ में होगा
तामिल रात का सोच, हंसी चेहरे पे, तुम्हारे हाथ में हाथ होगा
रात कैसे गुजरे तुम बताओ कम स कम इश्क का आगाज होगा
भूल जायेंगे ज़माने वाले, मजनू, फरहाद महिवाल को, कल हमारा होगा
आँख बंद कर प्यार करने को ही इश्क कहा जाता है
जलने वालों ने बख्शा नहीं मजनू फरहाद महिवाल को
फन्हा होने तक मजबूर किया इश्क के दिवानो को
परवाह अगर करते तो मिसाल ए इश्क कहाँ बनते
आज तुम हम है और हम भी परवाह नहीं करते
कल रात तो सितम की रात थी
तुम उधर सोच में डूबे थे तो इधर भी येही बात थी
याद करते तुम्हारी और जालिम ज़माने को कोसते थे
कसम खुद ए इश्क की हम भी येही सोचते थे
तुम जब सामने आओगे तो क़यामत आ जायेगी
सब्र का बांध टूट जायेगा और गुस्से की बाढ़ आजायेगी
लेकिन कसूर तुम्हारा नहीं इस ज़माने का है
लगे हज़ार पहरे फिर भी जिगरा तुम्हरा जो आने का है
इस्तकबाल तुम्हारा करेंगे गुलदस्ता हाथ में होगा
तामिल रात का सोच, हंसी चेहरे पे, तुम्हारे हाथ में हाथ होगा
रात कैसे गुजरे तुम बताओ कम स कम इश्क का आगाज होगा
भूल जायेंगे ज़माने वाले, मजनू, फरहाद महिवाल को, कल हमारा होगा
Tuesday, July 8, 2008
समय की पुकार
समय की पुकार आज की दरकार
जाग दोस्त सुन भारत माता की पुकार
जो दंगा करते हैं
जो नर संहार करते है
जो जातिवाद की नफरत की आग में देश को में झोंकते
राम- रहीम -इसा - गुरु -गाँधी -बाबा की बात करते है
इन आस्तीन के सांपो से
सावधान ख़बरदार होशियार
मेरे देश वासिओं कसलो कमर,
होजाओ त्यार
इन पापिओं को सबक सिखाना होगा
हर हथियार काम में ला इन्हें उडाना होगा
देर बहुत हो जायेगी
मानवता कराहयेगी
जब देश ही ना रहा
तो नींद कहाँ से आएगी
आज की ताजा ख़बर ...............
कश्मीर जल रहा है
काबूल आतंकियों से थर्रा रहा है
गुलाम इस्तीफ़ा दे दिल्ली चल रहा है
मनमोहन टोकियो में बुश से चोंचे लड़ा रहा है
वाम हका बका मुलायम अवसर ताक रहा है
महंगाई का नाग डस रहा किसान जहर खा रहा है
भारतमाँ का मुकट खतरे में है केन्द्र थर्रा रहा है
समय की पुकारआज की दरकार
जाग दोस्त सुन भारत माता की पुकार
जाग दोस्त सुन भारत माता की पुकार
जो दंगा करते हैं
जो नर संहार करते है
जो जातिवाद की नफरत की आग में देश को में झोंकते
राम- रहीम -इसा - गुरु -गाँधी -बाबा की बात करते है
इन आस्तीन के सांपो से
सावधान ख़बरदार होशियार
मेरे देश वासिओं कसलो कमर,
होजाओ त्यार
इन पापिओं को सबक सिखाना होगा
हर हथियार काम में ला इन्हें उडाना होगा
देर बहुत हो जायेगी
मानवता कराहयेगी
जब देश ही ना रहा
तो नींद कहाँ से आएगी
आज की ताजा ख़बर ...............
