
Monday, May 25, 2020
यदि PM पप्पू सा होता
मादक
दवाई का सेवन करता
अमरीका
से छुड़ा कर लाना पड़ता
रंगरलियों
का दास 50
बरस का
कुंवारा
ऐक जोकर सा....
यदि
PM पप्पू
सा होता.....
संसद
में कागज फाड़े।
मतवाली आंखे मारे।
देवपुरुष
को जफ्फी मारे।
चौकीदार
को चोर कह डारे।
सुप्रीम कोर्ट में माफी डाले
ऐसे
महान पप्पू की सुन सुन
दुनिया
लज्जित होई।
इनकी
बराबरी का जोकर
ढूंढे
मिलता नहीं कोई।
इनकी
कुछ दूरदर्शी सोच........
विश्वपटल पर नाक रगड़ते,
फ़ैला
हुआ दामन होता ।
आलू
से सोना उपजाता,
आंकड़ा
पीचत्तीस का होता ॥
फ़िर
धीर वीर से भरी धरा का,
हाल
जोकरों सा होता।
यदि
PM पप्पू
सा होता
दुनिया
को शून्य दिया,
वही
भारतवर्ष लज्जित होता ।
जब
बात हिसाब की होती तो,
ढाई
हज़ार पाँच सौ को रोता।
ज्ञानियों
की पावन भूमि का ।
हर
दिन उपहास उड़ाते सब,
भूल
से भी मेरे भारत का
यदि
PM पप्पू
सा होता
JNU में
संसद चलती,
AMU राज्यसभा
होता ।
टुकड़े-टुकड़े
गैंगों के लिए,
एक
अलग से मंत्रालय होता॥
जहाँ
देश विरोधी नीतियों का,
नित
सृजन और अमल भी होता ।
भूल
से भी मेरे भारत का ........
यदि
PM पप्पू
सा होता
कश्मीर
से कन्याकुमारी तक का,
खाका
नया खिंचा होता ।
गद्दारों
की इस टोली का,
सरदार
भी सरकारी होता॥
जहाँ
मुस्लिम तुष्टीकरण हँसता,
ईसाई
धर्मांतरण हर कोने में पता।
कात्रची
एंडरसन मामा देश लूटते
भूल
से भी मेरे भारत का.........
यदि
PM पप्पू
सा होता
सलाहकार
शरजील,
प्रचारक
छात्र कन्हैया सा होता।
एक
और विभाजन भारत का,
यही
लक्ष्य गद्दारों का होता॥
भाईचारे
का पहन के चोला,
क़त्ल
संविधान का होता ।
भूल
से भी मेरे भारत का.........
ताहिर
हुसैन सा हत्यारा,
सरकार
का अति प्यारा होता ।
दिल्ली
दंगे में शामिल हर,
दंगाई
भी न्यारा होता॥
फ्रीडम
फाइटर कहलाता वो,
जो
तनिक चुटैल हुआ होता ।
भूल
से भी मेरे भारत का.........
अब
बात करें कोरोना की,
घोटाले
का माध्यम होता ।
जहाँ
जमाखोरी जमकर होती,
मास्क
दौलत बरसाता होता ॥
उपकरणों
की खरीद होती,
घोटालों
का मंज़र होता ।
भूल
से भी मेरे भारत का.........
जनता
को राहत सामग्री,
एक
ज़रिया कमाई का होता।
CWG घोटाले
का,
अवतार
अवतरित यूँ होता॥
तब
भोजन के प्रति पैकेट का,
टैरिफ
भी खासमखास होता।
भूल
से भी मेरे भारत का.........
यदि
PM पप्पू
सा होता
पौ
बारह होती बहना की,
ट्रेडिंग
जीजा करता होता।
अंजामों
से बेपरवाह PM,
कुत्तों
से खेल रहा होता ॥
मंत्री
संतरी होते प्रसन्न,
उत्सव
सा उनके घर होता।
भूल
से भी मेरे भारत का.........
यदि
PM पप्पू
सा होता
हावी
हो जाती महामारी
तो
पप्पू नानी घर होता ।
दीदी
जीजा के घर रहती,
मम्मी
का विदेश दौरा होता॥
ख़ुद
ही लड़ता ख़ुद ही मरता,
ये
देश अनाथों सा होता ।
भूल
से भी मेरे भारत का.........
यदि
PM पप्पू
सा होता
कहर
कोरोना का घर घर,
जमकर
कर रहा होता तांडव।
हर
भारतवासी कोरोना से
ख़ुद
ही जूझ रहा होता ॥
चित्कार
रही होती जनता,
घर
घर कोहराम मचा होता॥
भूल
से भी मेरे भारत का.
यदि
PM पप्पू
सा होता........
भूल
से भी मेरे भारत का
यदि
PM पप्पू
सा होता॥
.....वन्दे
रोम मातरम ॥
Saturday, October 5, 2019
Wednesday, February 27, 2019
पाकिस्तान का राष्ट्रीय गान...
