Tuesday, October 6, 2009

करवा चौथ की महीमा

देवी लक्ष्मी की सब पूजा करते हैं
इसे देख लक्ष्मी वाहन उल्लू जलते हें ।।

एक दि लक्ष्मी बिना वाहन के हो गयी
उल्लू महाराज रूस् गये माता घर में बैठी रह गयी
माँ ने वजह पूछी और खिलखिला  कर हंस पडी

माँ तेरी पूजा ३६५ दि २४ घंटे होती है
तुझे वहां पहुचाने में मेरी बुरी हालात होती है

माँ समझ गयी और दे दिया वरदान
साल में एक दि तेरी भी होगी पूजा और मान

सुहागिन  तेरे नाम का व्रत रखेंगी
चरण छुएंगी और तुझे पूजे ध्यायेंगी

वोह शुभ दि दिपावली से पहिले आएगा
करवा चौथ के नाम से मनाया जाएगा ॥
साथिओं इस दि हर घर में सुबह से रात तक पूजा का माहोल होता है
हर पत्ति पूजा और ध्याया जाता है

हर उल्लू की ये ही कहानी है
पुरे साल करता इंतज़ार कि करवाचौथ कब आनी है

महिमाकरवा चौथ की हर उल्लू ने जानी है
गृह लक्ष्मी की पूजा ३६४ दि और उल्लू की करवा चौथ पर हो जानी है

जय लक्ष्मी माता 

Tuesday, April 7, 2009

पत्थर दिल

पत्थर समजकर आज जो ठोकर लगा गए
समजकर कल वो शायद सर जुकायेगे।।

यह गलतफहमी क्यों हो गयी
की वोह सिर को झुकायेंगे ।

जो माँ बाप को पूछते नहीं
पत्थर कहाँ पूजने जायेंगे ।

ठोकर में पत्थर आया..................
कोई बात नहीं........

इंट ३ रूपये की आती है
नाली में पत्थर लगा कर पैसा बचाएंगे ॥

बड़ी कमजोर निकली तुम्हारी यारी रब्बा


"भूले है रफ्ता रफ्ता उन्हें मुद्दतों में हमकिश्तों में खुदखुशी का मज़ा हमसे पूछिये !

बड़ी कमजोर निकली तुम्हारी यारी रब्बा
दो दिन नजरों से दूर हुए तो खुदकुशी की धमकी दे दी
कहीं हमारा जनाजा निकल जाता तो शायद .............
हुजुर तो जन्नत नशीं होती
अरे हम ऐसे वैसे आशिक नही
जो भूलने दे अपने रकीब को
अपना जलवा दिखाने को कभी कभी पर्दा भी डलता है
आज हमारा जलवा पूरा हिंद देख और सरहा रहा है
कुछ काम का बढ़ना, कुछ कामयाबी का और आगे बढना
कर गया मजबूर,और महरूम इस नाचिच को,
दोस्तों से दुआ सलाम करना
दिल चीर कर दिखा सकते नहीं वर्ना
तुम्हे अचरज होता
अरे वहां तुम्हारे अलावा और किसी का अक्श भी कैसे होता

वीरों की परिभाषा

वीरों की जरूरत
आज भाटों की नही वीरों की जरुरत है
जो भिड सके दुश्मनों से राष्ट्र के खातिर
खून खोलता हो जिसका अत्याचार देख
ऐसे ही चाहिए नोजवान जिसमे हो वेग.
..........
वीरों की जरूरत तो आदिकाल से चली आई है।
आल्हा उदल वीर शिवा छत्रसाल से यह धरा सजाई है॥

खून हो तो खोलेगा यारों
यहाँ तो डालडा और बिसलरी पिलवायी है॥

जो बोले हाथ कटवा दूंगा उसे रासुका,
जिसके साले ............
बीबी बेलगाम चले ............
और खुद बुलडोजर चलवाए .............
यह २ /३ की राजनीति
देश के नवजवानों पर छाई है ।।

बगल में तालिबान दहाड़ रहा...........
२६/११ हो चूका ..........
अब शायद मोदी अडवाणी जैसों की बारी आई है॥

एक नोजवान ने सत्य बोलने का साहस किया।
माया लालू मुलायम प्रियंका जैसो की बन आई है॥

गुरु कुर्बानी किसी मकसद से हो तो रंग लाती है।
नहीं तो खुदकुशी पर देश का कानून हरजाई है॥

इजहारे ऐ महोब्बत

सुबह शाम हमें याद आते क्यों हो,
सपनो में भी आके हमे रुलाते क्यों हो,
मेरा दिल तो सदा तुम्हारा तलबगार रहा,
फिर अभी इससे अक्सर तड़पाते क्यों हो,
ज़िन्दगी पहेले ही खड़ी है दोराहे पर,
इस पर भी तुम हमे भटकाते क्यों हो,
इश्क की इन्तहा बन गया है अब ये दर्द,
झूठे वादों से हमे बहलाते क्यों हो!!

