Saturday, July 24, 2021
श्रधा सुमन
प्रिये तुम बहुत याद आती हो
जीवन के हर मोड़ पर तुमने साथ दिया
हर ख़ुशी दी हर सुख दिया ||
गत ५० वर्षो के संग की याद आती है
विवाह की स्मृति सर्वदा मन मंदिर पे छा जाती है ||
प्रथम पुत्र प्राप्ति की पूर्व संध्या में
हमने बाबी देखी थी और बाबी आया था
शीघ्र ही कन्या रत्न व् दित्य पुत्र भी पाया था ||
प्रिये तुम बहुत याद आती हो
गृहस्वामिनी, भाग्यवान सर्वदा प्रभु में आस्थावान थी
व्रत, पूजा, उजमन, यज्ञ तीर्थ,दान में निष्ठावान थी
मेरी प्रिया, अर्धांगनी, मेरी प्रेरणा, मेरी जान थी
नाम हीनहीं रूप और कर्म में लक्ष्मी समान थी ||
बाबा दादी पिता-माता जी के देहांत पर
तुमने अहम् काम निभाया था
मेरे सभी भाइयों को पुत्रवत अपनाया था अ
पनी ननद को सुखमें विदा किया
दौरानियों ने बहिन रूप में पाया था||
प्रिये तुम बहुत याद आती हो
नहींभूलता कन्या विदा करना और बहूएँ लाना
दिल्ली, बेंगलोर और वृन्दावन का विवाह ठिकाना|
सुन्दर जामाता, बहूएं आई घर में ख़ुशहाली और प्रसन्नता का खजाना ||
सुन्दर दोहतीपौत्रों का प्रशाद मिला
घर खुशियों से भर गया तुम्हारा मन खिला ||
प्रिये तुम बहुतयाद आती हो
मै थका हारा आता,
तुमसे उर्जा उत्साह पाता था||
मेरे हर निर्णय मेंतुम्हारा योगदान होता था
जीवन के झंझावात में तुम साथ देती थी
संगनी भार्या मित्रसमान चर्चा करती, राय देती थी ||
प्रिये तुम बहुत याद आती हो
जब श्रंगार कर तुमसामने आती थी
मेरी तो अपलक आँखें तुम पर टीक जाती थी
याद आता तुम्हारा रूठना औरमेरा मनाना
तुम्हारा मुझे झुकाना और फिर मान जाना ||
प्रिये तुम बहुत याद आती हो
अजब हमारी गृहस्ती थी
कितनो को भाती, कितनो को खलती थी ||
हम मोर मोरनी की तरह चलते थे
घर बेघर, ऊपर नीचे, देश परदेश,
हर हाल- अभाव में भी में प्रसन्न रहते थे
हमने मधु यामनी के मधुर पल भी संजोये थे
प्रिये तुम बहुत याद आती हो
गावं हो या नगर,देश या विदेश पल पल हम जीए थे||
कलकता,मुंबई, काशी, गया, आगरा का ताज या वृन्दावन
दार्जलिंग,शिमला,मसूरी काश्मीर नैनीताल उंटी,
कोडई,चेन्नई,मैसूरकी चामुंडी माँ
केदार,नीलकंठ,बद्रीविशाल मदुरई मीनाक्षी या वैशनवी माँ,
अग्रोहा, रामेश्वरम,तिरुपति, राधावल्लभजी बयावला,बिहारीजी आदि दर्शन
नेपाल, मलेशिया,सिंगापुर, याश्रीलंका की मधुर यादें
घुमड़ घुमड़ कर आती छाई यादें मन पर हर पल
आदेशों का पालनकरती मेरी दिलबर |
प्रिये तुम बहुत याद आती हो
बहूत सी कामनाएं बाकी हैं
तुम्हारीकमी रहेगी परन्तु थाती हैं
आज परिवार में सम्पन्नता खुशहाली है
तुम्हारी कमी कैसेपूर्ण होगी पूछता यह सवाली है||
प्रिये तुम बहुत याद आती हो
सोच सोच थर्राता हूँ
अबयह समय कैसे निकलेगा
पुत्र पुत्रवधू पौत्र, बेटी दामाद भाई बहुओं का
बंधू बांधवोसंगी साथियों का साथ तो मिलेगा
दिल को बहुत समझाता हूँ ||
प्रिये तुम बहुत याद आती हो
हर पल हर क्षण हर कार्यमें तुम याद आओगी
इस याद में ही कभी यह जान निकल जाएगी
प्रिये, इन्तजार करना ऊपर जल्दी ही साथ आऊंगा
सात जन्मों का वादा था तुम्हे भी निभाना होगा
मै भी शीघ्र निभाऊंगा..........................
