Sunday, January 29, 2023
Wednesday, December 28, 2022
गुलदस्ता
बेशक मेरा मन
अजनबियो का मेला होगा
पर एक गुलदस्ता है
हर भांति के फूल हैं इसमें
रंग बिरंगों का मेला है।
कुछ भगवान को
कुछ प्रिय इंसान को
कुछ बिदा होते
कुछ आगवानी करते
कुछ चिढ़ाते
कुछ मनाते
कुछ नूतन जुड़ते
कुछ रूसते बिदा होते
गुल तो खिलते
झड़ते मुरझाते
यही तो इस ग्रुप की पहिचान
क्योंकि यहां तो हर दम
हंसी खुशी प्यार की बेला है
Thursday, December 22, 2022
यह दुनिया बेगानी
यह दुनिया बेगानी
बेरंगी बेमानी
मतलबियों से भरी हुई
बेवफाओं से सजी हुई
बाप बड़ा ना भैया
सबसे बड़ा रुपिया
बनावटी बदन,
लीपे पुते दर्शन
मुखोटों से ढके
मिश्री से भरे
सार रहित वचन
फिर भी चाहत हसरत
से भरपूर टूटता यह मन
क्या बेचा क्या पाया
गांव भूले शहर बसे, कीमत बड़ी चुकाई है।
जीवन के उल्लास बेच के, खरीदी हमने तन्हाई है।
बिक गया है ईमान धरम, तब घर में शानो शौकत आई है।
संतोष बेच खरीदी बैचेनी, देखो कितनी मंहगाई है।।
बीघा बेच वर्ग फुटखरीदा, ये कैसी चतुराई है।
संयुक्त परिवार के वट वृक्ष से टूटी, नई पीढ़ी मुरझाई है।।
रिश्तों में हुए स्वार्थी, हर आंख ललचाई है।
कहां गुम हो गई मिठास, जीवन में कड़वाहट सी भर आई है।।
रस्सी की बुनी खाट बेच दी, गद्दों ने जगह बनाई है।
अचार, मुरब्बे हुए गायब,आलों में सजी दवाई है।।
माटी की सोंधी महक बेच के, बनावटी खुशबू पाई है।
मिट्टी का चुल्हा बिक गया, आज गैस पे खीर जलाई है।।
पांच पैसे का लेमनचूस था,अब चाकलेट हमने पाई है।
बिका रहम, करुणामय दिल, कुटिलता समर है।।
सैलून में अब बाल कट रहे, बिका मोहल्ले का नाई है।
टीवी के सामने दिन गुजरता, बोल को तरसतीअम्मा के संग ताई है।।
मलाई बरफ के गोले बिक गये, अब तो कोक की बोतल आई है।
मिट्टी के कितने घड़े बिक गये, अब फ्रीज़ में ठंढक आई है ।।
खपरैल बेच छत डाल दी, तपस ने नींद उड़ाई है।
बरकत के कई दीये बुझा कर, रौशनी बल्बों में आई है।।
गोबर से लिपे फर्श बेच दिये, चिकने फर्श में टांग तुड़ाई है।
देहरी से गौ माता बेची, अब कुत्ते संग रात बिताई है ।
गुड शक्कर भूल गए, मधुमेह, रक्तचाप ने, हर घर में जगह पाई है।।
दादी नानी की बिकी कहानियां, दूरदर्शन ने जगह बनाई है।
बहुत तनाव है जीवन में,गृहलक्ष्मी भी दो पैग लगाई है।
मतलबी हुए हैं रिश्ते बेचारे, बची नही उनमें कोई सच्चाई है।
उबटन बिक गया, क्रीम से मुख चमक रहे , दिल पे जमी गहरी काई है।
गाँव बेच कर शहर खरीदा, कीमत बड़ी चुकाई है।।
जीवन के उल्लास बेच के, खरीदी हमने तन्हाई है।।
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🌹🌹🌹
Sunday, December 4, 2022
शादी
शादी वोह लड्डू है
जिसे खा के लोग मुस्कुराते हैं
जीवन का आनंद लेते
परिवार बढ़ाते हैं।
बिना नमक के
सब्जी बेस्वाद होती है
कभी कभी ग्रहस्त जीवन में भी
तकरार होती है।
ए जी ओजी, सुनने को
रात में गरमागरम रोटी खाने को
तबियत बेकरार होती है।।
हमने भी यह लड्डू
खाए खिलाए हैं
जिनको नहीं मिले
यकीनन वो पछताए हैं
Saturday, November 26, 2022
विवाह स्वर्ण जयंती
"विवाह स्वर्ण जयंती"
बिना तुम्हारे काटती
हमने ना जाने कितनी सालगिरह साथ मनाई
हर वर्ष लक्ष्मी रूप में,तुम लक्ष्मी साथ आई।
प्रिय, 1972 का वोह दिन रह रह उभरता है
सोच सोच दिल जोर जोर धड़कता है
घोड़ी पर चढ़ मैं तुम्हे मनाने आया था।
लंबा चौड़ा लश्कर भी साथ लाया था।
तुम सहमी सी,
हिरणी की आंखो सी निहार रही थी।
दो दिलों में तो प्रेम कली खिल रही थी।
प्रति वर्ष यह तिथि खास होती थी।
मधुरतम मधु रात्रि की समृति
हर्षित मोहित करती थी।
प्रथम वर्ष समाप्ति पूर्व
ईश्वर की सौगात पाई थी।
पुत्र रत्न की किलकारी
हर किसी को हरसाई थी।
जिंदगी को विराम कहां
हमे तुम्हे था विश्राम कहां?
