Sunday, May 14, 2023

माँ की यादें

 माँ की यादें ............................


हर माँ की येही है कहानी

आँचल में दूध और आंखों में पानी ||

बहुत खूब तुम्हे आपनी माँ का त्याग 

आज भी याद है


मुझको याद की अक्सर ऐसा होता था||

वह गर्मी की राते और बत्ती गुल


एक पंखा बिना रुके 

उसके हाथो में चलता था


वो जागती सारी रात, 

मैं उसकी नींदे सोता था ||

गर्मी की राते, 

गुल बत्ती, 

बिना रूके उसके हाथ में झलता पंखा,

.....................................मेरा भाग्य   है

उसका जागना,

मेरा  चैन से सोना, 

उसकी नींद नहीं, 

हर माँ की बीती रात है


मुझे आज भी याद है ||


मुझे याद है माँ वोह 

बड़ा मुश्किल जमाना, 


पिताजी का देर रात को

 थका हुआ घर आना. 


तुझे सारे दिन का दुखडा सुनाना 

और तेरा उन्हें ढाढस बंधाना.......................


एक स्वेटर पुराना, 

अभी भी मुझे बहुत प्यारा ............


हजारो धुलाई चुरा ना सकी,

उससे  तेरे  हाथो की खुशबु


वो स्वेटर बुनती ऐसे, 

ख्वाब बुनती हो जैसे 

दिन में पूरे मोहल्ले के स्वेटर बुनना..

जैसे फूलों का चुनना ,.....................

ख्वाबों का बुनना ..............................


और उसमे से मेरे इस ही 

 स्वेटर का  चुनना ||


यह मेरी जिन्दगी का 

सबसे प्यरा तोहफा है 


धुल चूका हजारों बार, 

फिर भी घना चौखा है ||


आज भी छुपके  मैं, 

बंद करके कमरा, 

अलमारी खोलता हूँ


वोह तेरा बुना स्वेटर, 

समेटे तेरे हाथों की खुशबू, 

उसे बार बार सूंघता हूँ ||


इसे आज भी पहनता हूँ तो

 " माँ"  तेरी याद आती है

बंद कमरे से मैं अकेला नहीं 

तेरी खुशबू भी साथ जाती है||

जब से तुझे देखा है माँ ,

 मुझे भगवान भी भूल गए


तुने मुझे जन्म दिया , 

आज के झंझावात में हम 

सभी शायद भूल गए

मै आज विश्व मातृदिवस पर 

गौ माँ, भारत माँ, 

धरती माँ को नमन करता हूँ |

व् समस्त मातृशक्ति को 

सादर स्मरण करता हूँ ||



Sunday, April 2, 2023

सेवा निवृत की व्यथा

 हर सेवा निवृत की जबानी है

हर घर की यही कहानी है।

 

रखो व्यस्त खुद को 

हर काम अर्पण प्रभु को।


कुछ लिखो

कुछ पढ़ो

कुछ सुनो

कुछ सुनाओ


कुछ यात्रा, कुछ विश्राम

कुछ आराधना, कुछ ध्यान

खुश रहो, पूर्ण करो, बाकी अरमान


सेवानिवृत्ति के बाद का एक दृश्य यह भी—

जब से सेवानिवृत्त हुआ हूँ, 

परिवार हो गया हूँ,

सारे परिवार की ज़रूरतों का, 

आधार हो गया हूँ।

सुनसान घर का चौकीदार, ब

च्चों के लिये घोड़ा,

बहुओं के लिये बैंक, 

रिश्तों को व्यवहार हो गया हूँ।

याद आने लगे सब रिश्तेदार, 

तन्हाई से बचने को,

व्यस्त रहने को, समाज का 

कर्णधार हो गया हूँ।

अपने ही बच्चे कहते कंजूस, 

धन पर कुंडली बताते,

खुले हाथ से खर्च किया, 

सबको स्वीकार हो गया हूँ।

Sunday, January 29, 2023

 


Wednesday, December 28, 2022

गुलदस्ता

 बेशक मेरा मन

अजनबियो का मेला होगा

पर एक गुलदस्ता है

हर भांति के फूल हैं इसमें

रंग बिरंगों का मेला है।

कुछ भगवान को

कुछ प्रिय इंसान को

कुछ बिदा होते

कुछ आगवानी करते

कुछ चिढ़ाते

कुछ मनाते

कुछ नूतन जुड़ते

कुछ रूसते बिदा होते

गुल तो खिलते 

झड़ते मुरझाते

यही तो इस ग्रुप की पहिचान

क्योंकि यहां तो हर दम

हंसी खुशी प्यार की बेला है

Thursday, December 22, 2022

यह दुनिया बेगानी

यह दुनिया बेगानी 

 बेरंगी बेमानी 

मतलबियों से भरी हुई 

बेवफाओं से सजी हुई 

बाप बड़ा ना भैया 

सबसे बड़ा रुपिया 

बनावटी बदन,

लीपे पुते दर्शन 

मुखोटों से ढके

मिश्री से भरे 

सार रहित वचन 

फिर भी चाहत हसरत 

से भरपूर टूटता यह मन 


 








 












