Friday, August 14, 2020

74वे स्वतंत्रता दिवस पर बधाई

 











..पिताश्री....

पितृदिवस पर पूज्य पिताजी को स्मरण आज आपके जन्मदिवस के पावन अवसर पे नमन करता हूँ अपना बचपन और आपका कन्धा आज भी करता हूँ॥ एक दिन दादी ने मुझे बतलाया था कितने मंदिर तीर्थ घुमे तो मुझे पाया था॥ मेरे जन्म पर आपने पूरे गाँव में बधाई बाटी थी खुशिओं की सौगात और मिठाई भी बाटी थी॥ मेरे स्कूल जाने पर कितनी बलैयां ले डाली थी पास होने पर, कितनी शाबाशीयां दे डाली थी॥ माँ मेरी शरारतों से थक तुम्हारा इंतज़ार करती थी तुम्हारे नाम को ले ले मुझे डराया करती थी ॥ तुम उनको सुन अनसुना करते थे राजा बेटा अच्छा बेटा कह मुझे समझाया करते थे॥ याद आता है मेरा साइकल से गिर जाना मेरी चोट देख जैसे तुम्हारी जान निकल जाना॥ सर्दी गर्मी धुप छाओं से मुझे बचाया करते थे मेरे हर सवाल का जवाब हर मुश्किल सुलझाया करते थे॥ जिन्दगी के हर मोड़ पर मैं ने आपको पाया था जीवनसंगनी लाकर मेरा गृहस्थ जीवन बसाया था॥ कितनी ही बार आप भी झुंझलाते थे बाप बनुगा तो पता चलेगा कह थक जाते थे॥ आज जब मैं भी जवान बेटे का बाप बना हू आपके कदम के निसानो पे खडा हूँ ।। आपके पोते से मैं भी रूठ जाता हूँ बेटा बाप बनोगे तो याद करोगे बोल जाताहूँ॥ दादा जैसा बनो उन्हें स्मरण करो उन्हें याद दिलाता हूँ अपने जवाब - उसके मुख से सुन शर्माता- पछताता हूँ ॥ बाप बेटे के सवाल का सो बार जवाब देता है बेटा बाप के एक सवाल दुबारा आने पर सनकी, बुढा बोल देता है ॥ पितृपक्ष पर सुबह तर्पण करता है श्राद्ध करता ब्रह्म भोज करता है उस ही आदरणीय के अधूरे कामो से मुख मोड़ लेता है ॥ मैंने भी एक प्रण किया था इस जिन्दगी का अच्छा बेटा बन आपके स्वप्न पूरे करने का ॥ लेकिन क्या मैं आपकी आकांक्षा पूरी कर सका हूँ आज जिस मुकाम पर हूँ क्या आपकी ऊंचाई तक पहुँच सका हूँ ? अगर कोई ख़ता हुई हो तो मुझे माफ़ करना मेरा प्रण है आपकी भावना- इच्छा पूर्ण करना ॥ आज इस आपके जन्म दिवस पर मैं नमन करता पुष्प चढाता हूँ आशीर्वाद की कामना और श्रद्धा का विश्वास दिलाता हूँ ॥

Sunday, August 2, 2020

राम मन्दिर निर्माण

आज राम मन्दिर निर्माण की पूजा
होगा प्रारम्भ महाउत्सव व गणेश की पूजा

आओ कुछ यादें ताजा करें
रामलल्ला के 500 वर्ष के वनवास को।
अविराम संघर्ष को, कारसेवकों के बलिदान को।।

भूले नहीं हम इस अनचाहे विवाद को
सुमरिन करें सनातन के अवसाद को

जब लखनउ कोर्ट का निर्णय आना था
हम सभी का दिल थमना ऐक अफसाना था

क्या था राम मन्दिर विवाद
मित्रों............

