Thursday, August 30, 2018

मचलता दिल

दिल में मचलता समंदर
तूफान सा घुमड़ता मंजर

किसी से मुलाकात की आस
किसी की मासूमियत का एहसास

जरूर वोह ही होगा
जिसकी आस में बिछी हर सांस

झुकी झुकी आंखे
आमंत्रण देती खास।

वादा

ना भटका हूँ ना लोट कर जाऊंगा
प्यास तेरी नियति, शांत कर पाऊंगा।

आसमा की बदली सा
सावन की रिमझिम सा
धरती के गर्भ में नए फूल खिलाऊंगा।

मरुधरा में नखालिस्तान
हरा भरा चमन खिलाऊंगा

तेरा मेरा अस्तित्व होगा एक
तेरी प्यास, मेरी आस, जमाने की अरदास
पूरी कर जाऊंगा।

मैं तेरा साजन,
ना भटका हूँ ना लौट कर जाऊंगा।।

यौवन का प्रवाह

लहरें टकरा तोड़ गई पहाड़ों को
शीतल धारा जीवनदायनी हजारों को

तुम भी तो आकाश गंगा हो
शिवजटा में विचरती जीवन हो

आगे बढ़ो जीवन दायनी, मन भावना
मत रुको, पूरी करो, जन जन आकांशा

एक मशाल पूरे जमाने को रोशन करती है
खुद जलती हाथों में मचलती फना होती है।

बनो जीवन धारा या मशाल सी
जीवन की मिसाल नाकि कठोर पाषाण सी

तरासी जाओगी मोनालिसा वीनस राधा सी
पूजी जाओगी अपने नगमों तरानों से कोकिला सी।
ना भटका हूँ ना लोट कर जाऊंगा
प्यास तेरी नियति, शांत कर पाऊंगा।

आसमा की बदली सा
सावन की रिमझिम सा
धरती के गर्भ में नए फूल खिलाऊंगा।

मरुधरा में नखालिस्तान
हरा भरा चमन खिलाऊंगा

तेरा मेरा अस्तित्व होगा एक
तेरी प्यास, मेरी आस, जमाने की अरदास
पूरी कर जाऊंगा।

मैं तेरा साजन,
ना भटका हूँ ना लौट कर जाऊंगा।।

Sunday, July 22, 2018

दोस्त

सफर में राहगीर मिलते बिछुड़ जाते है।
कुछ अपने बहूत करीबी भी बन जाते हैं।।

जो चलती सात कदम साथ वोह ता उम्र साथ निभाती है।
सयानी हो या बावली दिल को भाती, दूध में शक्कर सी मिल जाती है।।

प्याज के छिलके उतारो तो क्या कुछ मिलता है?
दोस्त को ऐबो के साथ स्वीकारो तो दोस्त मिलता है।|

दुनिया का फलसफा यही
कोई मूर्ति प्रभु ने सम्पूर्ण बनाई नही? 

गोपाल जेल में जन्मे राम को बनवास हुआ।
राजा के पूत गौतम को तजने पर ही ज्ञान प्राप्त हुआ।।

हम क्या, हमारी हस्ती क्या,
मंदिर क्या, मयखाना क्या

बिना हमदम के यह दुनिया इस
कायनात का वजूद क्या यहां।।

माँ की लोरी

मेरी प्यारी माँ मुझे आज भी लोरी सुनाती है 
सपनों में आती और मुझे निहारती है ||

जिंदगी यूँ ही बीत जाती है। 
कभी इंतज़ार कराने में, कभी इंतज़ार करने में। 

मां की ममता की छांव।
मेरी जिंदगी का सफल दाव।।

जहां मैं निडर हो हुकुम चलाता था।
हर किसी को मां का डर दिखाता था।

कितनीं हि बार मां को खिजाने, 
डराने को मे छुप जाता था।
मां सहमती, बलाए लेती
सड़क निहारती थी।।
कभी घड़ी देखती,
कभी कारण खोजती,
कभी पास पड़ोस यार दोस्त को खंगालती
डर और गुस्से का मिश्रण बनी मेरी मां
जैसे ही देखती मझे, 
करुणा और रौद्र की प्रतिम बन जाती थी।
भुल जाती थी कुछ पहिले की ली कसमे
सिर्फ मुझे देर हुई क्यों,
कैसे जानने
मेरी प्यारी माँ मुझे आज भी लोरी सुनाती है |

दीदार ए सनम

चांद में दाग है 
हर कामनी को नजर लगाता है।
पर्दा उठते ही वोह 
जलके राख हो जाता है।
ढक लो , 
मत देखो आयना, 
झांको चिलमन की ओट से, 
ना जाने कितनों को गश आता है।
एक हम ही हैं 
जो सम्भाल सकते 
तुम्हारा जलाल,
हमे दीदार कराने में 
तुम्हारा क्या जाता है।