संघर्ष में बनी थी तुम संबल मेरा।
मेरी हार को भी जीत माना
मुझे बांधा विजय सेहरा।
क्षणिक खुशी के पलों को भी
तुम्हारा संबल मिला
कन्या और दित्य पुत्र प्राप्ति से
परिवार पूर्ण हो चला।
हम चलते चलते ना जाने
कहां से कहां पहुंच गए।
मैसूर आ कर थमना था तो जम गए।
विश्वास नहीं होता की
कैसे ५० वर्ष निकल गए।
आज फिर वोह ही दिन पाया है।
विवाह की स्वर्ण जयंती का अवसर आया है।
तुम बिन इस दिन का कोई अर्थ कैसे।
तुम नहीं तो विवाह सवर्ण वर्षगांठ शूल जैसे।
आज तुम्हे याद कर
तुम्हारे चित्र को
अश्रुपुष्प अर्पण करता हूं
मन पटल पर छाई
तुम्हे नमन करता हूं।
काश आज तुम होती
इस दिन बड़ी रौनक,
देवी दर्शन, दावतें होती
सभी मित्र, बंधु बांधव,
नाती पौते बलैया लेते।
आज के दिन को
५० वर्ष पूर्व जैसा जी लेते।
बंद कमरे में, अकेला
तुम्हारी यादों में खोया हूं।
आसमान को निहारता
तारों में तुम्हे खोजता हूं।
तुम्हारी तस्वीरों में मन विचर रहा
साथ बिताए हर पल स्मरण कर रहा
भरपूर गृहस्ती संसार है
लेकिन प्रिय तुम बिना बेकार है।
🌹 🌹🌹 🌹
डा श्रीकृष्ण मित्तल
Wednesday, July 13, 2022
यादें प्रियतमा की
Wednesday, June 29, 2022
दिल की तड़प
Thursday, June 2, 2022
गौसेवा हेतु आश्रुपूर्ण मिलन
प्रिय
Wednesday, February 9, 2022
मैं रोज तराना गाता हूं
मैं रोज तराना गाता हूं
Monday, November 8, 2021
अधूरी दिवाली
हमने ना जाने कितनी दिवाली साथ मनाई
हर दिवाली लक्ष्मी रूप में,लक्ष्मी साथ आई।
कितने ही आरती पूजन साथ किए।
घर दुकान कारखानों में दीप रोशन किए।
पटाखों के धमाकों और शोर में,
फूलझाड़ियों की झरझर में
मिठाई की सुगंध मिठास में
नूतन सुंदर जेवर परिधान में
हर साल तुम मन पे छा जाती थी
नही भूल पा रहा
तुम्हारा दमकता चमकता चेहरा
तुम्हारा उल्लास भरा आभास
दिवाली तो इस वर्ष भी आ गई
पर तुम ना जाने कहां खो गई।
दीप भी जलेंगे
पटाखे भी चलेंगे
मिठाई भी बटेंगी
बोनस भी बटेगा
पूजा भी होगी
लेकिन तुम..........
ना जाने कहां खो गई
यादों के झरोखों में
पलक की कोरो में
हृदय के कोनों में
ढूंढती तरसती आंखें
हर एक की तरसती भावना
मेरे मन में बसी तरसती आत्मा
वर्षों से मेरी प्यारी सखी
मेरे परिवार की एकल कड़ी
दिवाली तो आ गई
पर तुम ना जाने क्यों रूठ गई
ना जाने तुम, कहां खो गई।
यह रूखी बेरंग दिवाली
तुम्हारे बिना नही मनानी
यह अधूरी दिवाली .....