डा श्रीकृष्ण मित्तल
Wednesday, July 21, 2021
Saturday, June 26, 2021
यार की यारी
यार की यारी, नही कोई दुकानदारी।
बहुत ढूंढा, गली कूचे, दरीबो में दुकानो में
तेरे जैसा,मिला नही कोई, हीरे की खदानो में।
दाग तो चांद में भी साफ नजर आता हैं।
लेकिन आशिक को सकून पहुंचाता है।।
मुझे तेरी यारी से मतलब,
तेरे सो ऐबो से क्या लेना
मेरा हमदम, मेरा रहबर
तो है खरा सोना।
कसम तेरी दोस्ती की,
दिल से तू निकलता नही।
ऐब तो मुझ में भी हजारों हैं,
तू गिनता ही नही।।
*डा श्रीकृष्ण मित्तल*
Monday, April 26, 2021
हाय आम : वाह आम
आम तू तो आम हो गया।
मैं तो यूं ही इसके इश्क में बदनाम हो गया।
लंगड़ा सिर पर चढ़ा।सरोली तो मेहरोली गया।
दुसहरी मिलता नही,पतला लम्बा, कहां गया?
बेंगनपल्ली का क्या कहना।
सिंदूरी तो शर्म में सिंदूर हो गया।।
मालदा का आते आते मलीदा बन गया
मलीहाबादी तो लखनऊ में खत्म हो चुका।
तोता गिरी का क्या कहना
आचार बन रसोई की शान बन गया।।
बूढ़ा का प्यारा, बच्चों का दुलारा
मेरा प्यारा, तेरा दुलारा आज आम हो गया।
यह गुलाबपास, रत्नगिरि, अलफांसो
फलों का राजा,विदेशों को निर्यात हो गया।
Tuesday, November 10, 2020
बिहार का संग्राम 2024
दे दी पटकनी लालू तेजस्वी, राहुल को तुने बिना खडग बिना ढाल।
पटना के रन बांकुरे तुमने कर दिया कमाल।।
कल तक नितीश- मोदी झेलते थे हमले बार बार।
राज में ना बिजली, ना रक्षा, जनता में हाहाकार ।। जयप्रकाश के पठे बिहार में जन्मे दो सितारे।
नितीश इस धरती के तारे।।
सामने थी बेकारी, अन्धकार, और सूखा बाढ़ गरीबी लाचारी ।
साथ थी हिम्मत, हौसला, संगठन शक्ति और दयानतदारी ।।
पांच वर्ष पहीले अंधकार विरासत में मिला था ।
सामने समश्याओं का लम्बा सिलसिला था ।।
लड़ते लड़ते निकल गये सरदारों के सरदार ।
हिम्मत ना हार के आगयी परिक्षा जनता के दरबार ।।
परीक्षक केद्र सरकार के 2010फिर 2015 का सुशासन राज ।
2024 में पुन: जनता के दरबार में आवाज़।।
कहीं राहुल कहीं लल्लू ।।
कुरुक्षेत्र सज चूका।
बिहार चुनाव धधक चूका।।
फिर महागठबंधन बन गया।
ऐनडीए के सामने इंडी रावण सेना सा डट गया।।
ओबेस्सी जैसे देश तोड़क भी आ गए।
कितने ही बिहार के स्वंभू मालिक बन गए।।
हमले होंगे, तीर चलेगै आरोप लगेगै।
अपने पराये हुए, दिल में खंजर से लगेगै।।
जनता पर विश्वास ,कर्म पर भरोसा।
साथ कमल सा कोमल और तीर कठोर सा।।
साथ में और हम होंगे।।
पासवान ऊपर चले गए चिराग अपनो को जलाने आयेंगे।।
भिड़ गये बोल हर हर महादेव अल्लाह हो अकबर ।।
सामने तेजस्वी, लालू राउल, सोनिया।
ना जाने कितने एक से एक बढ़ कर।
काम जीतेगा, विश्वाश बढ़ जायेगा ।
मोदी जी का जादू चल गया। डबल इंजन, डबल युवराज पर चढ़ गया।
सुशासन बाबू का तीर निशाने पर लग गया।।
भाजपा का कमल, पूरे बिहार में खिल गया।।
आओ करें सम्मान इस जीत का।
जो करेगी विकास बिहार का, बिहारी का।।
रन बाकुरो जीत को संभालना साथ निभाना।
कमल खिला रहे, तीर पैना रहे ।
जनता की आस को निभाना।।
प्रस्तुतकर्ता डा श्रीकृष्ण मित्तल
Friday, November 6, 2020
करोना को जवाब पटाखे बन्द
कोरोना को हराने को गोमय दीपक अपनाएं।
यह वर्ष विशेष है।
पूर्ण विश्व कोराना त्रस्त हैं।
राम मंदिर का निर्माण तेज है।
अयोध्या उत्थान कार्य उन्नत है।।
करोना पीड़ित पटाखों से त्रस्त है।
लोग मिठाई पाने - छूने से भयभीत है।
इस वर्ष रावण मारा नहीं गया।
दशहरा पर राम का तीर नहीं चला।
बच्चे स्कूल नहीं जा रहे
मन्दिर अभी नहीं खुल रहे।
ऐसे में पटाखों का शोर बर्दास्त नहीं होगा
वायु प्रदूषण करोना पीड़ितों को आत्मघाती होगा।
कामधेनु आयोग ने चलाया अभियान।
गौमय दीपक से दीपावली का प्रयान।
देश में ५० करोड़ दीपकों की होती दीपावली
३३ करोड़ शुद्ध गोम्य दीपक बनेंगे गली गली
ना शोर होगा ना प्रदूषण होगा
बचेंगे गाय बछड़े शुद्ध वातावरण होगा।
करें ऐक संकल्प हम
विदेशी माल का बहिष्कार करेंगे
पटाखे नहीं चलाएंगे।
देश में निर्मित दीपक गणेश लक्ष्मी से