राम जन्म भूमि विवाद
देश को परतंत्रता की सौगात 
  
३० सितम्बर को क्या होगा? 
कुछ  टीवी पर आयेंगे 
कुछ  अख़बारों पर छाएंगे 
कुछ फ़ना, कुछ शहीद,  
कुछ गुमनामी में सो जायेंगे 

कुछ खोजेंगे अदालती फैसले में खामिया, 
कुछ प्रदेश और कुछ रास्ट्रीय सरकार में,
कुछ नाम लेंगे 'भगवा और हरे' सम्प्रदायों का  
कुछ माननीय जजों को ही खोज डालेंगे  

मुक़दमा आगे बढेगा, 

राम तो आज भी साये में हैं 
कल भी साये में ही पाएंगे 
फर्क नही पड़ता इस राम भक्त को 
राम तो हनुमान के सीने  में सर्वदा सुरक्षित, सन्मानित, 
नित्य सुमिरन पाएंगे 

यह कैसा गाँधी का रामराज 
जिसमे राम सीता के घर भी,
अदालती फैसले से पहिचाने जायेंगे

राम के स्थान भी कब्जा किये जायेंगे 
राम सेवक तो जीतेगा ही 
हम है तैयार 
१५०० इसवी - नहीं - लेकिन 
१९९२ फिर दुहराए जायेंगे 
राम मंदिर कब बनेगा ? 
सीता रसोई में भोग कब लगेगा ?

सुर्यवंश की जितनी पीढ़ी लगी थी 
एक भागीरथ पाने में 
क्या हमें भी इतनी पीढ़ीओं जीना,

 लड़ना, भुगतना पड़ेगा 
रामलल्ला को घर दिलवाने में

आज सपना सच होने जा रहा है
राम मन्दिर का निर्माण हो रहा है।

मोदी जी, पूजनीय भागवत जी
योगी जी पधारेंगे
जय श्रीराम का उद्घोष होगा
चंपतराय जी विजय ध्वज फैराएंगे।

धन्य हमारा जन्म व जीवन*जो हम यह पुनीत अवसर देख पाएंगे

राम लक्ष्मण जानकी
*जय रघुबर श्याम की।

डा श्रीकृष्ण मित्तल

Monday, May 25, 2020

Rudrashtakam

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यदि PM पप्पू सा होता




मादक दवाई का सेवन करता
अमरीका से छुड़ा कर लाना पड़ता  
रंगरलियों का दास 50 बरस का
कुंवारा ऐक जोकर सा....
यदि PM पप्पू सा होता..... 

संसद में कागज फाड़े।
 मतवाली आंखे मारे।     
देवपुरुष को जफ्फी मारे।
चौकीदार को चोर कह डारे।               
 सुप्रीम कोर्ट में माफी डाले

ऐसे महान पप्पू की सुन सुन
दुनिया लज्जित होई।
इनकी बराबरी का जोकर
ढूंढे मिलता नहीं कोई।

इनकी कुछ दूरदर्शी सोच........

 विश्वपटल पर नाक रगड़ते,
फ़ैला हुआ दामन होता ।
आलू से सोना उपजाता,
आंकड़ा पीचत्तीस का होता ॥
फ़िर धीर वीर से भरी धरा का,
हाल जोकरों सा होता।
यदि PM पप्पू सा होता

दुनिया को शून्य दिया,
वही भारतवर्ष लज्जित होता ।
जब बात हिसाब की होती तो,
ढाई हज़ार पाँच सौ को रोता।
ज्ञानियों की पावन भूमि का ।
हर दिन उपहास उड़ाते सब,
भूल से भी मेरे भारत का
यदि PM पप्पू सा होता 
JNU में संसद चलती,
AMU राज्यसभा होता ।
टुकड़े-टुकड़े गैंगों के लिए,
एक अलग से मंत्रालय होता॥
जहाँ देश विरोधी नीतियों का,
नित सृजन और अमल भी होता ।
भूल से भी मेरे भारत का ........
यदि PM पप्पू सा होता

कश्मीर से कन्याकुमारी तक का,
खाका नया खिंचा होता ।
गद्दारों की इस टोली का, 
सरदार भी सरकारी होता॥
जहाँ मुस्लिम तुष्टीकरण हँसता,
ईसाई धर्मांतरण हर कोने में पता।
कात्रची एंडरसन मामा देश लूटते
भूल से भी मेरे भारत का.........
यदि PM पप्पू सा होता

सलाहकार शरजील,
प्रचारक छात्र कन्हैया सा होता।
एक और विभाजन भारत का,
यही लक्ष्य गद्दारों का होता॥
भाईचारे का पहन के चोला,
क़त्ल संविधान का होता ।
भूल से भी मेरे भारत का.........

ताहिर हुसैन सा हत्यारा,
सरकार का अति प्यारा होता ।
दिल्ली दंगे में शामिल हर,
दंगाई भी न्यारा होता॥
फ्रीडम फाइटर कहलाता वो,
जो तनिक चुटैल हुआ होता ।
भूल से भी मेरे भारत का.........

