Tuesday, October 6, 2009

करवा चौथ की महीमा

देवी लक्ष्मी की सब पूजा करते हैं
इसे देख लक्ष्मी वाहन उल्लू जलते हें ।।

एक दि लक्ष्मी बिना वाहन के हो गयी
उल्लू महाराज रूस् गये माता घर में बैठी रह गयी
माँ ने वजह पूछी और खिलखिला  कर हंस पडी

माँ तेरी पूजा ३६५ दि २४ घंटे होती है
तुझे वहां पहुचाने में मेरी बुरी हालात होती है

माँ समझ गयी और दे दिया वरदान
साल में एक दि तेरी भी होगी पूजा और मान

सुहागिन  तेरे नाम का व्रत रखेंगी
चरण छुएंगी और तुझे पूजे ध्यायेंगी

वोह शुभ दि दिपावली से पहिले आएगा
करवा चौथ के नाम से मनाया जाएगा ॥
साथिओं इस दि हर घर में सुबह से रात तक पूजा का माहोल होता है
हर पत्ति पूजा और ध्याया जाता है

हर उल्लू की ये ही कहानी है
पुरे साल करता इंतज़ार कि करवाचौथ कब आनी है

महिमाकरवा चौथ की हर उल्लू ने जानी है
गृह लक्ष्मी की पूजा ३६४ दि और उल्लू की करवा चौथ पर हो जानी है

जय लक्ष्मी माता 

Tuesday, April 7, 2009

पत्थर दिल

पत्थर समजकर आज जो ठोकर लगा गए
समजकर कल वो शायद सर जुकायेगे।।

यह गलतफहमी क्यों हो गयी
की वोह सिर को झुकायेंगे ।

जो माँ बाप को पूछते नहीं
पत्थर कहाँ पूजने जायेंगे ।

ठोकर में पत्थर आया..................
कोई बात नहीं........

इंट ३ रूपये की आती है
नाली में पत्थर लगा कर पैसा बचाएंगे ॥

बड़ी कमजोर निकली तुम्हारी यारी रब्बा


"भूले है रफ्ता रफ्ता उन्हें मुद्दतों में हमकिश्तों में खुदखुशी का मज़ा हमसे पूछिये !

बड़ी कमजोर निकली तुम्हारी यारी रब्बा
दो दिन नजरों से दूर हुए तो खुदकुशी की धमकी दे दी
कहीं हमारा जनाजा निकल जाता तो शायद .............
हुजुर तो जन्नत नशीं होती
अरे हम ऐसे वैसे आशिक नही
जो भूलने दे अपने रकीब को
अपना जलवा दिखाने को कभी कभी पर्दा भी डलता है
आज हमारा जलवा पूरा हिंद देख और सरहा रहा है
कुछ काम का बढ़ना, कुछ कामयाबी का और आगे बढना
कर गया मजबूर,और महरूम इस नाचिच को,
दोस्तों से दुआ सलाम करना
दिल चीर कर दिखा सकते नहीं वर्ना
तुम्हे अचरज होता
अरे वहां तुम्हारे अलावा और किसी का अक्श भी कैसे होता

वीरों की परिभाषा

वीरों की जरूरत
आज भाटों की नही वीरों की जरुरत है
जो भिड सके दुश्मनों से राष्ट्र के खातिर
खून खोलता हो जिसका अत्याचार देख
ऐसे ही चाहिए नोजवान जिसमे हो वेग.
..........
वीरों की जरूरत तो आदिकाल से चली आई है।
आल्हा उदल वीर शिवा छत्रसाल से यह धरा सजाई है॥

खून हो तो खोलेगा यारों
यहाँ तो डालडा और बिसलरी पिलवायी है॥

जो बोले हाथ कटवा दूंगा उसे रासुका,
जिसके साले ............
बीबी बेलगाम चले ............
और खुद बुलडोजर चलवाए .............
यह २ /३ की राजनीति
देश के नवजवानों पर छाई है ।।

बगल में तालिबान दहाड़ रहा...........
२६/११ हो चूका ..........
अब शायद मोदी अडवाणी जैसों की बारी आई है॥

एक नोजवान ने सत्य बोलने का साहस किया।
माया लालू मुलायम प्रियंका जैसो की बन आई है॥

गुरु कुर्बानी किसी मकसद से हो तो रंग लाती है।
नहीं तो खुदकुशी पर देश का कानून हरजाई है॥

इजहारे ऐ महोब्बत

सुबह शाम हमें याद आते क्यों हो,
सपनो में भी आके हमे रुलाते क्यों हो,
मेरा दिल तो सदा तुम्हारा तलबगार रहा,
फिर अभी इससे अक्सर तड़पाते क्यों हो,
ज़िन्दगी पहेले ही खड़ी है दोराहे पर,
इस पर भी तुम हमे भटकाते क्यों हो,
इश्क की इन्तहा बन गया है अब ये दर्द,
झूठे वादों से हमे बहलाते क्यों हो!!