मा लक्ष्मी का आवाहन करेंगे।।
मां लक्ष्मी गणपति की कृपा से करोना हराएंगे।
हर घर में गॉमय से देश के गौवंश को बचाएंगे।।कोरोना को हराने को गोमय दीपक अपनाएं।
यह वर्ष विशेष है।
विश्व में कोराना शेष हैं।
राम मंदिर निर्माण में तेजी है।
अयोध्या उत्थान कार्य में उन्नति है।।
करोना पीड़ित पटाखों के धुएं धमाके से त्रस्त है।
लोग तो मित्रों से मिठाई पाने-छूने से भयभीत है।
इस वर्ष रावण मारा नहीं गया।
दशहरा पर राम का तीर खाली रहा।
बच्चे स्कूल नहीं जा रहे।
मन्दिर अभी नहीं खुल रहे।
ऐसे में पटाखों का शोर बर्दास्त नहीं होगा
वायु प्रदूषण करोना पीड़ितों को आत्मघाती होगा।।
कामधेनु आयोग ने चलाया अभियान।
गौमय दीपक से दीपावली का प्रयान ।।
देश में ५० करोड़ दीपकों की होती दीपावली।
३३ करोड़ शुद्ध गोम्य दीपक बनेंगे गली गली।
ना शोर होगा ना प्रदूषण होगा
बचेंगे गाय बछड़े शुद्ध वातावरण होगा।।
करें ऐक संकल्प हम.......
विदेशी माल का बहिष्कार करेंगे
पटाखे नहीं चलाएंगे।
देश में निर्मित दीपक गणेश लक्ष्मी से,
मा लक्ष्मी को बुलाएंगे।।
मां लक्ष्मी गणपति की कृपा से करोना हराएंगे।
गोमय के उपयोग से देश के गौवंश को बचाएंगे।।
।।डा श्रीकृष्ण मित्तल की विनती।।
9980246400
डा श्रीकृष्ण मित्तल की विनती।।
Thursday, October 1, 2020
डाक्टर का मशवरा
कहां कहां है हाथरस, कहां भेड़िया घाट
सभी भेड़िए ढूंढ कर , लिंग दीजिए काट
लिंग दीजिए काट, जो निर्भया सभी बच जाएं।
कर ना सके उत्पात ये भेड़िए, शहर भयमुक्त हो जाएं।
भेड़िए भेड़ बन घूमे कोई फ़िक्र नहीं।
इन महिला लोलूप भेड़ियों की सभ्य समाज में कोई जगह नहीं।
हाथरस हो या अजमेर कानून ऐक ही हो।
हम नहीं राउल प्रियंका जिनका बारां में मुख बन्द हो
आतंकवादी की कोई जात नहीं सब जानते।
इन भेड़ियों को क्यों नहीं है पहिचानते।
कहां गए वोह शेर गजकेसरी
कहां गए वो मर्यादा पुरुषोत्तम नर केशरी।
आज भेड़िए नगरो गांवों में खुले घूम रहे।
इन आवारा कुत्तों को क्यों नहीं पालिका वाहन पकड़ रहे।
इन भेड़ियों का एक ही है इल
पकड़ इन्हे, खड़ा कर चौराहे पर, लिंग दीजिए काट।।
डा श्री कृष्ण मित्तल
Friday, August 14, 2020
..पिताश्री....
पितृदिवस पर पूज्य पिताजी को स्मरण
आज आपके जन्मदिवस के पावन अवसर पे नमन करता हूँ
अपना बचपन और आपका कन्धा आज भी करता हूँ॥
एक दिन दादी ने मुझे बतलाया था
कितने मंदिर तीर्थ घुमे तो मुझे पाया था॥
मेरे जन्म पर आपने पूरे गाँव में बधाई बाटी थी
खुशिओं की सौगात और मिठाई भी बाटी थी॥
मेरे स्कूल जाने पर कितनी बलैयां ले डाली थी
पास होने पर, कितनी शाबाशीयां दे डाली थी॥
माँ मेरी शरारतों से थक तुम्हारा इंतज़ार करती थी
तुम्हारे नाम को ले ले मुझे डराया करती थी ॥
तुम उनको सुन अनसुना करते थे
राजा बेटा अच्छा बेटा कह मुझे समझाया करते थे॥
याद आता है मेरा साइकल से गिर जाना
मेरी चोट देख जैसे तुम्हारी जान निकल जाना॥
सर्दी गर्मी धुप छाओं से मुझे बचाया करते थे
मेरे हर सवाल का जवाब हर मुश्किल सुलझाया करते थे॥
जिन्दगी के हर मोड़ पर मैं ने आपको पाया था
जीवनसंगनी लाकर मेरा गृहस्थ जीवन बसाया था॥
कितनी ही बार आप भी झुंझलाते थे
बाप बनुगा तो पता चलेगा कह थक जाते थे॥
आज जब मैं भी जवान बेटे का बाप बना हू आपके कदम के निसानो पे खडा हूँ ।।
आपके पोते से मैं भी रूठ जाता हूँ
बेटा बाप बनोगे तो याद करोगे बोल जाताहूँ॥
दादा जैसा बनो उन्हें स्मरण करो उन्हें याद दिलाता हूँ
अपने जवाब - उसके मुख से सुन शर्माता- पछताता हूँ ॥
बाप बेटे के सवाल का सो बार जवाब देता है बेटा बाप के एक सवाल दुबारा आने पर सनकी, बुढा बोल देता है ॥
पितृपक्ष पर सुबह तर्पण करता है
श्राद्ध करता ब्रह्म भोज करता है
उस ही आदरणीय के अधूरे कामो से मुख मोड़ लेता है ॥
मैंने भी एक प्रण किया था इस जिन्दगी का
अच्छा बेटा बन आपके स्वप्न पूरे करने का ॥
लेकिन क्या मैं आपकी आकांक्षा पूरी कर सका हूँ
आज जिस मुकाम पर हूँ
क्या आपकी ऊंचाई तक पहुँच सका हूँ ?