किसी बेदर्द बहैया ने सवाल पूंछा हमसे
हमने कहा अक्स ए आईना देख
कितने दिलों को गुलाब की तरह कुचला तुने
कितने रकीबों इंनायत की दिखा कर तुने
हमने जब इज़हार ए मोहब्बत किया था
तुमसेतुमने दिखाई थी सड़कें और दुनियादारी की मुसीबतें
हम तो आज भी खडे इंतज़ार करते हैं अपने इश्क का
कब मिलेगी दो लह्मो की फुर्सत हमारी दिलरुबा को हमारे लिए
कभी आवाज देकर देखना जालिम
हम ही मिलेंगे इंतज़ार ए मेहरुबा के
कब्र के किनारे भी खडे हुए

Monday, February 9, 2009

परिवार

परिवार से होती है पहिचान
परिवार से बढती है शान ॥

परिवार करता है होसले बुलंद
परिवार ही ख्याल रखता जब तू तंग॥

परिवार न होता तो महाभारत ना होती
परिवार ने बताई भरत के त्याग की चोटी॥

परिवार की महिमा देवताओं ने गयी
शिव परिवार के दर्शन बहुत शुभ होते हैं भाई॥

जब बाबा की गोद में पोता आता है
खेलता कूदता और घोड़ा बनाता है॥

उस समय बाबा की जीना हो जाता है सार्थक
अगर परिवार न हो तो सभी निरर्थक ॥

आप और हम भी एक परिवार ही तो है
जिस के राजा रानी हम और आप है॥


खूब समझाई है परिवार की महिमा....
लेकिन एक बात है आपने भी छुपाई ..
परिवार हीं है जो सीमित कर देता है इन्सान को..
नहीं लड़ पाता ज़माने के जुल्मों के खिलाफ ..
डरता है क्या होगा उसके बाद...
समझौते करवाता है परिवार..
फिर भी सबको भाता है परिवार...
सुखी रहे आपका परिवार


सुमन ..................................

दिलज़लों का हर जगह येही हाल होता है
परिवार के अंदर या बाहर उनका तो मुह लाल होता है

जो परिवार में रह नहीं सकते
वोह समाज में भी शायद खप नहीं सकते

हर सर्दी के बाद गर्मी आती है
हर रात के साथ दिन जुडा होता है॥

हर फूल के साथ कांटे होते है
हर अधिकार के साथ फर्ज भी अदा करने होते है

कुछ लोग सिर्फ अधिकार जानते हैं
जवाबदारी से मुह चुरा के भागते हैं

ऐसे लोग अपने माँ बाप को भी धत्ता बता देते हैं
मजे लेने के लिए पैदा किया कौनसा अहसान किया सुना देते है

हमने यूरोप भी देखा है
जहाँ परिवारों का टोटा है

उनका हाल भी हम जानते हैं
जाने कितने ओल्डएज होम उनकी छाती पे गडे हैं

इसलिए फिर कहता हूँ सुनो खोल के कान
रहना भाईओं के बीच चाहे जंगल हो या मकान

Thursday, February 5, 2009

नेता की महिमा

अफसर नेता दोनों खडे काके लागु पाए
बलिहारी नेता अपनों जो अफसर से सलाम कराए

नेता बैठा पेड़ पर रहा सबकी हरकत देख
चमचों पर करपा करे खागया, देश और खेत

अफसर गुंडे और नेता हैं आज के ब्रह्मा विष्णु महेश
पूरा देश कब्जे में इस त्रिमूर्ति के बाकी सब अवशेष

ब्रह्मा पूजे विष्णु को विष्णु पूजे महेश को महेश उसे दिल में धारे
ब्रह्मा सबका रचियेता सब एक पर दिखते सारे नियारे

इनकी लाली देखन मैं गया जित देखूं उत लाल
देखत देखत खा गये देश विदेश में गया माल

गिरगिट ने शिकायत करी क्यों करते मुझे बदनाम
रंग पलटने दल पलटने और आँख बदलने में यह मुझसे महान

रहिमन नेता की झोपडी होत बहुत विशाल
चमचे भी बना गये कार, दुकान महाल

नेता से डर कर रहियो कभी न निभावें प्रीत
सरकारी दामाद यह इनकी माल पचाने की रीत

पढ़ लिख कर तू कया करेगा बन जा किसी का चमचा
नेता बन, माल डकार, होगा तेरे पास रुतबा, नाम और पैसा

जीत गया तो मंत्री और हार गया तो निगमों का अध्यक्ष
पार्टी में रुतबा तेरा, थाने में शब्द तेरे, जनता को तू भक्ष

जेल गया तो कया हुआ कल अख़बार में देख
नेता बनने का रस्ता होत जात जेल के खेत

Monday, January 26, 2009

गणतन्त्र दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएँ

यह आजादी का सुनहरा गणतन्त्र
विश्व में बेमिसाल हमारा प्रजातंत्र ।

अब तजुर्बेकार हो गया यह तन्त्र
हमे फक्र है की हमारा है यह गणतन्त्र॥

याद आती है लिछिविओं की जिहोने विश्व को गणतन्त्र दिया
नमस्कार बाबा साहेब अम्बेडकर को जिन्होंने विश्व का सर्वोतम सविधान दिया ॥

75 सालों में इसमें सैकडो परिवर्तन हो गये
जैसे सोने की मूर्ति पर हीरे मोती टंग गये ॥

इसही सविधान से बिना खून के सत्ता की परिवर्तन है
बोलने, पूजा, व्यवसाय, आवागमन की पूर्ण स्वतन्त्रता है॥

सांसदों को,विधायकों को, नगर ग्रामसभाओं का चुनाव होता है
इसके सामने प्रधान मंत्री को भी सर झुकाना होता है ॥

उपर बैठे कह रहे होंगे गाँधी नेहरु तिलक गोखले
लाजपत भगत राजगुरु चंद्रशेखर सुभाष जो लड़े और चले ॥


हर वर्ष लगेंगे मेले बस शहीदों का येही मुकाम होगा
जब भी उनकी याद आएगी आँखे नम होंगी और जुबान पर नाम होगा ॥

तूफान से लाये थे आज़ादी के परवाने किस्ती निकाल के
इस गणतन्त्र को रखना मेरे साथियो संभाल के॥

दुश्मन आतंकी खडा है दरवाजे पर बंदूकें तान के
सम भारतमाता की खाते हैं रखेंगे हम इसको सम्भाल के ॥

आप को गणतन्त्र दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएँ

Monday, January 5, 2009

एक और नयी सुबह का फूल ......................