किसी बेदर्द बहैया ने सवाल पूंछा हमसे
हमने कहा अक्स ए आईना देख
कितने दिलों को गुलाब की तरह कुचला तुने
कितने रकीबों इंनायत की दिखा कर तुने
हमने जब इज़हार ए मोहब्बत किया था
तुमसेतुमने दिखाई थी सड़कें और दुनियादारी की मुसीबतें
हम तो आज भी खडे इंतज़ार करते हैं अपने इश्क का
कब मिलेगी दो लह्मो की फुर्सत हमारी दिलरुबा को हमारे लिए
कभी आवाज देकर देखना जालिम
हम ही मिलेंगे इंतज़ार ए मेहरुबा के
कब्र के किनारे भी खडे हुए

Monday, February 9, 2009

परिवार

परिवार से होती है पहिचान
परिवार से बढती है शान ॥

परिवार करता है होसले बुलंद
परिवार ही ख्याल रखता जब तू तंग॥

परिवार न होता तो महाभारत ना होती
परिवार ने बताई भरत के त्याग की चोटी॥

परिवार की महिमा देवताओं ने गयी
शिव परिवार के दर्शन बहुत शुभ होते हैं भाई॥

जब बाबा की गोद में पोता आता है
खेलता कूदता और घोड़ा बनाता है॥

उस समय बाबा की जीना हो जाता है सार्थक
अगर परिवार न हो तो सभी निरर्थक ॥

आप और हम भी एक परिवार ही तो है
जिस के राजा रानी हम और आप है॥


खूब समझाई है परिवार की महिमा....
लेकिन एक बात है आपने भी छुपाई ..
परिवार हीं है जो सीमित कर देता है इन्सान को..
नहीं लड़ पाता ज़माने के जुल्मों के खिलाफ ..
डरता है क्या होगा उसके बाद...
समझौते करवाता है परिवार..
फिर भी सबको भाता है परिवार...
सुखी रहे आपका परिवार


सुमन ..................................

दिलज़लों का हर जगह येही हाल होता है
परिवार के अंदर या बाहर उनका तो मुह लाल होता है

जो परिवार में रह नहीं सकते
वोह समाज में भी शायद खप नहीं सकते

हर सर्दी के बाद गर्मी आती है
हर रात के साथ दिन जुडा होता है॥

हर फूल के साथ कांटे होते है
हर अधिकार के साथ फर्ज भी अदा करने होते है

कुछ लोग सिर्फ अधिकार जानते हैं
जवाबदारी से मुह चुरा के भागते हैं

ऐसे लोग अपने माँ बाप को भी धत्ता बता देते हैं
मजे लेने के लिए पैदा किया कौनसा अहसान किया सुना देते है

हमने यूरोप भी देखा है
जहाँ परिवारों का टोटा है

उनका हाल भी हम जानते हैं
जाने कितने ओल्डएज होम उनकी छाती पे गडे हैं

इसलिए फिर कहता हूँ सुनो खोल के कान
रहना भाईओं के बीच चाहे जंगल हो या मकान

Thursday, February 5, 2009

नेता की महिमा

अफसर नेता दोनों खडे काके लागु पाए
बलिहारी नेता अपनों जो अफसर से सलाम कराए

नेता बैठा पेड़ पर रहा सबकी हरकत देख
चमचों पर करपा करे खागया, देश और खेत

अफसर गुंडे और नेता हैं आज के ब्रह्मा विष्णु महेश
पूरा देश कब्जे में इस त्रिमूर्ति के बाकी सब अवशेष

ब्रह्मा पूजे विष्णु को विष्णु पूजे महेश को महेश उसे दिल में धारे
ब्रह्मा सबका रचियेता सब एक पर दिखते सारे नियारे