अगर कोई ख़ता हुई हो तो मुझे माफ़ करना
मेरा प्रण है आपकी भावना- इच्छा पूर्ण करना ॥
आज इस आपके जन्म दिवस पर मैं नमन करता पुष्प चढाता हूँ
आशीर्वाद की कामना और श्रद्धा का विश्वास दिलाता हूँ ॥
Sunday, August 2, 2020
राम मन्दिर निर्माण
आज राम मन्दिर निर्माण की पूजा
होगा प्रारम्भ महाउत्सव व गणेश की पूजा
आओ कुछ यादें ताजा करें
रामलल्ला के 500 वर्ष के वनवास को।
अविराम संघर्ष को, कारसेवकों के बलिदान को।।
भूले नहीं हम इस अनचाहे विवाद को
सुमरिन करें सनातन के अवसाद को
जब लखनउ कोर्ट का निर्णय आना था
हम सभी का दिल थमना ऐक अफसाना था
क्या था राम मन्दिर विवाद
मित्रों............
राम जन्म भूमि विवाद
देश को परतंत्रता की सौगात
३० सितम्बर को क्या होगा?
कुछ टीवी पर आयेंगे
कुछ अख़बारों पर छाएंगे
कुछ फ़ना, कुछ शहीद,
कुछ गुमनामी में सो जायेंगे
कुछ खोजेंगे अदालती फैसले में खामिया,
कुछ प्रदेश और कुछ रास्ट्रीय सरकार में,
कुछ नाम लेंगे 'भगवा और हरे' सम्प्रदायों का
कुछ माननीय जजों को ही खोज डालेंगे
मुक़दमा आगे बढेगा,
राम तो आज भी साये में हैं
कल भी साये में ही पाएंगे
फर्क नही पड़ता इस राम भक्त को
राम तो हनुमान के सीने में सर्वदा सुरक्षित, सन्मानित,
नित्य सुमिरन पाएंगे
यह कैसा गाँधी का रामराज
जिसमे राम सीता के घर भी,
अदालती फैसले से पहिचाने जायेंगे
राम के स्थान भी कब्जा किये जायेंगे
राम सेवक तो जीतेगा ही
हम है तैयार
१५०० इसवी - नहीं - लेकिन
१९९२ फिर दुहराए जायेंगे
राम मंदिर कब बनेगा ?
सीता रसोई में भोग कब लगेगा ?
सुर्यवंश की जितनी पीढ़ी लगी थी
एक भागीरथ पाने में
क्या हमें भी इतनी पीढ़ीओं जीना,
लड़ना, भुगतना पड़ेगा
रामलल्ला को घर दिलवाने में
आज सपना सच होने जा रहा है
राम मन्दिर का निर्माण हो रहा है।
मोदी जी, पूजनीय भागवत जी
योगी जी पधारेंगे
जय श्रीराम का उद्घोष होगा
चंपतराय जी विजय ध्वज फैराएंगे।
धन्य हमारा जन्म व जीवन*जो हम यह पुनीत अवसर देख पाएंगे
राम लक्ष्मण जानकी
*जय रघुबर श्याम की।
डा श्रीकृष्ण मित्तल
Monday, May 25, 2020
यदि PM पप्पू सा होता
मादक
दवाई का सेवन करता
अमरीका
से छुड़ा कर लाना पड़ता
रंगरलियों
का दास 50
बरस का
कुंवारा
ऐक जोकर सा....
यदि
PM पप्पू
सा होता.....
संसद
में कागज फाड़े।
मतवाली आंखे मारे।
देवपुरुष
को जफ्फी मारे।
चौकीदार
को चोर कह डारे।
सुप्रीम कोर्ट में माफी डाले
ऐसे
महान पप्पू की सुन सुन
दुनिया
लज्जित होई।
इनकी
बराबरी का जोकर
ढूंढे
मिलता नहीं कोई।
इनकी
कुछ दूरदर्शी सोच........
