Wednesday, June 29, 2022
दिल की तड़प
Thursday, June 2, 2022
गौसेवा हेतु आश्रुपूर्ण मिलन
प्रिय
Wednesday, February 9, 2022
मैं रोज तराना गाता हूं
मैं रोज तराना गाता हूं
Monday, November 8, 2021
अधूरी दिवाली
हमने ना जाने कितनी दिवाली साथ मनाई
हर दिवाली लक्ष्मी रूप में,लक्ष्मी साथ आई।
कितने ही आरती पूजन साथ किए।
घर दुकान कारखानों में दीप रोशन किए।
पटाखों के धमाकों और शोर में,
फूलझाड़ियों की झरझर में
मिठाई की सुगंध मिठास में
नूतन सुंदर जेवर परिधान में
हर साल तुम मन पे छा जाती थी
नही भूल पा रहा
तुम्हारा दमकता चमकता चेहरा
तुम्हारा उल्लास भरा आभास
दिवाली तो इस वर्ष भी आ गई
पर तुम ना जाने कहां खो गई।
दीप भी जलेंगे
पटाखे भी चलेंगे
मिठाई भी बटेंगी
बोनस भी बटेगा
पूजा भी होगी
लेकिन तुम..........
ना जाने कहां खो गई
यादों के झरोखों में
पलक की कोरो में
हृदय के कोनों में
ढूंढती तरसती आंखें
हर एक की तरसती भावना
मेरे मन में बसी तरसती आत्मा
वर्षों से मेरी प्यारी सखी
मेरे परिवार की एकल कड़ी
दिवाली तो आ गई
पर तुम ना जाने क्यों रूठ गई
ना जाने तुम, कहां खो गई।
यह रूखी बेरंग दिवाली
तुम्हारे बिना नही मनानी
यह अधूरी दिवाली .....
Wednesday, August 4, 2021
चाय बनी हरजाई
Saturday, July 24, 2021
श्रधा सुमन
Wednesday, July 21, 2021
Saturday, June 26, 2021
यार की यारी
Monday, April 26, 2021
हाय आम : वाह आम
Tuesday, November 10, 2020
बिहार का संग्राम 2024
दे दी पटकनी लालू तेजस्वी, राहुल को तुने बिना खडग बिना ढाल।
पटना के रन बांकुरे तुमने कर दिया कमाल।।
कल तक नितीश- मोदी झेलते थे हमले बार बार।
राज में ना बिजली, ना रक्षा, जनता में हाहाकार ।। जयप्रकाश के पठे बिहार में जन्मे दो सितारे।
नितीश इस धरती के तारे।।
सामने थी बेकारी, अन्धकार, और सूखा बाढ़ गरीबी लाचारी ।
साथ थी हिम्मत, हौसला, संगठन शक्ति और दयानतदारी ।।
पांच वर्ष पहीले अंधकार विरासत में मिला था ।
सामने समश्याओं का लम्बा सिलसिला था ।।
लड़ते लड़ते निकल गये सरदारों के सरदार ।
हिम्मत ना हार के आगयी परिक्षा जनता के दरबार ।।
परीक्षक केद्र सरकार के 2010फिर 2015 का सुशासन राज ।
2024 में पुन: जनता के दरबार में आवाज़।।
कहीं राहुल कहीं लल्लू ।।
कुरुक्षेत्र सज चूका।
बिहार चुनाव धधक चूका।।
फिर महागठबंधन बन गया।
ऐनडीए के सामने इंडी रावण सेना सा डट गया।।
ओबेस्सी जैसे देश तोड़क भी आ गए।
कितने ही बिहार के स्वंभू मालिक बन गए।।
हमले होंगे, तीर चलेगै आरोप लगेगै।
अपने पराये हुए, दिल में खंजर से लगेगै।।
जनता पर विश्वास ,कर्म पर भरोसा।
साथ कमल सा कोमल और तीर कठोर सा।।
साथ में और हम होंगे।।
पासवान ऊपर चले गए चिराग अपनो को जलाने आयेंगे।।
भिड़ गये बोल हर हर महादेव अल्लाह हो अकबर ।।
सामने तेजस्वी, लालू राउल, सोनिया।
ना जाने कितने एक से एक बढ़ कर।
काम जीतेगा, विश्वाश बढ़ जायेगा ।
मोदी जी का जादू चल गया। डबल इंजन, डबल युवराज पर चढ़ गया।
सुशासन बाबू का तीर निशाने पर लग गया।।
भाजपा का कमल, पूरे बिहार में खिल गया।।
आओ करें सम्मान इस जीत का।
जो करेगी विकास बिहार का, बिहारी का।।
रन बाकुरो जीत को संभालना साथ निभाना।
कमल खिला रहे, तीर पैना रहे ।
जनता की आस को निभाना।।
प्रस्तुतकर्ता डा श्रीकृष्ण मित्तल
Friday, November 6, 2020
करोना को जवाब पटाखे बन्द
Thursday, October 1, 2020
डाक्टर का मशवरा
Friday, August 14, 2020
..पिताश्री....
Sunday, August 2, 2020
राम मन्दिर निर्माण
Monday, May 25, 2020
यदि PM पप्पू सा होता
Saturday, October 5, 2019
Wednesday, February 27, 2019
पाकिस्तान का राष्ट्रीय गान...