क्या बेचा क्या पाया

गांव भूले शहर बसे, कीमत बड़ी चुकाई है। 

जीवन के उल्लास बेच के, खरीदी हमने तन्हाई है।

बिक गया है ईमान धरम, तब घर में शानो शौकत आई है। 

संतोष बेच खरीदी बैचेनी, देखो कितनी मंहगाई है।। 


बीघा बेच वर्ग फुटखरीदा, ये कैसी चतुराई है।  

संयुक्त परिवार के वट वृक्ष से टूटी, नई पीढ़ी मुरझाई है।।  

रिश्तों में हुए स्वार्थी, हर आंख ललचाई है।  

कहां गुम हो गई मिठास, जीवन में कड़वाहट सी भर आई है।।    


रस्सी की बुनी खाट बेच दी, गद्दों ने जगह बनाई है। 

अचार, मुरब्बे हुए गायब,आलों में सजी दवाई है।।  

माटी की सोंधी महक बेच के, बनावटी खुशबू पाई है।  

मिट्टी का चुल्हा बिक गया, आज गैस पे खीर जलाई है।।  


पांच पैसे का लेमनचूस था,अब चाकलेट हमने पाई है।  

बिका रहम, करुणामय दिल, कुटिलता समर है।। 

सैलून में अब बाल कट रहे, बिका मोहल्ले का नाई है।

टीवी के सामने दिन गुजरता, बोल को तरसतीअम्मा के संग ताई है।।  


मलाई बरफ के गोले बिक गये, अब तो कोक की बोतल आई है।  


मिट्टी के कितने घड़े बिक गये, अब फ्रीज़ में ठंढक आई है ।। 

खपरैल बेच छत डाल दी, तपस ने नींद  उड़ाई है। 

बरकत के कई दीये बुझा कर, रौशनी बल्बों में आई है।।


गोबर से लिपे फर्श बेच दिये, चिकने फर्श में टांग तुड़ाई है।

देहरी से गौ माता बेची, अब कुत्ते संग रात बिताई है ।

गुड शक्कर भूल गए, मधुमेह, रक्तचाप ने, हर घर में जगह पाई है।।  


दादी नानी की बिकी कहानियां, दूरदर्शन ने जगह बनाई है। 

बहुत तनाव है जीवन में,गृहलक्ष्मी भी दो पैग लगाई है।

मतलबी हुए हैं रिश्ते बेचारे, बची नही उनमें कोई सच्चाई है।

उबटन बिक गया, क्रीम से मुख चमक रहे , दिल पे जमी गहरी काई है।  

गाँव बेच कर शहर खरीदा, कीमत बड़ी चुकाई  है।।  

जीवन के उल्लास बेच के, खरीदी हमने तन्हाई है।। 

🙏🏻🙏🏻🙏🏻🌹🌹🌹

Sunday, December 4, 2022

शादी

 शादी वोह लड्डू है 

जिसे खा के लोग मुस्कुराते हैं

जीवन का आनंद लेते 

परिवार बढ़ाते हैं।


बिना नमक के 

सब्जी बेस्वाद होती है

कभी कभी ग्रहस्त जीवन में भी

 तकरार होती है।


ए जी ओजी, सुनने को 

रात में गरमागरम रोटी खाने को

तबियत बेकरार होती है।।


हमने भी यह लड्डू 

खाए खिलाए हैं

जिनको नहीं मिले 

यकीनन वो पछताए हैं

Saturday, November 26, 2022

विवाह स्वर्ण जयंती


 "विवाह स्वर्ण जयंती" 

बिना तुम्हारे काटती 


हमने ना जाने कितनी सालगिरह साथ मनाई

हर वर्ष लक्ष्मी रूप में,तुम लक्ष्मी साथ आई।


प्रिय, 1972 का वोह दिन रह रह उभरता है

सोच सोच दिल जोर जोर धड़कता है 


घोड़ी पर चढ़ मैं तुम्हे मनाने आया था।

लंबा चौड़ा लश्कर भी साथ लाया था।


तुम सहमी सी, 

हिरणी की आंखो सी निहार रही थी।

दो दिलों में तो प्रेम कली खिल रही थी।


प्रति वर्ष यह तिथि खास होती थी।

मधुरतम मधु रात्रि की समृति 

हर्षित मोहित करती थी।


प्रथम वर्ष समाप्ति पूर्व 

ईश्वर की सौगात पाई थी।

पुत्र रत्न की किलकारी 

हर किसी को हरसाई थी।


जिंदगी को विराम कहां

हमे तुम्हे था विश्राम कहां?