नीरज जी को समर्पित

इन बदनसीबों पर क्यों रोते हो।
क्यो गेंडे की खाल को धोते हो।।
नही परवाह इन आजके मसीहाओं को
ना कविता की ना तुम्हारी।
आज चले गए नीरज,
क्यों निराला दिनकर को घसीटते रोते हो।
जब चन्द्र बरदाई भी बिक गया एक मुट्ठी नमक के ताने पर
इन की क्या बिसात,चलो
सुने तुम्हारी भी।
कुछ कट गई कुछ कट जाएगी
क्यों दुनिया का ठेका लेते हो।

अँधा इश्क

इश्क तो अंधा था जो तुम्हे मैं मिल गया।
ढूंढा सातो जहां में 

खुली आँखों से ,
आंख बंद की तो 
बगल में पा गया
स्वाति की एक बूंद जो मिली
मोती सा सनम पा गया

इश्क का अहद


इश्क के दामन में फूल भी कांटे भी
सनम के होटों पर दस्तखत भी और खुशनुमा रातें भी||
जुदाई के क्षण कांटो की तरह सालते
सनम को याद करते तारे गिनते रातें गुजारते ||

उनकी खबर पाने की बेचेनी
धड़कने तेज और आँखों में सनसनी ||

मिलें तो गर्म साँसे बिछडे तो भुलाने का ख़तरा
यह फलसफा ताजिन्दगी चलता रहा ||

कभी ख़ुशी कभी गम
जैसे सावन और पतझड़ का मौसम||
जेहन में एक विस्वास
सात जन्म भी ना छूटेगा साथ ||

हम न कर्जदार ना साहूकार
दिल के सौदागर करते ऐतबार ||

इस जन्म में नही तो क्या हुआ
अगला जन्म भी तो आसमान से उतरता हुआ ||

भरोसे पर दुनिया कायम
वाशिंदे इस ही जहां के हम ||
वादा ...................सनम ...................
हमारे इश्क ने तेरी बही पर दस्तखत करे
हम नही बेवफा भलही आफत के भरे ||

यह जिन्दगी भी तेरी आनेवाली नही तेरी
कर खुदा से अरदास हम पूरी करें मन्नत तेरी ||
.................................डॉ श्रीकृष्ण मित्तल

Tuesday, July 10, 2018

कलम की महिमा

कलम की ताकत का तलवार की ताकत से क्या मुकाबला
तलवार की जीत कलम के एक वार से हार दी जाती है ||
घाव तलवार का भले ही भर जाए,
लेकिन कलम की स्याही जो सदियों तक असर लाती है ||
अगर नही होती कलम तो ना कुरआन होती, ना गीता
राम को भगवान यह कलम ही बनाती है ||
आज़ादी की मशाल जलती रखी कलमदारो ने,
तलवारछिपी हुयी थी म्यानो में,
क्रान्ति के वीर धधक रहे थे,
कलमवीर समाज को जगा रहे थे,
लेखको ने हिला दी थी अंग्रेज सल्तनत,
तुलसी कबीर ने झुका दी थी,
अकबर औरंगजेब की ताकत,
याद करो एमर्जंसी का ज़माना,
जिसे गोयनका झु क के माना||
ना कलम होती तो ना दिलो में राम होते |
ना अल्लाह, ना गुरु नानक, ना श्याम होते || 

ना हीर-रांझे की कहानी लिखी जाती |
लैला मजनू की कहानी रेगिस्तान में सिमट जाती||
कलम ना होती तो अपराध कैसे रुकते |
जज बिना कलम के फरमान ना देते ||

मकतब बेमानी होते मदरसे रुस्वां होते |
कलम ना होती तो ना नेताजी होते ना बाबा साहिब होते ||
ना मै मै होता ना तुम तुम होते
सलाम मेरी कलम को जिसने मुझे मै बना दिया|
सदका कलम का जिसने मुझे तुम से रूबरू करा दिया||

Wednesday, July 4, 2018

जिस्मानी - रूहानी भूख

ना तुम ढोकली ना तुम रसगुल्ला
ना तुम मेरी भूख ना गर्म हल्ला।।
तुम बिन मैं अधूरा शायद
मुझ बिन तुम अधूरी।
आओ चलें तारों की छांव में करें उसे पूरी।।
जिस्म की बात कही
जो बिकते खरीदे जाते है
ना मैं उस गली का खरीदार
जहां जिस्म फरोश नजरें गड़ाते हैं।
मैं कृष्ण तुम राधा फिर
तो महज रूहानी कहानी है।
आ बना डालें यह दुनिया
सपनो सी रंगीन
कल की किसने जानी है।
ना तुम खाली
ना मैं रीता
साथ मे तुम तो
भूख बेमानी है।।