विश्वपटल पर नाक रगड़ते,
फ़ैला
हुआ दामन होता ।
आलू
से सोना उपजाता,
आंकड़ा
पीचत्तीस का होता ॥
फ़िर
धीर वीर से भरी धरा का,
हाल
जोकरों सा होता।
यदि
PM पप्पू
सा होता
दुनिया
को शून्य दिया,
वही
भारतवर्ष लज्जित होता ।
जब
बात हिसाब की होती तो,
ढाई
हज़ार पाँच सौ को रोता।
ज्ञानियों
की पावन भूमि का ।
हर
दिन उपहास उड़ाते सब,
भूल
से भी मेरे भारत का
यदि
PM पप्पू
सा होता
JNU में
संसद चलती,
AMU राज्यसभा
होता ।
टुकड़े-टुकड़े
गैंगों के लिए,
एक
अलग से मंत्रालय होता॥
जहाँ
देश विरोधी नीतियों का,
नित
सृजन और अमल भी होता ।
भूल
से भी मेरे भारत का ........
यदि
PM पप्पू
सा होता
कश्मीर
से कन्याकुमारी तक का,
खाका
नया खिंचा होता ।
गद्दारों
की इस टोली का,
सरदार
भी सरकारी होता॥
जहाँ
मुस्लिम तुष्टीकरण हँसता,
ईसाई
धर्मांतरण हर कोने में पता।
कात्रची
एंडरसन मामा देश लूटते
भूल
से भी मेरे भारत का.........
यदि
PM पप्पू
सा होता
सलाहकार
शरजील,
प्रचारक
छात्र कन्हैया सा होता।
एक
और विभाजन भारत का,
यही
लक्ष्य गद्दारों का होता॥
भाईचारे
का पहन के चोला,
क़त्ल
संविधान का होता ।
भूल
से भी मेरे भारत का.........
ताहिर
हुसैन सा हत्यारा,
सरकार
का अति प्यारा होता ।
दिल्ली
दंगे में शामिल हर,
दंगाई
भी न्यारा होता॥
फ्रीडम
फाइटर कहलाता वो,
जो
तनिक चुटैल हुआ होता ।
भूल
से भी मेरे भारत का.........
अब
बात करें कोरोना की,
घोटाले
का माध्यम होता ।
जहाँ
जमाखोरी जमकर होती,
मास्क
दौलत बरसाता होता ॥
उपकरणों
की खरीद होती,
घोटालों
का मंज़र होता ।
भूल
से भी मेरे भारत का.........
जनता
को राहत सामग्री,
एक
ज़रिया कमाई का होता।
CWG घोटाले
का,
अवतार
अवतरित यूँ होता॥
तब
भोजन के प्रति पैकेट का,
टैरिफ
भी खासमखास होता।
भूल
से भी मेरे भारत का.........
यदि
PM पप्पू
सा होता
पौ
बारह होती बहना की,
ट्रेडिंग
जीजा करता होता।
अंजामों
से बेपरवाह PM,
कुत्तों
से खेल रहा होता ॥
मंत्री
संतरी होते प्रसन्न,
उत्सव
सा उनके घर होता।
भूल
से भी मेरे भारत का.........
यदि
PM पप्पू
सा होता
हावी
हो जाती महामारी
तो
पप्पू नानी घर होता ।
दीदी
जीजा के घर रहती,
मम्मी
का विदेश दौरा होता॥
ख़ुद
ही लड़ता ख़ुद ही मरता,
ये
देश अनाथों सा होता ।
भूल
से भी मेरे भारत का.........
यदि
PM पप्पू
सा होता
कहर
कोरोना का घर घर,
जमकर
कर रहा होता तांडव।
हर
भारतवासी कोरोना से
ख़ुद
ही जूझ रहा होता ॥
चित्कार
रही होती जनता,
घर
घर कोहराम मचा होता॥
भूल
से भी मेरे भारत का.
यदि
PM पप्पू
सा होता........
भूल
से भी मेरे भारत का
यदि
PM पप्पू
सा होता॥
.....वन्दे
रोम मातरम ॥
Saturday, October 5, 2019
Wednesday, February 27, 2019
पाकिस्तान का राष्ट्रीय गान...
... सारे जहाँ से "लुच्चा" पाकिस्तान हमारा .
हम "जानवर" हैं इसके , ये "चिड़ियाघर"हमारा. .
हम "जानवर" हैं इसके , ये "चिड़ियाघर"हमारा. .
शैतान" हमें सिखाता "आतंकवाद" फैलाना..
"नामर्द" है हम वतन के.. "चीन" माई बाप हमारा..
"नामर्द" है हम वतन के.. "चीन" माई बाप हमारा..
दुनिया जानती हमने अमेरिका को बेवकूफ बना कर लूटा
सारे जहाँ से "लुच्चा"... "पाकिस्तान" हमारा.....
सारे जहाँ से "लुच्चा"... "पाकिस्तान" हमारा.....
मजहब हमे सिखाता पडोसी से बैर रखना
हिन्दू क्रिस्तान सिखों पर सितम करना भगाना
हिन्दू क्रिस्तान सिखों पर सितम करना भगाना
हम मशहूर हैं दुनिया में कटोरा लिए हाथ में
भिखारी हैं हम, यह धंधा है हमारा |
भिखारी हैं हम, यह धंधा है हमारा |
झूट बोलना - फरेब करना फितरत हमारी
लोकशाही की तबाही तानाशाही की दुकानदारी
लोकशाही की तबाही तानाशाही की दुकानदारी
जूतों के भूत हैं हम ये ही इलाज है हमारा
सारे जहाँ से "लुच्चा"... "पाकिस्तान" हमारा.....