बधाई नव वर्ष की और क्षमा करना मेरी भूल

कल सुबह भी देखा था खिलता मुस्कुराता फूल
हुयी शाम और ढल गया फूल

क्षण भंगुर यह दुनिया,
जानत सभी फिर भी गये भूल

पल की खबर नहीं, सामा १०० वर्ष का
प्यार को समय नही, झगडा कयामत का

फिर भी एक और नयी सुबह और उसका फूल

सोचता हूँ समय थमता नही
रात रूकती नही सुबह थमती नही

हर वर्ष फिर नव वर्ष की गूंज और हाथ में फूल

लेते भी, देते भी, दोस्त भी दुश्मन भी
राजा भी रंक भी, साधू भी संत भी
हिन्दू भी मुसलमा भी
सभी लगते इस नई सुबह का
खिलता मुस्कुराता चमन का फूल

फूल के साथ में कांटे जो दिखते नही
फिर भी दिल में दे जाते शूल

ऐसा ही कुछ हुआ गत वर्ष
जैसे बम्बई पर आतंकवादी हमला
शेएर बाज़ार का ४ लाख करोड़ पी जाना
पुरे विश्व का मंदी में घिर जाना
संसद में नोटों का लहराना
बेनजीर का हलाक ............और
श्रीमान १०% का सदर बन जाना
अर्र्रे ............दुनिया के थानेदार पर जूता चल जाना

किसी को फूल किसी को कांटे
किसी को शूल किसी को तोहफे
................एक और नयी सुबह .....और.....फूल

Thursday, November 27, 2008

धिक्कार


भारत के कर्णधारों को
देश के सुरक्षा के जिम्मेदारों को
धिक्कार धिक्कार धिक्कार

जो घर के रहने वालों पर भोंकते काटते हैं
बाहर के आतंकियों को देख दुम दबा कर भागते है
निर्दोषों की जानो को दाव पर लगा कर झूटी शान बखारते हैं
धिक्कार धिक्कार धिक्कार

उन देश के नेताओं को
जो सुभाष भगतसिंह आजाद का नाम बदनाम करते
पंचशील को पुकारते हर बार यह आखिरी है वादा करते
ऐसे भेडियों को
धिक्कार धिक्कार धिक्कार

कभी कारगिल तो कभी संसद
कभी काशी तो कभी दखन
कभी दिल्ली तो कभी बम्बई
देश की अस्मत को लुटाते
निर्दोषों की जान गवांते
ऐसे पाखंडियों देश द्रोहियों को
धिक्कार धिक्कार धिक्कार


सब्र का बाँध टूट गया है
देश आंसुओं डूब गया है
विदेशी ठठाका मार रहा है
ऐसे शिखंडी सरकार पर
धिक्कार धिक्कार धिक्कार

देश की सेना क्या सो रही है
गुप्तचर सेवा क्या सुप्त हो रही है
ATS क्या अब रो रही है
ऐसी सरकार को
धिक्कार धिक्कार धिक्कार

देश भक्तों और सेना गोरवों पर
कहर बदनामी बरपा कर
अफजल को फांसी दोगे तो काश्मीर जल जाएगा सुना कर
देश की आन बान शान लूटा रही है
ऐसी राजनीती को
धिक्कार धिक्कार धिक्कार


आज जरूरत है इंतकाम की
इन आतंक के सौदागरों के दिल में
भारत के बदले और इंतकाम की
एक के बदले चार की यानी पैनी तलवार की धार की
नहीं तो हमें नहीं स्वीकार


उठो
देशवासिओं ऐसे देश के दुश्मनों से देश को बचाओ
खुल के सामने आओ और इनको बोली गोली और मतों से सबक सिखाओ





Saturday, October 25, 2008

गुरु को संदेश


गुरुदेव का आशीर्वाद बडी मुद्दत बाद मिला
जैसे डूबते जहाज को सिंदबाद मिला

हम तरसते थे गुरु ज्ञान पाने को
अपने क ख ग सुनाने और मार खाने को

एक समय ऐसा आया
गुरु ने हमे दिल से दूर हटाया

हमे मालूम ना हुयी त्रुटी हमारी
क्यों गुरुदेव ने हमारी यादें बिसारी

महीने कई बीत गये
गुरु हमे भूल गये

आज दिवाली आई है
शायद गुरुमन में प्रीती पुनः आई है

धन्य हुआ जीवन हमारा आप का संदेश आने से
मन गयी दिवाली, छूटे पठाखे, पेट भर गया खाने से

अब अगर भुलाया तो हम भी आपके चेले हैं
फिर नही कहना, बेसुरे, नाकारा, अलबेले हैं

तुम हमे छोड़ दोगे हम 'यह' दुनिया छोड़ देंगे
गुरु ही नहीं तो हम मान किसे देंगे

दीपावली पर आपने नया विषय उठाया है
बिल्कुल ठीक फरमाया है

दीपावली का प्रकाश



दीपावली प्रकाश और दिलों के मिलने का त्यौहार .
दीपावली ख़ुशी और उमंग का त्यौहार

हर वर्ष हम गणपति लक्ष्मी मनाते हैं
रिद्दी सिद्दी, धन दौलत, सुख शांति मनाते हैं

राम का राजतिलक उत्सव सदियों से मनता आया है
आज फिर वही अवसर आया है

शुभ हो यह अवसर खुशीआं भरपूर पाओ
लक्ष्मी पूजन करो गणपति को रिझाओ

मित्तल परिवार की बधाई और शुभ कामना सुनो और बांटो
जो खुशीआं मिले उन्हें जरुरतमंदों में भी बाटों