संघर्ष में बनी थी तुम संबल मेरा।

मेरी हार को भी जीत माना 

मुझे बांधा विजय सेहरा।


क्षणिक खुशी के पलों को भी

 तुम्हारा संबल मिला

कन्या और दित्य पुत्र प्राप्ति से 

परिवार पूर्ण हो चला।


हम चलते चलते ना जाने

कहां से कहां पहुंच गए।


मैसूर आ कर थमना था तो जम गए।

विश्वास नहीं होता की

 कैसे ५० वर्ष निकल गए।


आज फिर वोह ही दिन पाया है।

विवाह की  स्वर्ण जयंती का अवसर आया है।

तुम बिन इस दिन का कोई अर्थ कैसे।

तुम नहीं तो विवाह सवर्ण वर्षगांठ शूल जैसे।


आज तुम्हे याद कर 

तुम्हारे चित्र को 

अश्रुपुष्प अर्पण करता हूं

मन पटल पर छाई

तुम्हे नमन करता हूं।


काश आज तुम होती

इस दिन बड़ी रौनक, 

देवी दर्शन, दावतें होती


सभी मित्र, बंधु बांधव, 

नाती पौते बलैया लेते।

आज के दिन को 

५० वर्ष पूर्व जैसा जी लेते।


बंद कमरे में, अकेला 

तुम्हारी यादों में खोया हूं।


आसमान को निहारता 

तारों में तुम्हे खोजता हूं।


तुम्हारी तस्वीरों में मन विचर रहा

साथ बिताए हर पल स्मरण कर रहा


भरपूर गृहस्ती संसार है

लेकिन प्रिय तुम बिना बेकार है।

🌹 🌹🌹 🌹

डा श्रीकृष्ण मित्तल

Wednesday, July 13, 2022

यादें प्रियतमा की

यादें एक साल बीता सावन पलट आया फिर भी मन रीता।। रहने को सदा इस दुनिया में आता नहीं कोई पर तुम जैसे गई, ऐसे भी जाता नहीं कोई।। डरता हूँ, कहीं सूख ना जाए, आंखों का समन्दर जानेमन, राख अपनी कभी बहाता नहीं कोई।। ख़ुद मौत भी घबरा गई होगी तुम्हे लेजाने में मौत को सीने से लगाता नहीं दुश्मन भी कोई।। माना कि, हमारे उजाले, तुमसे रोशन होते थे फिर भी रात में हमने, दिया बुझाया, नहीं कभी।। जमाने से गिला था तुम्हें, या मुझ से शिकवा अब तो कुछ भी याद आता नही।। तुम्हारी तस्वीर मेरा अंबल निहारते रोज उसे, तुम्हे भुला पाता नही।।h

Wednesday, June 29, 2022

दिल की तड़प

खोजते हैं,दो पल ख़ुशी के, चाँद तारो की ख्वाहिश नहीं होती। जवानों का दिल रोता है, आँखों से बरसात नहीं होती।। दिन में सुनते हैं पापा के ताने, रात को दर्द भरे गाने दिल लगाने की उम्र में, लग जाते हैं बेचारे कमाने।। उगता सूरज दिखाता इन्हें ख्वाब और ढलता हुआ औकात कोई ना समझता, दर्द इनका, ना कोई जज्बात।। घर में रहे तो नकारा, बाहर रहे तो आवारा ना रोए तो पत्थर. रोए तो बेचारा । पूछते हैं इन की खुशी की वजह सब बिना दर्द जाने , उम्मीदें सबकी इनसे बिना पहीचाने|| मेरे बच्चे ने कुछ खाया, बस एक माँ ही कहती है हर सुबह जागते किस्मत को ढूंढते, तलाशते पर मित्रो वोह नही मिलती जाने कहां सो जाती है|| जिंदगी का फसाना कुछ कम हो तो मोहब्बत हो जाती है दिल देते जिसे, करते इंतजार जिसका, वह भी दिल तोड़ जाती है जिसको माँ से बढ़ प्यार करते हैं वह भी ठोकर मार जाती है || खिलौना टूटने पर रोया करते थे बचपन में कोई मनाएगा अब दिल के टुकड़े हो जाते कोई नही आयेगा || साथियों दिल का जख्म भरा नहीं कि एक और जख्म आता है लड़को कि जिंदगी में फिर बेरोजगारी का दौर आता है खाली जेबों में ,खुशी के लहमे, खनखन करते हैं घरवालों के ताने हीं नहीं , बाहर वाले भी धुनते हैं जिंदगी की ठोकरें खाकर सुकून की तलाश में रहते हैं || लड़को कि जिंदगी घुटन में गुजरती है बेबसी इन लड़कों की ऐसी , जैसे कब्र में लाश रहती है ।। मर्द हैं मर्दानगी की बेबसी.आँख भरती ,शर्माती पर नही बरसती .... नही बरसती

Thursday, June 2, 2022

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गौसेवा हेतु आश्रुपूर्ण मिलन

गौशालाओ में कुर्सी का संघर्ष चलता रहता है। कलकत्ता की एक गौशाला के नामी धनाढ्य अपने मित्र से चुनाव हार गए और गौशाला से विमुख हो गए। मित्र को उन्होंने सपष्ट कह दिया कि अगर उसने गौशाला के विषय में कुछ भी मांगा तो उसकी मित्रता का अंतिम दिन होगा। कुछ दिनों पश्चात मित्र प्रात: अपने विमुख मित्र के घर गया और मित्र की पत्नी से कहा भाभी हलवा बना।मित्र को बड़ा आश्चर्य हुआ और पूंछ बैठा कि आज क्या विशेष है। *यह उत्तर सुनने लायक है* भाई, तेने तो बोल दिया कि गौशाला के बारे में कोई बात नही करूं और करूंगा तो तेरी मेरी मित्रता का अंतिम दिन होगा। परंतु मैं क्या करूं रोज रात गोशाला के प्राणी स्वपन में आकर मुझे पूछते हैं कि मैंने तेरे से बात की, तेरी सेवा को याद करते मुझे सींग मारते हैं। मुझे पता है की आज मेरा तेरे साथ आखिरी दिन है क्योंकि मैं रोज रात सींग नही खा सकता तो आज भाभी के हाथ का हलवा आखरी बार खा कर तेरे से गौशाला के प्राणियों हेतु बात करने आया हूं। मुझे पता है कि तू मुझे आज धक्के मारेगा लेकिन मैं गौमाता के सींग खाने से बच सकूंगा। मित्रो, कुछ ही पलों में दोनो मित्र आंसू पुरित नेत्रों से गले लग गौशाला कल्याण हेतु अग्रसर थे। आइए, हर एक को प्राणी सेवा से जोड़ने का हर संभव प्रयास करें डा श्रीकृष्ण मित्तल

प्रिय

प्रिय तुम्हारी बरसी भी आ गई बिछोह के 324 दिन रोज तुम्हारा स्मरण तुम नहीं - बरसी आ गई। तुम प्रभु चरणों में विलीन मैं यहां चिंतन में लीन। मन से तुम दूर नहीं भूलने का कोई प्रयास सफल नही हर पल,हर सफलता में तुम यादो से दूर होती नही। मेरा धर्म कर्म,पुण्य लाभ सुख तुम्हे समर्पित तुम्हारे बिना लगता सब फीका सब अपरिचित। चाहे धरती या आसमान तुम ही एक थी कद्रदान अब तो एक ही अरमान रहना साथ मेरी मेहरबान।।