*भूख*
मैं सिर्फ जिस्म हूं तुम्हारे लिए।
तुम्हारी भूख का सामान।
गरमा गरम दाल ढोकली कि बगैर चम्मच पूरी कटोरी​ गटक।
ठंडा -ठंडा रसगुल्ला कि एक ही बार में गप्प।
नया -नया अलफ़ेन्ज़ो कि चूस चास के हज़म
गर्म- गर्म काफ़ी कि टेबल पर खतम।
सुनो!
मैं भी हूं इन्सान! मेरी भी है भूख जवान!
किंतु
अलग-अलग हैं हम-तुम अलग-अलग है भूख
मेरी भूख का सामान नहीं है तुम्हारे पास
नहीं है तुम्हारे पास रूह का सुकून।
मैं जानती हूं
खाली हाथ लौटूंगी इस सफ़र में
किंतु तनहा नहीं हूं मैं
साथ में है मेरी भूख अमर,अजर, चिरंतन।
----मीनू मदान

Tuesday, November 28, 2017

एक जीवन वृतांत

जीवन के सुंदर 45 वर्ष कैसे व्यतीत हो गए।
लगती कल कि सी बात जब तुम हम बंध गए ।।

मम्मी-डेडी,
दादी-बाबा,
चाचा-चाची,
मांमा-मामी,
मौसा-मौसी
अनुज गौरीशंकर,अनिल, विमल,अजय और
बहिन लक्ष्मी खुशी में झूमते गए।।

सजा था लश्कर दिवानो का घोड़ी पर हम इठलाये|
यार दोस्त पीछे रहे नही नाचे गाये धूम मचाए ||

सामने अगवानी को बहूत खड़े थे|
सालीके हाथ में नीम की डाली
 सासू लिए आरते की थाली
 ना जाने कितने निहारते खड़े थे ||

एक हम थे जो पहन कर  हार तुम्हारा हम बिके थे |
सब के सामने गर्दन नीचे कर तुम्हारी छवि निहार रहे थे || 

फेरो की बेला आयी
कन्यादान की रस्म अदाई
फिर हुयी तुम्हारी भाव भीनी विदाई
और आँखे गीली करती,
सबको निहारती
मुझ पर विश्वास करती
तुम मेरे संग चली आई ||

27 नवम्बर 1972 का शुभ दिन भूलेगा नही।
जब तुम हम ही, नही दो परिवार एक होगये।।

गृहस्ती आगे बढ़ी हम दो से पांच हो गये ।
नितिन पूजा चेतन जैसे फूल खिल गए।

प्रवाह रुका नही
शीला,बेला, राकेश के बिना परिवार अधूरा,
मोहित, मिहिर,कोमल, गौरव,केशव,माधव
जैसे मनमोहक पौत्र,दोहित्रि,दौहित्र आज बड़े हो गए।।

मैं अत्ति भाग्यशाली देश के हर क्षेत्र में
आप जैसे शुभचिंतक मित्र मिल गए।।

Thursday, September 21, 2017

रोहिंगियो की जगह भारत में नही -

खुदाई खिदमतगार जंतर मन्तर पर आंसू बहा रहे                                                             जिन्हें त्रस्त बर्मा निकाल रहा, पाक,बांग्ला नही सम्भाल रहे ||
कोई सुने बर्मा की भी गुहार                                                                                         जिसने झेला, इन रोहिंगियों का दमन और अत्याचार ||
कहाँ गये मलेशिया इंडोनेशिया और श्याम 
वोह चीन, वोह दुबई, कतर अरब के मुसलमान ||
अहिंसक बौध - विराधू को, क्यों उठाने पड़े हथियार
सब जानते क्यों, भारत झेले रोहिन्गीया आतंक की मार ||
देखो बेशर्मी, सुप्रीम कोर्ट में पहुंचे इनके मददगार
जैसे इनका नही यह देश, और ना कोई सारोकार ||
अपने घर में ताले और बेशुमार चोकीदार
रोहिंगियों को देश में बसाओ इनकी पुकार ||
सुप्रीम कोर्ट को रात २ बजे खुलवाने वाले फिर जाग रहे
मानवतावाद की दुहाई दे सरकार को गरिया रहे||
भूल गए काश्मीरी पंडितों का दर्द
लाखों लाशों का वोह जलजला यह बेदर्द ||
४ करोड़ बांग्ला बस गये बंगाल में
कितने ही चूल्हे टूट चुके आसाम मिजोराम में ||
एक तरफ हम सीमा बंद कर रहे
नकली नोट, गौतस्करी, हथियारों का दंश झेल रहे ||
सुन ले यह मददगार, खुदाई खिदमतदार ,
इनके साथ में सुनले भारत की यशस्वी सरकार ||
काश्मीरी पंडितों को काश्मीर में बसाना होगा
४ करोड़ बांग्लादेशियों को भगाना होगा
ममता सरकार पर अंकुश लगा
रोहिंगियों को रास्ता दिखाना होगा
भारत किसी विधवा की जागीर नही
ना ही कातिलों का अड्डा - कब्रगाह
क्योंकि ..............................