... सारे जहाँ से "लुच्चा" पाकिस्तान हमारा .
हम "जानवर" हैं इसके , ये "चिड़ियाघर"हमारा. .
हम "जानवर" हैं इसके , ये "चिड़ियाघर"हमारा. .
शैतान" हमें सिखाता "आतंकवाद" फैलाना..
"नामर्द" है हम वतन के.. "चीन" माई बाप हमारा..
"नामर्द" है हम वतन के.. "चीन" माई बाप हमारा..
दुनिया जानती हमने अमेरिका को बेवकूफ बना कर लूटा
सारे जहाँ से "लुच्चा"... "पाकिस्तान" हमारा.....
सारे जहाँ से "लुच्चा"... "पाकिस्तान" हमारा.....
मजहब हमे सिखाता पडोसी से बैर रखना
हिन्दू क्रिस्तान सिखों पर सितम करना भगाना
हिन्दू क्रिस्तान सिखों पर सितम करना भगाना
हम मशहूर हैं दुनिया में कटोरा लिए हाथ में
भिखारी हैं हम, यह धंधा है हमारा |
भिखारी हैं हम, यह धंधा है हमारा |
झूट बोलना - फरेब करना फितरत हमारी
लोकशाही की तबाही तानाशाही की दुकानदारी
लोकशाही की तबाही तानाशाही की दुकानदारी
जूतों के भूत हैं हम ये ही इलाज है हमारा
सारे जहाँ से "लुच्चा"... "पाकिस्तान" हमारा.....
सारे जहाँ से "लुच्चा"... "पाकिस्तान" हमारा.....
Thursday, August 30, 2018
मचलता दिल
दिल में मचलता समंदर
तूफान सा घुमड़ता मंजर
किसी से मुलाकात की आस
किसी की मासूमियत का एहसास
जरूर वोह ही होगा
जिसकी आस में बिछी हर सांस
झुकी झुकी आंखे
आमंत्रण देती खास।
तूफान सा घुमड़ता मंजर
किसी से मुलाकात की आस
किसी की मासूमियत का एहसास
जरूर वोह ही होगा
जिसकी आस में बिछी हर सांस
झुकी झुकी आंखे
आमंत्रण देती खास।
वादा
ना भटका हूँ ना लोट कर जाऊंगा
प्यास तेरी नियति, शांत कर पाऊंगा।
आसमा की बदली सा
सावन की रिमझिम सा
धरती के गर्भ में नए फूल खिलाऊंगा।
मरुधरा में नखालिस्तान
हरा भरा चमन खिलाऊंगा
तेरा मेरा अस्तित्व होगा एक
तेरी प्यास, मेरी आस, जमाने की अरदास
पूरी कर जाऊंगा।
मैं तेरा साजन,
ना भटका हूँ ना लौट कर जाऊंगा।।
प्यास तेरी नियति, शांत कर पाऊंगा।
आसमा की बदली सा
सावन की रिमझिम सा
धरती के गर्भ में नए फूल खिलाऊंगा।
मरुधरा में नखालिस्तान
हरा भरा चमन खिलाऊंगा
तेरा मेरा अस्तित्व होगा एक
तेरी प्यास, मेरी आस, जमाने की अरदास
पूरी कर जाऊंगा।
मैं तेरा साजन,
ना भटका हूँ ना लौट कर जाऊंगा।।
यौवन का प्रवाह
लहरें टकरा तोड़ गई पहाड़ों को
शीतल धारा जीवनदायनी हजारों को
तुम भी तो आकाश गंगा हो
शिवजटा में विचरती जीवन हो
आगे बढ़ो जीवन दायनी, मन भावना
मत रुको, पूरी करो, जन जन आकांशा
एक मशाल पूरे जमाने को रोशन करती है
खुद जलती हाथों में मचलती फना होती है।
बनो जीवन धारा या मशाल सी
जीवन की मिसाल नाकि कठोर पाषाण सी
तरासी जाओगी मोनालिसा वीनस राधा सी
पूजी जाओगी अपने नगमों तरानों से कोकिला सी।
ना भटका हूँ ना लोट कर जाऊंगा
प्यास तेरी नियति, शांत कर पाऊंगा।
आसमा की बदली सा
सावन की रिमझिम सा
धरती के गर्भ में नए फूल खिलाऊंगा।
मरुधरा में नखालिस्तान
हरा भरा चमन खिलाऊंगा
तेरा मेरा अस्तित्व होगा एक
तेरी प्यास, मेरी आस, जमाने की अरदास
पूरी कर जाऊंगा।
मैं तेरा साजन,
ना भटका हूँ ना लौट कर जाऊंगा।।
शीतल धारा जीवनदायनी हजारों को
तुम भी तो आकाश गंगा हो
शिवजटा में विचरती जीवन हो
आगे बढ़ो जीवन दायनी, मन भावना
मत रुको, पूरी करो, जन जन आकांशा
एक मशाल पूरे जमाने को रोशन करती है
खुद जलती हाथों में मचलती फना होती है।
बनो जीवन धारा या मशाल सी
जीवन की मिसाल नाकि कठोर पाषाण सी
तरासी जाओगी मोनालिसा वीनस राधा सी
पूजी जाओगी अपने नगमों तरानों से कोकिला सी।
ना भटका हूँ ना लोट कर जाऊंगा
प्यास तेरी नियति, शांत कर पाऊंगा।
आसमा की बदली सा
सावन की रिमझिम सा
धरती के गर्भ में नए फूल खिलाऊंगा।
मरुधरा में नखालिस्तान
हरा भरा चमन खिलाऊंगा
तेरा मेरा अस्तित्व होगा एक
तेरी प्यास, मेरी आस, जमाने की अरदास
पूरी कर जाऊंगा।
मैं तेरा साजन,
ना भटका हूँ ना लौट कर जाऊंगा।।
Sunday, July 22, 2018
दोस्त
सफर में राहगीर मिलते बिछुड़ जाते है।
कुछ अपने बहूत करीबी भी बन जाते हैं।।
जो चलती सात कदम साथ वोह ता उम्र साथ निभाती है।
सयानी हो या बावली दिल को भाती, दूध में शक्कर सी मिल जाती है।।
प्याज के छिलके उतारो तो क्या कुछ मिलता है?