Wednesday, February 9, 2022

मैं रोज तराना गाता हूं

 मैं रोज तराना गाता हूं

भारत में भारत की याद कराता हूं।
सोने की चिड़िया को विदेशी लूट ले गए
मल्लेछ हम भूले नहीं, अंग्रेज भी कम ना रहे।
आज फिर उनकी याद कराता हूं।
आजादी के 75 वर्षों में गोल टोपी सवार रही
देश जागा जब वोह उतार दी।
आज फिर मैं याद कराता हूं।।
याद करो बलिदान हकीकत का
गुरु तेगबहादुर के बालक वीरों का
जिन्होंने धर्म,गौ माता के लिए प्राण दिए।
भारत मां को रक्त तिलक अर्पण किए।
मत बह जाना बहकावे में
ना आ जाना किसी भुलावे में।
हमे योगी मोदी को 100 साल लाना है
भारत को लाल हरे नीले से बचाना है।
मैं रोज तराना गाता हूं।
भारत में भारत की याद कराता हूं।।
🌹 भारत माता की जय 🌹

Monday, November 8, 2021

अधूरी दिवाली

 


हमने ना जाने कितनी दिवाली साथ मनाई

हर दिवाली लक्ष्मी रूप में,लक्ष्मी साथ आई।


कितने ही आरती पूजन साथ किए।

घर दुकान कारखानों में दीप रोशन किए।


पटाखों के धमाकों और शोर में, 

फूलझाड़ियों की झरझर में

मिठाई की सुगंध मिठास में

नूतन सुंदर जेवर परिधान में

हर साल तुम मन पे छा जाती थी


नही भूल पा रहा 

तुम्हारा दमकता चमकता चेहरा

तुम्हारा उल्लास भरा आभास


दिवाली तो इस वर्ष भी आ गई

पर तुम ना जाने कहां खो गई।


दीप भी जलेंगे

पटाखे भी चलेंगे

मिठाई भी बटेंगी

बोनस भी बटेगा

पूजा भी होगी 

लेकिन तुम..........

ना जाने कहां खो गई


यादों के झरोखों में 

पलक की कोरो में

हृदय के कोनों में

ढूंढती तरसती आंखें


हर एक की तरसती भावना

मेरे मन में बसी तरसती आत्मा

वर्षों से मेरी प्यारी सखी

मेरे परिवार की एकल कड़ी


दिवाली तो आ गई

पर तुम ना जाने क्यों रूठ गई 

ना जाने तुम, कहां खो गई।


यह रूखी बेरंग दिवाली

तुम्हारे बिना नही मनानी 

यह अधूरी दिवाली .....

Wednesday, August 4, 2021

चाय बनी हरजाई

मुझे फिर फिर चाय की याद आती है। 
 साथ में यादों की घटा छा जाती है।। 

 यह खुशनुमा भोर और उसकी अंगड़ाई 
 चिलमन से पहली किरण की अगवाई। 

 ख्वाबों में फिर प्याले में मिठास भर लाई 
 वोह अपने हाथों में चाय लेकर थी 

आई हाय ख्वाब टूटा और 
चाय हाथ ना आई।

Saturday, July 24, 2021

श्रधा सुमन

प्रिये तुम बहुत याद आती हो जीवन के हर मोड़ पर तुमने साथ दिया हर ख़ुशी दी हर सुख दिया || गत ५० वर्षो के संग की याद आती है विवाह की स्मृति सर्वदा मन मंदिर पे छा जाती है || प्रथम पुत्र प्राप्ति की पूर्व संध्या में हमने बाबी देखी थी और बाबी आया था शीघ्र ही कन्या रत्न व् दित्य पुत्र भी पाया था || प्रिये तुम बहुत याद आती हो गृहस्वामिनी, भाग्यवान सर्वदा प्रभु में आस्थावान थी व्रत, पूजा, उजमन, यज्ञ तीर्थ,दान में निष्ठावान थी मेरी प्रिया, अर्धांगनी, मेरी प्रेरणा, मेरी जान थी नाम हीनहीं रूप और कर्म में लक्ष्मी समान थी || बाबा दादी पिता-माता जी के देहांत पर तुमने अहम् काम निभाया था मेरे सभी भाइयों को पुत्रवत अपनाया था अ पनी ननद को सुखमें विदा किया दौरानियों ने बहिन रूप में पाया था|| प्रिये तुम बहुत याद आती हो नहींभूलता कन्या विदा करना और बहूएँ लाना दिल्ली, बेंगलोर और वृन्दावन का विवाह ठिकाना| सुन्दर जामाता, बहूएं आई घर में ख़ुशहाली और प्रसन्नता का खजाना || सुन्दर दोहतीपौत्रों का प्रशाद मिला घर खुशियों से भर गया तुम्हारा मन खिला || प्रिये तुम बहुतयाद आती हो मै थका हारा आता, तुमसे उर्जा उत्साह पाता था|| मेरे हर निर्णय मेंतुम्हारा योगदान होता था जीवन के झंझावात में तुम साथ देती थी संगनी भार्या मित्रसमान चर्चा करती, राय देती थी || प्रिये तुम बहुत याद आती हो जब श्रंगार कर तुमसामने आती थी मेरी तो अपलक आँखें तुम पर टीक जाती थी याद आता तुम्हारा रूठना औरमेरा मनाना तुम्हारा मुझे झुकाना और फिर मान जाना || प्रिये तुम बहुत याद आती हो अजब हमारी गृहस्ती थी कितनो को भाती, कितनो को खलती थी || हम मोर मोरनी की तरह चलते थे घर बेघर, ऊपर नीचे, देश परदेश, हर हाल- अभाव में भी में प्रसन्न रहते थे हमने मधु यामनी के मधुर पल भी संजोये थे प्रिये तुम बहुत याद आती हो गावं हो या नगर,देश या विदेश पल पल हम जीए थे|| कलकता,मुंबई, काशी, गया, आगरा का ताज या वृन्दावन दार्जलिंग,शिमला,मसूरी काश्मीर नैनीताल उंटी, कोडई,चेन्नई,मैसूरकी चामुंडी माँ केदार,नीलकंठ,बद्रीविशाल मदुरई मीनाक्षी या वैशनवी माँ, अग्रोहा, रामेश्वरम,तिरुपति, राधावल्लभजी बयावला,बिहारीजी आदि दर्शन नेपाल, मलेशिया,सिंगापुर, याश्रीलंका की मधुर यादें घुमड़ घुमड़ कर आती छाई यादें मन पर हर पल आदेशों का पालनकरती मेरी दिलबर | प्रिये तुम बहुत याद आती हो बहूत सी कामनाएं बाकी हैं तुम्हारीकमी रहेगी परन्तु थाती हैं आज परिवार में सम्पन्नता खुशहाली है तुम्हारी कमी कैसेपूर्ण होगी पूछता यह सवाली है|| प्रिये तुम बहुत याद आती हो सोच सोच थर्राता हूँ अबयह समय कैसे निकलेगा पुत्र पुत्रवधू पौत्र, बेटी दामाद भाई बहुओं का बंधू बांधवोसंगी साथियों का साथ तो मिलेगा दिल को बहुत समझाता हूँ || प्रिये तुम बहुत याद आती हो हर पल हर क्षण हर कार्यमें तुम याद आओगी इस याद में ही कभी यह जान निकल जाएगी प्रिये, इन्तजार करना ऊपर जल्दी ही साथ आऊंगा सात जन्मों का वादा था तुम्हे भी निभाना होगा मै भी शीघ्र निभाऊंगा.......................... डा श्रीकृष्ण मित्तल