हम "जानवर" हैं इसके , ये "चिड़ियाघर"हमारा. .
"नामर्द" है हम वतन के.. "चीन" माई बाप हमारा..
सारे जहाँ से "लुच्चा"... "पाकिस्तान" हमारा.....
हिन्दू क्रिस्तान सिखों पर सितम करना भगाना
भिखारी हैं हम, यह धंधा है हमारा |
लोकशाही की तबाही तानाशाही की दुकानदारी
सारे जहाँ से "लुच्चा"... "पाकिस्तान" हमारा.....
Thursday, August 30, 2018
मचलता दिल
तूफान सा घुमड़ता मंजर
किसी से मुलाकात की आस
किसी की मासूमियत का एहसास
जरूर वोह ही होगा
जिसकी आस में बिछी हर सांस
झुकी झुकी आंखे
आमंत्रण देती खास।
वादा
प्यास तेरी नियति, शांत कर पाऊंगा।
आसमा की बदली सा
सावन की रिमझिम सा
धरती के गर्भ में नए फूल खिलाऊंगा।
मरुधरा में नखालिस्तान
हरा भरा चमन खिलाऊंगा
तेरा मेरा अस्तित्व होगा एक
तेरी प्यास, मेरी आस, जमाने की अरदास
पूरी कर जाऊंगा।
मैं तेरा साजन,
ना भटका हूँ ना लौट कर जाऊंगा।।
यौवन का प्रवाह
शीतल धारा जीवनदायनी हजारों को
तुम भी तो आकाश गंगा हो
शिवजटा में विचरती जीवन हो
आगे बढ़ो जीवन दायनी, मन भावना
मत रुको, पूरी करो, जन जन आकांशा
एक मशाल पूरे जमाने को रोशन करती है
खुद जलती हाथों में मचलती फना होती है।
बनो जीवन धारा या मशाल सी
जीवन की मिसाल नाकि कठोर पाषाण सी
तरासी जाओगी मोनालिसा वीनस राधा सी
पूजी जाओगी अपने नगमों तरानों से कोकिला सी।
ना भटका हूँ ना लोट कर जाऊंगा
प्यास तेरी नियति, शांत कर पाऊंगा।
आसमा की बदली सा
सावन की रिमझिम सा
धरती के गर्भ में नए फूल खिलाऊंगा।
मरुधरा में नखालिस्तान
हरा भरा चमन खिलाऊंगा
तेरा मेरा अस्तित्व होगा एक
तेरी प्यास, मेरी आस, जमाने की अरदास
पूरी कर जाऊंगा।
मैं तेरा साजन,
ना भटका हूँ ना लौट कर जाऊंगा।।
Sunday, July 22, 2018
दोस्त
कुछ अपने बहूत करीबी भी बन जाते हैं।।
जो चलती सात कदम साथ वोह ता उम्र साथ निभाती है।
सयानी हो या बावली दिल को भाती, दूध में शक्कर सी मिल जाती है।।
प्याज के छिलके उतारो तो क्या कुछ मिलता है?
दोस्त को ऐबो के साथ स्वीकारो तो दोस्त मिलता है।|
दुनिया का फलसफा यही
कोई मूर्ति प्रभु ने सम्पूर्ण बनाई नही?
गोपाल जेल में जन्मे राम को बनवास हुआ।
राजा के पूत गौतम को तजने पर ही ज्ञान प्राप्त हुआ।।
हम क्या, हमारी हस्ती क्या,
मंदिर क्या, मयखाना क्या
बिना हमदम के यह दुनिया इस
कायनात का वजूद क्या यहां।।
माँ की लोरी
मां की ममता की छांव।
मेरी जिंदगी का सफल दाव।।
जहां मैं निडर हो हुकुम चलाता था।
हर किसी को मां का डर दिखाता था।
कितनीं हि बार मां को खिजाने,
मां सहमती, बलाए लेती
कभी घड़ी देखती,
कभी कारण खोजती,
डर और गुस्से का मिश्रण बनी मेरी मां
जैसे ही देखती मझे,
भुल जाती थी कुछ पहिले की ली कसमे
सिर्फ मुझे देर हुई क्यों,
दीदार ए सनम
पर्दा उठते ही वोह
ढक लो ,
एक हम ही हैं
हमे दीदार कराने में
नीरज जी को समर्पित
क्यो गेंडे की खाल को धोते हो।।
नही परवाह इन आजके मसीहाओं को
ना कविता की ना तुम्हारी।
आज चले गए नीरज,
क्यों निराला दिनकर को घसीटते रोते हो।
जब चन्द्र बरदाई भी बिक गया एक मुट्ठी नमक के ताने पर
इन की क्या बिसात,चलो
सुने तुम्हारी भी।
कुछ कट गई कुछ कट जाएगी
क्यों दुनिया का ठेका लेते हो।
अँधा इश्क
ढूंढा सातो जहां में
खुली आँखों से ,
आंख बंद की तो
बगल में पा गया
स्वाति की एक बूंद जो मिली
मोती सा सनम पा गया