दोस्त को ऐबो के साथ स्वीकारो तो दोस्त मिलता है।|
दुनिया का फलसफा यही
कोई मूर्ति प्रभु ने सम्पूर्ण बनाई नही?
गोपाल जेल में जन्मे राम को बनवास हुआ।
राजा के पूत गौतम को तजने पर ही ज्ञान प्राप्त हुआ।।
हम क्या, हमारी हस्ती क्या,
मंदिर क्या, मयखाना क्या
बिना हमदम के यह दुनिया इस
कायनात का वजूद क्या यहां।।
कुछ अपने बहूत करीबी भी बन जाते हैं।।
जो चलती सात कदम साथ वोह ता उम्र साथ निभाती है।
सयानी हो या बावली दिल को भाती, दूध में शक्कर सी मिल जाती है।।
प्याज के छिलके उतारो तो क्या कुछ मिलता है?
दोस्त को ऐबो के साथ स्वीकारो तो दोस्त मिलता है।|
दुनिया का फलसफा यही
कोई मूर्ति प्रभु ने सम्पूर्ण बनाई नही?
गोपाल जेल में जन्मे राम को बनवास हुआ।
राजा के पूत गौतम को तजने पर ही ज्ञान प्राप्त हुआ।।
हम क्या, हमारी हस्ती क्या,
मंदिर क्या, मयखाना क्या
बिना हमदम के यह दुनिया इस
कायनात का वजूद क्या यहां।।
माँ की लोरी
मेरी प्यारी माँ मुझे आज भी लोरी सुनाती है
सपनों में आती और मुझे निहारती है ||
कभी इंतज़ार कराने में, कभी इंतज़ार करने में।
मां की ममता की छांव।
मेरी जिंदगी का सफल दाव।।
जहां मैं निडर हो हुकुम चलाता था।
हर किसी को मां का डर दिखाता था।
कितनीं हि बार मां को खिजाने,
डराने को मे छुप जाता था।
मां सहमती, बलाए लेती
मां सहमती, बलाए लेती
सड़क निहारती थी।।
कभी घड़ी देखती,
कभी कारण खोजती,
कभी घड़ी देखती,
कभी कारण खोजती,
कभी पास पड़ोस यार दोस्त को खंगालती
डर और गुस्से का मिश्रण बनी मेरी मां
जैसे ही देखती मझे,
डर और गुस्से का मिश्रण बनी मेरी मां
जैसे ही देखती मझे,
करुणा और रौद्र की प्रतिम बन जाती थी।
भुल जाती थी कुछ पहिले की ली कसमे
सिर्फ मुझे देर हुई क्यों,
भुल जाती थी कुछ पहिले की ली कसमे
सिर्फ मुझे देर हुई क्यों,
कैसे जानने
मेरी प्यारी माँ मुझे आज भी लोरी सुनाती है |
दीदार ए सनम
चांद में दाग है
हर कामनी को नजर लगाता है।
पर्दा उठते ही वोह
पर्दा उठते ही वोह
जलके राख हो जाता है।
ढक लो ,
ढक लो ,
मत देखो आयना,
झांको चिलमन की ओट से,
ना जाने कितनों को गश आता है।
एक हम ही हैं
एक हम ही हैं
जो सम्भाल सकते
तुम्हारा जलाल,
हमे दीदार कराने में
हमे दीदार कराने में
तुम्हारा क्या जाता है।
नीरज जी को समर्पित
इन बदनसीबों पर क्यों रोते हो।
क्यो गेंडे की खाल को धोते हो।।
नही परवाह इन आजके मसीहाओं को
ना कविता की ना तुम्हारी।
आज चले गए नीरज,
क्यों निराला दिनकर को घसीटते रोते हो।
जब चन्द्र बरदाई भी बिक गया एक मुट्ठी नमक के ताने पर
इन की क्या बिसात,चलो
सुने तुम्हारी भी।
कुछ कट गई कुछ कट जाएगी
क्यों दुनिया का ठेका लेते हो।
क्यो गेंडे की खाल को धोते हो।।
नही परवाह इन आजके मसीहाओं को
ना कविता की ना तुम्हारी।
आज चले गए नीरज,
क्यों निराला दिनकर को घसीटते रोते हो।
जब चन्द्र बरदाई भी बिक गया एक मुट्ठी नमक के ताने पर
इन की क्या बिसात,चलो
सुने तुम्हारी भी।
कुछ कट गई कुछ कट जाएगी
क्यों दुनिया का ठेका लेते हो।