अब बात करें कोरोना की, 
घोटाले का माध्यम होता ।
जहाँ जमाखोरी जमकर होती,
मास्क दौलत बरसाता होता ॥
उपकरणों की खरीद होती,
घोटालों का मंज़र होता ।
भूल से भी मेरे भारत का.........
जनता को राहत सामग्री,
एक ज़रिया कमाई का होता।
CWG घोटाले का, 
अवतार अवतरित यूँ  होता॥
तब भोजन के प्रति पैकेट का,
टैरिफ भी खासमखास होता।
भूल से भी मेरे भारत का.........
यदि PM पप्पू सा होता

पौ बारह होती बहना की,
ट्रेडिंग जीजा करता होता।
अंजामों से बेपरवाह PM,
कुत्तों से खेल रहा होता ॥
मंत्री संतरी होते प्रसन्न,
उत्सव सा उनके घर होता।
भूल से भी मेरे भारत का.........
यदि PM पप्पू सा होता

हावी हो जाती महामारी
तो पप्पू नानी घर होता ।
दीदी जीजा के घर रहती,
मम्मी का विदेश दौरा होता॥
ख़ुद ही लड़ता ख़ुद ही मरता,
ये देश अनाथों सा होता । 
भूल से भी मेरे भारत का.........
यदि PM पप्पू सा होता

कहर कोरोना का घर घर,
जमकर कर रहा होता तांडव।
हर भारतवासी कोरोना से
ख़ुद ही जूझ रहा होता ॥
चित्कार रही होती जनता,
घर घर कोहराम मचा होता॥ 
भूल से भी मेरे भारत का.
यदि PM पप्पू सा होता........

भूल से भी मेरे भारत का
यदि PM पप्पू सा  होता॥
.....वन्दे रोम मातरम ॥




Wednesday, February 27, 2019

पाकिस्तान का राष्ट्रीय गान...



... सारे जहाँ से "लुच्चा" पाकिस्तान हमारा .
हम "जानवर" हैं इसके , ये "चिड़ियाघर"हमारा. .
शैतान" हमें सिखाता "आतंकवाद" फैलाना..
"नामर्द" है हम वतन के.. "चीन" माई बाप हमारा..
दुनिया जानती हमने अमेरिका को बेवकूफ बना कर लूटा
सारे जहाँ से "लुच्चा"... "पाकिस्तान" हमारा.....
मजहब हमे सिखाता पडोसी से बैर रखना
हिन्दू क्रिस्तान सिखों पर सितम करना भगाना
हम मशहूर हैं दुनिया में कटोरा लिए हाथ में
भिखारी हैं हम, यह धंधा है हमारा |
झूट बोलना - फरेब करना फितरत हमारी
लोकशाही की तबाही तानाशाही की दुकानदारी
जूतों के भूत हैं हम ये ही इलाज है हमारा
सारे जहाँ से "लुच्चा"... "पाकिस्तान" हमारा.....

Thursday, August 30, 2018

मचलता दिल

दिल में मचलता समंदर
तूफान सा घुमड़ता मंजर

किसी से मुलाकात की आस
किसी की मासूमियत का एहसास

जरूर वोह ही होगा
जिसकी आस में बिछी हर सांस

झुकी झुकी आंखे
आमंत्रण देती खास।

वादा

ना भटका हूँ ना लोट कर जाऊंगा
प्यास तेरी नियति, शांत कर पाऊंगा।

आसमा की बदली सा
सावन की रिमझिम सा
धरती के गर्भ में नए फूल खिलाऊंगा।

मरुधरा में नखालिस्तान
हरा भरा चमन खिलाऊंगा

तेरा मेरा अस्तित्व होगा एक
तेरी प्यास, मेरी आस, जमाने की अरदास
पूरी कर जाऊंगा।

मैं तेरा साजन,
ना भटका हूँ ना लौट कर जाऊंगा।।

यौवन का प्रवाह

लहरें टकरा तोड़ गई पहाड़ों को
शीतल धारा जीवनदायनी हजारों को

तुम भी तो आकाश गंगा हो
शिवजटा में विचरती जीवन हो

आगे बढ़ो जीवन दायनी, मन भावना
मत रुको, पूरी करो, जन जन आकांशा

एक मशाल पूरे जमाने को रोशन करती है
खुद जलती हाथों में मचलती फना होती है।

बनो जीवन धारा या मशाल सी
जीवन की मिसाल नाकि कठोर पाषाण सी

तरासी जाओगी मोनालिसा वीनस राधा सी
पूजी जाओगी अपने नगमों तरानों से कोकिला सी।
ना भटका हूँ ना लोट कर जाऊंगा
प्यास तेरी नियति, शांत कर पाऊंगा।