जर्रे जर्रे में शामिल है हमारे लहू के कतरे
जी हाँ हिन्दोस्तां हमारा और हमारे बाप का ही है ...

Wednesday, August 23, 2017

तीन तलाक पर तबसरा


सायरा ,सबीना या मुमताज यही सोचती थी
ईंसाफ निराला ये देश के काजीे कैसे करेंगे
कठमुल्लों के फतवे फरमान हैं चरम पर
अंधे लालची हैवानों का मुख कैसे काला करेंगे
हलाले के ख्वाबो मे मौलवी था मतवाला
माल काटेंगे औरं मजलुमो संग मजे करेंगे
खुदाई खिदमतगारो का दिवाला, इसी दर्द ने निकाला कि
अब तलाक होगया गैरकानुनी, तो हलाला कैसे करेंगे
लव जिहाद के मतवाले होगये गारत
निकाह तो कर लेंगे, तलाक कैसे करेंगे

भला हो सुप्रीमकोर्ट का, 9करोड खातूनो ने दी दुआ
अब जिंदगी बेखोफ अमन चैन से जियेंगे
सदका राखी का जो बांध थीं मोदी की कलाई पे
हिफाजत का पूरा किया बिरादर ने वादा, जिंदगी भर याद रखेंगे
-डा: श्रीकृष्ण मित्तल

Thursday, August 3, 2017

बिहार में भरत मिलाप

दे दी पटकनी लालू राहुल को तुम दोनों ने बिना खडग बिना ढाल
पटना के रन बांकुरों नितीश मोदी, तुमने कर दिया कमाल

कल तक लालू यशस्वनी गुर्राते थे  बार बार
राज में ना थी बिजली ना रक्षा था  केवल भ्रष्टाचार 

नीतिश कोस रहे थे वोह घड़ी जब लालू से हाथ मिलाया था 
वोह समय जब आधी छोड़ पूरी को ललचाया था 

इधर लालू के गुर्गो ने अपना रूप दिखाया था
सुशासन बाबू की प्रतिष्ठा को कोठे पर बैठाया था 

चाणक्य निति ने फिर दो बिछड़ो को मिलाया 
जयप्रकाश जी के सूरज चाँद को साथ दिलाया 

नितीश ने दे मारा इस्तीफा तान के 
चंगुल से बाहर आ गए सीना तान के 

सरकार तो युगल जोड़ी ने चलानी थी 
कुछ घडियों के बिछोह की कष्ट भरी यादें मिटानी थी 

सामने थी बेकारी, अन्धकार,  और सूखा बाढ़ गरीबी लाचारी
साथ थी हिम्मत, हौसला, संगठन शक्ति और दयानतदारी

लालू जेसों का तूफ़ान और अंधकार विरासत में मिला था 
सामने समस्याओं का, बड़े बोलों का, लम्बा सिलसिला था

कुछ दिनों पूर्व का दृश्य याद करो साथियों 
२०१० के चुनावों का स्मरण करो भाइयों 
कहीं राम
कही राहुल
कहीं माया
कहीं लल्लू   
कुरुक्षेत्र सज चूका था
बिहार चुनाव धधक चूका था

हमले हुए, तीर चले आरोप लगे
अपने पराये हुए, दिल में खंजर से लगे

जनता पर विश्वास था कर्म पर था भरोसा
साथ कमल सा कोमल और तीर सा कठोर था

शरद, शिवानन्द, ठाकुर, रविशंकर
शाहनवाज, शुष्मा, लालजी से साथ कर

भीड़ गये बौल हर हर महादेव अल्लाह हो अकबर
सामने लालू राबड़ी, रामविलास, राहुल सोनिया  एक से एक बढ़ कर

काम जीत गया, विश्वाश बढ़ गया
नतीजे आज आये तो नशा सा चढ़ गया

एक दो नही  २०० भी पार होगये
सामने तो तीन चार बीस बाईस रह गये

रन बाकुरे नही संभल सके जीत को और  साथ निभाना
उस ही का परिणाम देख भुगत अपनी गलती को माना 

जनता की अरदास दोनों से लम्बा साथ निभाना 
कमल खिला रहे, तीर पैना रहे जनता की आस पुराना 