कश्मीर जल रहा है
काबूल आतंकियों से थर्रा रहा है
गुलाम इस्तीफ़ा दे दिल्ली चल रहा है
मनमोहन टोकियो में बुश से चोंचे लड़ा रहा है
वाम हका बका मुलायम अवसर ताक रहा है
महंगाई का नाग डस रहा किसान जहर खा रहा है
भारतमाँ का मुकट खतरे में है केन्द्र थर्रा रहा है
समय की पुकारआज की दरकार
जाग दोस्त सुन भारत माता की पुकार
हिंद के नौजवान हिंद की पहचान
ऐ हिंद के युवा तू आगे बढ़ लगाम थाम ले
तू हिंद कि पहचान है तू हिंद को पहचान दे
आयें लाखों दिक्कते पर तेरा कदम ना डिगे
शोषण किसीका होता देख तेरा खूं खौल उठे
तू बेफिक्र आगे बढ़ मुश्किलें कितनी ही आयेंगी
मन मे हो उमंग जिसके जीत उसको ही पायेगी
ऐ हिंद के युवा तू आगे बढ़ लगाम थाम ले
तू हिंद कि पहचान है तू हिंद को पहचान दे
देश का प्रहरी तू देश का मान है तू
देश का भविष्य तू देश का अरमान तू
जाग देख तेरे देश को दुश्मन ललकार रहा है
उठ थाम ले हथियार आतंक सीमा लाँघ रहा है
राम कृष्ण गौतम गाँधी की संतान है तू
राम रहीम नानक और जीसस का आशीर्वाद है तू
हिंद के नौजवान कर तू विजय का प्रयाण
समुद्र की गहराई आसमा की ऊँचाई हो तेरा अरमान
तू हिंद कि पहचान है तू हिंद को पहचान दे
आयें लाखों दिक्कते पर तेरा कदम ना डिगे
शोषण किसीका होता देख तेरा खूं खौल उठे
तू बेफिक्र आगे बढ़ मुश्किलें कितनी ही आयेंगी
मन मे हो उमंग जिसके जीत उसको ही पायेगी
ऐ हिंद के युवा तू आगे बढ़ लगाम थाम ले
तू हिंद कि पहचान है तू हिंद को पहचान दे
देश का प्रहरी तू देश का मान है तू
देश का भविष्य तू देश का अरमान तू
जाग देख तेरे देश को दुश्मन ललकार रहा है
उठ थाम ले हथियार आतंक सीमा लाँघ रहा है
राम कृष्ण गौतम गाँधी की संतान है तू
राम रहीम नानक और जीसस का आशीर्वाद है तू
हिंद के नौजवान कर तू विजय का प्रयाण
समुद्र की गहराई आसमा की ऊँचाई हो तेरा अरमान
Thursday, July 3, 2008
अमरनाथ.....................
बर्फानी बाबा देख तेरी धरा पर कया हो रहा है ।
आज तो तेरे दर्शन का भी टोटा हो रहा है ॥
तेरा नाम लेके सवाली करते हैं तेरे धाम की यात्रा ।
तेरा नाम रटते हमारी पूरी होती है जीवन यात्रा ॥
काश्मीर का भविष्य है तेरी यात्रा ।
लाखों जिन्दगी का पालन करती है ये यात्रा ॥
सदिओं से आते हैं सवाली तेरे दर पे मत्था टेकने ।
अमरता का वरदान पाने आत्मा शीतल करने ॥
गरीबों को झोंक दिया आतंक की आग में ।
यात्रा को भी सवाली बना दिया सियास्तबाज ने ॥
अरबों रुपया पाते है काश्मीरी तेरे नाम पे ।
फिर भी दिखाते हैं दादागिरी धर्म के नाम पे ॥
भोले बाबा , क्या तू भी विदेशी होने जा रहा है ?
या तेरा कहर इन पर टूटने जा रहा है ॥
पुकारते हैं हम सिरफिरों को बुद्धि प्रदान कर ।
अपने भक्तों का मार्ग खोल, दर्शन दे, मुरादे पूरी कर ॥
काश्मीर की आग पुरे देश में फैलने जा रही है ।
'गुलाम'सरकार बचे या ना बचे जनता पिसने जा रही है ॥
जागो देश वासियो इस षड्यंत्र को पहिचानो ।
३७० अभिशाप असर ला रहा है देखो और जानो ॥
बालटाल के ४० हेक्टर ने आज सवाल उठाया है ।
सैकडो हजघर और हाजी सेवा खर्च पर आज फिर ध्यान आया है ॥
भारतवासियों ........सोचो जानो पहिचानो............
विदेशी षड्यंत्र से सावधान हो, मेरी राय मानो
मुफ्ती फारुख और पाकिस्तानी हुकुमरानों ।
काश्मीरी हो, देश के सिरमौर बर्फानी के कहर को मानो ॥
मत जलाओ काश्मीर को तुम भी नहीं बच पाओगे ।
भूल गए कबायली हमला, जो तुम कुछ,पाकिस्तान जा के, पाओगे
बर्फानी बाबा उठ जाग तेरा देश जल रहा है ।
खोल समाधि देख, सवाली, तेरे दर पे आने से डर रहा है ॥
देशवासिओं, सुनो बाबा की हुँकार ।
कमर कसो, आतंकियों से मुकाबिले को, हो जाओ तयार ॥
गुलाम- मुफ्ती -फारुख- की चलने देंगे नही ।
बर्फानी की इज्ज़त कम होने देंगे नही ॥
यात्रा करेंगे भोले को याद करते जायेंगे ।
इंट का जवाब पत्थर से देंगे शहीद हो जायेंगे ॥
आज तो तेरे दर्शन का भी टोटा हो रहा है ॥
तेरा नाम लेके सवाली करते हैं तेरे धाम की यात्रा ।
तेरा नाम रटते हमारी पूरी होती है जीवन यात्रा ॥
काश्मीर का भविष्य है तेरी यात्रा ।
लाखों जिन्दगी का पालन करती है ये यात्रा ॥
सदिओं से आते हैं सवाली तेरे दर पे मत्था टेकने ।
अमरता का वरदान पाने आत्मा शीतल करने ॥
गरीबों को झोंक दिया आतंक की आग में ।
यात्रा को भी सवाली बना दिया सियास्तबाज ने ॥
अरबों रुपया पाते है काश्मीरी तेरे नाम पे ।
फिर भी दिखाते हैं दादागिरी धर्म के नाम पे ॥
भोले बाबा , क्या तू भी विदेशी होने जा रहा है ?