आसमा की बदली सा
सावन की रिमझिम सा
धरती के गर्भ में नए फूल खिलाऊंगा।

मरुधरा में नखालिस्तान
हरा भरा चमन खिलाऊंगा

तेरा मेरा अस्तित्व होगा एक
तेरी प्यास, मेरी आस, जमाने की अरदास
पूरी कर जाऊंगा।

मैं तेरा साजन,
ना भटका हूँ ना लौट कर जाऊंगा।।

Sunday, July 22, 2018

दोस्त

सफर में राहगीर मिलते बिछुड़ जाते है।
कुछ अपने बहूत करीबी भी बन जाते हैं।।

जो चलती सात कदम साथ वोह ता उम्र साथ निभाती है।
सयानी हो या बावली दिल को भाती, दूध में शक्कर सी मिल जाती है।।

प्याज के छिलके उतारो तो क्या कुछ मिलता है?
दोस्त को ऐबो के साथ स्वीकारो तो दोस्त मिलता है।|

दुनिया का फलसफा यही
कोई मूर्ति प्रभु ने सम्पूर्ण बनाई नही? 

गोपाल जेल में जन्मे राम को बनवास हुआ।
राजा के पूत गौतम को तजने पर ही ज्ञान प्राप्त हुआ।।

हम क्या, हमारी हस्ती क्या,
मंदिर क्या, मयखाना क्या

बिना हमदम के यह दुनिया इस
कायनात का वजूद क्या यहां।।

माँ की लोरी

मेरी प्यारी माँ मुझे आज भी लोरी सुनाती है 
सपनों में आती और मुझे निहारती है ||

जिंदगी यूँ ही बीत जाती है। 
कभी इंतज़ार कराने में, कभी इंतज़ार करने में। 

मां की ममता की छांव।
मेरी जिंदगी का सफल दाव।।

जहां मैं निडर हो हुकुम चलाता था।
हर किसी को मां का डर दिखाता था।

कितनीं हि बार मां को खिजाने, 
डराने को मे छुप जाता था।
मां सहमती, बलाए लेती
सड़क निहारती थी।।
कभी घड़ी देखती,
कभी कारण खोजती,
कभी पास पड़ोस यार दोस्त को खंगालती
डर और गुस्से का मिश्रण बनी मेरी मां
जैसे ही देखती मझे, 
करुणा और रौद्र की प्रतिम बन जाती थी।
भुल जाती थी कुछ पहिले की ली कसमे
सिर्फ मुझे देर हुई क्यों,
कैसे जानने
मेरी प्यारी माँ मुझे आज भी लोरी सुनाती है |

दीदार ए सनम

चांद में दाग है 
हर कामनी को नजर लगाता है।
पर्दा उठते ही वोह 
जलके राख हो जाता है।
ढक लो , 
मत देखो आयना, 
झांको चिलमन की ओट से, 
ना जाने कितनों को गश आता है।
एक हम ही हैं 
जो सम्भाल सकते 
तुम्हारा जलाल,
हमे दीदार कराने में 
तुम्हारा क्या जाता है।

नीरज जी को समर्पित

इन बदनसीबों पर क्यों रोते हो।
क्यो गेंडे की खाल को धोते हो।।
नही परवाह इन आजके मसीहाओं को
ना कविता की ना तुम्हारी।
आज चले गए नीरज,
क्यों निराला दिनकर को घसीटते रोते हो।
जब चन्द्र बरदाई भी बिक गया एक मुट्ठी नमक के ताने पर
इन की क्या बिसात,चलो
सुने तुम्हारी भी।
कुछ कट गई कुछ कट जाएगी
क्यों दुनिया का ठेका लेते हो।

अँधा इश्क

इश्क तो अंधा था जो तुम्हे मैं मिल गया।
ढूंढा सातो जहां में 

खुली आँखों से ,
आंख बंद की तो 
बगल में पा गया
स्वाति की एक बूंद जो मिली
मोती सा सनम पा गया