डॉ श्रीकृष्ण मित्तल  

Tuesday, June 13, 2017

मोदी चालीसा


श्री भारत चरण रज, निज मन मुकुर सुधार ।
वरणौ मोदी विमल जस, जो करता जग सुधार ।। 
बुद्धि हीन खुदको जान के, सुमरो गुर्जर कूमार। 
यश कीर्ति शांति देवोमुझे, हरो गरीबी आतंक अत्याचार ।।
           जय नरेन्द्र ग्यान गुन सागर | जय मोदी तिहुँ लोक उजागर ||
            राष्ट्रदूत अतुलित बलधामा | हीराबेन  पुत्र नरेन्दर नामा ||
तुम उपकार राष्ट्र पर कीन्हा | गुजरात  संवारि स्वर्ग सम कीन्हा ||
         माया, मुलायम थर थर काँपैं | काँग्रेस को चिंता व्यापै ||
             नासहि सपा मिटैं बसपाई | खिलै कमल फूलैं भजपाई ||
               साधु संत के तुम रखबारे | असुर निकंदन राष्ट्रदुलारे ||
               संत रसायन तुम्हरे पासा | सदा रहहु भारत के दासा ||
भारत विश्वगुरु बन जावै | जब मोदी दिल्ली मैं आवै ||8
          चीन पाक दोउ निकट न आवै | जब मोदी को नाम सुनावै ||9
नासहिं दुष्ट और अपराधा | भ्रष्टाचार मिटावहिं बाधा ||10
         करहि विकास स्वर्ग सम सुंदर | बनहि राम को सुंदर मंदिर ||11
असुर निवारि सुरन्ह कौ थापैं | राहुल सोनिया कबहुँ न व्यापै ||12
   मोदी मंत्र एक सम जाना | करहि विकास राष्ट्र सनमाना ||13
 भारत राष्ट्र पराक्रमशाली | होहि सिद्ध यह शंशय नाही ||14
           जब तूम ने भृकुटि को ताना । नोटबंदी हुई लगी कतारें नाना।।15
           देश व्यापार तुमने विचारा  । जीएसटी मे घेरा सारा।।16
            तुमरो जस अमित ने गाया । राज पुरे भारत का पाया।17
           अरूण ने तुम्हे ध्याया        ।  धन रक्षा दोनो पाया।।18
           साधू संत ने तूम्हे पुकारा    | योगी को दिया युपी सारा।।19
          जिसने तुम्हे आंख दिखाई    । पाक जैसी समर गति पाई।।20
           जो यह पढे मोदी चालीसा । होय सिद्ध राजा जैसा।।
           यह सेवक सदा मोदी चेरा । किजे नाथ ह्रदय मे डेरा।।

दामोदर तनय भारत रत्न, मंगलमुर्ती रुप। 
देशरक्षा करण दुष्टदलन, ह्रदय बसो यही रूप।।

Tuesday, May 2, 2017

अरदास

याद आता 1970-72का जमाना।
जब खाते थे एक दस्तरखान पर खाना।
झुम्मन चाचा के कडक सेवियो वाले छोलै।
दिल्ली कालेज के यारो के संग होले होले।
ईद पर यारो के घरो मे मिलती थी ईद्दी ।
ना हिंदू ना मुस्लिम होती थी यह ईद्दि।
वो बल्लीमारान की मोटी जलेबी।
दौलत की चाट और बड साबुल्ला के मिया जी की कचोरी।
आज यह कुछ भी नही बचा।
ना सितारामबाजार की चाट ना झुम्मन चच्चा।
फिर भी मै अपने अतीत को याद रखता हुं। 
कुछ खट्टी कुछ मीठी यादे सपने की तरह देखता हूँ ||
जब आई एस आई हिज्जबुल आतंकवादी सुनता हुं ।
इन मे अपने आज और अतीत को टटोल रोता हूं |।
अरदास करता हू भगवान -अल्लाह क्राईस्ट नानक से।
मांगता हूँ पुराने दिन अमन शांति उन सबसे