या तेरा कहर इन पर टूटने जा रहा है ॥
पुकारते हैं हम सिरफिरों को बुद्धि प्रदान कर ।
अपने भक्तों का मार्ग खोल, दर्शन दे, मुरादे पूरी कर ॥
काश्मीर की आग पुरे देश में फैलने जा रही है ।
'गुलाम'सरकार बचे या ना बचे जनता पिसने जा रही है ॥
जागो देश वासियो इस षड्यंत्र को पहिचानो ।
३७० अभिशाप असर ला रहा है देखो और जानो ॥
बालटाल के ४० हेक्टर ने आज सवाल उठाया है ।
सैकडो हजघर और हाजी सेवा खर्च पर आज फिर ध्यान आया है ॥
भारतवासियों ........सोचो जानो पहिचानो............
विदेशी षड्यंत्र से सावधान हो, मेरी राय मानो
मुफ्ती फारुख और पाकिस्तानी हुकुमरानों ।
काश्मीरी हो, देश के सिरमौर बर्फानी के कहर को मानो ॥
मत जलाओ काश्मीर को तुम भी नहीं बच पाओगे ।
भूल गए कबायली हमला, जो तुम कुछ,पाकिस्तान जा के, पाओगे
बर्फानी बाबा उठ जाग तेरा देश जल रहा है ।
खोल समाधि देख, सवाली, तेरे दर पे आने से डर रहा है ॥
देशवासिओं, सुनो बाबा की हुँकार ।
कमर कसो, आतंकियों से मुकाबिले को, हो जाओ तयार ॥
गुलाम- मुफ्ती -फारुख- की चलने देंगे नही ।
बर्फानी की इज्ज़त कम होने देंगे नही ॥
यात्रा करेंगे भोले को याद करते जायेंगे ।
इंट का जवाब पत्थर से देंगे शहीद हो जायेंगे ॥
Monday, June 23, 2008
बेवफा के ख़त का जवाब
मैंने एक ख़त लिखा था तुम्हे परेशानी में
कौन जाने की तुम्हे याद भी है की नहीं
मैंने लिखा था जरूरत है सहारे की मुझे
वोह सहारा जो तुम दो तोह इन्य्यात होगी
मैंने लिखा था मेरा कोई नहीं दुनिया में
मैं गई थी आकाश में बादल तनहा
जैसे बसती में किस्सी मोड़ पे पीपल तनहा
जैसे मुरझाया हुआ कमळ कोई पानी में
मैंने लिखा था ये तुझे मालूम न था
"मैं तुम्हे रूह की जागीर नहीं लिख सकती
ख़त तोः लिख सकता हूँ तकदीर नहीं लिख सकती
भूल जाना की खता होगी नादानी में
में एक ख़त लिखा था तुम्हे परेशानी में
कौन जाने की तुम्हे याद भी है या की नहीं
तुमने तो दसिओं ख़त लीखे ते इजहार ए प्यार को
कोन से ख़त को सुना रहे हो अपने दिल दार को
आज भी हमारी रात वोही ख़त पढ़ पढ़ गुजरती है
पढ़ते हैं ख़त और तस्वीर तुम्हारी सामने पसरती है
तुम्हारी परेशानी का सबब फरेबी है
वफादारी तुम से दूर पास लालच और बेसब्री है
इस लिए तुम कहानी सुनाते हो
जब दुसरे की बाँहों में जगह नहीं मिली
तो अपने खतों का वास्ता बताते हो
हम ने तभी तुम्हे आगाह किया था
चिडीया सोने का पिंजरा और सयाद को याद किया था
आज भी कुछ बिगडा नहीं
हम बदले नहीं तुम वापस वहीँ
तुम हसीं हम जवान वल्लाह कया बात है
ख़त मत लिखो चले आओ आज पूनम की रात है
तकदीर की बात करो मत आगाज ए तकदीर हैं हम तुम्हारे
सात जन्म तक का वादा रहा हम ही हैं पीर पैगम्बर तुम्हारे
Subscribe to:
Posts (Atom)