इश्क का अहद


इश्क के दामन में फूल भी कांटे भी
सनम के होटों पर दस्तखत भी और खुशनुमा रातें भी||
जुदाई के क्षण कांटो की तरह सालते
सनम को याद करते तारे गिनते रातें गुजारते ||

उनकी खबर पाने की बेचेनी
धड़कने तेज और आँखों में सनसनी ||

मिलें तो गर्म साँसे बिछडे तो भुलाने का ख़तरा
यह फलसफा ताजिन्दगी चलता रहा ||

कभी ख़ुशी कभी गम
जैसे सावन और पतझड़ का मौसम||
जेहन में एक विस्वास
सात जन्म भी ना छूटेगा साथ ||

हम न कर्जदार ना साहूकार
दिल के सौदागर करते ऐतबार ||

इस जन्म में नही तो क्या हुआ
अगला जन्म भी तो आसमान से उतरता हुआ ||

भरोसे पर दुनिया कायम
वाशिंदे इस ही जहां के हम ||
वादा ...................सनम ...................
हमारे इश्क ने तेरी बही पर दस्तखत करे
हम नही बेवफा भलही आफत के भरे ||

यह जिन्दगी भी तेरी आनेवाली नही तेरी
कर खुदा से अरदास हम पूरी करें मन्नत तेरी ||
.................................डॉ श्रीकृष्ण मित्तल

Tuesday, July 10, 2018

कलम की महिमा

कलम की ताकत का तलवार की ताकत से क्या मुकाबला
तलवार की जीत कलम के एक वार से हार दी जाती है ||
घाव तलवार का भले ही भर जाए,
लेकिन कलम की स्याही जो सदियों तक असर लाती है ||
अगर नही होती कलम तो ना कुरआन होती, ना गीता
राम को भगवान यह कलम ही बनाती है ||
आज़ादी की मशाल जलती रखी कलमदारो ने,
तलवारछिपी हुयी थी म्यानो में,
क्रान्ति के वीर धधक रहे थे,
कलमवीर समाज को जगा रहे थे,
लेखको ने हिला दी थी अंग्रेज सल्तनत,
तुलसी कबीर ने झुका दी थी,
अकबर औरंगजेब की ताकत,
याद करो एमर्जंसी का ज़माना,
जिसे गोयनका झु क के माना||
ना कलम होती तो ना दिलो में राम होते |
ना अल्लाह, ना गुरु नानक, ना श्याम होते || 

ना हीर-रांझे की कहानी लिखी जाती |
लैला मजनू की कहानी रेगिस्तान में सिमट जाती||
कलम ना होती तो अपराध कैसे रुकते |
जज बिना कलम के फरमान ना देते ||

मकतब बेमानी होते मदरसे रुस्वां होते |
कलम ना होती तो ना नेताजी होते ना बाबा साहिब होते ||
ना मै मै होता ना तुम तुम होते
सलाम मेरी कलम को जिसने मुझे मै बना दिया|
सदका कलम का जिसने मुझे तुम से रूबरू करा दिया||

Wednesday, July 4, 2018

जिस्मानी - रूहानी भूख

ना तुम ढोकली ना तुम रसगुल्ला
ना तुम मेरी भूख ना गर्म हल्ला।।
तुम बिन मैं अधूरा शायद
मुझ बिन तुम अधूरी।
आओ चलें तारों की छांव में करें उसे पूरी।।
जिस्म की बात कही
जो बिकते खरीदे जाते है
ना मैं उस गली का खरीदार
जहां जिस्म फरोश नजरें गड़ाते हैं।
मैं कृष्ण तुम राधा फिर
तो महज रूहानी कहानी है।
आ बना डालें यह दुनिया
सपनो सी रंगीन
कल की किसने जानी है।
ना तुम खाली
ना मैं रीता
साथ मे तुम तो
भूख बेमानी है।।

*भूख*
मैं सिर्फ जिस्म हूं तुम्हारे लिए।
तुम्हारी भूख का सामान।
गरमा गरम दाल ढोकली कि बगैर चम्मच पूरी कटोरी​ गटक।
ठंडा -ठंडा रसगुल्ला कि एक ही बार में गप्प।
नया -नया अलफ़ेन्ज़ो कि चूस चास के हज़म
गर्म- गर्म काफ़ी कि टेबल पर खतम।
सुनो!
मैं भी हूं इन्सान! मेरी भी है भूख जवान!
किंतु
अलग-अलग हैं हम-तुम अलग-अलग है भूख
मेरी भूख का सामान नहीं है तुम्हारे पास
नहीं है तुम्हारे पास रूह का सुकून।
मैं जानती हूं
खाली हाथ लौटूंगी इस सफ़र में
किंतु तनहा नहीं हूं मैं
साथ में है मेरी भूख अमर,अजर, चिरंतन।
----मीनू मदान