Wednesday, July 21, 2021

Lakshmibala mittal Obituary

Saturday, June 26, 2021

यार की यारी

यार की यारी, नही कोई दुकानदारी। बहुत ढूंढा, गली कूचे, दरीबो में दुकानो में तेरे जैसा,मिला नही कोई, हीरे की खदानो में। दाग तो चांद में भी साफ नजर आता हैं। लेकिन आशिक को सकून पहुंचाता है।। मुझे तेरी यारी से मतलब, तेरे सो ऐबो से क्या लेना मेरा हमदम, मेरा रहबर तो है खरा सोना। कसम तेरी दोस्ती की, दिल से तू निकलता नही। ऐब तो मुझ में भी हजारों हैं, तू गिनता ही नही।। *डा श्रीकृष्ण मित्तल*

Monday, April 26, 2021

हाय आम : वाह आम

आम तू तो आम हो गया। मैं तो यूं ही इसके इश्क में बदनाम हो गया। लंगड़ा सिर पर चढ़ा।सरोली तो मेहरोली गया। दुसहरी मिलता नही,पतला लम्बा, कहां गया? बेंगनपल्ली का क्या कहना। सिंदूरी तो शर्म में सिंदूर हो गया।। मालदा का आते आते मलीदा बन गया मलीहाबादी तो लखनऊ में खत्म हो चुका। तोता गिरी का क्या कहना आचार बन रसोई की शान बन गया।। बूढ़ा का प्यारा, बच्चों का दुलारा मेरा प्यारा, तेरा दुलारा आज आम हो गया। यह गुलाबपास, रत्नगिरि, अलफांसो फलों का राजा,विदेशों को निर्यात हो गया।

Tuesday, November 10, 2020

बिहार का संग्राम 2024

दे दी पटकनी लालू तेजस्वी, राहुल को तुने बिना खडग बिना ढाल। 

 पटना के रन बांकुरे तुमने कर दिया कमाल।। 

 कल तक नितीश- मोदी झेलते थे हमले बार बार। 

 राज में ना बिजली, ना रक्षा, जनता में हाहाकार ।। जयप्रकाश के पठे बिहार में जन्मे दो सितारे। 