Tuesday, November 8, 2016

गौपष्ट्मी विशेष



 
जय गौमाता - जय गोपाल

गोपाष्टमी यानी गोप + अष्टमी - गोपो द्वारा अपने गौवंस को सजा धजा कर खिला पिला कर पूजन करने और हर्ष और उल्लास के साथ मान्या गया उत्सव | वैसे गोपालकों, गौरक्षको के गौसेवा कार्यों को सरहाने का उत्सव| आज देश में गौवंश रक्षा, निर्मम अवैधानिक कत्ल, परिवहन, क्रय विक्रय, तस्करी से हांहाकार मचा हुआ है |
देश के स्वतन्त्रता संग्राम में स्वाधीनता से अहम प्रश्न सम्पूर्ण गौरक्षा माना गया था और जिसे महात्मा गांधी, बालगंगाधर तिलक, महामना मदनमोहन मालवीय, राजेंद्रप्रसाद जैसी विभूतियों ने "देश के आज़ाद होने पर कलम की पहली नौक से देश में पूर्ण गौहत्या निषेध" का आवाहन और आश्वासन दिया था |
यह प्रश्न सविधान सभा के समक्ष लाला गोविन्द दास, पुरुषोत्तम दास जी टंडन, श्य्माप्रशाद जी मुखर्जी आदि ने पुर जोर तरिके से रखा था| सभा के मुस्लिम सदस्यों जैसे असम के जे एच लहरी जैसे सद्सयों ने इसका हिन्दू धर्म की मान्यता के कारण समर्थन किया था | लेकिन इतिहास गवाह है कि पंडित जवाहरलाल नेहरु ने इसे अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना कर राज्यों को निदेश सिद्धांत में डलवा दिया |
इस का भीषण परिणाम गत ६४ वर्षो में लगभग ४००-४५० करोड़ गौवंश का निर्मम व्यापार, परिवहन, तस्करी, ह्त्या आदि है यानी देश की कृषि लागत में असीम बढ़ोतरी, कृषको की आत्म ह्त्या, रासायनिक दुग्ध से देश की सेहत का विनाश, ग्रामीण व्यवस्था का विनाश आदि दृष्टी गौचर हैं |
इस ही मांग को दहुराते हुए १९६६ ७ नवम्बर को पूर्ण देश के गौभक्तो, साधू संतो ने गोलियां खायी थी जिसे भी ५० वर्ष बीत गए हैं लेकिन यह कलंक आज भी हमारा मुख काला कर रहा है परम गौभक्त हरजस राय कांग्रेस अधिवेशन में मुख काला कर के आये तो महामना मदनमोहन मालवीय जी ने उनका मुख धुलवाया और कहा की जब तक देश में गौहत्या होगी तुम्हारा मुख नही हमारा मुख काला हो रहा है |
ऐसे कितने ही संस्मरण हैं लेकिन देश से १६ लाख टन वर्ष का बीफ निर्यात किया जा रहा है जो निश्चित ही लगभग १.५ करोड़ भैंस के वध के बाद ही प्राप्त हो सकता है लेकिन इतना बड़ा संहार कहा हो रहा है वह देश और राज्यों की सरकार नही निश्चित कर पा रही है. यह सत्य है की देश से गौमांस निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध है लेकिन भैंस मांस के नाम में इन यांत्रिक कसाई खानों में गौवंश का निर्मम कत्ल किया जा कर मांस निर्यात किया जा रहा है |
देश के मांसाहारियों की आवश्यकता को एक तरफ रख दें तो बांग्ला देश को गौवंश की तस्करी आज अभिशाप बन गयी है |
४०९६ किलोमीटर लम्बी सीमा जो बंगाल, असाम, त्रिपुरा और मेघालय होकर गुजराती है आज देश की सुरक्षा में खतरा बन चुकी है क्योंकि भारत के गौवंश तस्करी से बांग्लादेश के कसाईखाने चल रहे हैं और विदेशी मुद्रा अर्जन कर रहे है उधर वेह भारत को हथियार, मादक दवाएं, नकली नोट आदि भेज रहे हैं |

लगभग डेढ़ करोड़ पशुओं की तस्करी जो की भारत में ७,५०० करोड़ के ख़रीदे जाते हैं, जिनपर लगभग १५,००० करोड़ रिश्वत व् परिवहन खर्च आता है और जो तस्करों को लगभग ८०,००० करोड़ रुपिया देते हैं यानी लगभग ५५,००० करोड़ बिना टैक्स, का पैसा और यह GST में भी नहीं आने वाला |
प्रति वर्ष लाखो स्वस्थ्य गाय विशेषत: कलकत्ता में बकर इद्द के अवसर पर सभी विधि विधानों सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों को धत्ता बताते हुए बंगाल सरकार के तुष्टिकरण और संरक्षण में कुर्बान कर दी जाती है|
आज गौपाष्ट्मी के पावन अवसर पर सभी गौभक्तों का अभिनन्दन करते हुए कुछ गौभक्तो का स्मरण करना मेरा कर्तव्य है | गौऋषि माननीय ॐ प्रकाश जी, परम श्र्ध्य ज्ञानानंद जी, परम पूजनीय शंकराचार्य श्री राघेश्वर भारती जी, स्वामी दतशर्णानन्द जी, परम पुँजनीय स्वर्गीय के.एस. सुदर्शन जी जिन सभी परम्श्रध्यों ने गत दशक में देश में गौरक्षा, सम्वर्धन और गौउत्पादो की लहर पैदा की है | 
इनके साथ देश के कोने कोने में व्याप्त लगभग १५,००० गोशालाओं का संचालन कर रहे गोपालकों को नमन|
आज पूर्ण देश में भ्रमण कर रहे परम गौभक्त सं
घ कार्यकारिणी सदस्य व् राष्ट्रीय गौरक्षा प्रमुख माननीय शंकरलाल जी
जिनका
१५ सूत्री विचार
देश में क्रान्ति ला रहा है के साथ दिल्ली में बैठे सु
दर्शन चेनल के भाई सुरेश जी चौहानके, भाई विजय खुराना, भाई जैपाल सिंह नयाल, बम्बई के श्री अमित व् अतुल शाह,सुर्याचारी कृष्णदेव जी शिंदे. श्री एस.के. हलवासिया, गुजरात के डॉ. वल्लभ भाई कथीरिया गोज्ञान फ़ौंडेशन के श्री सुदर्शन कौशिक, संदीप शर्मा, श्री नरेश कादियान, श्री सुरेंदर जैन, श्री हुकुमचंद जी सावला, हैदराबाद के श्री महेश अगरवाल, कलकत्ता के माननीय श्रीकांत शर्मा बालव्यास व् श्री विकास लोहिया, महेश राठी, दीनदयाल जी गुप्ता, विश्वनाथ जी सेकसरिया, तमिलनाडु में बहिन गौहर अज़ीज़, बाबूलाल जी जैन, पंजाब के श्री सतीश शर्मा
जैसे सैकड़ो हर प्रांत हर जिले हर नगर में रक्षण, सम्वर्धन और गौमहिमा प्रचार करने में लगे मेरे गौपालक अग्रजो का आज गौपास्ट्मी पर अभिनन्दन||| 
डॉ.श्रीकृष्ण मित्तल