सारे जहाँ से "लुच्चा"... "पाकिस्तान" हमारा.....
Thursday, August 30, 2018
मचलता दिल
दिल में मचलता समंदर
तूफान सा घुमड़ता मंजर
किसी से मुलाकात की आस
किसी की मासूमियत का एहसास
जरूर वोह ही होगा
जिसकी आस में बिछी हर सांस
झुकी झुकी आंखे
आमंत्रण देती खास।
तूफान सा घुमड़ता मंजर
किसी से मुलाकात की आस
किसी की मासूमियत का एहसास
जरूर वोह ही होगा
जिसकी आस में बिछी हर सांस
झुकी झुकी आंखे
आमंत्रण देती खास।
वादा
ना भटका हूँ ना लोट कर जाऊंगा
प्यास तेरी नियति, शांत कर पाऊंगा।
आसमा की बदली सा
सावन की रिमझिम सा
धरती के गर्भ में नए फूल खिलाऊंगा।
मरुधरा में नखालिस्तान
हरा भरा चमन खिलाऊंगा
तेरा मेरा अस्तित्व होगा एक
तेरी प्यास, मेरी आस, जमाने की अरदास
पूरी कर जाऊंगा।
मैं तेरा साजन,
ना भटका हूँ ना लौट कर जाऊंगा।।
प्यास तेरी नियति, शांत कर पाऊंगा।
आसमा की बदली सा
सावन की रिमझिम सा
धरती के गर्भ में नए फूल खिलाऊंगा।
मरुधरा में नखालिस्तान
हरा भरा चमन खिलाऊंगा
तेरा मेरा अस्तित्व होगा एक
तेरी प्यास, मेरी आस, जमाने की अरदास
पूरी कर जाऊंगा।
मैं तेरा साजन,
ना भटका हूँ ना लौट कर जाऊंगा।।
यौवन का प्रवाह
लहरें टकरा तोड़ गई पहाड़ों को
शीतल धारा जीवनदायनी हजारों को
तुम भी तो आकाश गंगा हो
शिवजटा में विचरती जीवन हो
आगे बढ़ो जीवन दायनी, मन भावना
मत रुको, पूरी करो, जन जन आकांशा
एक मशाल पूरे जमाने को रोशन करती है
खुद जलती हाथों में मचलती फना होती है।
बनो जीवन धारा या मशाल सी
जीवन की मिसाल नाकि कठोर पाषाण सी
तरासी जाओगी मोनालिसा वीनस राधा सी
पूजी जाओगी अपने नगमों तरानों से कोकिला सी।
ना भटका हूँ ना लोट कर जाऊंगा
प्यास तेरी नियति, शांत कर पाऊंगा।
आसमा की बदली सा
सावन की रिमझिम सा
धरती के गर्भ में नए फूल खिलाऊंगा।
मरुधरा में नखालिस्तान
हरा भरा चमन खिलाऊंगा
तेरा मेरा अस्तित्व होगा एक
तेरी प्यास, मेरी आस, जमाने की अरदास
पूरी कर जाऊंगा।
मैं तेरा साजन,
ना भटका हूँ ना लौट कर जाऊंगा।।
शीतल धारा जीवनदायनी हजारों को
तुम भी तो आकाश गंगा हो
शिवजटा में विचरती जीवन हो
आगे बढ़ो जीवन दायनी, मन भावना
मत रुको, पूरी करो, जन जन आकांशा
एक मशाल पूरे जमाने को रोशन करती है
खुद जलती हाथों में मचलती फना होती है।
बनो जीवन धारा या मशाल सी
जीवन की मिसाल नाकि कठोर पाषाण सी
तरासी जाओगी मोनालिसा वीनस राधा सी
पूजी जाओगी अपने नगमों तरानों से कोकिला सी।
ना भटका हूँ ना लोट कर जाऊंगा
प्यास तेरी नियति, शांत कर पाऊंगा।
आसमा की बदली सा
सावन की रिमझिम सा
धरती के गर्भ में नए फूल खिलाऊंगा।
मरुधरा में नखालिस्तान
हरा भरा चमन खिलाऊंगा
तेरा मेरा अस्तित्व होगा एक
तेरी प्यास, मेरी आस, जमाने की अरदास
पूरी कर जाऊंगा।
मैं तेरा साजन,
ना भटका हूँ ना लौट कर जाऊंगा।।
Sunday, July 22, 2018
दोस्त
सफर में राहगीर मिलते बिछुड़ जाते है।
कुछ अपने बहूत करीबी भी बन जाते हैं।।
जो चलती सात कदम साथ वोह ता उम्र साथ निभाती है।
सयानी हो या बावली दिल को भाती, दूध में शक्कर सी मिल जाती है।।
प्याज के छिलके उतारो तो क्या कुछ मिलता है?
दोस्त को ऐबो के साथ स्वीकारो तो दोस्त मिलता है।|
दुनिया का फलसफा यही
कोई मूर्ति प्रभु ने सम्पूर्ण बनाई नही?