 नितीश इस धरती के तारे।। 

 सामने थी बेकारी, अन्धकार, और सूखा बाढ़ गरीबी लाचारी । 

 साथ थी हिम्मत, हौसला, संगठन शक्ति और दयानतदारी ।। 

 पांच वर्ष पहीले अंधकार विरासत में मिला था । 

 सामने समश्याओं का लम्बा सिलसिला था ।। 

 लड़ते लड़ते निकल गये सरदारों के सरदार । 

 हिम्मत ना हार के आगयी परिक्षा जनता के दरबार ।।

 परीक्षक केद्र सरकार के 2010फिर 2015 का सुशासन राज । 

 2024 में पुन: जनता के दरबार में आवाज़।। 

 कहीं राहुल कहीं लल्लू ।। 

 कुरुक्षेत्र सज चूका।

बिहार चुनाव धधक चूका।। 

 फिर महागठबंधन बन गया।

 ऐनडीए के सामने इंडी रावण सेना सा डट गया।। 

 ओबेस्सी जैसे देश तोड़क भी आ गए।

 कितने ही बिहार के स्वंभू मालिक बन गए।। 

 हमले होंगे, तीर चलेगै आरोप लगेगै। 

 अपने पराये हुए, दिल में खंजर से लगेगै।।

 जनता पर विश्वास ,कर्म पर भरोसा। 

 साथ कमल सा कोमल और तीर कठोर सा।। 

 साथ में और हम होंगे।। 

 पासवान ऊपर चले गए चिराग अपनो को जलाने आयेंगे।। 

 भिड़ गये बोल हर हर महादेव अल्लाह हो अकबर ।। 

 सामने तेजस्वी, लालू राउल, सोनिया। 

 ना जाने कितने एक से एक बढ़ कर। 

 काम जीतेगा, विश्वाश बढ़ जायेगा । 

 मोदी जी का जादू चल गया। डबल इंजन, डबल युवराज पर चढ़ गया। 

 सुशासन बाबू का तीर निशाने पर लग गया।।

 भाजपा का कमल, पूरे बिहार में खिल गया।। 

 आओ करें सम्मान इस जीत का। 

 जो करेगी विकास बिहार का, बिहारी का।। 

 रन बाकुरो जीत को संभालना साथ निभाना।

 कमल खिला रहे, तीर पैना रहे । 

 जनता की आस को निभाना।। 

 प्रस्तुतकर्ता डा श्रीकृष्ण मित्तल

Friday, November 6, 2020

करोना को जवाब पटाखे बन्द

कोरोना को हराने को गोमय दीपक अपनाएं। यह वर्ष विशेष है। पूर्ण विश्व कोराना त्रस्त हैं। राम मंदिर का निर्माण तेज है। अयोध्या उत्थान कार्य उन्नत है।। करोना पीड़ित पटाखों से त्रस्त है। लोग मिठाई पाने - छूने से भयभीत है। इस वर्ष रावण मारा नहीं गया। दशहरा पर राम का तीर नहीं चला। बच्चे स्कूल नहीं जा रहे मन्दिर अभी नहीं खुल रहे। ऐसे में पटाखों का शोर बर्दास्त नहीं होगा वायु प्रदूषण करोना पीड़ितों को आत्मघाती होगा। कामधेनु आयोग ने चलाया अभियान। गौमय दीपक से दीपावली का प्रयान। देश में ५० करोड़ दीपकों की होती दीपावली ३३ करोड़ शुद्ध गोम्य दीपक बनेंगे गली गली ना शोर होगा ना प्रदूषण होगा बचेंगे गाय बछड़े शुद्ध वातावरण होगा। करें ऐक संकल्प हम विदेशी माल का बहिष्कार करेंगे पटाखे नहीं चलाएंगे। देश में निर्मित दीपक गणेश लक्ष्मी से मा लक्ष्मी का आवाहन करेंगे।। मां लक्ष्मी गणपति की कृपा से करोना हराएंगे। हर घर में गॉमय से देश के गौवंश को बचाएंगे।।कोरोना को हराने को गोमय दीपक अपनाएं। यह वर्ष विशेष है। विश्व में कोराना शेष हैं। राम मंदिर निर्माण में तेजी है। अयोध्या उत्थान कार्य में उन्नति है।। करोना पीड़ित पटाखों के धुएं धमाके से त्रस्त है। लोग तो मित्रों से मिठाई पाने-छूने से भयभीत है। इस वर्ष रावण मारा नहीं गया। दशहरा पर राम का तीर खाली रहा। बच्चे स्कूल नहीं जा रहे। मन्दिर अभी नहीं खुल रहे। ऐसे में पटाखों का शोर बर्दास्त नहीं होगा वायु प्रदूषण करोना पीड़ितों को आत्मघाती होगा।। कामधेनु आयोग ने चलाया अभियान। गौमय दीपक से दीपावली का प्रयान ।। देश में ५० करोड़ दीपकों की होती दीपावली। ३३ करोड़ शुद्ध गोम्य दीपक बनेंगे गली गली। ना शोर होगा ना प्रदूषण होगा बचेंगे गाय बछड़े शुद्ध वातावरण होगा।। करें ऐक संकल्प हम....... विदेशी माल का बहिष्कार करेंगे पटाखे नहीं चलाएंगे। देश में निर्मित दीपक गणेश लक्ष्मी से, मा लक्ष्मी को बुलाएंगे।। मां लक्ष्मी गणपति की कृपा से करोना हराएंगे। गोमय के उपयोग से देश के गौवंश को बचाएंगे।। ।।डा श्रीकृष्ण मित्तल की विनती।। 9980246400 डा श्रीकृष्ण मित्तल की विनती।।

Thursday, October 1, 2020

डाक्टर का मशवरा

कहां कहां है हाथरस, कहां भेड़िया घाट सभी भेड़िए ढूंढ कर , लिंग दीजिए काट लिंग दीजिए काट, जो निर्भया सभी बच जाएं। कर ना सके उत्पात ये भेड़िए, शहर भयमुक्त हो जाएं। भेड़िए भेड़ बन घूमे कोई फ़िक्र नहीं। इन महिला लोलूप भेड़ियों की सभ्य समाज में कोई जगह नहीं। हाथरस हो या अजमेर कानून ऐक ही हो। हम नहीं राउल प्रियंका जिनका बारां में मुख बन्द हो आतंकवादी की कोई जात नहीं सब जानते। इन भेड़ियों को क्यों नहीं है पहिचानते। कहां गए वोह शेर गजकेसरी कहां गए वो मर्यादा पुरुषोत्तम नर केशरी। आज भेड़िए नगरो गांवों में खुले घूम रहे। इन आवारा कुत्तों को क्यों नहीं पालिका वाहन पकड़ रहे। इन भेड़ियों का एक ही है इल पकड़ इन्हे, खड़ा कर चौराहे पर, लिंग दीजिए काट।। डा श्री कृष्ण मित्तल

Friday, August 14, 2020

74वे स्वतंत्रता दिवस पर बधाई

 











..पिताश्री....