Saturday, November 5, 2016

एनडीटीवी के सन्दर्भ में पत्रकार बंधुओं को स्मर्पित


देख तेरे इंसान की हालत क्या होगयी भगवान
........पत्रकार सा नही होता था कोई महान

रामनाथ गोयनका, चित्रा, जैसे पत्रकारों ने इंदिरा को भी नही छोड़ा था
जीप काण्ड हो या बोफर्स, चारे से भी मुह नही मोड़ा था
धुल छठा दी थी इस ने सेंसरशिप के महा पाप को
नही बक्शते थे कलम के धनी किसी के भी बाप को
देश की आज़ादी में सहयोगी कितने ही ऐसे धीर थे
रात छापते दिन में बांटते ऐसे कितने ही कलमवीर थे
सत्य की मशाल जिनके हाथ में होती थी
उनसे तो तुरत न्याय की जन जन को आस होती थी
पत्रकार सुन्दरी नेताओं से विवाह रचने लगी
बसी बसाई घर गृहस्ती  पर तेज़ाब सी बरसने लगी  
आज यह गणतन्त्र का चौथा स्तम्भ टुकडो में बट गया
सत्ता लोलुप नेताओं का,
विदेशी आकाओं का
देशी विज्ञापन का
सत्ता के गलियारों का
पैसे, दारु सुविधा नारी का
...........यह तो चाटुकार बन गया
ना जाने कब देशद्रोह करने लग गया
चरित्र हनन, ब्लेक मेलिंग दलाली धमकी ना जाने कब इनका पर्याय बन गये
विकास, इन्साफ, सर्वहारा के रक्षक ना जाने कब सत्ता के गलियारों में खो गये
लोकतंत्र को खतरा आज इस ही मीडिया से बन गया है...
आज कलम व कागज़  से मै दंगा करने वाला हुँ
मीडिया की सच्चाई को मै नंगा करने वाला हुँ
मीडिया जिसको लोकतंत्र का चौंथा खंभा होना था
खबरों की पावनता मे जी जिसको गंगा होना था
आज वही दिखता है हमको वैश्या के किरदारों मे
बिकने को तैयार खड़ा है गली चौक बाजारों मे
दाल मे काला होता है तुम काली दाल दिखाते हो
सुरा सुंदरी उपहारों की खुब मलाई खाते हो
गले मिले सलमान से आमिर ये खबरों का स्तर है
और दिखाते इंद्राणी का कितने फिट का बिस्तर है
म्यॉमार मे सेना के साहस का खंडन करते हो
और हमेशा दाउद का तुम महिमा मंडन करते हो
हिन्दु कोई मर जाए तो घर का मसला कहते हो
मुसलमान की मौत को मानवता पे हमला कहते हो
लोकतंत्र की संप्रभुता पर तुमने मारा चाटा है
सबसे ज्यादा तुमने हिन्दु मुसलमान को बॉंटा है
साठ साल की लूट पे भारी एक सुट दिखलाते हो
ओवैशी जैसों को तुम, भारत का रॉबिनहुड दिखलाते हो
दिल्ली मे जब पापी वहशी चीरहरण मे लगे रहे
तुम एेश्वर्या की बेटी के नामकरण मे लगे रहे
अब दुनिया यह समझ चुकी है, खेल ये बेहद गंदा है
बिकाऊ मीडिया अपने विदेशी आकाओं और ब्लेकमेलिंग का धंधा है 
हे सत्य पुजारी, भारत माँ के लाल  मेरे पत्रकार बन्धुओं 
जागो जागो जागो जाग जाओ
इतनी भी देर ना हो जाये की भुला दिए जाओ
गुंगे की आवाज बनो अंधे की लाठी हो जाओ
सत्य लिखो निष्पक्ष लिखो और फिर से जिंदा हो जाओ.