अँधा इश्क
इश्क तो अंधा था जो तुम्हे मैं मिल गया।
ढूंढा सातो जहां में
खुली आँखों से ,
आंख बंद की तो
बगल में पा गया
स्वाति की एक बूंद जो मिली
मोती सा सनम पा गया
ढूंढा सातो जहां में
खुली आँखों से ,
आंख बंद की तो
बगल में पा गया
स्वाति की एक बूंद जो मिली
मोती सा सनम पा गया
इश्क का अहद
इश्क के दामन में फूल भी कांटे भी
सनम के होटों पर दस्तखत भी और खुशनुमा रातें भी||
जुदाई के क्षण कांटो की तरह सालते
सनम को याद करते तारे गिनते रातें गुजारते ||
उनकी खबर पाने की बेचेनी
धड़कने तेज और आँखों में सनसनी ||
मिलें तो गर्म साँसे बिछडे तो भुलाने का ख़तरा
यह फलसफा ताजिन्दगी चलता रहा ||
कभी ख़ुशी कभी गम
जैसे सावन और पतझड़ का मौसम||
जेहन में एक विस्वास
सात जन्म भी ना छूटेगा साथ ||
हम न कर्जदार ना साहूकार
दिल के सौदागर करते ऐतबार ||
इस जन्म में नही तो क्या हुआ
अगला जन्म भी तो आसमान से उतरता हुआ ||
भरोसे पर दुनिया कायम
वाशिंदे इस ही जहां के हम ||
वादा ...................सनम ...................
हमारे इश्क ने तेरी बही पर दस्तखत करे
हम नही बेवफा भलही आफत के भरे ||
यह जिन्दगी भी तेरी आनेवाली नही तेरी
कर खुदा से अरदास हम पूरी करें मन्नत तेरी ||
.................................डॉ श्रीकृष्ण मित्तल
Tuesday, July 10, 2018
कलम की महिमा
कलम की ताकत का तलवार की ताकत से क्या मुकाबला
तलवार की जीत कलम के एक वार से हार दी जाती है ||
घाव तलवार का भले ही भर जाए,
लेकिन कलम की स्याही जो सदियों तक असर लाती है ||
अगर नही होती कलम तो ना कुरआन होती, ना गीता
राम को भगवान यह कलम ही बनाती है ||
लेकिन कलम की स्याही जो सदियों तक असर लाती है ||
अगर नही होती कलम तो ना कुरआन होती, ना गीता
राम को भगवान यह कलम ही बनाती है ||
आज़ादी की मशाल जलती रखी कलमदारो ने,
तलवारछिपी हुयी थी म्यानो में,
क्रान्ति के वीर धधक रहे थे,
कलमवीर समाज को जगा रहे थे,
लेखको ने हिला दी थी अंग्रेज सल्तनत,
तुलसी कबीर ने झुका दी थी,
अकबर औरंगजेब की ताकत,
याद करो एमर्जंसी का ज़माना,
जिसे गोयनका झु क के माना||
तलवारछिपी हुयी थी म्यानो में,
क्रान्ति के वीर धधक रहे थे,
कलमवीर समाज को जगा रहे थे,
लेखको ने हिला दी थी अंग्रेज सल्तनत,
तुलसी कबीर ने झुका दी थी,
अकबर औरंगजेब की ताकत,
याद करो एमर्जंसी का ज़माना,
जिसे गोयनका झु क के माना||
ना कलम होती तो ना दिलो में राम होते |
ना अल्लाह, ना गुरु नानक, ना श्याम होते ||
ना अल्लाह, ना गुरु नानक, ना श्याम होते ||
ना हीर-रांझे की कहानी लिखी जाती |
लैला मजनू की कहानी रेगिस्तान में सिमट जाती||
कलम ना होती तो अपराध कैसे रुकते |
जज बिना कलम के फरमान ना देते ||
जज बिना कलम के फरमान ना देते ||
मकतब बेमानी होते मदरसे रुस्वां होते |
कलम ना होती तो ना नेताजी होते ना बाबा साहिब होते ||
ना मै मै होता ना तुम तुम होते
सलाम मेरी कलम को जिसने मुझे मै बना दिया|
सदका कलम का जिसने मुझे तुम से रूबरू करा दिया||