पितृदिवस पर पूज्य पिताजी को स्मरण आज आपके जन्मदिवस के पावन अवसर पे नमन करता हूँ अपना बचपन और आपका कन्धा आज भी करता हूँ॥ एक दिन दादी ने मुझे बतलाया था कितने मंदिर तीर्थ घुमे तो मुझे पाया था॥ मेरे जन्म पर आपने पूरे गाँव में बधाई बाटी थी खुशिओं की सौगात और मिठाई भी बाटी थी॥ मेरे स्कूल जाने पर कितनी बलैयां ले डाली थी पास होने पर, कितनी शाबाशीयां दे डाली थी॥ माँ मेरी शरारतों से थक तुम्हारा इंतज़ार करती थी तुम्हारे नाम को ले ले मुझे डराया करती थी ॥ तुम उनको सुन अनसुना करते थे राजा बेटा अच्छा बेटा कह मुझे समझाया करते थे॥ याद आता है मेरा साइकल से गिर जाना मेरी चोट देख जैसे तुम्हारी जान निकल जाना॥ सर्दी गर्मी धुप छाओं से मुझे बचाया करते थे मेरे हर सवाल का जवाब हर मुश्किल सुलझाया करते थे॥ जिन्दगी के हर मोड़ पर मैं ने आपको पाया था जीवनसंगनी लाकर मेरा गृहस्थ जीवन बसाया था॥ कितनी ही बार आप भी झुंझलाते थे बाप बनुगा तो पता चलेगा कह थक जाते थे॥ आज जब मैं भी जवान बेटे का बाप बना हू आपके कदम के निसानो पे खडा हूँ ।। आपके पोते से मैं भी रूठ जाता हूँ बेटा बाप बनोगे तो याद करोगे बोल जाताहूँ॥ दादा जैसा बनो उन्हें स्मरण करो उन्हें याद दिलाता हूँ अपने जवाब - उसके मुख से सुन शर्माता- पछताता हूँ ॥ बाप बेटे के सवाल का सो बार जवाब देता है बेटा बाप के एक सवाल दुबारा आने पर सनकी, बुढा बोल देता है ॥ पितृपक्ष पर सुबह तर्पण करता है श्राद्ध करता ब्रह्म भोज करता है उस ही आदरणीय के अधूरे कामो से मुख मोड़ लेता है ॥ मैंने भी एक प्रण किया था इस जिन्दगी का अच्छा बेटा बन आपके स्वप्न पूरे करने का ॥ लेकिन क्या मैं आपकी आकांक्षा पूरी कर सका हूँ आज जिस मुकाम पर हूँ क्या आपकी ऊंचाई तक पहुँच सका हूँ ? अगर कोई ख़ता हुई हो तो मुझे माफ़ करना मेरा प्रण है आपकी भावना- इच्छा पूर्ण करना ॥ आज इस आपके जन्म दिवस पर मैं नमन करता पुष्प चढाता हूँ आशीर्वाद की कामना और श्रद्धा का विश्वास दिलाता हूँ ॥

Sunday, August 2, 2020

राम मन्दिर निर्माण

आज राम मन्दिर निर्माण की पूजा
होगा प्रारम्भ महाउत्सव व गणेश की पूजा

आओ कुछ यादें ताजा करें
रामलल्ला के 500 वर्ष के वनवास को।
अविराम संघर्ष को, कारसेवकों के बलिदान को।।

भूले नहीं हम इस अनचाहे विवाद को
सुमरिन करें सनातन के अवसाद को

जब लखनउ कोर्ट का निर्णय आना था
हम सभी का दिल थमना ऐक अफसाना था

क्या था राम मन्दिर विवाद
मित्रों............

राम जन्म भूमि विवाद
देश को परतंत्रता की सौगात 
  
३० सितम्बर को क्या होगा? 
कुछ  टीवी पर आयेंगे 
कुछ  अख़बारों पर छाएंगे 
कुछ फ़ना, कुछ शहीद,  
कुछ गुमनामी में सो जायेंगे 

कुछ खोजेंगे अदालती फैसले में खामिया, 
कुछ प्रदेश और कुछ रास्ट्रीय सरकार में,
कुछ नाम लेंगे 'भगवा और हरे' सम्प्रदायों का  
कुछ माननीय जजों को ही खोज डालेंगे  

मुक़दमा आगे बढेगा, 

राम तो आज भी साये में हैं 
कल भी साये में ही पाएंगे 
फर्क नही पड़ता इस राम भक्त को 
राम तो हनुमान के सीने  में सर्वदा सुरक्षित, सन्मानित, 
नित्य सुमिरन पाएंगे 

यह कैसा गाँधी का रामराज 
जिसमे राम सीता के घर भी,
अदालती फैसले से पहिचाने जायेंगे

राम के स्थान भी कब्जा किये जायेंगे 
राम सेवक तो जीतेगा ही 
हम है तैयार 
१५०० इसवी - नहीं - लेकिन 
१९९२ फिर दुहराए जायेंगे 
राम मंदिर कब बनेगा ? 
सीता रसोई में भोग कब लगेगा ?

सुर्यवंश की जितनी पीढ़ी लगी थी 
एक भागीरथ पाने में 
क्या हमें भी इतनी पीढ़ीओं जीना,

 लड़ना, भुगतना पड़ेगा 
रामलल्ला को घर दिलवाने में

आज सपना सच होने जा रहा है
राम मन्दिर का निर्माण हो रहा है।

मोदी जी, पूजनीय भागवत जी
योगी जी पधारेंगे
जय श्रीराम का उद्घोष होगा
चंपतराय जी विजय ध्वज फैराएंगे।

धन्य हमारा जन्म व जीवन*जो हम यह पुनीत अवसर देख पाएंगे

राम लक्ष्मण जानकी
*जय रघुबर श्याम की।

डा श्रीकृष्ण मित्तल

Monday, May 25, 2020

Rudrashtakam

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यदि PM पप्पू सा होता




मादक दवाई का सेवन करता
अमरीका से छुड़ा कर लाना पड़ता  
रंगरलियों का दास 50 बरस का
कुंवारा ऐक जोकर सा....
यदि PM पप्पू सा होता..... 