Tuesday, November 28, 2017

एक जीवन वृतांत

जीवन के सुंदर 45 वर्ष कैसे व्यतीत हो गए।
लगती कल कि सी बात जब तुम हम बंध गए ।।

मम्मी-डेडी,
दादी-बाबा,
चाचा-चाची,
मांमा-मामी,
मौसा-मौसी
अनुज गौरीशंकर,अनिल, विमल,अजय और
बहिन लक्ष्मी खुशी में झूमते गए।।

सजा था लश्कर दिवानो का घोड़ी पर हम इठलाये|
यार दोस्त पीछे रहे नही नाचे गाये धूम मचाए ||

सामने अगवानी को बहूत खड़े थे|
सालीके हाथ में नीम की डाली
 सासू लिए आरते की थाली
 ना जाने कितने निहारते खड़े थे ||

एक हम थे जो पहन कर  हार तुम्हारा हम बिके थे |
सब के सामने गर्दन नीचे कर तुम्हारी छवि निहार रहे थे || 

फेरो की बेला आयी
कन्यादान की रस्म अदाई
फिर हुयी तुम्हारी भाव भीनी विदाई
और आँखे गीली करती,
सबको निहारती
मुझ पर विश्वास करती
तुम मेरे संग चली आई ||

27 नवम्बर 1972 का शुभ दिन भूलेगा नही।
जब तुम हम ही, नही दो परिवार एक होगये।।

गृहस्ती आगे बढ़ी हम दो से पांच हो गये ।
नितिन पूजा चेतन जैसे फूल खिल गए।

प्रवाह रुका नही
शीला,बेला, राकेश के बिना परिवार अधूरा,
मोहित, मिहिर,कोमल, गौरव,केशव,माधव
जैसे मनमोहक पौत्र,दोहित्रि,दौहित्र आज बड़े हो गए।।

मैं अत्ति भाग्यशाली देश के हर क्षेत्र में
आप जैसे शुभचिंतक मित्र मिल गए।।

Thursday, September 21, 2017

रोहिंगियो की जगह भारत में नही -

खुदाई खिदमतगार जंतर मन्तर पर आंसू बहा रहे                                                             जिन्हें त्रस्त बर्मा निकाल रहा, पाक,बांग्ला नही सम्भाल रहे ||
कोई सुने बर्मा की भी गुहार                                                                                         जिसने झेला, इन रोहिंगियों का दमन और अत्याचार ||
कहाँ गये मलेशिया इंडोनेशिया और श्याम 
वोह चीन, वोह दुबई, कतर अरब के मुसलमान ||
अहिंसक बौध - विराधू को, क्यों उठाने पड़े हथियार
सब जानते क्यों, भारत झेले रोहिन्गीया आतंक की मार ||
देखो बेशर्मी, सुप्रीम कोर्ट में पहुंचे इनके मददगार
जैसे इनका नही यह देश, और ना कोई सारोकार ||
अपने घर में ताले और बेशुमार चोकीदार
रोहिंगियों को देश में बसाओ इनकी पुकार ||
सुप्रीम कोर्ट को रात २ बजे खुलवाने वाले फिर जाग रहे
मानवतावाद की दुहाई दे सरकार को गरिया रहे||
भूल गए काश्मीरी पंडितों का दर्द
लाखों लाशों का वोह जलजला यह बेदर्द ||
४ करोड़ बांग्ला बस गये बंगाल में
कितने ही चूल्हे टूट चुके आसाम मिजोराम में ||
एक तरफ हम सीमा बंद कर रहे
नकली नोट, गौतस्करी, हथियारों का दंश झेल रहे ||
सुन ले यह मददगार, खुदाई खिदमतदार ,
इनके साथ में सुनले भारत की यशस्वी सरकार ||
काश्मीरी पंडितों को काश्मीर में बसाना होगा
४ करोड़ बांग्लादेशियों को भगाना होगा
ममता सरकार पर अंकुश लगा
रोहिंगियों को रास्ता दिखाना होगा
भारत किसी विधवा की जागीर नही
ना ही कातिलों का अड्डा - कब्रगाह
क्योंकि ..............................