Sunday, July 10, 2016

बरसात


तुम्हारे दिल की दास्ताँ बयानी
दूनिया को हमारी प्रेम कहानी
हम ने दिया साथ हर कदम पर तुम्हारा
हसरत थी तुम साथ दोगी हमारा
लेकिन तुम तो देखते देखते बेगानी होगयी
किसी और के दिल की रानी हो गयी
छोड़ हमे गमों के समंदर में
तुम तो आसमान की दामिनी सी हो गयी
बर्फ केटुकड़े सा मेरा दिल फिसलता रहा
तुम तो टुटा हुआ सपना होगयी
आज फिर तुम्हारी आवाज़ आई
जैसे उजड़े चमन में बहार आई
तुम फिर टुटा घोसला बनाने चली हो
यानि हमारे अरमानो का चमन खिलाने चली हो
आता नहीं यकीं सब्र होता नहीं. यकीं करो हमारा
क़यामत तक करेंगे इंतज़ार तुम्हारा
तुम क्या सुनाओगी दासता ए दिल
हमारे दिल की किश्ती को जब मिलेगा साहिल
सकूनों की झड़ी लगेगी
सावन की घटा जैसी आँखें लड़ेंगी
चारो और हरियाली छा जायेगी
तुम अगर आये तो करारों की बरसात आएगी

Thursday, June 9, 2016

मोदी का कमाल

...................नरेंदर तूने कर दिया कमाल ||
कर दी इज्जत की बारिश तूने, बिना खडग बिना ढाल |
बडनगर के नरेंदर तूने कर दिया कमाल ||
दो वर्ष पहिले जो आगमन भी बंद करता था |
जो अम्रीका मोदी जी के नाम से भी शायद नफ़रत करता था| | |
उस अम्रीका को कर दिया निढाल |
....................नरेंदर तूने कर दिया कमाल ||
जिसे विश्व का सबसे बड़ा नेता कहते थे
जिसके आगे पीछे सब पानी भरते थे
उस ओबामा हमदम दोस्त यार ए जमाल
....................नरेंदर तूने कर दिया कमाल ||
किसने कहा था मौत का सौदागर चाय का दूकानदार|
वोह गिन रही दिन अपने, कहाँ गये उसकेदामाद और पप्पू फर्माबदार||
...................नरेंदर तूने कर दिया कमाल ||
देख कर तालियों की गडगडाहट शक्ल होगयी होगी लाल
पूरा हिन्दुस्तान तुम पर वारी तुमने कर दिया निहाल
...................नरेंदर तूने कर दिया कमाल ||
तू ने दिया नारा ए कांग्रेस मुक्त भारत जिसपे चल पडा पूरा हिन्दुस्तान|
आज उसकी शक्ति अमेरिका ही नहीं जान चूका चीन और पाकिस्तान||
अमेरिकी संसद के तेरेभाषण ने दुस्मनो के दिल में मचा दिया कोलहाल
...................नरेंदर तूने कर दिया कमाल ||

Saturday, June 4, 2016

यु पी की जनता को सन्देश

नाप लो ए दुश्मन  ए हिन्दुस्तान ।
५६ इंच का सिना हमारे अध्यक्ष जी की शान || 


इन्हें देख कर हर हिन्दुस्तानी मेंजोश उमड़ आता है ।
पाकिस्तानी और कांग्रेसियों का तो जनाजा निकल जाता है ॥

अगर विश्वास नही तो पूछो गुजरात में ।
पूछो आज काश्मीर और असाम में ॥

हमे गर्व है हमारे अध्यक्ष के चुनाव पे ।
अटल, अडवाणी, राजनाथ, गडकरी अमित के नाम पे ॥

कहाँ सोनिया, मुलायम, वंश परम्परा वादी
कहाँ संघ सेवक खरा सोना, कहाँ माया जातिवादी

उत्तरप्रदेश के चुनाव सिर पर आगये ।
अमितजी के नेतृत्व में बीजेपी के कार्यकर्ता छा गये || 


कमल हाथ में लिए, विकास, उन्नति, भाईचारा, संदेश दे रहे। 

आओ मेरे साथियों, जरुरत है तुम्हारी इस विकास केमार्ग पे ||

साथ दो विकास का, विरोध करो वंशवाद का, जातिवाद का ।
साथ दो विकासपुरुष मोदी, लोहपुरुष राजनाथ का -
अमितशाह,मोर्य,कलराज,महेश, स्मृति, आदित्यनाथ का ॥

फिर ना कहना याद नहीं कराया था ।
समय रहते तुम्हे नही चेताया था   ॥

हमे  कमल खिलाना  है   शांति और विश्वास का । 
तरक्की का खुशहाली का, भाईचारे का, विकास का ॥ 

चूक गए तो पछताओगे ।
अमित जी का साथ दिया तो नया सबेरा पाओगे ॥ 


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