Wednesday, August 4, 2021
चाय बनी हरजाई
Saturday, July 24, 2021
श्रधा सुमन
Wednesday, July 21, 2021
Saturday, June 26, 2021
यार की यारी
Monday, April 26, 2021
हाय आम : वाह आम
Tuesday, November 10, 2020
बिहार का संग्राम 2024
दे दी पटकनी लालू तेजस्वी, राहुल को तुने बिना खडग बिना ढाल।
पटना के रन बांकुरे तुमने कर दिया कमाल।।
कल तक नितीश- मोदी झेलते थे हमले बार बार।
राज में ना बिजली, ना रक्षा, जनता में हाहाकार ।। जयप्रकाश के पठे बिहार में जन्मे दो सितारे।
नितीश इस धरती के तारे।।
सामने थी बेकारी, अन्धकार, और सूखा बाढ़ गरीबी लाचारी ।
साथ थी हिम्मत, हौसला, संगठन शक्ति और दयानतदारी ।।
पांच वर्ष पहीले अंधकार विरासत में मिला था ।
सामने समश्याओं का लम्बा सिलसिला था ।।
लड़ते लड़ते निकल गये सरदारों के सरदार ।
हिम्मत ना हार के आगयी परिक्षा जनता के दरबार ।।
परीक्षक केद्र सरकार के 2010फिर 2015 का सुशासन राज ।
2024 में पुन: जनता के दरबार में आवाज़।।
कहीं राहुल कहीं लल्लू ।।
कुरुक्षेत्र सज चूका।
बिहार चुनाव धधक चूका।।
फिर महागठबंधन बन गया।
ऐनडीए के सामने इंडी रावण सेना सा डट गया।।
ओबेस्सी जैसे देश तोड़क भी आ गए।
कितने ही बिहार के स्वंभू मालिक बन गए।।
हमले होंगे, तीर चलेगै आरोप लगेगै।
अपने पराये हुए, दिल में खंजर से लगेगै।।
जनता पर विश्वास ,कर्म पर भरोसा।
साथ कमल सा कोमल और तीर कठोर सा।।
साथ में और हम होंगे।।
पासवान ऊपर चले गए चिराग अपनो को जलाने आयेंगे।।
भिड़ गये बोल हर हर महादेव अल्लाह हो अकबर ।।
सामने तेजस्वी, लालू राउल, सोनिया।
ना जाने कितने एक से एक बढ़ कर।
काम जीतेगा, विश्वाश बढ़ जायेगा ।
मोदी जी का जादू चल गया। डबल इंजन, डबल युवराज पर चढ़ गया।
सुशासन बाबू का तीर निशाने पर लग गया।।
भाजपा का कमल, पूरे बिहार में खिल गया।।
आओ करें सम्मान इस जीत का।
जो करेगी विकास बिहार का, बिहारी का।।
रन बाकुरो जीत को संभालना साथ निभाना।
कमल खिला रहे, तीर पैना रहे ।
जनता की आस को निभाना।।
प्रस्तुतकर्ता डा श्रीकृष्ण मित्तल
Friday, November 6, 2020
करोना को जवाब पटाखे बन्द
Thursday, October 1, 2020
डाक्टर का मशवरा
Friday, August 14, 2020
..पिताश्री....
Sunday, August 2, 2020
राम मन्दिर निर्माण
Monday, May 25, 2020
यदि PM पप्पू सा होता
Saturday, October 5, 2019
Wednesday, February 27, 2019
पाकिस्तान का राष्ट्रीय गान...
हम "जानवर" हैं इसके , ये "चिड़ियाघर"हमारा. .
"नामर्द" है हम वतन के.. "चीन" माई बाप हमारा..
सारे जहाँ से "लुच्चा"... "पाकिस्तान" हमारा.....
हिन्दू क्रिस्तान सिखों पर सितम करना भगाना
भिखारी हैं हम, यह धंधा है हमारा |
लोकशाही की तबाही तानाशाही की दुकानदारी
सारे जहाँ से "लुच्चा"... "पाकिस्तान" हमारा.....
Thursday, August 30, 2018
मचलता दिल
तूफान सा घुमड़ता मंजर
किसी से मुलाकात की आस
किसी की मासूमियत का एहसास
जरूर वोह ही होगा
जिसकी आस में बिछी हर सांस
झुकी झुकी आंखे
आमंत्रण देती खास।
वादा
प्यास तेरी नियति, शांत कर पाऊंगा।
आसमा की बदली सा
सावन की रिमझिम सा
धरती के गर्भ में नए फूल खिलाऊंगा।
मरुधरा में नखालिस्तान
हरा भरा चमन खिलाऊंगा
तेरा मेरा अस्तित्व होगा एक
तेरी प्यास, मेरी आस, जमाने की अरदास
पूरी कर जाऊंगा।
मैं तेरा साजन,
ना भटका हूँ ना लौट कर जाऊंगा।।