जर्रे जर्रे में शामिल है हमारे लहू के कतरे
जी हाँ हिन्दोस्तां हमारा और हमारे बाप का ही है ...

Wednesday, August 23, 2017

तीन तलाक पर तबसरा


सायरा ,सबीना या मुमताज यही सोचती थी
ईंसाफ निराला ये देश के काजीे कैसे करेंगे
कठमुल्लों के फतवे फरमान हैं चरम पर
अंधे लालची हैवानों का मुख कैसे काला करेंगे
हलाले के ख्वाबो मे मौलवी था मतवाला
माल काटेंगे औरं मजलुमो संग मजे करेंगे
खुदाई खिदमतगारो का दिवाला, इसी दर्द ने निकाला कि
अब तलाक होगया गैरकानुनी, तो हलाला कैसे करेंगे
लव जिहाद के मतवाले होगये गारत
निकाह तो कर लेंगे, तलाक कैसे करेंगे

भला हो सुप्रीमकोर्ट का, 9करोड खातूनो ने दी दुआ
अब जिंदगी बेखोफ अमन चैन से जियेंगे
सदका राखी का जो बांध थीं मोदी की कलाई पे
हिफाजत का पूरा किया बिरादर ने वादा, जिंदगी भर याद रखेंगे
-डा: श्रीकृष्ण मित्तल

Thursday, August 3, 2017

बिहार में भरत मिलाप

दे दी पटकनी लालू राहुल को तुम दोनों ने बिना खडग बिना ढाल
पटना के रन बांकुरों नितीश मोदी, तुमने कर दिया कमाल

कल तक लालू यशस्वनी गुर्राते थे  बार बार
राज में ना थी बिजली ना रक्षा था  केवल भ्रष्टाचार 

नीतिश कोस रहे थे वोह घड़ी जब लालू से हाथ मिलाया था 
वोह समय जब आधी छोड़ पूरी को ललचाया था 

इधर लालू के गुर्गो ने अपना रूप दिखाया था
सुशासन बाबू की प्रतिष्ठा को कोठे पर बैठाया था 

चाणक्य निति ने फिर दो बिछड़ो को मिलाया 
जयप्रकाश जी के सूरज चाँद को साथ दिलाया 

नितीश ने दे मारा इस्तीफा तान के 
चंगुल से बाहर आ गए सीना तान के 

सरकार तो युगल जोड़ी ने चलानी थी 
कुछ घडियों के बिछोह की कष्ट भरी यादें मिटानी थी 

सामने थी बेकारी, अन्धकार,  और सूखा बाढ़ गरीबी लाचारी
साथ थी हिम्मत, हौसला, संगठन शक्ति और दयानतदारी

लालू जेसों का तूफ़ान और अंधकार विरासत में मिला था 
सामने समस्याओं का, बड़े बोलों का, लम्बा सिलसिला था

कुछ दिनों पूर्व का दृश्य याद करो साथियों 
२०१० के चुनावों का स्मरण करो भाइयों 
कहीं राम
कही राहुल
कहीं माया
कहीं लल्लू   
कुरुक्षेत्र सज चूका था
बिहार चुनाव धधक चूका था

हमले हुए, तीर चले आरोप लगे
अपने पराये हुए, दिल में खंजर से लगे

जनता पर विश्वास था कर्म पर था भरोसा
साथ कमल सा कोमल और तीर सा कठोर था

शरद, शिवानन्द, ठाकुर, रविशंकर
शाहनवाज, शुष्मा, लालजी से साथ कर

भीड़ गये बौल हर हर महादेव अल्लाह हो अकबर
सामने लालू राबड़ी, रामविलास, राहुल सोनिया  एक से एक बढ़ कर

काम जीत गया, विश्वाश बढ़ गया
नतीजे आज आये तो नशा सा चढ़ गया

एक दो नही  २०० भी पार होगये
सामने तो तीन चार बीस बाईस रह गये

रन बाकुरे नही संभल सके जीत को और  साथ निभाना
उस ही का परिणाम देख भुगत अपनी गलती को माना 

जनता की अरदास दोनों से लम्बा साथ निभाना 
कमल खिला रहे, तीर पैना रहे जनता की आस पुराना 

डॉ श्रीकृष्ण मित्तल