सदका कलम का जिसने मुझे तुम से रूबरू करा दिया||
Wednesday, July 4, 2018
जिस्मानी - रूहानी भूख
ना तुम ढोकली ना तुम रसगुल्ला
ना तुम मेरी भूख ना गर्म हल्ला।।
तुम बिन मैं अधूरा शायद
मुझ बिन तुम अधूरी।
आओ चलें तारों की छांव में करें उसे पूरी।।
जिस्म की बात कही
जो बिकते खरीदे जाते है
ना मैं उस गली का खरीदार
जहां जिस्म फरोश नजरें गड़ाते हैं।
मैं कृष्ण तुम राधा फिर
तो महज रूहानी कहानी है।
आ बना डालें यह दुनिया
सपनो सी रंगीन
कल की किसने जानी है।
ना तुम खाली
ना मैं रीता
साथ मे तुम तो
भूख बेमानी है।।
*भूख*
मैं सिर्फ जिस्म हूं तुम्हारे लिए।
तुम्हारी भूख का सामान।
गरमा गरम दाल ढोकली कि बगैर चम्मच पूरी कटोरी गटक।
ठंडा -ठंडा रसगुल्ला कि एक ही बार में गप्प।
नया -नया अलफ़ेन्ज़ो कि चूस चास के हज़म
गर्म- गर्म काफ़ी कि टेबल पर खतम।
सुनो!
मैं भी हूं इन्सान! मेरी भी है भूख जवान!
किंतु
अलग-अलग हैं हम-तुम अलग-अलग है भूख
मेरी भूख का सामान नहीं है तुम्हारे पास
नहीं है तुम्हारे पास रूह का सुकून।
मैं जानती हूं
खाली हाथ लौटूंगी इस सफ़र में
किंतु तनहा नहीं हूं मैं
साथ में है मेरी भूख अमर,अजर, चिरंतन।
----मीनू मदान
Tuesday, November 28, 2017
एक जीवन वृतांत
जीवन के सुंदर 45 वर्ष कैसे व्यतीत हो गए।
लगती कल कि सी बात जब तुम हम बंध गए ।।
मम्मी-डेडी,
दादी-बाबा,
चाचा-चाची,
मांमा-मामी,
मौसा-मौसी
अनुज गौरीशंकर,अनिल, विमल,अजय और
बहिन लक्ष्मी खुशी में झूमते गए।।
सजा था लश्कर दिवानो का घोड़ी पर हम इठलाये|
यार दोस्त पीछे रहे नही नाचे गाये धूम मचाए ||
सामने अगवानी को बहूत खड़े थे|
सालीके हाथ में नीम की डाली
सासू लिए आरते की थाली
ना जाने कितने निहारते खड़े थे ||
एक हम थे जो पहन कर हार तुम्हारा हम बिके थे |
सब के सामने गर्दन नीचे कर तुम्हारी छवि निहार रहे थे ||
फेरो की बेला आयी
कन्यादान की रस्म अदाई
फिर हुयी तुम्हारी भाव भीनी विदाई
और आँखे गीली करती,
सबको निहारती
मुझ पर विश्वास करती
तुम मेरे संग चली आई ||
27 नवम्बर 1972 का शुभ दिन भूलेगा नही।
जब तुम हम ही, नही दो परिवार एक होगये।।
गृहस्ती आगे बढ़ी हम दो से पांच हो गये ।
नितिन पूजा चेतन जैसे फूल खिल गए।
प्रवाह रुका नही
शीला,बेला, राकेश के बिना परिवार अधूरा,
मोहित, मिहिर,कोमल, गौरव,केशव,माधव
जैसे मनमोहक पौत्र,दोहित्रि,दौहित्र आज बड़े हो गए।।
मैं अत्ति भाग्यशाली देश के हर क्षेत्र में
आप जैसे शुभचिंतक मित्र मिल गए।।
लगती कल कि सी बात जब तुम हम बंध गए ।।
मम्मी-डेडी,
दादी-बाबा,
चाचा-चाची,
मांमा-मामी,
मौसा-मौसी
अनुज गौरीशंकर,अनिल, विमल,अजय और
बहिन लक्ष्मी खुशी में झूमते गए।।
सजा था लश्कर दिवानो का घोड़ी पर हम इठलाये|
यार दोस्त पीछे रहे नही नाचे गाये धूम मचाए ||
सामने अगवानी को बहूत खड़े थे|
सालीके हाथ में नीम की डाली
सासू लिए आरते की थाली
ना जाने कितने निहारते खड़े थे ||
एक हम थे जो पहन कर हार तुम्हारा हम बिके थे |