Thursday, October 23, 2008

मानस शोर्य कामना

जिसने भी तुम्हारा नाम मानस रखा होगा
तुम्हारे नामकरण के बाद इतहास बन गया होगा

हम बचपन से सुनते हैं
खत्री बहुत सुंदर होते है

आज हम देख रहे है
सुंदर ही नही रचियक भी पा रहे हैं

इस उम्र में तुम्हारा यह हाल है
जल्द बडे हो जाओ खाली पडे हाल हैं

तुम्हे बहुत आगे जाना है
दुनिया को बहुत कुछ सुनाना है

आज स्कूल की पुस्तिका में स्थान मिलता है
कल विश्व प्रसारण में उच्च स्थान दिखता है

हर फिल्म में हीरो कवि और गायक होता है
सुना के अपनी कविता कविताओं को मोहता है

तुम्हारी भी उम्र आने वाली है
इस कला की जरूरत तुम्हे जल्दी ही पड़ने वाली है

अपने जैसी ही नायिका का वरन करना
जो तुम्हारी प्रेरणा बन सके ऐसी का चयन करना

कुछ वर्ष शादी के बाद अपने जैसा चिराग जलाना
उस भी मानस यानी मानसपुत्र खत्री बनाना

और क्या लिखें आज इतना काफी है
हमारा आशीर्वाद, आशीष, तुम्हारा साथी है

*********************

रामचरित 'मानस'

तेरे प्यार की क्या तारीफ करूं कुछ कहते हुए मैं डरता हूँ
कहीं भूल से यूँ ना समझ लेना की मैं तुम से महोब्बत करता हूँ

सात समुन्द्र पार से मैं लेता हूँ तुम्हारी बलैयां
तुम अयोध्यावासी मैं तो केवल रामभक्त हूँ भैया

हम हैं दंडकारन्य लंका के पडोसी महिसासुर की नगरी के दक्षिणवासी
तुम पढ़ लिख राम बनाना आना इधर बन सन्यासी

सीता जैसी कोमलांगी तुम्हारे साथ हो और लक्ष्मण जैसा भाई
हनुमान मिलेंगे यहाँ तुम बनाना तुलसीदास की चौपाई

लिखना पढेंगे सभी ध्यान से
तुम भी तर जाओगे हम भी पार उतर जायेंगे इस जहान से

Monday, October 20, 2008

शब्दों में भी कंजूसी

आप को एक कंजूस सेठ की कथा सुनाते है

एक नगरसेठ नामी कंजूस था उसके एक साधू पधारे और उसे प्रभु आराधना का उपदेश दिया. उसने खर्च का रोना रोया तो मानसिक पूजा का तरीका समझाया.
सेठ ने रोज रात शयन से पहले मानसिक पूजा प्रारम्भ कर दी. पहिले गंगा जल से स्नान करा, पुष्प चढा. दीप दर्शन के बाद शक्कर का भोग अर्पण करने का अभिनय करता था. " जैसे चम्मच हाथ में हो शक्कर के पात्र से निकाल चढाने के साथ प्रभु भोग लगाओ" बोलता था.

एक दिन शायद सोने की हडबडी में गलती से दो बार भोग अर्पण कर बैठा.
तुरन्त ख्याल आया अररे क्या अनर्थ हो गया ? भगवान जी को तो ज्यादा शक्कर खाने से मधुमेय रोग हो जायेगा और तुरंन्त उच्चारण किया प्रभु एक चम्मच वापिस ली.
प्रभु को बड़ा गुस्सा आया और प्रगट हो उसका हाथ पकड़ बोले अरे कंजूस इस मानसिक अर्पण में भी तेरा कुछ लग रहा था क्या?

उधर कंजूस सेठ रो रहा और नाच रहा था. क्यों? इतने दिन शक्कर चढाई आज ही क्यों वापिस ली अगर पता होता की वपिस लेने से प्रभु प्रगट होते हैं तो पहिले दिन ही वापिस ले लेता

शक्कर भी लगी और प्रभु दर्शन भी देर से हुए



कैसी लगी कथा ?

इश्क की नियामत

हम अभी जवान है और मरने से डरते हैं
हम अभी जीना चाहते हैं क्यों की तुम पर मरते हैं

तुमसे मिलने को बहाने किसे चाहिए
हम तो तुम्हारी तस्वीर दिल में छुपा के रखते हैं

तुम कबूल करो या ना करो दुनिया को खबर है की
तुम और हम एक दूजे पर जाँ छिडकते हैं

आसमा है रकीब इश्क का
इसही लिए तो तुम हम कमरे में बंद रहते हैं

तुम हंसो हम देखें, हम हसें तुम देखो
येही इसरार खुदा से हम करते हैं

जख्म कोन जालिम भरना चाहता है
हम तो तुम्हारे दिए घाव इश्क की नियामत समझते हैं

जवाब के जवाब का जवाब

तुम्हारे हुस्न की तपस में
तुम्हारे इश्क की गर्मी में
तुम्हारे आंचल की ठंडक में
तुम्हारे हाथों के खनकते शोर में
तुम्हारी पायल की झंकार में
तुम्हारे हाथों से प्याले में

कोन जालिम बहरा, अँधा, गूंगा, पागल ना हो जाये

हम भी शायद उन्ही में से एक हैं
हुजुर इसलिए खो गये

शनि को कोन जाने
यहाँ तो पूरा हफ्ता ही सो गये

तुम्हारा कया हाल है ?
कम तो नही होगा

इतवार आये या ना आये
दिल में हमारा संदेश ही होगा
=======Reply to reply===========
क्या ये सच है ??!!
"आपकी खुशनुमा आहट दिन या रात
लाती हर किसी के चेहरे पर
दूध सी
गुलाब सी
लोबान सी
धुप सी
चाँद की चमक सी मुस्कुराहट !!"