इनकी लाली देखन मैं गया जित देखूं उत लाल
देखत देखत खा गये देश विदेश में गया माल

गिरगिट ने शिकायत करी क्यों करते मुझे बदनाम
रंग पलटने दल पलटने और आँख बदलने में यह मुझसे महान

रहिमन नेता की झोपडी होत बहुत विशाल
चमचे भी बना गये कार, दुकान महाल

नेता से डर कर रहियो कभी न निभावें प्रीत
सरकारी दामाद यह इनकी माल पचाने की रीत

पढ़ लिख कर तू कया करेगा बन जा किसी का चमचा
नेता बन, माल डकार, होगा तेरे पास रुतबा, नाम और पैसा

जीत गया तो मंत्री और हार गया तो निगमों का अध्यक्ष
पार्टी में रुतबा तेरा, थाने में शब्द तेरे, जनता को तू भक्ष

जेल गया तो कया हुआ कल अख़बार में देख
नेता बनने का रस्ता होत जात जेल के खेत

Monday, January 26, 2009

गणतन्त्र दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएँ

यह आजादी का सुनहरा गणतन्त्र
विश्व में बेमिसाल हमारा प्रजातंत्र ।

अब तजुर्बेकार हो गया यह तन्त्र
हमे फक्र है की हमारा है यह गणतन्त्र॥

याद आती है लिछिविओं की जिहोने विश्व को गणतन्त्र दिया
नमस्कार बाबा साहेब अम्बेडकर को जिन्होंने विश्व का सर्वोतम सविधान दिया ॥

75 सालों में इसमें सैकडो परिवर्तन हो गये
जैसे सोने की मूर्ति पर हीरे मोती टंग गये ॥

इसही सविधान से बिना खून के सत्ता की परिवर्तन है
बोलने, पूजा, व्यवसाय, आवागमन की पूर्ण स्वतन्त्रता है॥

सांसदों को,विधायकों को, नगर ग्रामसभाओं का चुनाव होता है
इसके सामने प्रधान मंत्री को भी सर झुकाना होता है ॥

उपर बैठे कह रहे होंगे गाँधी नेहरु तिलक गोखले
लाजपत भगत राजगुरु चंद्रशेखर सुभाष जो लड़े और चले ॥


हर वर्ष लगेंगे मेले बस शहीदों का येही मुकाम होगा
जब भी उनकी याद आएगी आँखे नम होंगी और जुबान पर नाम होगा ॥

तूफान से लाये थे आज़ादी के परवाने किस्ती निकाल के
इस गणतन्त्र को रखना मेरे साथियो संभाल के॥

दुश्मन आतंकी खडा है दरवाजे पर बंदूकें तान के
सम भारतमाता की खाते हैं रखेंगे हम इसको सम्भाल के ॥

आप को गणतन्त्र दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएँ

Monday, January 5, 2009

एक और नयी सुबह का फूल ......................



बधाई नव वर्ष की और क्षमा करना मेरी भूल

कल सुबह भी देखा था खिलता मुस्कुराता फूल
हुयी शाम और ढल गया फूल

क्षण भंगुर यह दुनिया,
जानत सभी फिर भी गये भूल

पल की खबर नहीं, सामा १०० वर्ष का
प्यार को समय नही, झगडा कयामत का

फिर भी एक और नयी सुबह और उसका फूल

सोचता हूँ समय थमता नही
रात रूकती नही सुबह थमती नही

हर वर्ष फिर नव वर्ष की गूंज और हाथ में फूल

लेते भी, देते भी, दोस्त भी दुश्मन भी
राजा भी रंक भी, साधू भी संत भी
हिन्दू भी मुसलमा भी
सभी लगते इस नई सुबह का
खिलता मुस्कुराता चमन का फूल

फूल के साथ में कांटे जो दिखते नही
फिर भी दिल में दे जाते शूल

ऐसा ही कुछ हुआ गत वर्ष
जैसे बम्बई पर आतंकवादी हमला
शेएर बाज़ार का ४ लाख करोड़ पी जाना
पुरे विश्व का मंदी में घिर जाना
संसद में नोटों का लहराना
बेनजीर का हलाक ............और
श्रीमान १०% का सदर बन जाना
अर्र्रे ............दुनिया के थानेदार पर जूता चल जाना

किसी को फूल किसी को कांटे
किसी को शूल किसी को तोहफे
................एक और नयी सुबह .....और.....फूल