सब के सामने गर्दन नीचे कर तुम्हारी छवि निहार रहे थे ||
फेरो की बेला आयी
कन्यादान की रस्म अदाई
फिर हुयी तुम्हारी भाव भीनी विदाई
और आँखे गीली करती,
सबको निहारती
मुझ पर विश्वास करती
तुम मेरे संग चली आई ||
27 नवम्बर 1972 का शुभ दिन भूलेगा नही।
जब तुम हम ही, नही दो परिवार एक होगये।।
गृहस्ती आगे बढ़ी हम दो से पांच हो गये ।
नितिन पूजा चेतन जैसे फूल खिल गए।
प्रवाह रुका नही
शीला,बेला, राकेश के बिना परिवार अधूरा,
मोहित, मिहिर,कोमल, गौरव,केशव,माधव
जैसे मनमोहक पौत्र,दोहित्रि,दौहित्र आज बड़े हो गए।।
मैं अत्ति भाग्यशाली देश के हर क्षेत्र में
आप जैसे शुभचिंतक मित्र मिल गए।।
Thursday, September 21, 2017
रोहिंगियो की जगह भारत में नही -
खुदाई खिदमतगार जंतर मन्तर पर आंसू बहा रहे जिन्हें त्रस्त बर्मा निकाल रहा, पाक,बांग्ला नही सम्भाल रहे ||
कोई सुने बर्मा की भी गुहार जिसने झेला, इन रोहिंगियों का दमन और अत्याचार ||
कहाँ गये मलेशिया इंडोनेशिया और श्याम
वोह चीन, वोह दुबई, कतर अरब के मुसलमान ||
वोह चीन, वोह दुबई, कतर अरब के मुसलमान ||
अहिंसक बौध - विराधू को, क्यों उठाने पड़े हथियार
सब जानते क्यों, भारत झेले रोहिन्गीया आतंक की मार ||
सब जानते क्यों, भारत झेले रोहिन्गीया आतंक की मार ||
देखो बेशर्मी, सुप्रीम कोर्ट में पहुंचे इनके मददगार
जैसे इनका नही यह देश, और ना कोई सारोकार ||
जैसे इनका नही यह देश, और ना कोई सारोकार ||
अपने घर में ताले और बेशुमार चोकीदार
रोहिंगियों को देश में बसाओ इनकी पुकार ||
रोहिंगियों को देश में बसाओ इनकी पुकार ||
सुप्रीम कोर्ट को रात २ बजे खुलवाने वाले फिर जाग रहे
मानवतावाद की दुहाई दे सरकार को गरिया रहे||
मानवतावाद की दुहाई दे सरकार को गरिया रहे||
भूल गए काश्मीरी पंडितों का दर्द
लाखों लाशों का वोह जलजला यह बेदर्द ||
लाखों लाशों का वोह जलजला यह बेदर्द ||
४ करोड़ बांग्ला बस गये बंगाल में
कितने ही चूल्हे टूट चुके आसाम मिजोराम में ||
कितने ही चूल्हे टूट चुके आसाम मिजोराम में ||
एक तरफ हम सीमा बंद कर रहे
नकली नोट, गौतस्करी, हथियारों का दंश झेल रहे ||
नकली नोट, गौतस्करी, हथियारों का दंश झेल रहे ||
सुन ले यह मददगार, खुदाई खिदमतदार ,
इनके साथ में सुनले भारत की यशस्वी सरकार ||
इनके साथ में सुनले भारत की यशस्वी सरकार ||
काश्मीरी पंडितों को काश्मीर में बसाना होगा
४ करोड़ बांग्लादेशियों को भगाना होगा
४ करोड़ बांग्लादेशियों को भगाना होगा
ममता सरकार पर अंकुश लगा
रोहिंगियों को रास्ता दिखाना होगा
रोहिंगियों को रास्ता दिखाना होगा
भारत किसी विधवा की जागीर नही
ना ही कातिलों का अड्डा - कब्रगाह
क्योंकि ..............................
जर्रे जर्रे में शामिल है हमारे लहू के कतरे
जी हाँ हिन्दोस्तां हमारा और हमारे बाप का ही है ...
ना ही कातिलों का अड्डा - कब्रगाह
क्योंकि ..............................
जर्रे जर्रे में शामिल है हमारे लहू के कतरे
जी हाँ हिन्दोस्तां हमारा और हमारे बाप का ही है ...