शायाद ये सच ही है .....
नहीं तो.....
आपने ये कैसे नोट नहीं किया के आज sunday नहीं saturday है!!
मैंने ग्रीटिंग तो sunday का भेजा था!!
शायद ....
"दूध सी
गुलाब सी
लोबान सी
धुप सी
चाँद की चमक सी मुस्कुराहट में खो गए थे!!
हा हा हा हा ....
------Reply-------------
गुड मोर्निंग नमस्कार

सीता को देनी पडी अग्निपरिक्षा क्यूं
इम्तेहां गैर इत्फाकी का दूसरा नाम यूं


अंधियारों में भी खिलते है फूल
धूल में ही लगते है मुलायम फूल
आपकी खुशनुमा आहट दिन या रात
लाती हर किसी के चेहरे पर
दूध सी
गुलाब सी
लोबान सी
धुप सी
चाँद की चमक सी मुस्कुराहट
----------Message------------------
गुड मोर्नींग गुरु देव ....

इम्तेहाँ मुशीबत और भला ..
अधियारो में कोई है खिला ..
बेचैन बहारो की आहट..
चहरे में चित चितवन सजती
लोबान सी ख़ुश्बू मुस्कराहट

Monday, October 13, 2008

यु आर वैरी ग्रेट

तुसी सानु ग्रेट कहंदे हो
ग्रेटदा मतलब भी समझदे हो ॥

अस्सी त्वानू एक असली वाकया सुनांदे ने
तुवाणु ग्रेट दे अंदर दा मतलब समझान्दे ने ॥

इक यारनु भाभी जी तुस्सी बडे ग्रेट हो कहंदी आदतसी
सानु सुनके लगदी सी दिल ते छुरे घोपन सी ॥

अस्सी एक दिन पूछ बैठे
राज ओउद्दी गल दा खोल बैठे ॥

अस्सी पुछिया ओये सालेया सिर्फ भाभिआं ही क्यों ग्रेट होंदी हैं
अस्सी कया सोने नहीं या भाभिआं की ज्यादा दुद्द देंदी हैं ॥

सुन के अस्सी हैरान हुए,
उस कुत्ते दी गल ते हंस के लोटपोट हुए ॥

उसने अपने बचपन दा ईक वाकया सुनाया
सच्च था बचपन में उसे डकैतों ने था उठाया ॥

यारा जो हालात उन्होंने मेरी दो दिना में बनादेयी सी
वोह तो इन् भाभियाँ नु रोज सहना पडदा ही।।

इसही लिए इनाणु मैं भाभी जी यु आर वैरी ग्रेट कहंदा हूँ
मैं भी उसदिनतो जो ग्रेट कहंदा उनु भाभी वल समझदाहूँ ॥

कैसी लगी मेरे ग्रेट दोस्त को यह कहानी
अर्थ समझा या फोन कर पूछ ले जानी ॥

Sunday, October 12, 2008

हम सफर की याद

तुझे देख कर याद आते हैं कुछ जंगल के रास्ते
चलते थे हम तुम साथ साथ एक दुसरे के वास्ते॥

घर में कमरा एक और एक दरी होती थी
याद है रात को टांग कर दरी पार करते थे सदिओं के फासले ॥

दरी के इस पार तुम हम और उस पार दुनिया सोती थी
अररे, वोह भी क्या हसीन खुशनुमा मधुरात्रि होती थी ॥

आज दूरियां मिट गयी इंटरनेट आ गया
वेबकेम ने बंद कमरे का रहस्य भी दुनिया को दिखा दिया ॥

एक घर में चार कार, दस फोन होते हैं
हर कमरे में टी वी और टेप सजे होते हैं ॥

फिर भी दूरियां दिलों की इतनी हो गयी
मतलबपरस्ती इंसान की कहानी हो गयी ॥

कुरान, बाइबल, भागवत रामायण बासी होगयी
खता लह्मो ने करी, कहानी सदिओं की हो गयी ॥

आओ फिर उन लह्मो में खो जायें
वोही जंगल हो, हम तुम हों डाल के गलबाहें

Friday, October 10, 2008

आज का तब्सिरा

नाव चलाने वाले मल्लाह को गम था तो बस एक ही गम था ।
साहिल पे आके किस्ती जहाँ डूबी वहां पानी बहुत कम था ॥

देश की नाव और मल्लाह का भी येही हाल है
नाव में बैठे यात्री परेशान बेहाल है ॥

साहिल सामने नजर आरहा लेकिन मल्लाह गाफिल सो रहा ।
नाव आधी डूब चुकी किस्ती में सुराख़ हो चूका ॥

शेर गीदड़ बन गये शेयर बाज़ार ढह गया ।
सोना सुर्ख हो गया रूपया सौ का आधा रह गया॥

टकटकी लगी है सबकी इंतज़ार है साहिल से राहत के आने की ।
नाव को और पथिक को जीवनदान देने और कायनात बचाने की

उठो हिम्मत करो, मत देर करो, सब छुट जायेगा
जब देश ही नही रहा तो देशवासी कहाँ जायेगा

काशमिरिओं को संभाला हम वतनो ने
हम अगर डूबे,भागे,तो ठौर नहीं प्रभुचरणों में

Thursday, October 9, 2008

विजयदशमी पर्व का महत्व

विजयादशमी का पावन पर्व हमे कुछ याद कराता है ।
दशमुख के दहन की याद कराता है ॥

हम सदियों से जन्म मरण दिवस मनाते आए हैं ।
इस ही रूप में श्रधा के पुष्प चढाते आए हैं ॥