गोपाल जेल में जन्मे राम को बनवास हुआ।
राजा के पूत गौतम को तजने पर ही ज्ञान प्राप्त हुआ।।
हम क्या, हमारी हस्ती क्या,
मंदिर क्या, मयखाना क्या
बिना हमदम के यह दुनिया इस
कायनात का वजूद क्या यहां।।
कुछ अपने बहूत करीबी भी बन जाते हैं।।
जो चलती सात कदम साथ वोह ता उम्र साथ निभाती है।
सयानी हो या बावली दिल को भाती, दूध में शक्कर सी मिल जाती है।।
प्याज के छिलके उतारो तो क्या कुछ मिलता है?
दोस्त को ऐबो के साथ स्वीकारो तो दोस्त मिलता है।|
दुनिया का फलसफा यही
कोई मूर्ति प्रभु ने सम्पूर्ण बनाई नही?
गोपाल जेल में जन्मे राम को बनवास हुआ।
राजा के पूत गौतम को तजने पर ही ज्ञान प्राप्त हुआ।।
हम क्या, हमारी हस्ती क्या,
मंदिर क्या, मयखाना क्या
बिना हमदम के यह दुनिया इस
कायनात का वजूद क्या यहां।।
माँ की लोरी
मेरी प्यारी माँ मुझे आज भी लोरी सुनाती है
सपनों में आती और मुझे निहारती है ||
कभी इंतज़ार कराने में, कभी इंतज़ार करने में।
मां की ममता की छांव।
मेरी जिंदगी का सफल दाव।।
जहां मैं निडर हो हुकुम चलाता था।
हर किसी को मां का डर दिखाता था।
कितनीं हि बार मां को खिजाने,
डराने को मे छुप जाता था।
मां सहमती, बलाए लेती
मां सहमती, बलाए लेती
सड़क निहारती थी।।
कभी घड़ी देखती,
कभी कारण खोजती,
कभी घड़ी देखती,
कभी कारण खोजती,
कभी पास पड़ोस यार दोस्त को खंगालती
डर और गुस्से का मिश्रण बनी मेरी मां
जैसे ही देखती मझे,
डर और गुस्से का मिश्रण बनी मेरी मां
जैसे ही देखती मझे,
करुणा और रौद्र की प्रतिम बन जाती थी।
भुल जाती थी कुछ पहिले की ली कसमे
सिर्फ मुझे देर हुई क्यों,
भुल जाती थी कुछ पहिले की ली कसमे
सिर्फ मुझे देर हुई क्यों,
कैसे जानने
मेरी प्यारी माँ मुझे आज भी लोरी सुनाती है |
दीदार ए सनम
चांद में दाग है
हर कामनी को नजर लगाता है।
पर्दा उठते ही वोह
पर्दा उठते ही वोह
जलके राख हो जाता है।
ढक लो ,
ढक लो ,
मत देखो आयना,
झांको चिलमन की ओट से,
ना जाने कितनों को गश आता है।
एक हम ही हैं
एक हम ही हैं
जो सम्भाल सकते
तुम्हारा जलाल,
हमे दीदार कराने में
हमे दीदार कराने में
तुम्हारा क्या जाता है।
नीरज जी को समर्पित
इन बदनसीबों पर क्यों रोते हो।
क्यो गेंडे की खाल को धोते हो।।
नही परवाह इन आजके मसीहाओं को
ना कविता की ना तुम्हारी।
आज चले गए नीरज,
क्यों निराला दिनकर को घसीटते रोते हो।
जब चन्द्र बरदाई भी बिक गया एक मुट्ठी नमक के ताने पर
इन की क्या बिसात,चलो
सुने तुम्हारी भी।
कुछ कट गई कुछ कट जाएगी
क्यों दुनिया का ठेका लेते हो।
क्यो गेंडे की खाल को धोते हो।।
नही परवाह इन आजके मसीहाओं को
ना कविता की ना तुम्हारी।
आज चले गए नीरज,
क्यों निराला दिनकर को घसीटते रोते हो।
जब चन्द्र बरदाई भी बिक गया एक मुट्ठी नमक के ताने पर
इन की क्या बिसात,चलो
सुने तुम्हारी भी।
कुछ कट गई कुछ कट जाएगी
क्यों दुनिया का ठेका लेते हो।
अँधा इश्क
इश्क तो अंधा था जो तुम्हे मैं मिल गया।
ढूंढा सातो जहां में
खुली आँखों से ,
आंख बंद की तो
बगल में पा गया
स्वाति की एक बूंद जो मिली
मोती सा सनम पा गया
ढूंढा सातो जहां में
खुली आँखों से ,
आंख बंद की तो
बगल में पा गया
स्वाति की एक बूंद जो मिली
मोती सा सनम पा गया
इश्क का अहद
इश्क के दामन में फूल भी कांटे भी
सनम के होटों पर दस्तखत भी और खुशनुमा रातें भी||
जुदाई के क्षण कांटो की तरह सालते
सनम को याद करते तारे गिनते रातें गुजारते ||
उनकी खबर पाने की बेचेनी
धड़कने तेज और आँखों में सनसनी ||
मिलें तो गर्म साँसे बिछडे तो भुलाने का ख़तरा
यह फलसफा ताजिन्दगी चलता रहा ||
कभी ख़ुशी कभी गम
जैसे सावन और पतझड़ का मौसम||
जेहन में एक विस्वास
सात जन्म भी ना छूटेगा साथ ||
हम न कर्जदार ना साहूकार
दिल के सौदागर करते ऐतबार ||
इस जन्म में नही तो क्या हुआ
अगला जन्म भी तो आसमान से उतरता हुआ ||
भरोसे पर दुनिया कायम
वाशिंदे इस ही जहां के हम ||
वादा ...................सनम ...................