Wednesday, August 23, 2017
तीन तलाक पर तबसरा
सायरा ,सबीना या मुमताज यही सोचती थी
ईंसाफ निराला ये देश के काजीे कैसे करेंगे
ईंसाफ निराला ये देश के काजीे कैसे करेंगे
कठमुल्लों के फतवे फरमान हैं चरम पर
अंधे लालची हैवानों का मुख कैसे काला करेंगे
अंधे लालची हैवानों का मुख कैसे काला करेंगे
हलाले के ख्वाबो मे मौलवी था मतवाला
माल काटेंगे औरं मजलुमो संग मजे करेंगे
माल काटेंगे औरं मजलुमो संग मजे करेंगे
खुदाई खिदमतगारो का दिवाला, इसी दर्द ने निकाला कि
अब तलाक होगया गैरकानुनी, तो हलाला कैसे करेंगे
अब तलाक होगया गैरकानुनी, तो हलाला कैसे करेंगे
लव जिहाद के मतवाले होगये गारत
निकाह तो कर लेंगे, तलाक कैसे करेंगे
भला हो सुप्रीमकोर्ट का, 9करोड खातूनो ने दी दुआ
अब जिंदगी बेखोफ अमन चैन से जियेंगे
निकाह तो कर लेंगे, तलाक कैसे करेंगे
भला हो सुप्रीमकोर्ट का, 9करोड खातूनो ने दी दुआ
अब जिंदगी बेखोफ अमन चैन से जियेंगे
सदका राखी का जो बांध थीं मोदी की कलाई पे
हिफाजत का पूरा किया बिरादर ने वादा, जिंदगी भर याद रखेंगे
हिफाजत का पूरा किया बिरादर ने वादा, जिंदगी भर याद रखेंगे
-डा: श्रीकृष्ण मित्तल
Thursday, August 3, 2017
बिहार में भरत मिलाप
दे दी पटकनी लालू राहुल को तुम दोनों ने बिना खडग बिना ढाल
पटना के रन बांकुरों नितीश मोदी, तुमने कर दिया कमाल
कल तक लालू यशस्वनी गुर्राते थे बार बार
राज में ना थी बिजली ना रक्षा था केवल भ्रष्टाचार
नीतिश कोस रहे थे वोह घड़ी जब लालू से हाथ मिलाया था
वोह समय जब आधी छोड़ पूरी को ललचाया था
इधर लालू के गुर्गो ने अपना रूप दिखाया था
सुशासन बाबू की प्रतिष्ठा को कोठे पर बैठाया था
चाणक्य निति ने फिर दो बिछड़ो को मिलाया
जयप्रकाश जी के सूरज चाँद को साथ दिलाया
नितीश ने दे मारा इस्तीफा तान के
चंगुल से बाहर आ गए सीना तान के
सरकार तो युगल जोड़ी ने चलानी थी
कुछ घडियों के बिछोह की कष्ट भरी यादें मिटानी थी
सामने थी बेकारी, अन्धकार, और सूखा बाढ़ गरीबी लाचारी
साथ थी हिम्मत, हौसला, संगठन शक्ति और दयानतदारी
लालू जेसों का तूफ़ान और अंधकार विरासत में मिला था
सामने समस्याओं का, बड़े बोलों का, लम्बा सिलसिला था
कुछ दिनों पूर्व का दृश्य याद करो साथियों
२०१० के चुनावों का स्मरण करो भाइयों
कहीं राम
कही राहुल
कहीं माया
कहीं लल्लू
कुरुक्षेत्र सज चूका था
बिहार चुनाव धधक चूका था
हमले हुए, तीर चले आरोप लगे
अपने पराये हुए, दिल में खंजर से लगे
जनता पर विश्वास था कर्म पर था भरोसा
साथ कमल सा कोमल और तीर सा कठोर था
शरद, शिवानन्द, ठाकुर, रविशंकर
शाहनवाज, शुष्मा, लालजी से साथ कर
भीड़ गये बौल हर हर महादेव अल्लाह हो अकबर
सामने लालू राबड़ी, रामविलास, राहुल सोनिया एक से एक बढ़ कर
काम जीत गया, विश्वाश बढ़ गया
नतीजे आज आये तो नशा सा चढ़ गया
एक दो नही २०० भी पार होगये
सामने तो तीन चार बीस बाईस रह गये
रन बाकुरे नही संभल सके जीत को और साथ निभाना
उस ही का परिणाम देख भुगत अपनी गलती को माना
जनता की अरदास दोनों से लम्बा साथ निभाना
कमल खिला रहे, तीर पैना रहे जनता की आस पुराना
डॉ श्रीकृष्ण मित्तल
पटना के रन बांकुरों नितीश मोदी, तुमने कर दिया कमाल
कल तक लालू यशस्वनी गुर्राते थे बार बार
राज में ना थी बिजली ना रक्षा था केवल भ्रष्टाचार
नीतिश कोस रहे थे वोह घड़ी जब लालू से हाथ मिलाया था
वोह समय जब आधी छोड़ पूरी को ललचाया था
इधर लालू के गुर्गो ने अपना रूप दिखाया था
सुशासन बाबू की प्रतिष्ठा को कोठे पर बैठाया था