हरवर्ष ईद क्रिश्मस मनती है,गुरुनानक जयंती आती है ।
गाँधीजयंती ,बालदिवस और आधीअधूरी आजादी भी मनाई जाती है ॥

हर बच्चा अपनी वर्षगाँठ मनाता है।
हर जोडा शादी की सालगिरह पर बीबी के नाज़ उठाता है॥

आज देश में देशद्रोही मक्कारों की वर्षगांठ मनाई जाती है।
चारण चाटुकारों द्वारा उनकी झूटी महिमा सुनाई जाती है ॥

कल तक जो गबन के आरोपों में घिरे रहा करते थे ।
वोह आज देश के नेता और जनता खडी है सकते में ॥

आज अगर गांधी भी इस भारत में वापिस आ जायें ।
देख इटेलियन गांधियों को शायद वोह भी शरमा जाये ॥

त्रेतायुग ने दशानन के दस मुख दिखाए थे।
लालच, इर्षा, घमंड, द्वेष, परनारी आदि के पाप गिनाये थे ॥

रावण तो महाज्ञानी, पराक्रमी वेदपाठी, पोलत्सय था ।
इन्द्र यम कुबेर अग्नि वरुण विजेता तेजस्वी था ॥

आज कलयुग में भी रावण हैं।
जिस गली में चले जाओ एक दो नही बावन हैं॥

विजयदसमी की कल ही नही आज भी जरुरत है।
दसमुख से क्या होगा आज तो सौ की जरूरत है॥

आज (जनता) सीता (नेता) रावन की लंका में कैद हो गयी।
हनुमान दलाल बन गये सीता नीलाम हो गयी॥

विजय दसमी का पर्व नया संदेश लाता है।
दसमुख हों या सौमुख हों उनसे लड़ने को जगाता है ॥

एक दिन तो हर बच्चा राम बनना चाहता है।
आतंक, द्वेष, लालच,
देशद्रोह, मक्कारी, महंगाई,
गरीबी, बीमारी,छल कपट,
झूट, बेईमानी, लम्पटता
को जलाना चाहता है ॥

इस ही लिए यह पावन पर्व आता है।
राम नाम, राम राज्य, राम चरित्र की याद दिलाता है ॥

आओ हम भी यह विजय पर्व मनाये।
दसानन दहन का विशाल आयोजन करवाएं ॥

सीता को आजाद कराने की
दशानन को मार गिराने की
दलालों को भगाने की
विभिष्नो को दूर हटाने की
कीगरीबी, भुखमरी, बेकारी,
बदसलूकी, गद्दारी,चोरबाजारी,
आतंक, लालच, छलकपट, मक्कारी
दसमुखों को दहन करने की शपथ खाएं ।।

Wednesday, October 8, 2008

जीवन की सच्चाई

कभी कभी दिल की आग को भड़काने के लिए ।
प्रितम के दिल में अपने को जानने के लिए ॥

दुनिया को अपने प्यार की किताब पढाने के लिए।
कसमे वादों को फिर से दोहराने-अजमाने के लिए ॥

चकोर ढूंढ़ता,चाँद भी बदली में छिप जाता है ।
दिवाना भी इसरार करवाने के लिए गुम जाता है ॥

ऐसा ही कुछ मेरे साथ हुआ ।
मैं ने भी कुछ ऐसा ही किया ॥

'या' शायद अनजाने में मै चाहने वालों से दूर हुआ ।
दिल बेकरार था दिन चैन रात नींद से मरहूम हुआ ॥

तपन मुझे भी उतनी ही चढी थी ।
आग इधर भी इतनी ही लगी थी ॥

रोज सोचता था यारों की हसने हसाने की बातें ।
रोज सुबह शाम जो होती थी बातें - मुलाकातें ॥

जब वापिस आया तो क्या देखा?
जो दम भरते थे महोब्बत का उन्हें नादारद देखा ॥

कुछ असली आशिको ने ढूँढ मचा दी थी ।
आर्कुट थाने में रपट लिखा दी थी ॥

आ कर मैं ने रपट की कार्यवाही देखी ।
उस पर अपनी स्याही से इबादत फैंकी॥

आपका शुक्रिया जो आप ने इतना मान दिया ।
अपने को हमारा हमदर्द साबित कर हमे गुलाम किया॥

Tuesday, October 7, 2008

हमारी कामना

खुश रहो
आबाद रहो

चैन से जीयो
सालों नाबाद रहो

हर सुबह नया सूरज देखो
हर रात नया चाँद ताको

हर पल को जीयो
यादों को दिल से ना बांधो

हर रात में दिन
हर गम में ख़ुशी

हर मा में ममता
हर माशूक में अदा

हर मन्दिर में बुत
हर काबे में खुदा

मिलता है चाहने वाले को
उठा नजर मिला जिगर

भूल जा गम
मना दीवाली रोज हर दम

हर दिन खुशनुमा होगा
हमे याद कर प्रेरणा ले रहा होगा

शिकायत - नई सुबह

तुम करो शिकायत हक तुम्हारा है
तुम से दूर रहे नसीब कसूर हमारा है ॥

कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है
दुसरे की गलती को भी ढोना पड़ता है ॥

अपने लक्ष्य को पाने, गोमाता को बचाने,
गोबर गोमूत्र के दाम ग्वाले को दिलवाने ॥

हम ने उद्योगपतियों को बुलाया था
इसे सत्य करने का बिदा हमने उठाया था ॥

आज इसके लिए खुद पहल कर बैठे हैं
मथुरा में गोवर्धन उद्योग की शुरुआत कर बैठे हैं ॥

दीपावली तक आशा है उत्पादन निकल आने
की पुरे देश में गोमाता के नाम का डंका बज जाने ॥

का गोबर से टाइल बोर्ड का पहला उद्योग होगा
आज पर्यावरण की समस्या - गोबर बिक रहा होगा ॥

हर गाय के गोबर का रु२० गोमूत्र का रु३० जिस दिन मिल जायेगा
कोन बेवकूफ उस गोवंश को कसाई के हाथ थमाएगा ॥

ऐसे लगता है ...........