संसद में कागज फाड़े।
 मतवाली आंखे मारे।     
देवपुरुष को जफ्फी मारे।
चौकीदार को चोर कह डारे।               
 सुप्रीम कोर्ट में माफी डाले

ऐसे महान पप्पू की सुन सुन
दुनिया लज्जित होई।
इनकी बराबरी का जोकर
ढूंढे मिलता नहीं कोई।

इनकी कुछ दूरदर्शी सोच........

 विश्वपटल पर नाक रगड़ते,
फ़ैला हुआ दामन होता ।
आलू से सोना उपजाता,
आंकड़ा पीचत्तीस का होता ॥
फ़िर धीर वीर से भरी धरा का,
हाल जोकरों सा होता।
यदि PM पप्पू सा होता

दुनिया को शून्य दिया,
वही भारतवर्ष लज्जित होता ।
जब बात हिसाब की होती तो,
ढाई हज़ार पाँच सौ को रोता।
ज्ञानियों की पावन भूमि का ।
हर दिन उपहास उड़ाते सब,
भूल से भी मेरे भारत का
यदि PM पप्पू सा होता 
JNU में संसद चलती,
AMU राज्यसभा होता ।
टुकड़े-टुकड़े गैंगों के लिए,
एक अलग से मंत्रालय होता॥
जहाँ देश विरोधी नीतियों का,
नित सृजन और अमल भी होता ।
भूल से भी मेरे भारत का ........
यदि PM पप्पू सा होता

कश्मीर से कन्याकुमारी तक का,
खाका नया खिंचा होता ।
गद्दारों की इस टोली का, 
सरदार भी सरकारी होता॥
जहाँ मुस्लिम तुष्टीकरण हँसता,
ईसाई धर्मांतरण हर कोने में पता।
कात्रची एंडरसन मामा देश लूटते
भूल से भी मेरे भारत का.........
यदि PM पप्पू सा होता

सलाहकार शरजील,
प्रचारक छात्र कन्हैया सा होता।
एक और विभाजन भारत का,
यही लक्ष्य गद्दारों का होता॥
भाईचारे का पहन के चोला,
क़त्ल संविधान का होता ।
भूल से भी मेरे भारत का.........

ताहिर हुसैन सा हत्यारा,
सरकार का अति प्यारा होता ।
दिल्ली दंगे में शामिल हर,
दंगाई भी न्यारा होता॥
फ्रीडम फाइटर कहलाता वो,
जो तनिक चुटैल हुआ होता ।
भूल से भी मेरे भारत का.........

अब बात करें कोरोना की, 
घोटाले का माध्यम होता ।
जहाँ जमाखोरी जमकर होती,
मास्क दौलत बरसाता होता ॥
उपकरणों की खरीद होती,
घोटालों का मंज़र होता ।
भूल से भी मेरे भारत का.........
जनता को राहत सामग्री,
एक ज़रिया कमाई का होता।
CWG घोटाले का, 
अवतार अवतरित यूँ  होता॥
तब भोजन के प्रति पैकेट का,
टैरिफ भी खासमखास होता।
भूल से भी मेरे भारत का.........
यदि PM पप्पू सा होता

पौ बारह होती बहना की,
ट्रेडिंग जीजा करता होता।
अंजामों से बेपरवाह PM,
कुत्तों से खेल रहा होता ॥
मंत्री संतरी होते प्रसन्न,
उत्सव सा उनके घर होता।
भूल से भी मेरे भारत का.........
यदि PM पप्पू सा होता

हावी हो जाती महामारी
तो पप्पू नानी घर होता ।
दीदी जीजा के घर रहती,
मम्मी का विदेश दौरा होता॥
ख़ुद ही लड़ता ख़ुद ही मरता,
ये देश अनाथों सा होता । 
भूल से भी मेरे भारत का.........
यदि PM पप्पू सा होता

कहर कोरोना का घर घर,
जमकर कर रहा होता तांडव।
हर भारतवासी कोरोना से
ख़ुद ही जूझ रहा होता ॥
चित्कार रही होती जनता,
घर घर कोहराम मचा होता॥ 
भूल से भी मेरे भारत का.
यदि PM पप्पू सा होता........

भूल से भी मेरे भारत का
यदि PM पप्पू सा  होता॥
.....वन्दे रोम मातरम ॥




Wednesday, February 27, 2019

पाकिस्तान का राष्ट्रीय गान...



... सारे जहाँ से "लुच्चा" पाकिस्तान हमारा .
हम "जानवर" हैं इसके , ये "चिड़ियाघर"हमारा. .
शैतान" हमें सिखाता "आतंकवाद" फैलाना..
"नामर्द" है हम वतन के.. "चीन" माई बाप हमारा..
दुनिया जानती हमने अमेरिका को बेवकूफ बना कर लूटा
सारे जहाँ से "लुच्चा"... "पाकिस्तान" हमारा.....
मजहब हमे सिखाता पडोसी से बैर रखना
हिन्दू क्रिस्तान सिखों पर सितम करना भगाना
हम मशहूर हैं दुनिया में कटोरा लिए हाथ में
भिखारी हैं हम, यह धंधा है हमारा |
झूट बोलना - फरेब करना फितरत हमारी
लोकशाही की तबाही तानाशाही की दुकानदारी
जूतों के भूत हैं हम ये ही इलाज है हमारा
सारे जहाँ से "लुच्चा"... "पाकिस्तान" हमारा.....