चाणक्य निति ने फिर दो बिछड़ो को मिलाया
जयप्रकाश जी के सूरज चाँद को साथ दिलाया
नितीश ने दे मारा इस्तीफा तान के
चंगुल से बाहर आ गए सीना तान के
सरकार तो युगल जोड़ी ने चलानी थी
कुछ घडियों के बिछोह की कष्ट भरी यादें मिटानी थी
सामने थी बेकारी, अन्धकार, और सूखा बाढ़ गरीबी लाचारी
साथ थी हिम्मत, हौसला, संगठन शक्ति और दयानतदारी
लालू जेसों का तूफ़ान और अंधकार विरासत में मिला था
सामने समस्याओं का, बड़े बोलों का, लम्बा सिलसिला था
कुछ दिनों पूर्व का दृश्य याद करो साथियों
२०१० के चुनावों का स्मरण करो भाइयों
कहीं राम
कही राहुल
कहीं माया
कहीं लल्लू
कुरुक्षेत्र सज चूका था
बिहार चुनाव धधक चूका था
हमले हुए, तीर चले आरोप लगे
अपने पराये हुए, दिल में खंजर से लगे
जनता पर विश्वास था कर्म पर था भरोसा
साथ कमल सा कोमल और तीर सा कठोर था
शरद, शिवानन्द, ठाकुर, रविशंकर
शाहनवाज, शुष्मा, लालजी से साथ कर
भीड़ गये बौल हर हर महादेव अल्लाह हो अकबर
सामने लालू राबड़ी, रामविलास, राहुल सोनिया एक से एक बढ़ कर
काम जीत गया, विश्वाश बढ़ गया
नतीजे आज आये तो नशा सा चढ़ गया
एक दो नही २०० भी पार होगये
सामने तो तीन चार बीस बाईस रह गये
रन बाकुरे नही संभल सके जीत को और साथ निभाना
उस ही का परिणाम देख भुगत अपनी गलती को माना
जनता की अरदास दोनों से लम्बा साथ निभाना
कमल खिला रहे, तीर पैना रहे जनता की आस पुराना
डॉ श्रीकृष्ण मित्तल
Tuesday, June 13, 2017
मोदी चालीसा
श्री भारत चरण रज, निज
मन मुकुर सुधार ।
वरणौ मोदी विमल जस, जो करता जग सुधार ।।
बुद्धि हीन खुदको जान के, सुमरो गुर्जर कूमार।
यश कीर्ति शांति देवोमुझे, हरो गरीबी आतंक अत्याचार ।।
बुद्धि हीन खुदको जान के, सुमरो गुर्जर कूमार।
यश कीर्ति शांति देवोमुझे, हरो गरीबी आतंक अत्याचार ।।
जय नरेन्द्र ग्यान गुन सागर | जय मोदी तिहुँ लोक उजागर ||
राष्ट्रदूत अतुलित बलधामा | हीराबेन पुत्र नरेन्दर नामा ||
तुम उपकार राष्ट्र पर कीन्हा | गुजरात संवारि स्वर्ग सम कीन्हा ||
माया, मुलायम थर थर काँपैं | काँग्रेस को चिंता व्यापै ||
नासहि सपा मिटैं बसपाई | खिलै कमल फूलैं भजपाई ||
साधु संत के तुम रखबारे | असुर निकंदन राष्ट्रदुलारे ||
संत रसायन तुम्हरे पासा | सदा रहहु भारत के दासा ||
भारत विश्वगुरु बन जावै | जब मोदी दिल्ली मैं आवै ||8
चीन पाक दोउ निकट न आवै | जब मोदी को नाम सुनावै ||9
नासहिं दुष्ट और अपराधा | भ्रष्टाचार मिटावहिं बाधा ||10
करहि विकास स्वर्ग सम सुंदर | बनहि राम को सुंदर मंदिर ||11
असुर निवारि सुरन्ह कौ थापैं | राहुल सोनिया कबहुँ न व्यापै ||12
मोदी मंत्र एक सम जाना | करहि विकास राष्ट्र सनमाना ||13
भारत राष्ट्र पराक्रमशाली | होहि सिद्ध यह शंशय नाही ||14
जब तूम ने भृकुटि को ताना । नोटबंदी
हुई लगी कतारें नाना।।15
देश व्यापार तुमने विचारा । जीएसटी मे घेरा सारा।।16
तुमरो जस अमित ने गाया । राज पुरे
भारत का पाया।17
अरूण ने तुम्हे ध्याया ।
धन रक्षा दोनो पाया।।18
साधू संत ने तूम्हे पुकारा | योगी को दिया युपी सारा।।19
जिसने तुम्हे आंख दिखाई । पाक जैसी समर गति पाई।।20
जो यह पढे मोदी चालीसा । होय सिद्ध
राजा जैसा।।
यह सेवक सदा मोदी चेरा । किजे नाथ
ह्रदय मे डेरा।।
दामोदर तनय भारत रत्न, मंगलमुर्ती
रुप।
देशरक्षा करण दुष्टदलन, ह्रदय बसो यही रूप।।
देशरक्षा करण दुष्टदलन, ह्रदय बसो यही रूप।।
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