बदले बदले से मेरे सरकार नज़र आते हैं
हमे तो........ बर्बादी के...... आसार नजर आते हैं
अगर आप फैन हमारे तो हम आपके कूलर हैं
आप गुरु - हम चेले ऑरकुट में साथ साथ खेले हैं
ऐसे लगता है ...........
आप कलाकार - मैं दर्शक
आप बादल - मैं कृषक
आप खुदा - मैं पूजा
आप हुस्न - मैं इबादत
आप हसीना- मैं इश्क
आप आप - मैं भी आप
मैं बेटा - आप मेरे बाप
आप जिन्दगी - मैं रवानी
आप नियामत - मैं जवानी
कैसी रही यह सीढ़ी
............बताना सानी

Sunday, October 5, 2008

वो सात समंदर पार गया

लल्लू ने स्कूल में लंदन रोम के बारे में पढ़ा था
ऊँचे मकान फैले मैदान देख उसका मन चला था ॥

सपने में आती थी उड़ते हवाई जहाज की आवाज और तस्वीरें
खुल जाती थी नींद जैसे उसने थे सात समुंदर उनमे पार करे ॥

जब भी किसी नजूमी,पंडित से मुलाकात होती
सिर्फ़ एक ही विषय पर बात होती ॥

मुह पर बताते उसके भाग्य में विदेश यात्रा
पीछे से कहते थे कोई पागल भी करता है विदेश यात्रा ?

सोचते सोचते दिन बीत गये साल निपट गये
लालू जी कक्षा 1२ से कोलेज में धमक गये ॥

दोस्त दिखाते थे ठाट से विदेशी माल को
लल्लू जी तड़पते थे रातों के देखे ख्याल को ॥

एक दिन कोलेज में घोषणा हुयी
अमरीका से चुनाव समिति आने की तिथि तय हुई ॥

लल्लू जी ने भाग लेने की तयारी करी
दोस्तों ने तानो के बारिश करी ॥

दिन निकलते गए
लल्लू जी तड़पते गये ॥

इंतज़ार की घड़ी खत्म हुई
विदेशिओं की टीम आ के जम गयी

लल्लू जी बुलाये गए
अररे, लल्लू जी तो बेहोश हुए ॥

आते ही 'गोड़ सेव दी किंग' चालू किया

फ़िर जन गन मन भी सुना दिया ॥

विदेशिओं ने रास्ट्र गीतों को मान दिया
सभी ने साथ दिया और उठ के सेल्ल्युट किया ॥

लल्लू जी के देश प्रेम से अमरीकी अभिभूत होगये
सवाल कुछ पूछने थे कुछ और ही पूंछे गये

देखते ही देखते लल्लू जी का चयन हो गया
सात समन्दर पार का प्यारों सपना सच हुआ ॥

नये कपडे सिलवाये गये
पासपोर्ट वीसा टिकट बनवाये गये ॥

वोह दिन भी आ गया
एअरपोर्ट पहुंच जहाज पकडा गया ॥

इंतज़ार की घडियां खत्म हुयी
उलटी गिनती चालू हुयी ॥

जहाज गुर्राना चालू हुआ
व्योमसुन्दरी ने सुचना, नास्ता, दारू चालू किया ॥

देखते ही देखते देश दूर होगये समंदर आ गया
लल्लू यानि वो इंजिनीअर ललित प्रशाद सात समंदर पार गया ॥

Saturday, September 13, 2008

आज फ़िर चला पटाका

आज हिमाले की चोटी से 
फिर किसी ने पुकारा है ।
आतंकवाद के साये में धूर्त जलते 
पडोसी ने ललकारा है ॥

पूरा भारत घूम, सिमी मुजाहिद्दीन, 
हिन्दोस्तान  में फिर धमका गया ।
भारत के सपूतों ने आईएसआई की 
इस चुनौती को स्वीकारा किया ॥

आतंक के सौदागरों को 
चेतावनी का संदेश भिजवाया है ।
बम फोड ले सडक खोल ले
 हिंद-कश्मीर हमारा है ॥

कितने ही सालों से जालिम तुने 
मासूमों पर कहर बरपाया है ।
हम ने मुहतोड़ जवाब दिया 
और हर जगह तुझे हराया है ॥

खेमकरण और कारगिल के संग्राम 
की पिटाई तू क्या भूल गया ।
जम्मू हो या सूरत, हैदराबाद हो या
 बनारस चाहे संसद तेरी मौत भूल गया ॥

शायद खावायिश लालकिले पे चाय पीने की
 अभी भुला नहीं तू ।
शास्त्री के जय जवान की मार 
को आज भी याद कर तू ॥

राम कृष्ण गौतम गाँधी तिलक जवाहर
 के हम वंशज हैं जान ले ।
सर पे कफ़न माथे पे तिलक, 
कमर कसे है मोदी की सेना मानले ॥