हमारे इश्क ने तेरी बही पर दस्तखत करे
हम नही बेवफा भलही आफत के भरे ||
यह जिन्दगी भी तेरी आनेवाली नही तेरी
कर खुदा से अरदास हम पूरी करें मन्नत तेरी ||
.................................डॉ श्रीकृष्ण मित्तल
Tuesday, July 10, 2018
कलम की महिमा
कलम की ताकत का तलवार की ताकत से क्या मुकाबला
तलवार की जीत कलम के एक वार से हार दी जाती है ||
घाव तलवार का भले ही भर जाए,
लेकिन कलम की स्याही जो सदियों तक असर लाती है ||
अगर नही होती कलम तो ना कुरआन होती, ना गीता
राम को भगवान यह कलम ही बनाती है ||
लेकिन कलम की स्याही जो सदियों तक असर लाती है ||
अगर नही होती कलम तो ना कुरआन होती, ना गीता
राम को भगवान यह कलम ही बनाती है ||
आज़ादी की मशाल जलती रखी कलमदारो ने,
तलवारछिपी हुयी थी म्यानो में,
क्रान्ति के वीर धधक रहे थे,
कलमवीर समाज को जगा रहे थे,
लेखको ने हिला दी थी अंग्रेज सल्तनत,
तुलसी कबीर ने झुका दी थी,
अकबर औरंगजेब की ताकत,
याद करो एमर्जंसी का ज़माना,
जिसे गोयनका झु क के माना||
तलवारछिपी हुयी थी म्यानो में,
क्रान्ति के वीर धधक रहे थे,
कलमवीर समाज को जगा रहे थे,
लेखको ने हिला दी थी अंग्रेज सल्तनत,
तुलसी कबीर ने झुका दी थी,
अकबर औरंगजेब की ताकत,
याद करो एमर्जंसी का ज़माना,
जिसे गोयनका झु क के माना||
ना कलम होती तो ना दिलो में राम होते |
ना अल्लाह, ना गुरु नानक, ना श्याम होते ||
ना अल्लाह, ना गुरु नानक, ना श्याम होते ||
ना हीर-रांझे की कहानी लिखी जाती |
लैला मजनू की कहानी रेगिस्तान में सिमट जाती||
कलम ना होती तो अपराध कैसे रुकते |
जज बिना कलम के फरमान ना देते ||
जज बिना कलम के फरमान ना देते ||
मकतब बेमानी होते मदरसे रुस्वां होते |
कलम ना होती तो ना नेताजी होते ना बाबा साहिब होते ||
ना मै मै होता ना तुम तुम होते
सलाम मेरी कलम को जिसने मुझे मै बना दिया|
सदका कलम का जिसने मुझे तुम से रूबरू करा दिया||
सदका कलम का जिसने मुझे तुम से रूबरू करा दिया||
Wednesday, July 4, 2018
जिस्मानी - रूहानी भूख
ना तुम ढोकली ना तुम रसगुल्ला
ना तुम मेरी भूख ना गर्म हल्ला।।
तुम बिन मैं अधूरा शायद
मुझ बिन तुम अधूरी।
आओ चलें तारों की छांव में करें उसे पूरी।।
जिस्म की बात कही
जो बिकते खरीदे जाते है
ना मैं उस गली का खरीदार
जहां जिस्म फरोश नजरें गड़ाते हैं।
मैं कृष्ण तुम राधा फिर
तो महज रूहानी कहानी है।
आ बना डालें यह दुनिया
सपनो सी रंगीन
कल की किसने जानी है।
ना तुम खाली
ना मैं रीता
साथ मे तुम तो
भूख बेमानी है।।
*भूख*
मैं सिर्फ जिस्म हूं तुम्हारे लिए।
तुम्हारी भूख का सामान।
गरमा गरम दाल ढोकली कि बगैर चम्मच पूरी कटोरी गटक।
ठंडा -ठंडा रसगुल्ला कि एक ही बार में गप्प।
नया -नया अलफ़ेन्ज़ो कि चूस चास के हज़म
गर्म- गर्म काफ़ी कि टेबल पर खतम।
सुनो!
मैं भी हूं इन्सान! मेरी भी है भूख जवान!
किंतु
अलग-अलग हैं हम-तुम अलग-अलग है भूख
मेरी भूख का सामान नहीं है तुम्हारे पास
नहीं है तुम्हारे पास रूह का सुकून।
मैं जानती हूं
खाली हाथ लौटूंगी इस सफ़र में
किंतु तनहा नहीं हूं मैं
साथ में है मेरी भूख अमर,अजर, चिरंतन।
----मीनू मदान
Subscribe to:
Posts (Atom)









