Tuesday, August 5, 2008

बिखरते जज्बात

आज की इस अंधी दौड़ में देखे हैं हमने
नफरत की ठोकर से जज्बात बिखरते

उपरवाला भी अगर आये तो यारों
सौदागर उसे भी बेच खाके निकलते

आज की सौगात झूट नफरत आतंक
इसे फैलाने वाले तानाशाह और मालिक बनते

बहुत से गम हैं इस ज़माने में
इश्क से हालात नहीं पलटते

आओ हम मिल बनाये नयी दुनिया
जिसमे इश्क, मोहब्बत की शहनाई गूंज

1 comment:

रश्मि प्रभा... said...

उपरवाला भी अगर आये तो यारों
सौदागर उसे भी बेच खाके निकलते
.........
बहुत सही तस्वीर उतारी है,
बहुत ही अच्छी....