हमने विश्व को मानवता का सन्देश दिया ।
पंचशील और सद्भावना को माना और जिया ॥

मजहबों से परे जा हर कौम को आदर दिया ।
इस देश में हर मजहब ने प्यार अमन को जिया ॥

हमने विश्व से आतंक 
ख़त्म करने का अहद लिया ।
बंगबंधुओं से, अफगानों से, 
पूछ हमने क्या क्या नहीं किया ॥

हमें लाहौर शांती की रेल भेजना आता है ।
तू छुरा घोंपे तो कारगिल 
भी करना आता है ॥

मुल्क में जमुरियत फिर से दस्तक दे रही है ।
बेनजीर को लुटा के इंसानियत भी रो रही है ॥

सात समुन्द्र दूर बैठा 
तेरा आका आज तुझे जान गया ।
हम कुछ भी ना करें 
दुनिया का थानेदार 
तो डंडा तान चुका ॥

कुरान-हदीस के पाक फतवों को भुला तू
 कुफ्र की वकालत कर रहा है ।
अपनों को भड़का के तू उन्हें क्यों 
नापाक नाकाम बदनाम कर रहा है ॥

दुनिया कहाँ से कहाँ तरक्की 
कर गयी तू भी इसे जान ले ।
झूट बोलना आतंक बोना- 
लाशे काटना गलत है मान ले ॥

2025  के पाक महिने में सिजदा कर
 कुफ्र  से तौबा मांग ले ।
छोड़ दे यह ओछी हरकते विनाश की,
तरक्की की डगर थाम ले ॥

मत ले इम्तहान नहीं तो तू पछतायेगा ।
कसम से हम उठ गए तो कौन बचायेगा ॥

भारत वासियों मत घबराना 
सब तुम्हारे साथ है ।
हम एकता, सावधानी, कठोरता, 
निरभ्यता, सद्भाव है ॥

हिम्मत रखना मत घबराना 
 आतंकियों को सबक सिखाना है ।
बाबा बर्फानी के दर्शनों को जाना है 
आशीर्वाद पाना है 

जनगनमन, सत्यमेव जयते और 
वन्देमातरम गाना है ॥

Thursday, September 11, 2008

एहसास ए इश्क

रात तनहा नही सितारों से भरी होती है ।
दूजे की बगल में हूर की चाहत भी किस्मत से शिकायत करती है॥

जिसको चाहते हैं नही मिलती यह नसीब या खेल कहो ।
आशिक की तबियत तो गमगीन नर्म करती है ॥

फूल ही नही हर कांटे की दास्ताँ अलग होती है ।
हिफाजत करे काँटा, कली हसीना के जुड़े में जा सजती है॥

कांटा चुपचाप फना हो जाता है इश्क का एहसास लिए
उसकी दिलऔजान जैसे फूल के पास गिरवी होती है ॥

कभी कांटे के दिन भी आते हैं
जब कली के साथ चुने, जुड़े में फूलों का सहारा बन पाते हैं ॥

अली इस अरमान से कली के साये में भटकता है
मिलेगी फतह नाकामयाबी से ना डरता है ॥

क्या हुआ जो पा ना सका रस ए गुल वोह अली
लुटाता मिट गया बेपरवाह इश्क ए कली ॥

उस अली और कांटे का एहसास किसी को नही
मजनू , फरहाद महिवाल के किस्सों का भी इल्म nhi ॥

इश्क के पुजारी उनको आज भी सिजदा करते हैं
कसम उनकी खाते और महोब्बत करते हैं ॥

कभी देखते इश्क लुटता दुसरे की बाहों में आह भरते हैं
माशूक जब दगा देता तब भी अहद इक तरफा करते हैं ॥

हैंयारां अकेले हो तन्हा हो तो याद करना
छोड़ खुदा का दर भी आएंगे इतना इतबार करना ॥

तारों से फरमाईश

यह बेकरारी है,सबब ए इंतजारी चाँद के प्यारों जागतेरहों
हमारी जानेमन आज आ रही है सितारों जागते रहो ॥

वोह आयेनही ऐसी बदकिस्मती नहिहमारी तुम
jab tak ना आये प्यारी रातहैभारी तारों साथ में रहो ॥

चाँदसेप्यारी जान है हमारी तारों रश्क ना करो
फक्र हमे चाँद हार गया बाजी तुम गवाह तो हो ॥

जाग रहे पाने को राजदारी इस बदख्याल में न रहो
कल ढिंढोरा न पीटना हमारे राज का कसम तुम्हे हो ॥

वोह आये या ना आए जागेंगे रात सारी तुम हामी तो भरो
चाँद छिपगया शर्मसे बादलो की ओट में उनका इस्तकबाल करके
...........अब तुम्हारी बारी आगे बढो ॥

लाना उन्हें हमारे गरीबखाने पे तारों की छाओं में ऐसा करम करो
सीता की बेकरारी अशोकवन में तारी ऐसी ही कोई जुगत करो ॥

Monday, September 8, 2008

वकील भाई को जन्म दिन की बधाई

वकीलों का भी जन्म दिवस आता है
वोह भी उसे बडी धूमधाम से मनाता है

कमल के समान चेहरा
उपर से काला कोट तुम्हारा

हमे भी कुछ कहने को
कुछ पैरवी करने को
जन्मदिन की खुशीआं मनाने को
तुम्हे बधाई सुनाने को

हजारों साल जीने को
और हर साल में हजारों दिन बनाने को

प्रभु से अर्दास करने को दिल चाहता है

हमारी अरदास कबूल होगी
तुम्हे दुनिया की सब खुशीआं नसीब होंगी

हमारी मिठाई
हमारे तुम तक आने तक
या तुम्हारे मैसूर आने तक
उधार रखनी होंगी

इस विश्वास के साथ

तुम्हे जन्म दिन की बहुत बधाई
हम ही नही पूरा जग सुनाता है